मैंने पहले ही कहा था: ठाकुरों को गर्व था कि बाक़ी जगहों पर वे कहीं उच्च पदों पर नहीं है। लेकिन सेना में अच्छी संख्या है। मैंने कहा था कि पूरी दुनिया में फ़ौज की संख्या घट रही है। टेक्नोलॉजी है। हज़ारों मील दूर बैठकर ड्रोन से हमले हो रहे हैं। भारी भाला अब किसी काम का नहीं रहा।
भारत के 78% लोग तो कह कर मांसाहारी हैं। इनमें वे लोग शामिल नहीं हैं जो होटल में वेज थाली में चिकन या मटन का शोरबा यानी करी यानी झोल डालने की माँग करते हैं और इसके लिए अलग रुपया माँगने पर झगड़ा करते हैं। अंडा वाले भी उसमें नहीं हैं। भारत में मांसाहारी बहुसंख्यक हैं।
इतनी ही समस्या है तो कट्टर शाकाहारी लोग अपना अलग देश क्यों नहीं मांग लेते? वहाँ सारे लोग मिलकर वेज बिरयानी और वेज मोमो खाएँ। 78% माँसाहारियों को भारत में शांति से रहने दें। दक्षिण और पूर्वी भारत तो 99% तक मांसाहारी है। शाकाहारियों से कौन ज़बर्दस्ती कर रहा है कि वे मांस खाएँ?
powerful! a tour-de-force on how taxation in the colonies fuelled (three-quarters of the total) imperial treasury. immigrants from the colonies have a tax-equal stake in their nation.
by britain's leading sociologist @GKBhambra for @openDemocracy
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बाक़ी जातियों को ब्राह्मणों से सीखना चाहिए। यही जाति है जो अपने नाम में खुद ही “जी” लगा लेती है। अगर आप अपनी इज़्ज़त नहीं करेंगे तो कोई और क्यों करेगा? ब्राह्मण हिंदुओं का मार्गदर्शक है। उनसे सीखना चाहिए। हर्षवर्धन “जी” ने माली जाति के मुख्यमंत्री के नाम में “जी” नहीं लगाया।
हिंदू राष्ट्र के नाम पर @RSSorg ब्राह्मण राष्ट्र बना रहा है। ये नगर निगम बीजेपी के कंट्रोल में है। कल कहेंगे कि दिल्ली में हर आदमी सुबह एक प्लेट गोबर खाएगा क्योंकि भावनाओं का सम्मान करने के लिए ये ज़रूरी है। करना पड़ेगा। सरकार है इनकी।
मोदी जी को बधाई कि उनकी महत्वाकांक्षी योजना "प्रधानमंत्री मंहगाई योजना " का लाभ भारतवासियों को लगातार मिल रहा है और इस योजना के "लाभार्थियों" की संख्या दिनों दिन बढ़ रही हैं।
आप लगे रहिए भारत की जनता
" निंद्रार्थी " है जब तक जागेगी देश " कंगालार्थी " हो जाएगा।
बहुजन समाज को धर्म के नाम पर हजारों साल तक शिक्षा, संपत्ति, रोजगार, मूलभूत आवश्यकताओं, स्वतंत्रता पूर्वक रहने के अधिकार से वंचित करके समाजिक, आर्थिक, राजनीतिक रूप से कमजोर करके पशुओं से भी बदतर जीवन जीने के लिए मजबूर किया गया। बहुजन समाज को धर्म नहीं शिक्षा को महत्व देना चाहिए।
दुनिया भर के बौद्धों तक भारत में हो रहे इस अत्याचार की कहानी पहुँचनी चाहिए। बुद्ध की उपासना अगर सारनाथ में नहीं होगी तो कहाँ होगी? यूपी सरकार का दिमाग़ ख़राब हो गया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन को संज्ञान लेना चाहिए। @UNHumanRights@OHCHRAsia@myogiadityanath
कुछ दिन पहले सारनाथ में प्रशासन ने भिक्खुओं को पूजा नहीं करने दिया था. पुलिस ने कहा की पूजा करने के लिए परमिशन चाहिए... भंते जी ने कहा की "हम भंते हैं और हम पूजा करेंगे". और पूछा की कहां लिखा है की पूजा नहीं करना है? और वहीं धरने पर बैठ गए.
मुझे शहरों से गाँवों की ओर बड़े पैमाने पर पलायन होने के संकेत दिख रहे हैं। महंगाई का खर्च उठाने में कई लोग ख़ुद को असमर्थ पा रहे हैं। नोटबंदी और कोविड की पागलपन भरी पाबंदियों के ऊपर अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ, महँगा तेल, बेकारी, भारत से पूँजी का पलायन। संकेत बुरे हैं।
झारखंड के हमारे शहर में सबसे ज़्यादा मीट दुकानें महतो जी यानी कुर्मियों और कोयरी लोगों की है। दूसरे नंबर पर राजपूत और तीसरे नंबर पर मुसलमान दुकानदार हैं। हम लोग ज़्यादा उनसे ख़रीदते थे जो पानी कम डालता था। हमारे शहर में सबसे ज़्यादा मीट होली और दुर्गा पूजा में बिकता है।