कल मऊ जिले के विकास खंड बड़रॉव स्थित माँदी सिपाह 33/11 ��े.वी. विद्युत सबस्टेशन पर रुपये 3.44 करोड़ की लागत से 132 के.वी. विद्युत उपकेन्द्र दोहरीघाट से माँदी सिपाह घोसी तक 33 के.वी. लाइन का निर्माण कर 33/11 माँदी सिपाह सबस्टेशन को सीधे विद्युत आपूर्ति एवं 5 MVA ट्रांसफार्मर से 10 MVA की क्षमता��ृद्धि कार्य का लोकार्पण किया।
क्षेत्रवासियों को बधाई!
@narendramodi @myogiadityanath @JPNadda @AmitShah @Bhupendraupbjp @idharampalsingh @UPPCLLKO @EMofficeUP
#GoodGovernance
#PoweringUP #GreenEnergyIndia
#UPEnergyReforms #EnergyForAll
#HumaraUP #VikasExpress
बिजली दरों में बढ़ोतरी की साजिश और निजीकरण की कोशिश के खिलाफ उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में दाखिल की लोक महत्व याचिका उत्तर प्रदेश लगातार 6 वर्षों तक बिजली दर न बढ़ने वाला देश का पहला राज्य ना बन पाए इसलिए कुछ लोग ���र रहे साजिश।
विद्युत कम्पनियों के बढ़ते घाटे व संभावित निजीकरण पर उपभोक्ता परिषद की गहरी चिंता कहां घाटे के लिए केंद्र व राज्य सरकार की कुछ चुनिंदा नीतियां व योजनाएं है जिम्मेदार निजीकरण से जनता का नुकसान होगा और उद्योगपतियों का फायदा।
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के साथ पांच शहरों के निजीकरण की भी तैयारी : निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी आंदोलन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरो�� लगाया है कि पांच शहरों की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के समानांतर इन शहरों के निजीकरण की भी तैयारी चल रही है। निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि वि��ित हुआ है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों का जवाब तैयार कर लिया गया है और आरएफपी डॉक्यूमेंट के अनुमोदन के लिए ��ावर कॉरपोरेशन किसी भी समय विद्युत नियामक आयोग में जा सकता है जिससे निजीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से आगे बढ़ाई जा सके।
संघर्ष समिति ने विद्युत नियम आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार से अपील की है कि यदि पावर कारपोरेशन का निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट अनुदान के लिए आता है तो पहले तो उसे अस्वीकृत कर दिया जाए और अगर उस पर चर्चा भी की जाती है तो उसके पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष सम��ति, उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए क्योंकि निजीकरण से बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर उत्तर प्रदेश के पांच अन्य शहरों के निजीकरण की तैयारी भी अंदर-अंदर की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ शहर की ब��जली व्यवस्था का ऊर्ध्वाधर पुनर्गठन (वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग) करने के पीछे मुख्य उद्देश्य इन शहरों की बिजली व्यवस्था का निजीकरण किया जाना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल जो ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम करने में अधिक रुचि ले रहे हैं, उन्होंने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की वेबसाइट पर निजीकरण पर अपनी उपलब्धियां गिनाने के क्रम में स्वयं एक नया पॉइंट जोड़ा है जिसमें इस बात को लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ सुधार हेतु कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ की बिजली व्यवस्था की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की जा रही है। इससे बिल्कुल साफ हो जाता है कि इन शहरों के निजीकरण की साथ-साथ तैयारी चल रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में रहते हुए देश के जिन शहरों में भी बिजली व्यवस्था में सर्वाधिक सुधार किया गया उनमें से किसी भी शहर में इस प्रकार तुगलकी फरमान जारी कर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग जैसी विचित्र व्यवस्था नहीं लागू की गई। संघर्ष समिति ने उदाहरण देकर कहा बेंगलुरु, पटियाला, पुणे, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, गुड़गांव, हिसार आदि ऐसे कई शहर है जहां बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार किया गया है और यह सब सरकारी क्षेत्र में चल रही व्यवस्था के अंतर्गत ही किए गए हैं।
बिजली के निजीकरण का ��िरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में बड़ी सभाएं कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
डिस्ट्रीब्यूशन यूट��लिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा - विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण : मुंबई में होने वाली मीट के आयोजक , होस्ट और समर्थक संगठनों में निजी घरानों का प्रभुत्व: ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण में मुख्य भूमिका के चलते उप्र में कांफ्लिक्ट ऑफ इंटरे��्ट का मामला: निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बताया कि आगामी 04 एवं 05 नवम्बर को मुम्बई में हो रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा ही विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन और निजी घरानों का इस मीट में प्रभुत्व खुलकर दिखाइ दे रहा है।
डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के लिए ���ारी किए गए एजेंडा से बिल्कुल साफ हो जाता है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों के साथ मिली भगत है और निजीकरण में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सबसे प्रमुख भूमिका है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का आयोजक इंडियन स्मार्ट ग्रिड फोरम है जो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर्ड एक निजी संस्था है। इस संस्था के वेब साइट पर जाने से पता चलता है कि इसका मुख्य उद्देश्य ही निजीकरण की पहल है।
संघर्ष समिति कहा कि यह बहुत ही आपत्तिजनक बात है की उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल अध्यक्ष की हैसियत से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में लगे हुए हैं वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में आशीष गोयल की निजी घरानों के साथ मिली भगत है��� संघर्ष समिति ने कहा कि यह सीधे-सीधे कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (हितों के टकराव) का मामला है जो बहुत गम्भीर बात है ।
डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान टाटा पावर और सह मेजबान बीएसईएस राजधानी पावर और बीएसईएस यमुना पावर ��ैं जो रिलायंस पावर की विद्युत वितरण कंपनियां है। ध्यान देने योग्य बात है कि मुख्य मेजबान टाटा पावर के सीईओ कई बार ऐलान कर चुके हैं कि टाटा पावर उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को खरीदने की लिए बेताब है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ध्यान देने योग्य बात यह है कि इसी प्रकार की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई थी। इसी मीट में ऑल इंडिया डिस्कॉम एस��शिएशन का गठन किया गया था जिसमें महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सीएमडी लोकेश चंद्र को अध्यक्ष बनाया गया, उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल को महामंत्री बनाया गया और नोएडा पावर कंपनी के पी आर कुमार को कोषाध्यक्ष बनाया गया। लखनऊ में हुई मीट के कुछ दिन बाद ही पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की घोषणा कर दीगई थी।
संघर्ष समिति ने कहा डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के एजेंडा से बिल्कुल साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है और इसके बाद महाराष्ट्र में बिजली के निजीकरण की पूरी तैयारी है। ऐसे में संघर्ष समिति ने महाराष्ट्र के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे चार-पांच नवंबर को मुंबई में होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का पुरजोर विरोध करें।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 296वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रांत भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
आज मुख्यतया वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
@UPRVPAS@narendramodi@PMOIndia@myogiadityanath@myogioffice@aksharmaBharat@UPGovt निजीकरण बंद करो, व्यवस्था दो काम लो, कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद करो, जो जिस पद का कर्मचारी है उसे पद के अनुसार ही उससे काम लो सब स्टेशन की भौगोलिक स्थिति और उस पर आने वाले उपभोक्ताओं की संख्या के आधार पर मैनपावर की व���यवस्था करो बिजली विभाग में सुधार करो।
निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी : ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिविधियों पर संघर्ष समिति ने उठा��ा सवाल*
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बारे में ऑल इंडिया डिस्काम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिविधियों पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश में सवाल खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण को लेकर की जा रही कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाई जाय। संघर्ष समिति के आह��वान पर आज लगातार 268 वें दिन प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि पता चला है कि नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई विद्युत वितरण कंपनियां की बैठक में निजी घरानों के साथ मिली भगत में गठित आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में न ���ेवल रुचि ले रही है अपितु इस एसोशिएशन की आड़ में निजी घरानों का हित साधने की कोशिश भी की जा रही है जो अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण और निन्दनीय है।
संघर्ष समिति ने कहा कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन में विद्युत वितरण निगम के मौजूदा चेयरमैन और प्रबंध निदेशकों के साथ निजी घरानों के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफीसर हैं । एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल के पद पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष और भ���रत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव आलोक कुमार सेवानिवृत्त आई ए एस है। एसोशिएशन के जनरल सेक्रेटरी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के मौजूदा अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि डॉ आशीष गोयल का पॉवर कारपोरेशन का चेयरमैन रहते हुए इस प्रकार निजी घरानों के साथ एसोसिएशन बनाना सरकारी गोपनीयता का हनन है और हितों के टकराव का मामला भी है। संघर्ष समिति ने कहा कि पारदर्शिता का तकाजा है कि ऐ��ी परिस्थितियों में डॉक्टर आशीष गोयल को या तो अपने को आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से अलग कर लेना चाहिए अन्यथा स्वयं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी पता चला है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी विद्युत वितरण निगमों से करोड़ों रुपए का चंदा ले रही है। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर एक बड़े निजी घराने के सीईओ को रखा गया है। यह चर्चा है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कई करोड़ का चंदा दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि करोड़ों रुपए का चंदा लिया जा रहा है तो सरकार को यह जांच करना चाहिए कि यह संगठन किसने बनाया है, किस उद्देश्य से बनाया है, देश के विद्युत वितरण निगम किस मद में इसे चंदा दे रहे हैं और इसका ऑडिट कैग से कराया जाना चाहिए। सरकार की अनुमति के बिना इस प्रकार संगठन बनाकर करोड़ों करो��़ों रुपए का चंदा लिया जाना पूरी तरह अनैतिक और अनुचित है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी जानकारी मिल रही है कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष और भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव सेवा निवृत आई ए एस श्री आलोक कुमार उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के उच्च अधिकारियों की अनौपचारिक बैठक ले रहे हैं और उन्हें निजीकरण की प्रक्रिया तेज करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह बहुत गम्भीर बात है जिसकी जांच होनी चाहिए और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण न कर पाने से हताश और निजीकरण करने के लिए उतावले पॉवर कारपोरेशन के पूर्व और वर्तमान अधिकारी निजी घरानों के साथ मिलकर संविधानेतर कार्य कर रहे हैं ।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 268 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में प्र��ेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@UPGovt
@UPPCLLKO
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
निजीकरण से 76500 बिजली कर्मियों की नौकरी खतरे में: निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष की तैयारी : सेवा करेंगे और हक भी लेंगे - संघर्ष समिति
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया गया त�� लगभग 76500 सरकारी कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा। आज निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 267 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण रोकने के लिये निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली की बढ़ी हुई मांग को देखते हुए बिजली कर्मी आंदोलन के साथ-साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं को भी सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड कर रहे हैं । संघर्ष समिति ने कहा कि उनका नारा है - सेवा करें��े और हक भी लेंगे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 17500 और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 10500 नियमित कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त इन दोनों विद्युत वितरण निगमों में लगभग 50 हजार संविदा कर्मी काम कर रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निजीकरण क�� बाद बिजली कर्मियों को तीन विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प यह है कि वे निजी कंपनी की नौकरी स्वीकार कर लें। दूसरा विकल्प यह है कि वे अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आ जाए और तीसरा विकल्प यह है कि वे स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर घर चले जाएं। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसे बिजली कर्मी बहुत बड़ी संख्या में हैं जो निजी कंपनियों की नौकरी छोड़कर पावर कारपोरेशन में सरकारी नौकरी करने आए थे। अब कई कई साल की नौकरी के बाद उन��े यह कहना कि वे फिर निजी कंपनी में चल जाए यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है और बिजली कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
दूसरे विकल्प के रूप में यदि बिजली कर्मी अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आते हैं तो वे सरप्लस हो जाएंगे और उनकी छटनी की नौबत आ जाएगी। इतना ही नहीं तो पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से अन्य विद्युत वितरण निगमों में आने वाली बिजली कर्मी नियमानुसार वरिष्ठता ��्रम में 2025 बैच के नीचे अर्थात सबसे नीचे रखे जाएंगे। स्वाभाविक है कि सरप्लस होने पर सबसे पहले इन बिजली कर्मियों की ही छटनी होगी।
संघर्ष समिति ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2002 में निजीकरण के बाद दिल्ली के विद्युत वितरण निगमों में कुल 18097 बिजली कर्मी कार्यरत थे। निजीकरण के एक वर्ष के अंदर-अंदर निजी घरानों के उत्पीड़न से तंग आकर 8190 बिजली कर्मियों ने सेवानिवृत्ति ले ली। इस प्रकार द��ल्ली में निजीकरण के एक साल के अंदर ही अंदर-अंदर 45% बिजली कर्मी सेवानिवृत्ति लेकर घर चले गए। तब बिजली कर्मचारियों को पेंशन मिलती थी। अब पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में कार्यरत 90% बिजली कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिलती वे सेवा निवृत्ति लेकर कहां जाएंगे ?
हाल ही में 1 फरवरी 2025 को चंडीगढ़ विद्युत विभाग का निजीकरण किया गया। निजीकरण जिस दिन किया गया उसी दिन लगभग 40% बिजली कर्मी सेवा निवृत्ति लेकर घर चले। चंडीगढ़ में बिजली कर्मचारियों की यूनियन और सरकार के बीच 1 फरवरी की रात जो समझौता हुआ था आज तक उसे लिखकर नहीं दिया गया है। और निजी कंपनी यह कह रही है कि यह समझौता सरकार ने किया था हमें इससे कोई मतलब नहीं है। निजीकरण की यही भयावह कहानी अब उत्तर प्रदेश में दोहराई जा रही है जिसे बिजली कर्मी कदापि स्वीकार नहीं करेंगे।
निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 267 वें दिन आज बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन कर निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया। बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण बिजली कर्मचारियों और उनके परिवार के लिए अंधेरे का संदेश लेकर आ रहा है। बिजली कर्मियों ने कहा कि वे किसी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नह��ं करेंगे और यह संघर्ष तब तक चलता रहेगा जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता।
#stop_privatization_of_uppcl
#stop_victimization_of_uppcl_employees
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को सर्वाधिक समय प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने पर बधाई देते हुए संघर्ष समिति ने निजीकर��� का निर्णय निरस्त करने की मांग की : विधानसभा के मानसून सत्र के पहले सभी विधायकों को निजीकरण के पीछे हो रहे घोटाले से अवगत कराया जाएगा : अभद्र भाषा प्रयोग करने का ऊर्जा मंत्री का आरोप गलत:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी को सर्वाधिक समय तक लगातार प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने पर बधाई देते हुए एक ब��र पुनः उनसे अनुरोध किया है कि वे ऊर्जा विभाग की कमान खुद संभाले और निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की कृपा करें। संघर्ष समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि विधानसभा के मानसून सत्र के पहले बिजली के निजीकरण के पीछे हो रहे घोटाले से सभी विधायकों को अवगत कराया जाएगा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा मंत्री के x पर किए गए बिजली कर्मियों के विषय में ट्वीट पर टिप्पणी कर��े हुए कहा है की बिजली कर्मी कभी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करते और जिस तरह विदेश यात्रा से टोरेंट के निजीकरण को जोड़ा गया है वह पूर्णतया निराधार और भ्रम फैलाने वाला है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण घाटे के झूठे आंकड़े देकर और बिजली कर्मचारियो��� में भय का वातावरण बना कर किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि पावर कॉरपोरेशन की ऑडिटेड बैलेंस शीट सभी विधायकों को भेजी जाएगी। इस बैलेंस शीट के माध्यम से स्पष्ट किया जाएगा कि सब्सिडी की धनराशि और सरकारी विभागों के बिजली राजस्व के बकाए की धनराशि जोड़कर घाटा दिखाया जा रहा है जो निजीकरण की एक साजिश है।
संघर्ष समिति ने कहा कि जिस ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को पूर्व���ंचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का ��धार बनाया जा रहा है वह ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में नहीं है। इतना ही नहीं तो भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आज तक राज्य सरकार और राज्यों के विद्युत वितरण निगमों को न तो सर्कुलेट किया है और न ही इस पर कोई आपत्ति मांगी है। संघर्ष समिति ने सवाल उठाया कि ऐसे में लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को ड्राफ्ट स्टैंडर्ड ब��डिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार मानकर कैसे बेचा जा सकता है ? संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति भी अवैध ढंग से की गई है। ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में पहले हितों के टकराव का प्राविधान हटा दिया गया फिर मेसर्स ग्रांट थॉर्टन द्वारा झूठा शपथ पत्र देने का फर्जीवाडा सामने आने के बावजूद इसी कंपनी से निजीकरण के दस्तावेज तैयार कराये गए। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों का और रेवेन्यू पोटेंशियल का मूल्यांकन किए बिना आरएफपी डॉक्यूमेंट में एक लाख करोड रुपए की परिसंपत्तियों को बेचने की रिजर्व प्राइस मात्र 6500 करोड रुपए रख दी गई।
संघर्ष समिति निजीकरण के पीछे हो रहे इन तमाम घोटालों को अगले 15 दिन तक सम्मानित विधायकों के सामने रखेगी। संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री के x पर लिखी गई टिप्पणी पर कहा है कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी को नोटिस भेज कर 22 जुलाई को मिलने का समय मांगा था। संघर्ष समिति ऊर्जा मंत्री जी से मिलकर यह पूछना चाहती थी कि 03 दिसंबर 2022 और 19 मार्च 2023 को उनके द्वारा संघर्ष समिति के साथ किए गए समझौते का क्रियान��वयन क्यों नहीं हो रहा है ? और इस समझौते के अनुसार बिजली कर्मियों पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां आज तक क्यों नहीं वापस ली गई ? और आज भी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों किस आधार पर की जा रही है ? संघर्ष समिति ने कहा कि मौके पर पुलिस के बड़े अधिकारी भी मौजूद थे जो संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों के लगातार संपर्क में थे। पूरे घटनाक्रम का वीडियो फुटेज माननीय ऊर्जा मंत्री जी के पास होगा ही पुलिस क��� पास भी होगा। बिजली कर्मी शांतिपूर्ण ढंग से समझौतों का क्रियान्वयन न होने पर ऊर्जा मंत्री के प्रति अपना विरोध दर्ज कर रहे थे। किसी ने उनके परिवार के प्रति किसी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया। संघर्ष समिति का इतिहास रहा है कि वह सदा ही गांधीवादी ��ंग से सत्याग्रह आंदोलन करती है ।कभी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया जाता।
उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण पर छाया बड़ा संकट नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने निजीकरण के पूरे मसौदे की पत्रावली व सभी कागजात किया तलब छानबीन की शुरू पावर कारपोरेशन में मचा हड़कंप भ्रष्टाचारियों का फसना तय उपभोक्ता परिषद की लड़ाई रंग लाई।
यह पूरा मामला सरकारी धन के दुरुपयोग का है भारत सरकार से 44094 करोड़ बिजली कंपनियों को सुधारने के लिए आरडीएसएस में लेकर और सुधार के बाद बिजली कंपनियों को देश के निजी घरानों को बेचना सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग का है जिसमें नौकरशाहो का फसना तय।
उत्तर प्रदेश में निजीकरण पर आज करूंगा अब तक का सबसे बड़ा खुलासा क्यों मचा है पावर कारपोरेशन में हड़कंप सबके हाथ पांव फुले आया ऊंट पह���ड़ के नीचे थोड़ा इंतजार फिर बताएंगे पूरी कहानी।
उत्तर प्रदेश की 42 बिजली इकाइयों के निजीकरण पर CAG की सख्ती।🔥
जब सिस्टम सवालों से भाग रहा था तब श्री अवधेश वर्मा जी ने उपभोक्ता परिषद की आवाज़ बनकर पूरे प्रदेश के कर्मचारियों और उपभोक्ताओं की लड़ाई लड़ी।
नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CAG) ने अब पावर कॉर्पोरेशन से निजीकरण की पूरी पत्रावली और कागज़ात तलब किए हैं।
अब जांच होगी कि किसने किन दस्तावेज़ों पर दस्तखत किए, किसने जनहित के खिलाफ काम किया।
यह केवल एक शुरुआत है भ्रष्टाचारियों का घेरा अब तंग होगा।
निजीकरण नहीं चलेगा, जन जन की आवाज़ अब दस्तावेज़ों में दर्ज हो रही है।
आदरणीय अवधेश वर्मा साहब को सलाम है। 🙏���️ जिन्होंने यह साबित कर दिया कि जब जमीनी नेतृत्व सच्चाई से जुड़ता है, तब सत्ता भी जवाबदेह होती है। @uprvup
उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण में भ्रष्टाचार और बेरोजगारों के रोजगार के मुद्दे पर उपभोक्ता पर��षद के अध्यक्ष @uprvup से खुलकर बात हुई।
��ाफी जनपदों में घूम कर आए, हर जगह बिजली निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाई गई।
सरकार से आंख मिलाकर जनता के मुद्दे उठाने वाले अवधेश जी को आप भी सुनिए।