रील मंत्री @AshwiniVaishnaw जी आपने सारा ठेका गुंडों को क्यों दे रखा है ?
आए दिन pantry staff and vendors लोगों को ऐसे ही ग्रुप बनाकर पीटते रहते है ,
इस पर कार्यवाही कीजिए वर��ा लोग इतना खुरपेंच करेंगे कि आप वंदे भारत की रील डालना भूल जाएंगे।
We got a holiday for the birthday of Prophet Mohammed (Eid-e-Milad), but didn’t get a holiday on the birthday of Krishna Ji (Janmashtami) in a Hindu majority, so called secular country. ��🤡
This is a terrible idea. The current stadium is more than enough for cricket needs.
Making another massive cricket stadium in a city that already has a very decent one, just for 7 IPL games and one odd rotation international match every 3 years is a criminal waste of money.
Please make smaller mixed use facilities that support different sports, commercial activities and concerts and shows like the Ajax stadium.
Or if you have to spend it on cricket, you have 33 districts, many would love to have a decent cricket pitch.
Prepaid Recharge Customers के साथ हो रही लूट का मुद्दा आज मैंने Parliament में उठाया।
(a) अगर आपका recharge खत्म हो जाए तो Outgoing Calls बंद होना समझ में आता है, लेकिन Incoming Calls बंद करना मनमानी है।रिचार्ज खत्म होते ही न कोई आपसे संपर्क कर सकता है और न ही आपके फोन पर OTP जैसे जरूरी मैसेज आ पाते हैं। Emergency के हालातों में व्यक्ति बेसहारा हो जाता है।
(b) 28 दिन का Recharge plan एक scam है। साल में महीने 12 होते हैं लेकिन रिचार्ज 13 बार करवाना पड़ता है (28 days x 13 times = 364 days).
Recharge plan की वैधता calender months (30–31 दिन) के हिसाब से होनी चाहिए, क्योंकि 28 दिन के चक्कर में लोगों को साल भर में एक अतिरिक्त रिचार्ज करवाना पड़ता है।
मोबाइल आज के समय में Luxury नहीं, बल्कि आम नागरिक की Necessity बन चुका है।
इसलिए टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं के साथ Fair और Transparent रवैया रखना चाहिए।
What @ajeetbharti is stating is a fact. Insurance companies take money from Indians, yet ill-treat them, don't release their genuine claims & frustrate. There is no mechanism that protects Indians who invest in insurance hoping for a safety net in difficult times!
@HDFCERGOGIC
अपने बच्चों को बताओ की बाबर नाम के एक सैतान ने भगवान राम की नगरी अयोध्या में राम मंदिर गिरा कर मस्जिद बना दी फिर समय ने करवट ली और फिर से भव्य राम मंदिर का निर्माण ह��आ ।
भारत की दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट टीम ने साहस, धैर्य एवं अविचल संकल्पशक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए प्रथम महिला दृष्टिबाधित T-20 विश्वकप जीत लिया है। इस ऐतिहासिक विजयाभूषण के लिए समस्त भारतवर्ष की ओर से हमारी इन बेटियों को हृदयपूर्वक अभिनंदन एवं शुभकामनाए��। आप सब बेटियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ निश्चय तथा सतत साधना के समक्ष कोई भी बाधा कभी नहीं टिक सकती। जय हो🇮🇳🎉🪅
देख लो बिहार वालों, खास करके हमारा समाज का दरी बिछाने वाला युवा जो हर बात पर मुंह में 5 वाला फ्री का रजनीगंधा भर के लाऊ लाऊ करते रहते हो।
प्र��ागराज महाकुंभ को फालतू कहने वाला कैथोलिक क्रिश्चियन पोता पोती के साथ क्रिश्चियन त्यौहार हैलोवीन मना रहा है वो भी बिना व्हीलचेयर के जो कोर्ट जाते समय निकल जाता है।
किसी धर्म का त्यौहार मनाना कोई गलत नहीं है, इसमें कोई बुराई भी नहीं है लेकिन किसी दूसरे धर्म को फालतू कहना सरासर गलत है।
एक यूजर ने बाकायदा स्क्रीन रिकॉर्डिंग डालकर @IRCTCofficial के सर्वर की तारीफ की वही सर्वर जो हर रात मेंटेनेंस के नाम पर ठप हो जाता है।
सवाल है — जब ���र रात अपडेट होता है तो फिर तत्काल बुकिंग के समय ही सर्वर क्यों बैठ जाता है?
बार-बार लॉगआउट, पेमेंट फेल, Error occurred — और ये सब तब तक चलता है जब तक टिकट खत्म न हो जाए।
क्या ये सिर्फ़ टेक्निकल फेल्योर है या कोई प्री-प्लान्ड सर्वर प्ले??
सामान्य यात्री कैसे टिकट ले जब सिस्टम पहले से एजेंटों के लिए रिज़र्व हो?
रेल मंत्रालय और IRCTC जवाब दें — ये सेवा है या सिस्टमेटिक लूट?? 🚆
IRCTC दावा करता है कि आम यात्रियों को समान अवसर देने के लिए एजेंटों को अग्रिम आरक्षण अवधि (ARP) या तत्काल टिकट खुलने के पहले 30 मिनट तक बुकिंग की अनुमति नहीं होती।
लेकिन फिर सवाल उठते हैं —>>
> अगर एजेंट 30 मिनट तक बुक नहीं कर सकते, तो सिर्फ 1 मिनट में सारे टिकट कैसे ��ायब हो जाते हैं?
> हर दूसरे दिन आपका सर्वर लंगड़ा क्यों पड़ जाता है, और “technical glitch” का बहाना तैयार रहता है?
> तत्काल टिकट खुलते ही “Booking Full” का संदेश कैसे आता है, जबकि घड़ी अभी 10:00:30 ही दिखा रही होती है?
> उसी वक्त थर्ड-पार्टी ऐप्स पर वही ट्रेन सीट उपलब्ध दिखा रही होती है, पर IRCTC पर “Not Available” ये तकनीकी दिक्कत है या कोई गैर-तकनीकी जुगाड़?
> ट्रेन चलने के कुछ मिनट बाद ही कन्फर्म टिकट ऐप “करेंट बुकिंग” में टिकट क��्फर्म कैसे हो जाते हैं?
क्या ट्रेन रुकी नहीं और सिस्टम “मिल गया” बोल देता है?
> क्या ये “टेक्निकल ग्लिच” है या फिर पैरेलल सर्वर, बैकडोर और अंदरूनी दलालगिरी का संगठित खेल चल रहा है?
और अगर नहीं है, तो IRCTC पारदर्शिता रिपोर्ट कब जारी करेगा —>>
> जिसमें बुकिंग टाइमस्टै��्प, सर्वर लॉग, और थर्ड-पार्टी API कॉल का रिकॉर्ड पब्लिक हो?
> कितने टिकट एजेंट-आईडी से जाते हैं और कितने कॉमन यूजर से, ये आंकड़े कब जनता को दिखाए जाएंगे?
> क्यों न हर तत्काल बुकिंग पर OTP-बेस्ड ट्रांजैक्शन प्रूफ दिया जाए ताकि फर्जीवाड़ा रोका जा सके?
कान खोलकर सुनो @IRCTCofficial अगर कोई यात्री RAC टिकट लेकर यात्रा कर रहा है और ट्रेन की 50% दूरी पूरी होने तक उसे पूरी सीट नहीं मिलती, तो यह सीधा सेवा में असफलता (Service Failure) है। ऐसे में IRCTC को बाध्य किया जाना चाहिए कि वह किराए का 50% हिस्सा तुरंत रिफंड करे।
यात्रियों की मांग बिल्कुल जायज है —>>
आपने पूरा किराया भरा, फिर भी आधी सीट और आधी नींद मिली।
रेलवे ने सेवा का पूरा मूल्य वसूला, लेकिन सुविधा आधी दी।
कोई भी निजी कंपनी ऐसा करे तो उसे Penalty & Refund देना पड़ता है, तो IRCTC क्यों नहीं?
सुझाव :>>
1. RAC Compensation Policy लागू हो 50% यात्रा तक सीट न मिलने पर स्वचालित 50% रिफंड।
2. रियल-टाइम सीट अलॉटमेंट ट्रैकिंग ऐप में दिखे ताकि यात्री जान सके कि कौन सी सीट खाली हुई।
3. TT को जवाबदेह बनाया जाए —> सीट खाली होते ही RAC वालों को देना अनिवार्य हो।
4. पब्लिक डेटा रिलीज़ हो —> हर ट्रेन में कितने RAC यात्री बिना पूरी सीट यात्रा करते हैं।
IRCTC को समझना चाहिए —>>
यात्री ग्राहक है, भीख मांगने वाला नहीं।
पूरा किराया लेने के बाद आधी सीट देना, रेलवे की नैतिक और आर्थिक चोरी है।
जब आप थर्ड AC का टिकट बुक करते हैं और चार्ट बनने के बाद आपको RAC टिकट मिलता है तो आप उम्मीद करते हैं कि जैसे ही सीट खाली होगी , रेलवे आपको पूरी सीट देगा। लेकिन हक़ीकत कुछ और है।
कई यात्रियों ने लिखा है कि TT साहब सीट खाली होते ही RAC वालों को देने की बजाय, बिना टिकट यात्रि��ों को पैसे लेकर सीट दे देते हैं। यह खुली रिश्वतखोरी है और रेलवे की साख पर सीधा दाग।
सोचिए —>>
आप फुल किराया देकर यात्रा कर रहे हैं, फिर भी आधा सोना, आधा बैठना पड़ता है।
TT कहता है सीट नहीं है, जबकि असल में वो सीट किसी कैश वाले बिना टिकट यात्री को दे चुका होता है।
यात्री को ये तक नहीं पता चलता कि कौन-सी सीट खाली हुई, क्योंकि कोई पारदर्शी सिस्टम नहीं है।
अब सवाल है —>>
क्या TT की नैतिक और प्रशासनिक जि���्मेदारी नहीं बनती कि जो यात्री पूरा किराया दे चुका है, उसे प्राथमिकता दी जाए?
रेलवे की प्रतिष्ठा जनता के भरोसे पर टिकी है, न कि TT के “कलेक्शन” पर।
इस पूरे खेल को खत्म करने के लिए ज़रूरी कदम —>>
1. लाइव सीट अपडेट सिस्टम — हर कोच की खाली सीटें रेलवे ऐप पर रीयल-टाइम दिखें।
2. CCTV निगरानी — TT की हर सीट अलॉटमेंट कैमरे में रिकॉर्ड हो।
3. डिजिटल लॉग — हर सीट असाइनमेंट का डेटा पब्लिक रिकॉर्ड में जाए, ताकि गड���बड़ी पकड़ी जा सके।
4. यात्री शिकायत पोर्टल पर फास्ट-ट्रैक एक्शन रिश्वत साबित होते ही तत्काल सस्पेंशन और जुर्माना।
5. जनता को जागरूकता —>> यात्रियों को सिखाएं कि वे सीट की स्थिति कैसे चेक कर सकते हैं (NTES या IRCTC पर “Chart Vacancy” फीचर)।
अब टीम खुरपेंच ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
अगर किसी TT की ऐसी हरकत का सबूत मिला
तो उसे समझ में आ जाएगा कि “सीट बेचने” की कमाई कितनी महंगी पड़ सकती है।
रेलवे, सुन लो — जनता को एडजस्ट नहीं, इंसाफ चाहिए।