पुरानी आईडी @Gulamdesh_av1 किसी ने बंद करबा दी है
MCA&MSc NET Qualified
Teacher
Patriotic
Dream LBSNAA🚔
#UPSC
Expert-PSIR
जय जवान जय किसान🚜
Advocate ⚖️📚
Better late than never. Shri Dharmendra Pradhan has submitted his resignation. I hope that the Prime Minister will also take an immediate and timely decision. I appreciate and congratulate all the students for their peaceful conclusion to the movement. I hope that now peace will soon be established in the world of Indian education and that the young people will have ample opportunities for their bright future and progress.
देर आये दुरुस्त आये। श्री धर्मेंद्र प्रधान ने त्यागपत्र दे दिया है। आशा करता हूं कि प्रधानमंत्री जी भी इस पर शीघ्र ही समयोचित निर्णय लेंगे। उन सभी छात्रों को बधाई देता हूं कि उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्वक समाप्त कर दिया। मैं आशा करता हूँ कि अब भारतीय शिक्षा जगत में शीघ्र शांति स्थापित हो जाएगी और छात्रों को अपने उज्जवल भविष्य तथा प्रगति के लिए व्यापक अवसर प्राप्त होंगे।
Gzb.....
चाइनीज़ दLAल , CIA के स्पाई, डीप स्टेट के एजेंट और भारत को तोड़ने की साज़िश करने वाले को सूप पिलाता एक राष्ट्रवादी-हिंदूवादी पार्टी का शेर:
#Gen-Z #proteste
While @DelhiPolice has a reputation of behaving abrasively with citizens - they used to maintain decorum atleast with lawyers.
They knew that the lawyer fraternity could shut the system down if one of them was assaulted or manhandled.
Has that last pillar of unity also fallen?
नरिंदर का ट्वीट भी तब आया जब एक बच्चे की जान चली गई। ये अमीरों की उंगली पर चोट लगने पर भी ट्वीट कर दिया करता था। लेकिन कभी मणिपुर पर एक शब्द नहीं बोल सका। सोनम वांगचुक और देश के भविष्य बच्चों से माफी नहीं मांग सका ।
धिक्कार है ऐसे सत्ता के लालची पर।
अगले कुछ घंटों में कुछ भी हो सकता है, क्योंकि किसान आंदोलन करने दिल्ली की ओर बढ़ रहे है और जंतर मंतर पर फिरसे स्टूडेंट इक्ट्ठा हो रहे है।
आंदोलन को खत्म करने के लिए terror level की प्लानिंग की जा रही है।
#CJPProtestUpdate
हर तानाशाही का अंत हुआ है इतिहास गवाह है किसी में कम वक्त लगा किसी में ज्यादा।
"भूख हड़ताल राजाओं के खिलाफ काम करती थी, ये कलयुग के तानाशाह हैं, यहां लाठी काम करेगी "
~~राकेश टिकैत
इतने दिनों तक सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और शिक्षा व्यवस्था व पेपर लीक को लेकर, खासकर सोशल मीडिया पर बने माहौल के कारण अधिकांश नौजवान छात्र प्रदर्शन में पहुंचे थे। वे ऑर्गेनिक तरीके से आए थे।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का केवल एक छोटा-सा हिस्सा ही चंद्रशेखर रावण की पार्टी, आम आदमी पार्टी और वामपंथी संगठनों द्वारा मोबिलाइज़ किया गया था। आंदोलन मूलतः स्वतःस्फूर्त था।
CJP के दो-तीन कथित नेतृत्वकर्ता जे.पी. नड्डा को ज्ञापन देने के नाम पर प्रोटेस्ट और मार्च छोड़कर चले गए।
प्रोटेस्ट लगभग नेतृत्वविहीन हो गया था, लेकिन उसके बाद भी युवाओं में खूब जोश था।
बड़ी संख्या में Gen Z युवा पहली बार किसी प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। वे रचनात्मक तरीके से विरोध दर्ज करा रहे थे।
"बांग्लादेश बना देंगे ,नेपाल बना देंगे" जैसे नारे लगाने वाले दो-चार लोग रहे होंगे। उसके आधार पर पूरे आंदोलन को उसी नज़र से देखना या वैसा ठप्पा लगा देना उचित नहीं है।
भीड़ द्वारा पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं आंदोलन के बिल्कुल अंत में हुईं। उससे पहले पुलिस लगातार लाठीचार्ज करती रही और आंसू गैस के गोले छोड़ती रही।