बसपा और सपा इस भ्रम से निकल जाओगे ब्राह्मण तुमको वोट देगा हां देगा 10% बस,
7% बसपा को 3% सपा को।
जब सपा और बसपा मजबूत होती है तब ब्राह्मण बसपा को वोट देता है ऑदरवाइज भाजपा मजबूत है तो 90% वोट उसी को जाएगा।।
महिलाओं, OBC, SC, ST को मनुस्मृति को जला देना चाहिए,
मनुस्मृति दुनिया की सबसे घटिया किताब है,
बाबा साहेब ने इसे जलाया था,
जो लोग कहते हैं कि मनुस्मृति को आजकल कौन रखता है? वो चारों शंकराचार्य की किताब चेक कर लीजिए जाकर, और देखिए कि वो मनुस्मृति को भारतीय संविधान से भी ऊपर मानते हैं, प्रेमानंद महाराज जैसे बाबा चारों शंकराचार्य का गुणगान करते नहीं थकते हैं, अंबानी की शादी शंकराचार्य करवाता है, और @ajeetbharti जैसे घोर जातिवादी लोग जातिवादियों में नैरेटिव बनाते हैं कि मनुस्मृति को आजकल कौन पड़ता है,
हिंदू धर्म बिना जाति के है ही नहीं, और उसकी जड़ में शंकराचार्य द्वारा मनुस्मृति का पालन है, जो जन्म आधारित वर्णव्यवस्था की बात करती है, न कि कर्म आधारित,
सोचिए कितने घृणित लोग होते हैं ये जातिवादी।
महिलाओं, SC, ST, OBC को सिर्फ संविधान आजादी देता है।
दुर्भाग्यपूर्ण, लेकिन ऐसा तो आतंकवाद विरोधी कानूनों में भी होता है जहां पुलिस निर्दोष लोगों को फंसा देती है, ऐसे ही हत्या के केस में भी देखने को मिल जाएगा। हर कानून का दुरुपयोग होता है, तो क्या सभी कानून हटा दिए जाएं। Misuse को रोकने के लिए पुलिस सुधार की मांग कीजिए, न कि कानून को खत्म करने की।
योगी की आरक्षण चोरी....
डालो हर जगह डाका डालो, थोड़ा तसल्ली से पढ़िएगा... विस्तार से समझाया है कि कैसे चोरी की गई है...
ये सीधे-सीधे योगी आदित्यनाथ सरकार और भाजपा द्वारा आरक्षण के साथ छेड़छाड़ का सवाल है।
मंदिर में चोरी के बाद अब आरक्षण की चोरी?
योगी प्रशासन से नियमों के फेर में बात घुमाने के बजाय सीधा सवाल है कि..
क्या UPPSC में आरक्षण की संवैधानिक भावना के साथ छेड़छाड़ की जा रही है?
Prelims केवल एक screening/entry stage है। लेकिन अगर इसी stage पर Reserved Category की cutoff, Open/UR cutoff से ऊपर रखी जाती है और UR cutoff पार करने वाला SC/ST/OBC candidate केवल अपनी category के कारण Mains में जाने से रोक दिया जाता है, तो यह गंभीर संवैधानिक सवाल है...
क्योंकि Open Category कोई “General Caste Category” नहीं है...
Open/Unreserved का अर्थ है...
OPEN TO ALL.
SC, ST और OBC candidates भी merit के आधार पर Open category में compete करते हैं...
मान लीजिए...
UR/Open Cutoff = 100
OBC Cutoff = 105
किसी OBC candidate के 103 marks हैं,
वह Open cutoff पार कर चुका है,
लेकिन उसे कहा जाता है....
“आप OBC हैं, इसलिए 103 पर Mains नहीं लिख सकते”
जबकि उससे कम marks वाला Open-category candidate Mains में चला जाता है,
तो सवाल है,
समस्या candidate की merit में है या उसकी category में?
उस candidate को अगर केवल category बदलकर UR मान लिया जाए, तो वह qualify कर जाता है।
उसकी merit वही है,
Marks वही हैं,
सिर्फ category उसके खिलाफ entry barrier बन गई,
Supreme Court ने स्पष्ट किया कि Open/Unreserved कोई caste quota नहीं है; यह merit के आधार पर सभी के लिए खुला है..
Reserved-category candidate अगर Open cutoff से ऊपर score करता है और उसने ऐसी concession नहीं ली है जो उसे open competition से बाहर करे, तो उसे Open category में consider किया जाना चाहिए...shortlisting stage Prelims पर भी।
और UP के मामले में सवाल और गंभीर है...
Allahabad High Court ने 2026 में UPPSC की उस policy पर stay दिया जिसमें meritorious reserved-category candidates को Unreserved category में adjustment केवल final selection पर देने की व्यवस्था थी,
29 May 2026 को High Court ने भी माना कि यदि Reserved Category की cutoff UR से ऊपर हो और UR cutoff से अधिक marks पाने वाला reserved candidate फिर भी Mains से बाहर हो जाए, तो Article 14 और Article 16(1) के तहत fundamental-rights का सवाल पैदा हो सकता है।
इसलिए UPPSC केवल यह कहकर नहीं बच सकता..... कि
“नियमों में ऐसा लिखा है।”
सवाल यह है.....
क्या वह नियम Articles 14 और 16 तथा Supreme Court के judgments के साथ reconcile होता है?
अगर UR सचमुच “Unreserved” है, तो Open cutoff पार करने वाले SC/ST/OBC candidate के लिए उसी Open category का दरवाजा Prelims में क्यों बंद है?
आरक्षण का उद्देश्य Reserved Candidates को Open competition से बाहर करना नहीं है...
बल्कि उनकी merit को Reserved Quota से अलग पहचानना भी उसी constitutional scheme का हिस्सा है।
सीधी सी बात है...
अगर SC/ST/OBC candidate ने Open cutoff पार कर ली है, तो उसकी category को उसके खिलाफ entry barrier बनाना merit नहीं है,
राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में भी ऐसे मामलों पर विवाद और न्यायिक हस्तक्षेप सामने आते रहे हैं, और ये इत्तेफाक नहीं है कि इन राज्यों में जब जब ऐसा किया गया है तब तब वहां भाजपा की सरकारें सत्ता में रही हैं।
यदि UPPSC और उत्तर प्रदेश सरकार इस व्यवस्था को सही मानती है, तो सार्वजनिक रूप से समझाए—
Open Category “Open to All” कैसे है, यदि Open cutoff पार करने के बाद भी SC/ST/OBC candidate को केवल उसकी category के कारण Mains में प्रवेश नहीं मिलता?
नियमों की आड़ में संविधान की मूल भावना से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
आज जब आरक्षण हटाने की मांग को लेकर आंदोलन हो रहे हैं, उसी समय Reserved Candidates के Open Merit में प्रवेश को रोकने वाली नीतियों पर सवाल उठना महज संयोग नहीं माना जा सकता।
यह संविधान, समानता और सामाजिक न्याय का सवाल है।
#reservation #UPPSC #Yogigovernment #आरक्षणचोरी
चन्द्रशेखर को समझना चाहिए कि वो सांसद है। उनमे तार्किकता व मैच्योरिटी उच्च स्तर की होनी चाहिए। काहे दो टके के लोगो से बहस करना चाह रहा है। अपने स्टेटस के अनुसार लोगो से बात करे। न कि Payout पर जीवन यापन कर रहे लोगो को बहस के लिए आमंत्रित करें। चिराग पासवान की यह बात अच्छी लगी कि आरक्षण पर कोई चर्चा नही होगीं। क्योंकि चर्चा का स्थल संसद है न कि दो टके के लोगो के साथ चर्चा करें।
1.में कई बार लिख चुका हूं कि कोई कहे कि आरक्षण खत्म करो तो जवाब ही न दे। अगर दे भी तो कह दे कर दो। अगर करवा सकते हो। इससे ज्यादा चर्चा न करे। आरक्षण केवल एससी से सम्बंधित नही है।
ओबीसी को 27% मिलता है।।
एसटी को 7.5% मिलता है।
अल्पसंख्यक को आर्टिकल 30 में संस्थान में 50% मिलता है।
इसलिए "आरक्षण" नाम आते ही स्वयं मत मैदान में मत कूदो। इन्ही हरकतों कर कारण मुँह हाथ नाभि से पैदा होने का क्लेम करने वाले;
एससी को पानी नही मिला।
एससी को गालिया दे रहे है।
जबकिं आरक्षण ओबीसी, एसटी, अल्पसंख्यक को भी मिल रहा है।।
2.आप इन लोगो से बहस में नही जीत सकते है। यह आपको कुतर्क के उस स्तर पर ले जाएंगे जँहा आप स्वयं कन्फ्यूज हो जाएंगे। यह ओशो तक ने कई बार अपनी वाणी में कही है।।ओशो ने कई बार यह कहा है कि इन लोगो का कुतर्क की वर्ण व्यवस्था "कर्म आधारित" थी अथार्त अच्छे कर्म करके शुद्र (ओबीसी) ब्राह्मण बन सकता है जबकि आज तक इतिहास में एक भी व्यक्ति का उदाहरण नही दे सके जो कि ओबीसी से कर्म आधार पर ब्राह्मण बन गया हो। एक भी ऐसा उदाहरण नह मिला कि माधुरी गुप्ता पाकिस्तान में गद्दारी करके सजा पाई और उसे कर्म के अनुसार वैश्य से अन्य वर्ण मर ट्रांसफर कर दिया गया। कभी हुआ ऐसा? नही न?
लेकिन कुतर्क है। बार बार दिया जाता है। सभी को पता है कि वर्ण व्यवस्था जन्म आधारित है।
3.सीधी बात है कि
न तो यह कहो कि हमारा शोषण हुआ इसलिए दो।
न यह कहो कि जब तक जाति है तब तक दो।
न यह कहो कि गटर में उतर कर देखो।
सीधा यह एक पैराग्राफ में कह दो की;
"भारत मे अलग अलग वर्ग है। इसलिए प्रत्येक वर्ग को संसाधनों में हिस्सेदारी/प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। हमे भी दो"
4.सबसे महत्वपूर्ण की;
"ब्राह्मण या क्षत्रिय, वैश्य या अन्य से आरक्षण पर आप काहे बहस करे। यह है कौन? आपका सीधा संवाद सरकार से है। केंद्र सरकार से है। उससे संवाद करो कि सभी को प्रतिनिधित्व दो।। हमे भी दो। आरक्षण बढाने, लागू करने के लिए केंद्र से संवाद करो। उसे टारगेट करो। माँग नही मानने पर उन्हें चुनाव में टाइट करो। लेकिन 8% से 10% वाले इन तीनो वर्गों से काहे बहस करना चाह रहे हो। किस कैपेसिटी से यह बहस होगी"
5.इसलिए चन्द्रशेखर भाई इस बहस में न पड़ो। आरक्षण पर कैंची चलाने पर सरकार को घेरों। न कि दो टके के कोई दुबे, अजित भारती जैसे बतमीजी, अनुराधा या किसी त्यागी से बहस करो। न तो इनकीं हैसियत आरक्षण देने की है। न इनकीं हैसियत आरक्षण खत्म करने की है। फिर काहे इन्हें बहस की चुनौती देकर इनकीं हैसियत बढ़ा रहे हो।।
यह सोशल मीडिया पर "Payout" के खिलाड़ी है। इन्हें ज्यादा महत्व न दो।।
विकास कुमार जाटव
@BhimArmyChief@iChiragPaswan
सवर्ण कहते हैं कि— "जब दलितों को पानी मिला ही नहीं तो जिंदा कैसे हैं?"
मतलब ये तो वही बात हो गई👇
> जंग में सारे सिपाही नहीं मरे तो जंग हुई ही नही।
> कैंसर से लोग बच गए तो कैंसर था ही नहीं।
> टाइटैनिक जहाज से लोग बच गए तो जहाज डूबा ही नहीं।
> देश अमेरिका जैसा नहीं बन पाया तो अमेरिका है ही नहीं।
> मुगलो का इतिहास खत्म कर दो तो मुगल भारत आए ही नहीं।
ये लॉजिक अश्लील किस्म के व्यक्ति "अजीत भारती" का है उसकी बौद्धिक क्षमता बहुत ही क्षुद्र है।
इतिहास में दलितों को सार्वजनिक कुएं और घड़ो से पानी पीने से रोका गया था— वो नदियों तालाबो और झीलों से पानी लाकर उपयोग करते थे।
I am a Brahmin, not an ordinary Brahmin but a genetically superior Janeu wearing Kanyakubja Brahmin - the highest sect amongst Brahmins. I have a ponytail. I'm a PURE veg, Satvik food eater. I'm so pure that I even avoid onion & garlic.
And I support caste-based reservation. ✊
आदरणीय बहन जी आप से निवेदन है की इन सब ज्वलंत मुद्दों पर बीएसपी पार्टी की तरफ़ से प्रेस कॉन्फ़्रेस करनी चाहिए और कांग्रेस सपा छोड़ बीजेपी पर निशाना साधना चाहिए चूँकि सपा कांग्रेस कई वर्षों से सरकार में नहीं है तो जनता की सहानुभूति जो सरकार में नहीं है तो परहेज करे
1. दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई माँग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुँचे।
2. वैसे भी देश में सदियों से जातिवाद की अमानवीयता का शिकार रहे एस.सी., एस.टी. व ओबीसी समाज के लोगों हेतु संविधान में की गई आरक्षण की व्यवस्था के बारे में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का यह कहना था कि ’जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है’। अतः लोग सही देशभक्ति का परिचय ज्यादा दें तो यही उचित होगा।
3. जहाँ तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है, तो केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा भी ग़रीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष ख़र्च किया जाता है, किन्तु उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है।
4. इसके अलावा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के ग़रीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है।
5. वास्तव में ख़ासकर यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी व्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से ज़मीन पर लागू ही नहीं होने दिया है, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग, आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद आज तक भी, ग़रीबी, जातिवादी द्वेष, शोषण, अत्याचार व जातिवाद के ज़हर का दंश हर दिन हर स्तर पर लगातार झेलते रहते हैं।
6. अतः सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण बिल्कुल भी ना दें तो यह व्यापक देश व जनहित में होगा। लोगों से भी अपील है कि वे आरक्षण जैसे अहम् एवं संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति ना करें और ना ही होने दें।
7. हालाँकि उसी ही दिन पार्लियामेन्ट थाना के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री राहुल गाँधी कई घन्टों तक धरने पर बैठे रहे, जिसका पार्टी को कोई ऐतराज़ नहीं है।
ऽ लेकिन उसके बग़ल में जंतर-मंतर पर दलित व शोषितों के जातीय आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण को ख़त्म करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा था, वहाँ पर वे व उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन्हें समझाने तक के लिये भी नहीं गये, जिससे इन वर्गों के प्रति इनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता अभी भी साफ झलकती है।
@Mayawati आदरणीय बहन जी आप से निवेदन है की इन सब ज्वलंत मुद्दों पर बीएसपी पार्टी की तरफ़ से प्रेस कॉन्फ़्रेस करनी चाहिए और कांग्रेस सपा छोड़ बीजेपी पर निशाना साधना चाहिए चूँकि सपा कांग्रेस कई वर्षों से सरकार में नहीं है तो जनता की सहानुभूति जो सरकार में नहीं है तो परहेज करे
Nationalist?
- Going against the Constitution.
- Demanding a separate state.
- Mocking Dalits.
- Promoting a superiority complex.
- Opposing affirmative action.
That’s not nationalism. You guys are anti- national in the truest sense.
@SujeetKanauji16@Neeraj_Bhawanii भाईसाहब आप अपना समय व्यर्थ कर रहे है सपा को समर्थन दे कर सपा में कोई बदलाव नहीं है सपा और भाजपा में कोई अंतर नहीं ये लिख कर रख लीजिए सपा बहुत ही जातिवादी पार्टी है ग़ैर यादव और दलितों से ये नफ़रत करते है यादव समुदाय का 50% वोट तो बीजेपी को जाता है इनको बस दरी बिछाने वाला चाहिए ।
बेचारे आरक्षण हटाओ आंदोलन चला रहे थे,
दिल्ली पुलिस ने इन्हें ही घसीटकर हटा दिया। 🤣🤣
प्रधान जी तो अपना भाषण और मीडिया बाइट की हवाबाजी करके पहले ही निकल लिए। अब क्रांति कौन लाएगा बे?
माता सावित्रीबाई फुले जब लड़कियों को पढ़ाने निकलती थीं, तो उनके ऊपर ईंट-पत्थर और गोबर फेंका जाता था।
आज राजस्थान में स्कूल सुधार की बात करने पहुंचे सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका पर हमला हुआ।
इन्हीं के पूर्वज थे जो पहले गोबर और कीचड़ फेंकते थे,
पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन शिक्षा-विरोधी मानसिकता अब भी जिंदा है।
सावित्रीबाई की लड़ाई आज भी जारी है।
देखिए इस ब्रेनवॉश महिला को इसके ख़ुद कि बच्चे नहीं पढ़ते है इस स्कूल में और क्या बोल रही है यह पक्का भाजपा समर्थक होगीं अगर बुलवाना ही था तो स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों कि माता पिता से बुलवाते