Congratulations Sir apki Nayi MOVIE ke liye.. Aaj MAHARASTRA ASSEMBLY ELECTION THE AAPNE VOTE KIYA KYA..?????????? ya MANGAL YAAN ke CELEBRATION ME YA HOUSEFULL MOVIE KE RELEASEING me busy the.... 🤔🤔🤔🤔🤔
गलगोटिया ने सिर्फ फर्जी रोबोट नहीं बनाया, शुभंकर मिश्रा जैसा B Tech पत्रकार भी बनाया है।😅।
भाई, मैडम नेहा सिंह तारीफ कर रही हैं या बुराई नहीं पता।
मगर नाम ऐसे ली हैं जैसे APJ अब्दुल कलाम को पढ़ाई हैं।
ब्राह्मण विदेशी है।इन्हें राष्ट्रवाद सिखाने की जरूरत नहीं है। सुभाष चंद्र बोस को कितना प्रताड़ित किया गया? उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर किया।
सुभाष चंद्र बोस डॉ बाबासाहेब आंबेडकर जी को मिले थे अंतिम दिनों में।
CJI गवई जी के ऊपर जूता फेंकवाया, IPS पूरन कुमार का अपमान कराया और मजबूर होकर आत्महत्या करना पड़ा । मुझे नहीं झुका सकते अब और ताक़त से लड़ूँगा ।RSS और बीजेपी इतना दबाना चाहते हैं की हम फिर से गुलाम बनें । मेरी पत्नी ,सीमा राज के जुबान से सच्चाई सुनें ।
मुसहर जाति पर अभिनव पांडेय की पूरी डॉक्यूमेंट्री देखी. बड़े चालाकी से डॉक्यूमेंट्री के अंत मे आरक्षण पर हमला किया गया है.
पहली बात आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नही है. देश की कुल नौकरियों में केवल 1% सरकारी नौकरी है.
99% नौकरी प्राइवेट सेक्टर में है, जहां कोई आरक्षण नही है. प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की बात उठते ही अभिनव पांडेय की जाति सबसे पहले विरोध करती है.
न्यूज़ पिंच की डॉक्यूमेंट्री बताया जाता है मुसहर जाति का हर गांव में टोला गांव के बहार दक्षिण में होता है. और मुसहर जाति से छुआछूत और जातिवाद किया जाता है. डॉक्यूमेंट्री का टाइटल मुसहर जाति चूहे के शिकारी रखा गया है.
असल में अभिनव पांडेय को डॉक्यूमेंट्री अपने जाति के टोले में जाकर बनानी चाहिए कि उनकी जाति बस्ती गांव के बीचों बीच और ऊंचे स्थान पर क्यों होती है. उनकी जाति के लोग वर्ण अव्यवस्था का कड़ाई से पालन क्यों करते हैं. जातिवाद की समस्या तो ब्राह्मण टोले में भी है.
क्या यह उन्मादी अनिल मिश्रा अब कानून से भी ऊपर हो गया है? ग्वालियर में धारा 163 लागू है उसके बावजूद इसे टेंट लगाकर अपना जन्मदिन मनाना है
जब प्रशासन रोकता है तो धर्म को मोहरा बनाकर 'जय श्री राम' के नारे लगाने लगता है। वैसे अपने कुकर्मों को छुपाने के लिए धर्म का सहारा लेने का नया ट्रेंड देश में चल रहा है
यकीन मानिए इस अनिल मिश्रा जैसे जातिवादी हिंदुओं ने अपने धर्म की जितनी खिल्लियां उड़ाई है उतनी किसी और ने नहीं....जो आदमी अपने व्यक्तिगत बचाव के लिए धर्म का सहारा ले उससे नीच व्यक्ति कोई नहीं हो सकता
सवाल तो @DrMohanYadav51 जी पर उठता है, बिना मुख्यमंत्री महोदय के सहयोग से उनके राज्य में इतनी अराजकता नहीं फैल सकती।।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी अब सवाल उठ रहे हैं-
भारतीय खिलाड़ी और सेलिब्रिटी विदेशों में नस्लभेद के खिलाफ आवाज तो उठाते हैं, लेकिन अपने ही देश में सदियों से चल रहे जातिगत भेदभाव पर एक शब्द क्यों नहीं बोलते?
दिखावे का विरोध नहीं, सच्चे साहस की जरूरत है।