Ahmedabad Customs seized 600.240 grams of concealed 18K/14K gold chain hooks worth ₹60.24 lakh from a passenger arriving from Sharjah at SVPI Airport.
The passenger was arrested under the Customs Act,1962. Further investigation is underway.
Customs officials at Ahmedabad airport seized 61 premium designer pens from a passenger arriving from Japan via Vietnam. The haul, valued at up to Rs 30 lakh, has triggered questions over duty evasion and possible smuggling links.
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#Ahmedabad #AhmedabadAirport #DesignerPens #ITCard
राजस्थान के टोंक जिले से एक अजीब खबर आ रही है
एक लड़का लड़का जिसकी उम्र 15 वर्ष है जिसका जन्म बहुजन परिवार में हुआ है
अपने आप को जयपुर का राजा मानसिंह का पुनर्जन्म बता रहाहै
लोगों ने जब उससे पूछा कि अगर आप राजा मानसिंह थे ...तो आप का महाराणा प्रताप से हल्दीघाटी का युद्ध हुआ होगा
लड़का ने बोला हल्दीघाटी का युद्ध हुआ उसके बाद भी छह युद्ध और हुए थे
वह अपनी मौत का कारण और स्थान भी बता रहा है।
यह मैच कोई संयोग है या पुनर्जन्म की घटना
राजस्थान जोन का प्रतिनिधित्व करते हुवे PNB के Sports Event में Gold Medal जितने की बहुत बहुत बधाई JP
दोस्तों एक बंदा कितना ऑलराउंडर हो सकता हैं आज इसका बहुत ही सटीक example हैं JP @imJpooniya
PNB में Sr. Manager हैं, और सोशल मीडिया पर आम जनता को बैंकिंग मुद्दों पर awareness के podcast video भी बनाते हैं।
बैंकिंग के साथ साथ passion के तौर पर बहुत ही शानदार वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर हैं। उनकी click की फोटो National Geography, भारत सरकार, राजस्थान सरकार, राजस्थान वन विभाग, Sony के साथ और कई बड़े प्लेटफार्म पर publish हो चुकी हैं।
फोटोग्राफी के साथ साथ वन्यजीव संरक्षण के कार्यों में हमेशा तत्पर रहते हैं और उसका बेहद शानदार तरीके से documentation करके आम जनता को उससे जोड़ने का हुनर भी बखूबी जानते हैं।
पर्यावरण संरक्षण के हर मुद्दे को चाहे वो जोजरी प्रदूषण का हो, या अरावली का, या wildlife field में AI के दुरुपयोग का, बहुत ही यूनिक तरीके से सोशल मीडिया पर उठाने की खूबी हैं इनमे, जो सीधा आम लोगों को इन मुद्दों से जोड़ता हैं, जागरूक करता हैं।
इन सब के साथ साथ फिटनेस के मामले में बेहद ऐक्टिव हैं।क्रिकेट के साथ साथ किसी भी खेल में जहाँ भी मौक़ा मिलता हैं खेल मैदान में कुछ न कुछ करते जरूर दिखेंगे।
जहाँ एक तरह सोशल मीडिया पर कई सरकारी अधिकारी आए दिन किसी न किसी कारणों से लोगों के निशाने पर रहते हैं वहाँ JP जैसे कुछ लोग वाक़ई इसका बेहद positive way में प्रयोग करके सबके लिए एक सटीक उदाहरण पेश कर रहे हैं।
@MumbaichaDon EU tend to reject Indian products on multiple levels and by their multiple means and standards. If it is not secured in this deal, looking at their trackrecord, this deal won’t be as successful as being predicted as of now.
सीरीज़ की शुरुआत में, 15 दिन पहले, पाकिस्तान के मंत्री मोहसिन नकवी के साथ हाथ भी मिलाया ,फोटो खिंचवाया
अभी ये लोग देश को नौटंकी दिखा रहे है!
इतनी राष्ट्रभक्ती आपके खुन में थी तो पाकिस्तान के साथ मैदान में नही उतरना था,
उपर से नीचे तक ड्रामा ही ड्रामा ।
🇮🇳 की जनता मूर्ख 👎 है
पर्द के पीछे के लोगों का राज बहुत कम ही बाहर आता है दोस्त @imJpooniya 👍जो वास्तविक चाणक्य होते है क्रांतियों के।शुरू से लेकर आज तक आपने जो मार्गदर्शन दिया है वो इस संघर्ष का सारथी है।एक एक कदम सावधानी से चलना होता है ऐसे मुद्दों पर जब राजनैतिक भ्रष्टाचार का दलदल जुड़ा हो।
कैमरा ओर जोजरी के हालातों को हवा से कैद करने के संसाधन आपने ही नेरे कंधो पर रखे थे ।मैं तो बस उन्हे चला रहा था। ना जाने कितनी संघर्ष की यादें जुड़ी है घंटो का डिसकसन ओर धरातल पर साथ बिताये समय बहुत कुछ सीखाया है।
सोशल मिडिया का उपयोग हम जो समाज के लिए सार्थक रूप से कर सकते है ये सीख आप से मिली है।
कई बार मुश्किल हालातों से ऊभरने का जज्बा इसी पावर सेंटर से मिलता है।
टीम का लीडर आप जैसा मिले तो मजबूत साथी को खौने के बाद भी संघर्ष जारी रख पाना संभव हो सकता है।
Today BCCI & their Cricketers are sending cheques/money to those Pakistani terrorists who killed his son !
Why we are calling them Indian Team ? What’s Indian about these cricketers ?
#NationFirst 🇮🇳
आज कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला का जन्मदिन है। वह एक ग़ज़ब ही शख़्सियत थे।
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उनके पुराने चित्र आज ही मानो कह रहे हों, मेरी पगड़ी ही मेरा राजमुकुट, रेल की पटरियाँ ही मेरा सिंहासन।
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जीवन में कुछ मुलाक़ातें केवल भेंट नहीं होतीं, वे किसी जीवन बोध का ही नया उद्घाटन होती हैं।
मुझे वे दिन याद हैं, जब गुर्जर आंदोलन का तूफ़ान अभी नहीं उठा था।
मैं भारतीय जनता पार्टी की बीट रिपोर्टिंग करता था। पार्टी के उस बेहद सुव्यवस्थित और नियमित समर्पित कार्यकर्ताओं वाले दफ़्तर में अक्सर एक ऊँचे क़द का, पगड़ीधारी, लाठी टेकता हुआ व्यक्ति दिखाई देता। एक दिन मेरी दृष्टि उस पर अटक गई। उसके व्यक्तित्व पर नहीं, उसकी मेज़ पर रखी किताब पर। किताब थी “नेपोलियन : द पाथ टू पावर” (फ़िलिप ड्वायर)।
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क्या आश्चर्यजनक दृश्य था!
खांटी देहाती अंदाज़ में धोती बाँधे, पगड़ी सिर पर सजाए एक किसान-सा दिखता आदमी और उसके हाथों में अंगरेज़ी में लिखी नेपोलियन की जीवनी। उसने क्षण भर में उस आधुनिक कुंठा को तोड़ दिया, जो यह मानकर चलती है कि धोती-पगड़ी पहनने वाला ग्रामीण आदमी महान् यूरोपीय इतिहास की गम्भीर रचनाएँ नहीं पढ़ सकता। उसके लिए युवा नेपोलियन कोई पराया नाम नहीं था; वह उसका नायक था, उसकी नियति का साथी।
कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला से वह मेरी पहली मुलाक़ात थी।
थोड़े से शब्दों में ही उन्होंने बहुत कुछ कह दिया। प्रजा, राज्य, सत्ता और आत्मसम्मान की बातें। गहरी आत्मीयता से लबालब भरा एक इन्सान। उनके लिए खेत-खलिहान ही राजसिंहासन था, पगड़ी ही राजमुकुट। वे उन दुर्लभ शख्सियतों में थे, जिन्होंने आंदोलन को याचना और दीनता से उठाकर आत्मगौरव का इतना उन्नत स्वरूप दिया कि राजसत्ता बार-बार उनके सामने झुकती रही। उनके सामने उनकी जाति के एक-एक कर सत्तर लोग गिराए गए। लेकिन वह आदमी डरा नहीं। राजस्थान के एक ऐसे गुर्जर समाज को उन्होंने देश भर में पहचान दिलाई, जिसे लोकसमाज में प्रभावशाली जातियां नकारात्मक रूप से प्रचारित करती थीं। यह एक तरह का ट्रांस्फोर्मेशन था।
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वह निडरता की यह एक अतुलनीय मिसाल थे।
इस तरह की निडरता मैंने गंगानगर में वामपंथी नेताओं में देखी थी। श्योपतसिंह मक्कासर, प्रोफ़ेसर केदार, हेतराम बेनीवाल, कॉमरेड योगेंद्रनाथ हांडा और बाद में निर्भीकता की इस परंपरा को दर्शन कोडा और सुरेंद्रसिंह राठौड़ जैसे नेताओं ने नए मयार दिए। कोडा को भाजपा और कांग्रेस के आपराधिक नेताओं ने मिलकर मारा था। लेकिन वह मरकर भी जीवित हैं। सुरेंद्रसिंह राठौड़ अपने आप में एक दंतकथा की तरह रहे हैं।
कर्नल बैसला भी एक अदम्य साहस के साथ खड़ी हुई शख़्सियत थीं। फ़िराक़ गोरखपुरी की पंक्तियाँ मानो उनके भीतर जीवित थीं, “सूरज-चाँद अंगड़ाई लेंगे और तारे अपनी गति बदलेंगे।” सैनिक जीवन की तप्त भट्ठी से निकले अनुभवों को उन्होंने जन-आंदोलनों से जोड़ा और एक ऐसी इबारत लिखी, जिसमें पीड़ा गरिमा में बदल गई। अफ़सरों और नेताओं को उन्होंने लोकतंत्र का नया पाठ पढ़ाया कि सत्ता ऊपर से नहीं बँटती, वह नीचे से जन्म लेती है। वे उन्हें महलों और दफ़्तरों से खींचकर रेल की पटरियों पर, जनता के बीच ले आए।
विनोद कुमार शुक्ल ने लिखा है, “एक उफनती नदी कभी मेरे घर नहीं आएगी; मुझे नदी तक जाना होगा।” बैसला ने इस दर्शन को जीकर दिखाया। उन्होंने सत्ता की नदी को अपने धरने तक मोड़ दिया। यहाँ तक कि एक समय वह हुआ जब एक ऐसे महागुरु, जिनके लिए सितारे भी झुकते हैं, उन्हें भी रेल की पटरियों पर आना पड़ा। उनकी “आर्ट ऑफ़ लिविंग” एक फौजी की “आर्ट ऑफ़ वॉर” के सामने नतमस्तक हो गई।
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बैसला के भीतर नेपोलियन ही नहीं, गोल्ड्सवर्दी के सीज़र की गूँज भी थी। उन्होंने महज़ किताबें नहीं पढ़ीं, उन्हें आत्मसात किया। वैसे ही जैसे भगत सिंह ने ऑगस्ट वयाँ को किया था। उन्होंने राजस्थान की नौकरशाही और शासन-तंत्र के मिथकों को एक-एक कर ध्वस्त किया। वे केवल विरोध करने वाले एजीटेटर भर नहीं थे; वे सुधारक थे, जिन्होंने जर्जर मशीनरी के नट-बोल्ट कसे और उसे जनता की आवाज़ के लिए इस्तेमाल किया।
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मुख्यमंत्री के रूप में अशोक गहलोत जैसे नभस्पर्शी नेता और वसुंधरा राजे जैसी अलग प्रभामंडल वाली नेता की कार्यशैली के बारे में जैसा आकलन कर्नल बैसला ने कर रखा था, वह इतना सटीक था कि मैं बता नहीं सकता। उनके कई लंबे इंटरव्यूज में उन्होंने जो वर्णन किए, वह चमत्कृत करते हैं।
आज के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के युग में उसका मुकाबला कोई साइको मेट्रिक्स भी नहीं कर सकता। बैसला के पास अपने निजी अनुभवों के आधार पर राजनेताओं को पहचानने की विलक्षण दृष्टि थी। उस समय मुख्यमंत्री रहे दोनों प्रमुख नेताओं के कामकाज के तौरतरीकों को लेकर उनका जो आकलन था, वह आप क्रिस्टैल, ट्रैटिफाई, सिक्सटीन पर्सनैलिटीज, आईबीएम वाट्सन पर्सनैलिटी इन्साइट्स एचआर टेक् जैसे विभिन्न एआई-प्लेटफ़ॉर्म्स के माध्यम से भी नहीं निकाल सकते।
उनकी दृष्टि ही जैसे इसके लिए पर्याप्त थी। लोकअनुभवों में तपा इन्सान एआई आधारित डिजिटल फुटप्रिंट पर्सनैलिटी मैपिंग तक को कैसे दूर बिठाता है, यह हमें बैसला जैसे लोकनेता दिखाते हैं।
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कर्नल की ताक़त इतनी थी कि जिन ज़िलों में उनका आंदोलन होता, वहाँ के कलेक्टर और अन्य अधिकारी न केवल उनकी बैठकों में आते; पूरी टोह भी रखते थे। तत्कालीन सरकार ने शीर्ष स्तर से एक विशेष आदेश निकाला था कि संभागीय आयुक्त और संबंधित इलाकों के कलेक्टरों की सरकारी बैठकों में कर्नल बैसला विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।
यह हैरान कर देने वाला आदेश था और राजस्थान के इतिहास में अपनी तरह का असाधारण क़दम था।
आप सोच सकते हैं कि सरकार उनसे कितनी डरी हुई थी। लेकिन एक सदाशयी मुख्यमंत्री ने डर के बजाय इसके माध्यम से लोकशक्ति को अपना नमन किया था। और इसी से वे अपने कार्यकाल में बड़े और ख़तरनाक़ आंदोलन से बचे भी रहे। हालांकि आंदोलन से डीलिंग का यह एक इंटेलिजेंट तरीका था, लेकिन बाद में भाजपा के नेता इस बुद्धमत्तापूर्ण प्रशासकीय शासकीय क़दम से आंदोलन को हिंसक होने से बचाने की सफलता को एक अलग तरह की नज़र से देखते हैं। वह नज़र यह है कि गुर्जर आंदोलन में कांग्रेस की मिलीभगत। इस तरह का एक बयान पिछले ही दिनों भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ साहब ने कुछ ही समय पहले भी दिया है। लेकिन सच तो यह है कि भाजपा के समय के गुर्जर आंदोलन में वह नाकामी पूरी तरह एक गृह मंत्री के स्तर पर थी।
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बैसला राजनीति में नहीं आते तो शायद अधिक अच्छा था; लेकिन चुनाव लड़ने से उनकी सारी कमाई एकबारगी तो लुट ही गई थी। जैसा कि इन दिनों में नेपाल में देख रहे हैं। साधारण लड़ाका कैसे नायक बनता है और राजनीति उसे कैसे लोगों में अलोकप्रिय बना देती है। बैसला हार गए तो उनकी वह कमाई काफी हद तक बच भी गई।
जैसे हम देखते हैं कि सरकार में आने से पहले डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की जो छवि थी, वह सरकार में आ जाने के बाद बहुत बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसे उन्होंने बचाने की कोशिश की है। लेकिन सरकार तो सरकार ही होती है। सरकार के बाहर होने का भी बड़ा फ़र्क पड़ता है। आज लोक समाज में वसुंधरा राजे की छवि भी बहुत अलग है। और उन्हें गिलास से घूंट-घूंट भरभर कर जले-भुने शब्दों में कोसने वाले भी स्पृहा से याद कर रहे हैं। तो बैसला की आभा कुछ धूमिल हुई, पर उनके आंदोलन की छवि पिरामिड की तरह स्थायी हो गई।
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कर्नल बैसला का व्यक्तित्व आज भी स्मृति में जीवित है। उनके आंदोलनों को लेकर असहमति और बहसें चलती रहेंगी, पर उनकी उपलब्धि यह थी कि उन्होंने साबित किया, जनता की हल्की-सी सरसराहट भी सरकारों और तंत्र की रीढ़ झुका सकती है। जब लोकतांत्रिक परंपरा खंडहरों में सिसक रही थी, उन्होंने रेल की पटरियों पर बैठकर उसे नई चेतना दी।
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कर्नल बैसला इतिहास में उन विरले पुरुषों में गिने जाएँगे जिन्होंने अपनी ज्वलंत और भव्य शैली में दिखाया कि लोक की शक्ति क्या होती है।
कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला का व्यक्तित्व इस मायने में विशिष्ट था कि उन्होंने आंदोलन के नेता की भूमिका को पुस्तकों के गहन अध्ययन और सैन्य जीवन की कठोर साधना से एक अद्वितीय रूप दिया।
पुस्तकें उनके भीतर विचार और इतिहास का एक विराट संसार रचती थीं। जब वे नेपोलियन की जीवनी जैसे ग्रंथ पढ़ते, तो केवल कथानक नहीं, संघर्ष के दर्शन और सत्ता से जूझने की रणनीतियाँ आत्मसात करते। यही कारण था कि उनका आंदोलन केवल आरक्षण या सुविधाओं की मांग तक सीमित नहीं रहा; उसमें आत्मसम्मान, न्याय और इतिहास-बोध की गूँज भी समाहित थी।
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सेना ने उन्हें अनुशासन, धैर्य और संगठन की कला सिखाई। सैनिक जीवन का अभ्यास उन्हें यह सिखा चुका था कि हर जंग केवल ताक़त से नहीं, सुविचारित रणनीति, सामूहिकता और साहस से जीती जाती है। यही गुण उन्होंने अपने आंदोलनों में ढाला—रेल की पटरियों पर बैठी भीड़ अचानक अनुशासित जनशक्ति बन गई, जो सत्ता से सीधा संवाद कर रही थी।
इस द्वंद्वात्मक साधना—पुस्तकों की गहराई और फौजी अनुशासन—ने बैसला को बाकी नेताओं से अलग किया। वे न तो केवल भीड़ को भड़काने वाले नेता थे और न ही केवल भाषण देने वाले, वे वह व्यक्ति थे जिसने जनता के संघर्ष को इतिहास, विचार और अनुशासन से जोड़कर आत्मगौरव का स्वर दिया।
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कर्नल बैसला को एक छोटे से स्ट्रिंगर का सैल्यूट!
#RajasthanPoliticsWithTribhuvan #RajasthanWithTribhuvan
सालों हो गये हमारी पूरी पीढ़ी जहर में बड़ी हो गयी है जिनको पता ही नही है कि शुद्ध वातावरण क्या होता हैं।शहर के जहर की बदबू से नाक की नशे मर चुकी हैं।
अब जब ये दर्द मीडिया के माध्यम से दुनिया भर में उठने लगा है तो सबको पता चल रहा है कि कितना बुरा हाल है यहां।
धन्यवाद @TheNewspinch@Abhinav_Pan सर आपने रात के दो दो बजे तक इस जहरीले पानी के इर्द गिर्द घूमकर ओर हर ज़िम्मेदार का दरवाज़ा खटखटाकर खत्म होती एक पूरी सभ्यता का दर्द उजागर किया
https://t.co/4PiJyCMI9p
Hey @BCCI, Do you have any respect for the blood of innocents in Pahalgam and soldiers in Kashmir?
I have immense respect for their sacrifice 🙏🫡
Jai Hind 🇮🇳
BCCI is controlled by politicians and their families across party lines and it has become a super elite arrogant club mocking us and our sentiments. All of us supported the Hon'ble PM during Operation Sindoor! Few days ago two brave Indian Armed force heros were martyred fighting Pakistan terrorists! We must all now unite to show this elite powerful club that the true power of cricket vests in our hands !
An INDIA PAKISTAN ASIA CUP Cricket matchis unacceptable! Let us show them our power !
Jai Hind Jai Bharat
I appealed to the home Minister to call off the Ind-Pak Asia Cup match. Went unheard
To the sports Minister
To the I&B Minister
to the IT Minister
To the cricketers
To BCCI
To sponsors
To broadcasters
To streamers
All went unheard
Now I appeal to the citizens of the country to not let anyone profiteer over the blood of our Indians.
Remember Pahalgam.
लाखों लोगों के दर्द ओर मरते वन्यजीवों की दास्तान आपके ज़रिये पूरा देश ओर दुनिया देखेगी।
हमारे लिए आपने जो मेहनत की है सर सलाम है आपको।उम्मीद बनी रहेगी कि हमारी पीड़ा को देश के नेता समझेंगे और समाधान करेगें।
The India-Pakistan match in #AsiaCup deserves an empty stadium, and no viewership on TV in India.
Maybe that’ll be a wake up call for all sponsors, promoters, broadcasters and @BCCI !
I really hope the country makes this happen this time.