#AkhileshYadav#PDA
पीड़िता गार्गी सिंह पटेल उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की समाजवादी पार्टी (सपा) की महिला मोर्चा सभा की जिलाध्यक्ष हैं !
इनके चंदा से चेहरे पर PDA का मोहर धब्बा लगाने वाले आरोपी अमित यादव (सपा नेता प्यारे लाल यादव का पहला बेटा, मुख्य आरोपी) मनोज यादव (सपा नेता प्यारे लाल यादव का दूसरा बेटा) अमित और मनोज यादव की दोनों पत्नी व बेटी (हमले में शामिल अन्य पारिवारिक सदस्य) !
कारण :– 15 बीघा जमीन साजे में बिकवाई जिसका हिस्सा एक पक्ष को कम मिला तो PDA ने PDA वाली की जमकर कुटाई कर दी,
पीड़िता का आरोपी पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्यारे लाल यादव जिसे गार्गी जी प्यारे मामा पुकारती थी, पर मामा तो कंस मामू निकला टीम वर्क के साथ गार्गी के 🍈 प्यारे तरबूज से मुखड़े पर का 🥑 विदेशी एवोकैडो डिज़ाइन में बदल दिया !
अब ४ दिलचस्प सवाल उठते है ? माथा फोड़ने पर भी एक का जवाब YES☑️ नहीं मिलेगा सबका जवाब NOT 🚫 ही होगा !
१) महिला अपमान में योगी की बुलडोजर कार्यवाही होगी ?
२) क्या अखिलेश यादव सपाई नेता प्यारे लाल यादव को पार्टी से बाहर निकालने की हिम्मत कर सकते है ?
३) क्या PDA में गैर यादव का कोई महत्व है ?
४) क्या गार्गी सिंह पटेल अब अपने पार्टी पद से इस्तीफा देंगी ?
#Baba_Manish
@BHEEM_BAUDH गद्दार तो हमारे समाज में ही है।
बहुतों से लड़ना है हमें, बीजेपी कांग्रेस, सपा और समाज के दलालों/गांधी के हरिजनों से भी
तुम जैसे चूतियां से भी समझे
"गाँधी जी सो सकते है, क्योंकि उनका समाज जाग रहा है।
में इसलिए जाग रहा हूँ, क्योंकि मेरा समाज सो रहा है"
यह वाक्य बाबा साहब ने अमरीका के प्रसिद्ध लेखक व पत्रकार लुई फिशर को 1942 की मुलाकात में कही थी। क्योंकि लुई फिशर महात्मा गाँधी के साथ रहकर उन्हें जान रहे थे व काफी बार महात्मा गाँधी के आराम करने पर वो बाबा साहब से मिलने गए तब बाबा साहब उन्हें अध्ययन करते हुए मिले। तब लुई फिशर ने पूछा कि गाँधीजी आराम कर रहे है और आप अधयन्न। तब बाबा साहब ने उपरोक्त वाक्य कहा था।
लुई फिशर भारत विशेष तौर से महात्मा गाँधी पर उनकी जीवनी लिखने आये थे व उनकी लिखी जीवनी "The Life of Mahatma Gandhi" पर बनी फिल्म "गाँधी" को ऑस्कर मिला था।
चूँकि लुई फिशर महात्मा गाँधी पर जीवनी लिखने आये थे लेकिन उन्होंने काफी मुलाकात डॉक्टर बी आर अम्बेडकर जी के साथ करी। जिसे उन्होंने विस्तार से लिखा कि;
"में देखकर दंग रह गया कि डॉक्टर अम्बेडकर के पास हजारो किताबे थी। इतनी किताबे की यह किसी लाइब्रेरी में भी नही मिलेगी। उसमे भी डॉक्टर अम्बेडकर हर समय अधयन्न करते हुए मुझे मिले। बाबा साहब का राजगृह में एक घर नही बल्कि बौद्धिक विचारो का एक जीवंत मन्दिर है"
लुई फिशर ने अपनी किताब में विस्तार से डॉक्टर अम्बेडकर व महात्मा गाँधी विवाद पर लिखा है। उन्होंने इसपर भी बाबा साहब की काफी सराहना करी।
इस तश्वीर में बाबा साहब व लुई फिशर है। बाबा साहब व लुई फिशर की कई मुलाकातों की तश्वीर है। बाबा साहब का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि बन्दा गाँधीजी पर किताब लिखने आया और कई मुलाकातें बाबा साहब से करके गया, उसपर भी बाबा साहब के बारे में विस्तार से विश्व को बताया। जिसमे सबसे मुख्य यह कि;
"उनके पास ऐसी दुर्लभ किताबे थी जो आसानी से किसी लाइब्रेरी तक मे नही मिलेगी। हजारो किताबे। पूरे दिन अधयन्न करना"
तो जनाब;
"सम्मान पाना है, समाज का भला करना है, अपनी एक अलग छवि बनानी है तो अध्ययन करने की आदत डालें। इसी एक गुण ने बाबा साहब को एक अलग व्यक्तित्व बना दिया"
लेकिन;
"बाबा साहब का समाज का बड़ा हिस्सा अभी भी सो रहा है"
विकास कुमार जाटव
माननीय प्रधानमंत्री जी की हालिया अपील ऐसे समय आई है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। पिछले तीन महीनों में हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग $38 अरब घटकर मात्र $690 अरब रह गया है। रुपया डॉलर के मुक़ाबले ₹95 पार कर चुका है, और व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। ये केवल आँकड़े नहीं हैं, ये करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की चिंता हैं।
मैं मानता हूँ कि मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था चलाना आसान काम नहीं है, और दुनिया भी एक कठिन दौर से गुज़र रही है।
ऐसे समय में सरकार का ध्यान मांग बढ़ाने पर होना चाहिए, मांग घटाने पर नहीं। दुनिया का आर्थिक इतिहास हमें एक सीधी बात सिखाता है कि जब आर्थिक गति धीमी हो, तब लोगों से कम खर्च करने को कहना समाधान नहीं होता, समाधान यह है कि टैक्स में राहत देकर, छोटे व्यापारियों को सहारा देकर, मध्यम वर्ग पर बोझ कम कर आम परिवारों के हाथ में थोड़ा ज़्यादा पैसा छोड़ा जाए।
मुझे दुख इस बात का है कि हर बार किफ़ायत की ज़िम्मेदारी उसी ईमानदार करदाता पर आ जाती है जिसने कोविड के समय भी सबसे ज़्यादा सहा। उसने उस वक़्त भी पूरे भरोसे से अपनी भूमिका निभाई थी, तब भी उसके लिए राहत सीमित थी, और आज फिर उसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वो भी बिना ये बताए कि सरकार अपनी ओर से उसके लिए क्या करने जा रही है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को रेवडियां बांटने वाली नीतियों पर तुरंत रोक लगानी होगी ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम हो सके। अगर सरकारें fiscal dicipline और productive capital creation पर ध्यान नहीं देंगी, तो थोड़े समय का राजनीतिक लाभ देश को लंबी आर्थिक कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
देश को अपील नहीं, एक स्पष्ट रास्ता चाहिए। लोग जानना चाहते हैं विकास कैसे लौटेगा, नौकरियाँ कैसे बढ़ेंगी, और किसानों, छोटे व्यापारियों व मध्यम वर्ग को असली राहत कब मिलेगी।
सिर्फ़ नागरिकों से त्याग माँगना शासन नहीं होता। जवाबदेही, दूरदृष्टि और आर्थिक संतुलन यही असली राष्ट्रहित है।
NEET-UG 2026 का रद्द होना सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है, यह उन लाखों परिवारों के भरोसे की बात है, जिन्होंने अपने बच्चों के लिए सपने देखे, मेहनत से पढ़ाया और यह माना कि अगर बच्चा ईमानदारी से पढ़ेगा, तो व्यवस्था भी उसके साथ ईमानदारी से पेश आएगी।
मैं जानता हूँ कि देश भर में एक साथ परीक्षा कराना आसान काम नहीं है। लेकिन हमारे युवाओं को इतना अधिकार तो है कि उनकी मेहनत का सम्मान हो, और उनका भविष्य किसी की लापरवाही की भेंट न चढ़े।
जब पेपर लीक एक के बाद एक दोहराए जाएँ, और छात्र सड़कों पर न्याय माँगने को मजबूर हों तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं रह जाती, यह हमारे साझा भरोसे की चूक बन जाती है।
हमारे परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार बताया था। उस हथियार को कमजोर करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार और एजेंसियों को जवाब देना होगा कि आखिर हर बार युवाओं का भविष्य ही क्यों दांव पर लगाया जाता है?
देश के सभी छात्रों के साथ हमारी पूरी संवेदना और एकजुटता है। न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
#NEET
लक्ष्मण यादव के एजेंडे का पोस्टमॉर्टम।
एक पॉडकास्ट में बहन मायावती पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज का दौर स्मृतियों का नहीं, संघर्ष का है।
लक्ष्मण जी, आप Dominant Caste से आते हैं। अतः आपको स्मृतियों की कद्र नहीं है लेकिन हम दलितों के जेहन में सपा सरकार के एक-एक पाप की स्मृति अमिट छाप की तरह बसी हुई है। क्या आपके सामाजिक न्याय की समझ यही कहती है कि समाजवादी पार्टी के गुंडों ने गेस्ट हाउस कांड में बहन जी पर जो जानलेवा एवं बर्बर हमला किया था, हम उन स्मृतियों को भूल जाएं क्योंकि हमें BJP को हराना है?
क्या हम उन स्मृतियों को भूल जाएं कि अखिलेश यादव ने जातीय द्वेष में 20 लाख से अधिक कर्मचारियों का डिमोशन किया था? या फिर उन स्मृतियों को भूल जाएं कि समाजवादी पार्टी के सांसदों ने भरी संसद में SC-ST समुदाय के प्रमोशन में आरक्षण का बिल फाड़ दिया था?
क्या आप यह नहीं जानते हैं कि मुलायम सिंह यादव ने 2012 के अपने मैनिफेस्टो में कैसे SC-ST Act के तहत दर्ज मामलों का रिव्यू करने का वादा किया था, और अखिलेश की सरकार बनते ही उन्होंने सत्ता एवं प्रशासन के दम पर रिव्यू के नाम पर अनगिनत पीड़ित दलितों पर उल्टा कार्रवाई कराई थी?
हम कैसे भूल जाएं कि अखिलेश यादव ने अपनी जातीय कुंठा में बहन जी द्वारा दलित एवं पिछड़े महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के नाम बदल दिए थे? या फिर यह भूल जाएं कि कैसे सपा सरकार ने अनेकों आम्बेडकर पार्कों को खाली कराया, कैसे बहुजन महापुरुषों के नाम पर बने अनेकों अस्पतालों, पार्कों एवं कॉलेजों के नाम बदले थे?
सपा सरकार बनते ही आपके सजातीय लोगों ने दलितों की जमीनें कब्जानी शुरू कर दीं। विरोध करने पर उन पर बर्बर हमले हुए, लेकिन सपा सरकार और पुलिस अपराधियों को संरक्षण देकर उनका मनोबल बढ़ाने में लगी रही। दलित समुदाय की मां-बहनों का बाहर निकलना भी दुभर हो गया था। रेप, छेड़खानी एवं जातीय हिंसा आम बात हो गई थी। यह सब किसी आतंक से कम नहीं था। आप चाहते हैं कि हम इन स्मृतियों को भूल जाएं? वाह!
दलितों के मंच में जाकर उन्हें लच्छेदार भाषणों की चटनी चटाने वाले लक्ष्मण यादव को सामाजिक न्याय की इतनी सी बुनियादी समझ नहीं है कि स्मृतियां हमेशा समता के संघर्ष को सींचती हैं। ये स्मृतियां उस दौर की हैं जब दलित समुदाय के लोग मान्यवर कांशीराम एवं बहन जी के नेतृत्व में आजादी की आबोहवा में सिर उठाकर जीना शुरू कर चुके थे। समाजवादी पार्टी के गुंडों ने शुरू से ही उन्हें कुचलना शुरू किया। आलम यह था कि उन्होंने गैंग बनाकर 2 जून 1995 को बहन जी जैसी महान और शक्तिशाली नेता पर भी जानलेवा हमला किया।
वैसे तो आप मनुस्मृति की किताब उठाकर रोज स्मृतियों की दुहाई देते रहते हैं, लेकिन जब दलितों की स्मृतियों की बारी आई तो आप स्मृतियों को भूलकर संघर्षों की दुहाई देने लगे। वैसे किन संघर्षों की बात कर रहे हैं आप? अखिलेश यादव द्वारा एक हॉल में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को आप संघर्ष कहते हैं? दलितों द्वारा दिन-रात जातीय हिंसा के खिलाफ हो रहा संघर्ष आपको दिखाई नहीं देता? दिखाई भी क्यों देगा, जाति का मामला जो है। अखिलेश यादव आपके सजातीय हैं। अतः उनका नाखून कटाना भी आपको संघर्ष ही दिखाई देगा।
हम जानते हैं कि हमारा समाज बहुत भोला-भाला है, गुमराह हो जाएगा, लेकिन सनद रहे कि अभी समाज में हम जैसे लोग जिंदा हैं। हम अब उन्हें चिकनी-चुपड़ी बातों में नहीं आने देंगे। जब आपके सजातीय लोग दलितों का दमन करते हैं, तो आपका सामाजिक न्याय वाला मुखौटा पूरा समाज देखता है। आपकी सामाजिक न्याय की समझ बस इतनी है कि आप BJP का डर दिखाकर दलितों का राजनीतिक नेतृत्व खत्म कर सकें, ताकि दलित आप Dominant Caste के रहमो-करम पर जिंदा रहे, जहां आप अपने फायदे के अनुसार उनका इस्तेमाल करें। जैसे गांवों में लोग मजदूरी एवं बेगारी हेतु दलितों का इस्तेमाल करते हैं, वैसे ही आप राजनीति में उनका इस्तेमाल करें।
न तो हम मान्यवर कांशीराम, बहन जी एवं बसपा की कल्याणकारी स्मृतियों को भूलेंगे और न समाजवादी पार्टी द्वारा दलितों पर किए गए पापों की स्मृतियों को भूलेंगे। संघर्षों का दौर आपके लिए नया होगा, लेकिन हम दलित समुदाय के लोग सदियों से ही संघर्ष करते आए हैं। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हम दलितों का जीवन संघर्षों में ही बीतता है। बस अंतर इतना है कि आपका संघर्ष सिर्फ BJP से है। हमारा संघर्ष सिर्फ BJP से नहीं, बल्कि उनसे भी है जो BJP के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। दलितों का संघर्ष समता एवं संवैधानिक मूल्यों के लिए है। किसी पार्टी के विरोध अथवा समर्थन के नाम पर हमें खाई में न धकेलें। दलितों के जेहन में सपा की जातीय उत्पीड़न, विद्वेष एवं जातीय हिंसा से ओतप्रोत स्मृतियां भरी हुई हैं। न भूलेंगे, न माफ करेंगे।
हमीरपुर जनपद के राठ कोतवाली क्षेत्र के औंडेरा गांव में डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति अपने गाँव मे "महिलाओ" ने स्थापित कर दी। जिसपर बवाल हो गयं प्रशासन का कहना था कि परमिशन नही ली। जिसपर महिलाओ ने धरना दे दिया। अब प्रशासन ने समझौता करते हुए 2 माह में परमिशन देकर पुनः स्थापित करने का आश्वासन दिया है। महिलाओ की इस बहादुरी की चारो तरफ चर्चा हो रही है।
इसपर मुझे याद आया कि "बहुजन आंदोलन" महिलाओ के सहयोग के कारण ही जड़ बना। मुझे अभी भी याद है कि 1992 या 93 के आसपास आंदोलन में मेरी माँ तक गयी।
इसमे मान्यवर कांशीराम साहब की एक कुशल, दूरदर्शी सोच ने सभी कुछ बदल दिया जब उन्होंने "जनता पार्टी के मंच" पर "हरिजन शब्द" का बार बार यूज करने पर एक 21 साल की युवती "बहन मायावती" को उन्ही जनता पार्टी के नेताओ को।खरी खोटी सुनाने की घटना को सुना क्योंकि मान्यवर ने अपने कुछ सहयोगी कार्यक्रम में भेजे थे। मान्यवर कांशीराम साहब जानते थे कि;
"इस समाज की जड़ महिलाये है। बाबा साहब ने कहा रहा कि किसी समाज की तरक्की उस समाज की महिलाओ की स्तिथि पर निर्भर करती है। इसलिए मान्यवर जानते थे कि जुए, शराब व अन्य पाखंडी, अंधविश्वास में डूबे समाज मे सबसे पहले महिला वर्ग को उनके अधिकार के लिए जगाना पड़ेगा। इसलिए बहनजी को मान्यवर लेकर आये"
इससे यह परिवर्तन आया कि;
"महिलाओ के लिए यह अजूबा बात थी कि उनके समाज की जिसमे लम्बा घूंघट, शाम को घर से बाहर नही निकलना, असुरक्षित रहने के समय एक लड़की उन्हें आकर बहुजन नाम का कोई मिशन समझा रही है। इससे महिलाओ का आकर्षण बढ़ा। जब बढ़ा तो इससे ख्याति बढ़ने लगीं। इसी कारण 40 साल में यह बदल गया कि;
"राष्ट्पति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से लेकर चारो तरफ 14 अप्रैल में बाबा साहब को याद किया गया"
बिना महिलाओ के संघर्ष के यह सम्भव नही था।
विकास कुमार जाटव
"अखिलेश जी मेरे मित्र है तो कभी कभी मदद कर देते है"
श्री नरेन्द्र मोदी जी लोकसभा में भाषण के समय।
इसके प्रतिउत्तर में श्री अखिलेश यादव मुस्कराकर हाथ जोड़कर खड़े हो जाते है।
यक्ष : "अखिलेश" की जगह "बहनजी" मोदी जो कहते तो क्या होता?
युधिष्ठिर : अभी तक सपाई उछल उछलकर बसपा भाजपा की बी टीम है, की आवाज चारो तरफ से आना शुरू हो जाती। मिम्स बनाते, वायरल करते, व्हाट्सएप ग्रुप से लेकर हर जगह। विशेष तौर से मुस्लिम को पकड़ पकड़कर पढवाते।
विकास कुमार जाटव
#AmbedkarJayanti#modi#YogiAdityanath
क्यों झूठ फैला रहे हो आगरा भगवान परशुराम चौक पर भगवा झंडा निकाला गया,
पूरी वीडियो में केवल भगवा झंडे के साथ नीला झंडा लगाया गया है और यह कोई अपराध नहीं है !
अपराध देखना हो तो रामनवमी हनुमान जयंती पर मस्जिदों के आगे फूहड़ भड़काऊ गाने बजाना व मस्जिदों से उनका धार्मिक झंडा तोड़ना वो अपराध है वो देखे !
भगवान् परशुराम चौक पर वे युवा कोई भीड़ आर्मी के लफंगे नहीं बस रैली निकालते हुए लड़के थे,
किसी को भी भीड़ आर्मी जैसे लफंगों के संगठन से जोड़ कर बदनाम ना करे !!
उत्तर प्रदेश सरकार से निवेदन है, जब आप दलितों की सुरक्षा नहीं कर सकते तो आंबेडकर जयंती बनाने का ढोंग भी ना करे !
बहुजन समाज के युवाओं से निवेदन किसी भी अन्य जगह बंधुत्व बढ़ाने के नाम पर भगवा झंडे के साथ नीला झंडा ना लगाए आपके अपने स्थल भारत में हर जगह बने हुए है, अपने स्थान पर ही जयंती कार्यक्रम करे !
योगी मोदी जी एक तरफ अपने आपको अंबेडकर भक्त और दलित प्रेमी बने का ढोंग कर रहे है वही आंबेडकर शोभा यात्रा पर अनेक जगह पथराव हुए जिसका जवाब भी दिया गया, अगर वास्तव में दलित सुरक्षा की इतनी ही परवाह है,
जिन्ह जगह पर पथराव हुए जिस छत से पथराव हुए वहां बुलडोजर कार्यवाही करे ऐसे अराजकता फैलाने वालों सामाजिक सौंदर्य खराब करने वालों के निवास सुरक्षित नहीं होना चाहिए, अगर कठोर कार्यवाही होगी तो भविष्य में सामाजिक सौंदर्य बिगाड़ने का दुस्साहस कोई नहीं कर पाएगा !!
#Baba_Manish
आज उनकी जन्म जयंती है जिन्होंने जन्म के आधार पर श्रेष्ठता वाली व्यवस्था को सबसे बड़ी चुनौती दी है।
भेदभाव के लिए सैकड़ो धर्मग्रंथ थे मगर बराबरी के लिए इन्होंने संविधान नाम की न्यायसंगत किताब लिख दी है।
जो जितना पीड़ित शोषित है उसके उतने करीबी की जयंती है
आधुनिक भारत एवं संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के जन्मदिन पर सभी साथियों को हार्दिक बधाई।
मा॰ बहन जी जिंदाबाद
मा॰ आनंद कुमार जी जिंदाबाद
मा॰आकाश आनंद जी जिंदाबाद
पाँचवी बार बसपा सरकार
जय भीम जय भारत जय कांशीराम जय भगत सिंह जय बसपा।
@dspbhaskar इनकी यह सख्ती तब कहां जाती है जब दूसरे धार्मिक स्थलों के दरवाजों पर तोप चलती हैं, मस्जिदों पर भगवा झंडे लगते हैं, खुलेआम मां-बहनों को गालियां दी जाती हैं?
लेकिन DSP भास्कर मिश्रा को अम्बेडकर जयंती पर कानून व्यवस्था टाइट रखनी है 😂
ये जलन तुम्हारी सदियों पुरानी है