आज माताएं-बहनें अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर धरने पर बैठने के लिए विवश हैं। जनता अपने वैध अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रही है, लेकिन अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं।
मैं प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देता हूं कि यदि 15 अगस्त तक जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो मैं स्वयं ग्रामीणों के साथ डीसी कार्यालय के समक्ष धरने पर बैठूंगा और जनता के समस्याओं का समाधान कराऊंगा।
अधिकारियों को जनता की सेवा करने, उनकी समस्याओं का समाधान करने और सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए वेतन मिलता है, न कि उन्हें महीनों तक कार्यालयों के चक्कर कटवाकर प्रताड़ित करने के लिए।
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माननीय नेता प्रतिपक्ष श्री @yourBabulal जी का सत्ताधारी गठबंधन पर इतना खौफ है कि सत्ताधारी दल के प्रवक्ता लगातार उनका नाम जपते रहे। माननीय बाबूलाल जी ने चाईबासा में हो रहे हजारों करोड़ के डीएमएफटी फंड के घोटाले का पर्दाफाश किया है। 3700 करोड रुपए पिछले 10 वर्षों में मिले हैं। 2018-19 तक का आंकड़ा वेबसाइट पर उपलब्ध है।उसके बाद की कोई टेंडर, कोई योजना,कोई ठेकेदार का विवरण और कोई आंकड़ा भी अपडेट नहीं किया गया है।
एक और चिंताजनक बात है की झारखंड में देश का 40% खनिज है जबकि रॉयल्टी सिर्फ 22,000 करोड रुपए की आती है। उड़ीसा में 17% खनिज है देश का लेकिन रॉयल्टी 46,000 करोड़ आती है।मूल कारण है कि उड़ीसा ने समय रहते अपने खदानों की नीलामी कर दी जबकि झारखंड में लौह अयस्क समेत दूसरे खनिजों की नीलामी प्रक्रिया ही बंद है।
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The warmth and affection of the Indian diaspora in Indonesia are truly heartwarming. Speaking at a community programme in Jakarta.
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गिरिडीह की बेटी पूनम कुमारी ने अपने हुनर, मेहनत और संकल्प से यह साबित कर दिया कि अवसर मिले तो झारखंड की बेटियां दुनिया में अपनी पहचान बना सकती हैं।
आईटीआई से लेकर मलेशिया में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और अब भारत के उभरते सेमीकंडक्टर सेक्टर तक का उनका सफर, मोदी सरकार के Women-Led Development के संकल्प का सशक्त उदाहरण है।
रांची के दशम फॉल क्षेत्र से लेकर हाईवे तक महिलाओं की गाड़ी का कई किलोमीटर तक पीछा कर उनके साथ बदसलूकी किए जाने की घटना बेहद भयावह और चिंताजनक है। सबसे गंभीर बात यह है कि महिलाओं द्वारा सूचना दिए जाने के बावजूद समय पर पुलिस सहायता के लिए नहीं पहुंची।
मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी दिल्ली में निवेशकों को आमंत्रित करने में व्यस्त हैं, लेकिन सवाल यह है कि ऐसी कानून-व्यवस्था पर कोई निवेशक कैसे भरोसा करेगा? जिस राज्य में पुलिस वाहन से खींचकर युवक की हत्या कर दी जाए और महिलाओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित न हो, वहां सुरक्षा का संदेश कैसे जाएगा?
राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन पर्यटन सीजन और मॉनसून के दौरान प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। यह स्थिति पर्यटकों और स्थानीय लोगों, दोनों के लिए चिंता का विषय है।
@ranchipolice@Jharkhandpolice दशम फॉल सहित राज्य के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के व्यापक और प्रभावी प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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विद्यार्थी परिषद के पूर्व प्रांत सह मंत्री रहे, भाई श्री अनुराग गौतम जी, आपको जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ 💐
प्रभु श्रीराम जी आपको उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन प्रदान करें
@anuraggautambjp
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता।
.@BJP4Jharkhand जेपीएससी की 14 वीं सिविल सर्विस परीक्षा के पीटी के परिणाम को अविलंब रद्द करने की मांग करती है।साथ में यह सरकार सीबीआई जांच की अनुशंसा करें।
सिर्फ अध्यक्ष के हस्ताक्षर से जारी हुआ परिणाम। 3 सदस्यों ने हस्ताक्षर करने से इनकार किया। आज हमने प्रेस वार्ता में ओएमआर शीट में गड़बड़ी को भी दिखाया। झारखंड सरकार युवाओं के सपनों को बेचना बंद करे।
भारतीय जनता पार्टी युवाओं के साथ खड़ी है।
@AdityaPdSahu@yourBabulal@dasraghubar@MundaArjun@ChampaiSoren@bjpkarmveer
भारत के गृह मंत्री आदरणीय श्री @AmitShah जी के व्यक्तित्व, उनकी कार्यशैली और राजनीतिक दृष्टि को समझने के लिए “Amit Shah & The March of BJP” एक बेहतरीन किताब है।
यह पुस्तक केवल अमित शाह जी के राजनीतिक सफर को ही नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय जनता पार्टी में आए व्यापक संगठनात्मक बदलावों को समझने में भी मदद करती है।
यदि आप इस पुस्तक को पढ़ने का विचार कर रहे हैं, तो मेरा सुझाव है कि इसकी शुरुआत Chapter 11 – “Mission UP” से करें। यही अध्याय आगे की पूरी पुस्तक को समझने के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।
आदरणीय मंत्री @radhakkofficial जी, आप भी किन कागज़ी चक्करों में फंसे हुए हैं?
आप जवानों को बैठाने के लिए DG साहब को पत्र लिख रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि झारखंड पुलिस में DG और IG की अब कोई हैसियत ही नहीं बची है! पूरा पदानुक्रम ध्वस्त हो चुका है। मेरी बात मानिए, सीधे अजय सिंह (ASI) के दरबार में अर्जी लगाइए। आपका गाड़ी, गार्ड, एस्कॉर्ट, सब एक झटके में अलॉट हो जाएगा।
जब राज्य के एक ADG स्तर के अधिकारी खुद बेबस होकर यह स्वीकार कर चुके हों कि “अजय जी की मर्जी के बिना झारखंड पुलिस में एक पत्ता तक नहीं हिलता, वही सबके कर्ता-धर्ता हैं”, तो आप इतने वरिष्ठ और कद्दावर नेता होकर DG से पत्राचार करने की भूल क्यों कर रहे हैं?
एक कैबिनेट मंत्री को जवानों को बैठाने के लिए चौथी गाड़ी तो दूर, उलटा उनका ही संयुक्त सचिव बची-खुची गाड़ी भी वापस मांग लेता है! आपने इसे अपने लिए 'Embarrassing' बताकर आहत होकर अपनी सुरक्षा वापस कर दी, लेकिन असल में 'Embarrassing' तो झारखंड का यह पूरा सिस्टम है जो पूरी तरह से चरमरा गया है।
मंत्री जी, यह सरकार और महकमा अब अधिकारियों से नहीं चल रहा। DG को पत्र लिखना छोड़िए और अपनी गाड़ी-गार्ड की समस्या लेकर झारखंड पुलिस के उस सर्वशक्तिमान 'ASI' के पास जाइए, जिसके इशारों पर आज पूरी की पूरी भ्रष्ट व्यवस्था नाच रही है!
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झारखंड के वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर जी ने अपनी सुरक्षा वापस करने का फैसला लिया है। सुनकर लगा कि शायद वीआईपी कल्चर छोड़ने की मिसाल पेश की जा रही है।
लेकिन मामला कुछ और ही निकला। मंत्री जी ने अपने काफिले के लिए अतिरिक्त गाड़ियों की मांग की थी। मांग पूरी नहीं हुई, तो “नाराज़ फूफा” बनकर अंगरक्षक ही वापस कर दिए।
यानी समस्या सुरक्षा की नहीं, गाड़ियों की संख्या की थी। झारखंड में मंत्री हों या अधिकारी, अधिकांश अब भी सामंती मानसिकता से बाहर निकलते नहीं दिखते। इधर रांची में आम जनता रोज़ सायरन और लंबे-लंबे काफिलों में फंसकर परेशान होती है, उधर सत्ता के गलियारों में गाड़ियों की गिनती ही प्रतिष्ठा का पैमाना बनी हुई है।