दिल्ली पुलिस का आदर्श वाक्य ‘शांति, सेवा, न्याय’ है, लेकिन कल जंतर-मंतर पर वर्दीधारी द्वारा मासूम बेटियों की अस्मिता पर किया गया हमला इस आदर्श वाक्य को विडंबना बना देता है।
आदरणीय दिल्ली पुलिस,मुँह ढककर,साधारण कपड़ों में बेक़सूर बच्चों को लाठी मारने वाले कौन थे ? आपने अभी तक देश को नहीं बताया कि,क्या वो पुलिस के जवान थे ? या फिर पुलिस की देखरेख में गुंडे हमारे युवाओं को पीट रहे थे ?
@DelhiPolice
बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा।
महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत।
छात्रों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज किया गया। छात्र-छात्राओं और महिलाओं तक को नहीं बख्शा गया। मोदी, शाह और धर्मेंद्र प्रधान देश की जनता की आवाज़ को कुचलना चाहते हैं। RML अस्पताल पहुँचकर घायल छात्र-छात्राओं से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।
NSUI पेपर लीक, भर्ती घोटालों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है। इस संघर्ष को दबाने के लिए मोदी सरकार ने हमारे सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए, लाठीचार्ज कराया और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। लेकिन NSUI का प्रत्येक कार्यकर्ता छात्रों के अधिकारों की इस लड़ाई में पीछे हटने वाला नहीं है।
जब तक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद नहीं होता,दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा नहीं देते, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा ।
#ChhatronKiGoonj
कांग्रेस सेवा दल जंतर मंतर स्टूडेंटो के लिए ग्राउंड पर उतरी है . पानी और राशन बांटा जा रहा है . कांग्रेस कहाँ है पूछने वाले ध्यान दे कांग्रेस यहाँ है .
सिविल ड्रेस में लाठियां भांजते यह योद्धा कौन है जिनके साथ पुलिस कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।
क्या पुलिस ने लाठियां भांजने के लिए आउटसोर्सिंग पर लोगों को रखना शुरू कर दिया है।
कुछ लोग मुझे DM कर रहे है कि ये जाट है , अगर ये जाट है तो जहाँ भी मिले ….. धुनाई कर दो !
छोटी-छोटी छात्राओं और बच्चों को गालियाँ देने वाला कभी जाट नहीं हो सकता ।
बड़ी खबर 😳🚨
आज दिल्ली पुलिस द्वारा आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ किये गये रवैये के खिलाफ @BhimArmyChief एवं नगीना सांसद चन्द्रशेखर आजाद संसद भवन परिसर में बाबासाहेब अम्बेडकर की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गये हैं....!!
इन तीनों तस्वीरों को देखकर बताओ क्या ये आपको दिल्ली पुलिस के जवान लग रहे हैं?👇🏻
एक स्नीकर्स व जीन्स पहने हुआ है, एक चप्पल पहनकर छात्रों को पीट रहा है, एक स्पोर्ट्स जूते पहने है, एक पुलिस की वर्दी पहने हुआ है जिसपर कोई टैग या बैच नहीं लगा, चेहरे पर दाढ़ी है
यह बहुत बड़ा व गंभीर सवाल है कि आखिर ये लोग कौन हैं और पुलिस के साथ मिलकर छात्रों को पीटने की अथाॅरिटी इन्हें कैसे मिली...!?
BIG BREAKING
मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए - प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों.
- नेता विपक्ष राहुल गांधी
ज़ुल्म जब भी हद से आगे बढ़ने लगता है,
वहीं से बदलाव का सूरज निकलने लगता है।
आज जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ जिस प्रकार का बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया, उसने मन को गहराई तक झकझोर दिया। मैंने जलियांवाला बाग का वह दौर नहीं देखा, लेकिन आज जो दृश्य सामने आए, उन्होंने इतिहास के उस काले अध्याय की याद अवश्य दिला दी।
लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि उस अधिकार का उत्तर बल प्रयोग से दिया जाए, तो यह केवल कुछ लोगों पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात है।
इसी पीड़ा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ, आज से मैं संसद भवन परिसर में परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ रहा हूँ। जब तक न्याय सुनिश्चित नहीं होता और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं होती, मेरा यह शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।
देश की संसद में दलित वर्ग के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे NEET पेपर लीक पर दहाड़ रहे है। संसद ठप्प कर रहे है।
सांसद चंद्र शेखर आजाद संसद भवन में डॉ अंबेडकर साहब की प्रतिमा के आगे धरने पर बैठे है।
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ हैदराबाद में आंदोलन कर रहे है।
अभिजीत दीपके दिल्ली में आंदोलन कर रहे है।
केन्द्र सरकार स्पष्ट करें कि दिल्ली पुलिस के साथ सिविल कपड़ों में लाठी लेकर मौजूद लोग कौन थे? उन्हें किसके आदेश पर कार्रवाई करने और लाठीचार्ज में शामिल होने की अनुमति दी गई?
लोकतांत्रिक देश में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने वाले युवाओं और छात्रों पर लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का प्रयोग अत्यंत चिंताजनक है। लोकतंत्र में असहमति को बल प्रयोग से नहीं, संवाद से सुना और सुलझाया जाना चाहिए।
देश के युवाओं की आवाज़ लाठियों और आंसू गैस से दबाई नहीं जा सकती।