साथियो, मैं दो दिन से आपके बीच में इसलिए नहीं आ पाया कि मेरी पत्नि को सर्प ने काट लिया था. तत्काल अस्पताल ले गया और आज सकुशल घर पर वापस ले आया हूँ. अब चिंता की कोई बात नहीं है. यह तो प्रकृति पर आधारित है. इसलिए सभी सम्मानित साथियों को सादर जय भीम.
1. देश में वन्दे मातरम् गायन को पूरा गाना है या शुरू के दो छंद (पैरा) गाना है या नहीं गाना है, इसको लेकर जो इस समय में देश में राजनीति चल रही है, यह ठीक नहीं है और इस मामले में हमारी पार्टी का यही कहना है कि वन्दे मातरम् गायन को लेकर अभी हाल ही में संसद में जो क़ानून पास किया गया है यह कोई पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है।
2. क्योंकि केन्द्र व राज्यों में भी सत्ता परिवर्तन के दौरान् सभी पार्टियाँ अपने राजनैतिक स्वार्थ/फ़ायदे के हिसाब से या फिर अपनी कमियों पर से जनता का ध्यान बाँटने के लिए यह सब करती रहती हैं अर्थात् एक-दूसरे के बने क़ानूनों को बदलती रहती हैं।
3. जबकि इस समय देश व जनहित के मुद्दों पर व ख़ासकर बेरोज़गार युवाओं व छात्र-छात्राओं ’जेन-जी’ व स्कूली बच्चे-बच्चियों की ’जी-अल्फा’ एवं इस समय देश के कुछ भागों में भयंकर आई बाढ़ से हो रही जान-माल की हानि आदि के अनेकों और भी अति-महत्वपूर्ण मुद्दों पर केन्द्र व सभी राज्य सरकारों को तथा साथ ही सभी राजनैतिक पार्टियों को भी सही से समुचित ध्यान देना चाहिये, यही वर्तमान में देश व जनहित में समय की सबसे ज़रूरी माँग भी है।
पाँच बातों का विशेष ध्यान रखिए
1. किसी भी समुदाय के विरुद्ध अनावश्यक टिप्पणी करने से बचिए। आंबेडकरवाद किसी एक जाति या समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि समानता, न्याय, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन तथा सभी के उत्थान की विचारधारा है।
2. BSP को किसी एक जाति की पार्टी के रूप में प्रस्तुत न होने दें। यह बहुजन समाज की व्यापक राजनीतिक शक्ति है। इसका उद्देश्य समाज के सभी वंचित, शोषित और उपेक्षित वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सामाजिक समता, आर्थिक स्वतंत्रता और समग्र सामाजिक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ाना है।
3. धार्मिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप या टिप्पणी से बचिए। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर धार्मिक मुद्दे को उछालकर BSP को राजनीतिक नुकसान पहुँचाने का प्रयास करे, तो तथ्यों और तर्क के साथ दृढ़ता से जवाब दीजिए। लेकिन प्रतिक्रिया देने से पहले यह जरूर देखिए कि आप जिसे जवाब दे रहे हैं, वह किसी बड़े राजनीतिक दल का वरिष्ठ या महत्वपूर्ण नेता है या नहीं। यदि वह ऐसा व्यक्ति नहीं है, तो उसे नज़रअंदाज़ करना ही बेहतर है।
4. किसी एक जाति या समुदाय के समर्थन से कोई भी राजनीतिक दल चुनाव नहीं जीत सकता। चुनाव में व्यापक सामाजिक आधार और विभिन्न वर्गों का समर्थन आवश्यक होता है। इसलिए संगठन का विस्तार कीजिए और समाज के हर वर्ग तक पहुँचिए।
5. चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी और अमित शाह के राजनीतिक बयानों पर कड़ी नजर रखिए। उनके बयानों का तथ्यात्मक और राजनीतिक विश्लेषण कीजिए और जहाँ आवश्यक हो, तथ्यों के आधार पर प्रभावी राजनीतिक जवाब दीजिए।
1. जेन-अल्फा अर्थात् सन् 2013 के बाद जन्मे बच्चे-बच्चियों में भी ख़ासकर अपने थोड़े ’अच्छे दिन’ की उम्मीद लगाये स्कूली छात्र-छात्रायें व उनके माता-पिता भी सुखी भविष्य हेतु अच्छी शिक्षा को लेकर हमेशा चिन्तित ही नहीं बल्कि उसके लिये लगातार काफी जद्दोजहद भी करते रहे हैं, किन्तु देश भर में व विशेषकर यूपी एवं उत्तर भारत के राज्यों के स्कूलों के बदतर हालत की कड़वी ज़मीनी हक़ीक़त के कारण वे लोग अति-मुखर होे गये हैं।
2. वे लोग जेन-जी अर्थात् कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के देशव्यापी ’स्कूल ठीक करो’ अभियान में काफी बढ़चढ़ कर व पूरे उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं।
3. किन्तु यह बड़े दुख और चिन्ता की बात है कि जिन मासूम बच्चे-बच्चियों के हंसने-खेलने व पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें अपनी प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा हेतु बुनियादी सुविधाओं के लिये भी सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
4. वैसे परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’शिक्षित बनो’ आह्वान के कारण शिक्षा में भी ख़ासकर स्कूली शिक्षा ’बहुजन समाज’ के लोगों के लिये हमेशा विशेष चिन्ता की बात रही है, और इसी के तहत् हमारी पार्टी बी.एस.पी. ने इन दबे-कुचले व शोषित-पीड़ित समाज के लोगों की, जिनकी केन्द्र व राज्य में रही सरकारें लगातार उपेक्षा करती रहीं हैं, उनके हित व कल्याण एवं शिक्षा आदि के लिये यूपी में मेरे नेतृत्व में बी.एस.पी. की सभी चारों रही सरकारों में पूरा-पूरा ध्यान दिया गया, ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित मानवतावादी एवं कल्याणकारी भारतीय संविधान के हिसाब से उन सभी परिवार वालों को रोटी-रोजी व शिक्षा-युक्त आत्म-सम्मान का समतामूलक जीवन नसीब हो सके।
5. किन्तु यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि सरकारी स्कूल की व्यवस्था को बेहतर बनाने की तरफ समुचित ध्यान देने के बजाय सभी सरकारों ने ज़्यादातर इसकी घोर अनदेखी ही की है तथा इस पूरी शिक्षा व्यवस्था को एक प्रकार से, इन वर्गों के आरक्षण की तरह ही, काफी हद तक निष्क्रिय बनाने का कुचक्र चलाया हुआ है और इस प्रक्रिया में हज़ारों सरकारी स्कूल बंद भी किये जा रहे हैं, जिसका भी विरोध बी.एस.पी. ने लगातार किया है और अब स्कूलों के भवन, शिक्षक, पेयजल, शौचालय व साफ-सफाई आदि जैसी बुनियादी ज़रूरतों की अत्यन्त कमी को लेकर नन्हें जेन-अल्फा स्वंय अति-मुखर होने के साथ-साथ अब आन्दोलित भी हैं।
6. अतः यूपी सहित अन्य राज्यों की भी सभी सरकारें जेन-अल्फा के मासूम बच्चे-बच्चियों की बेहतर शिक्षा व्यवस्था सम्बंधी उनकी ज़रूरतों/माँगों पर पूरी सहानुभूति के साथ सही नीयत व नीति से तत्काल ध्यान देना प्रारंभ करें और उनके विरुद्ध कोई भी सरकार बल का प्रयोग करने से पूरी तरह से बचें तो यह उचित होगा।
बहुजन संतों, महापुरुषों के सम्मान में,
BSP उतरी मैदान में।
बसपा सुप्रीमो बहन कुमारी मायावती जी के निर्देश पर पंजाब इकाई द्वारा संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज जी के सम्मान में पंजाब में यात्रा निकाल रही हैं और इस यात्रा के माध्यम से पूरे प्रदेश भर में गुरु रविदास जी के द्वारा बताए मार्ग और उनके समानता के भाव भरे संदेश को जन जन तक पहुँचाने का काम किया जा रहा हैं।
अन्य पार्टियां बहुजन महापुरुषों को सिर्फ़ राजनीतिक लाभ लेने तक सीमित रखती है लेकिन बहुजन समाज पार्टी का उद्देश्य समस्त महापुरुषों के विचारों को, उनके बताए मार्ग को धरातल पर उतरकर लोगों तक पहुँचा उन्हें असली सम्मान देने का काम करती हैं।
#JayantChaudhary#RLD#Samajwadi
1979 में तत्कालीन CM राम नरेश यादव की सरकार गिराने के लिए किसी यादव चेहरे की तलाश थी,
तब छोटे कद होने के कारण मुलायम जी स्वीकृति नेता नहीं बन पा रहे थे, तब चौधरी चरण सिंह जी द्वारा मुलायम सिंह यादव जी को छोटा नेपोलियन बोल तब उनकी राजनैतिक स्वीकृति मिली !
अब उनका पुत्र उस पार्टी को चवन्नी का रुपया बनाने की बात कर रहे है,
जिन्हें समाजवादी धेले को सिक्का बनाया !
राहुल गांधी और अखिलेश जी को अपना इतिहास छोड़ कर सबका इतिहास पता है !
अहसान गिनवाने की बात होती जयंत चौधरी जी को पटखनी देने जैसे जवाब से अच्छा अपने अहसान गिनवा अखिलेश यादव जी को धेले से सिक्के की गाथा सुनानी चाहिए,
चाहे तो मेरे से संपर्क कर सकते है मुझे दोनों पार्टियों अमूमन इतिहास ज्ञात है, नमस्ते !!
#Baba_Manish
एक नेता की सिक्योरिटी के लिए 40 गनमैन तो दे सकते हैं, लेकिन 40 बच्चों के लिए एक अध्यापक नहीं दे सकते. फिर भी भारत को विश्व गुरु बनाने की बात करते हैं. गजब का तमाशा बना रखा है.
देखो भाई, सीधी सी बात है...
आरक्षण से मिले अवसरों के ज़रिए जब SC, ST, OBC के लोग विश्वविद्यालयों, दफ्तरों और अन्य संस्थाओं में प्रवेश करते हैं, तो वे संस्थाएँ और ज़्यादा संवेदनशील होती हैं।
समावेशी तरक्की कमज़ोरी नहीं, बल्कि देश की ताकत है।
पंजाब में BSP के तत्वाधान में गुरु रविदास सम्मान यात्रा जारी है. गुरु रविदास सम्मान यात्रा 10अगस्त को दिल्ली के तुगलकाबाद से शुरू होकर पंजाब के कसबों गाँव में लोगों के बीच जाकर यह संकल्प दिलाया जा रहा है कि इस बार पंजाब BSP की सरकार बनाकर पंजाब को बेगमपुर बनाएंगे.गुरु जी की जय
बसपा का अंबेडकरवादी मिशन सिर्फ समर्पण भाव से चलता है. आप सभी सम्मानित साथियों को पता है कि मैं इस वक्त किस स्थिति से गुजर रहा हूँ. दुखी हूँ, बेचैन भी हूँ और आर्थिक स्थिति से अति निम्न स्तर पर भी हूँ. इसके बावजूद मेरी कलम की धार में कोई कमी नहीं है, और न मरते दम तक रहेगी. बाकी सब कुछ पार्टी हित में सीक्रेट है. इसलिए समस्त अंबेडकर वादियों से उम्मीद करता हूँ कि विषम परिस्थितियों में भी बसपा का यह मिशन कमजोर नहीं होना चाहिए. अन्यथा यह उदासीनता हमारी आने वाली पीढ़ियों को भारी कष्टदायी होगी.
जय भीम - जय भारत
80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम केवल आज़ादी का उत्सव न मनाएँ, बल्कि एक मजबूत संकल्प भी लें, संविधान को मजबूत करेंगे, हर गरीब, शोषित, वंचित एवं कमजोर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करेंगे और लोकतंत्र को दो दलों की जागीर नहीं बनने देंगे।
भारत का भविष्य हमारे युवाओं के हाथों में है। इसलिए हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, कि हर युवा को शिक्षा, समान अवसर, कौशल और अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का अधिकार मिले।
जय भीम, जय भारत
1. जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों एवं सिद्धान्त पर चलने वाली विशिष्ट पहचान वाली पार्टी है, जो किसी भी समाज के व्यक्ति विशेष से ज़्यादा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पवित्र संविधान की सच्ची मंशा के मुताबिक़, सर्वसमाज के हित व कल्याण के लिये समर्पित है और इसीलिये पार्टी में नेताओं की नहीं बल्कि पूरे तन, मन, धन से समर्पित अम्बेडकरवादी कार्यकर्ताओं की ही फौज हर स्तर पर अधिकतर सक्रिय है। यही मान्यवर श्री कांशीराम जी द्वारा पार्टी व मूवमेन्ट के हित में स्थापित परम्परा भी है।
2. इसीलिये ब्राह्मण समाज व अन्य सभी समाज के जो भी लोग अभी तक पार्टी से निकाले गये हैं या निकाले जा रहे हैं या वे अपने निजी स्वार्थ में दूसरी पार्टियों में चले गये हैं या फिर वे अपने ग़लत कारनामों की वजह से उनसे बचने के लिये ख़ासकर सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो गये हैं, तो उनका पार्टी के प्रति समर्पण भाव लोगों की निगाह में भी उनके कार्यों के ऑकलन के आधार पर काफी सशंकित व निराशाजनक बना रहा है, क्योंकि ख़ासकर बी.एस.पी. सरकार के दौरान भी ऐसे लोगों ने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ के लिए ही पार्टी से फायदा ज़्यादा उठाया है और अपने समाज व पार्टी के हित के लिए वे लोग अधिकतर निष्क्रिय व उदासीन ही बने रहे हैं।
3. इतना ही नहीं बल्कि इन्हीं सब कारणों से उन लोगों ने अपनेे समाज को भी सही से बी.एस.पी. में नहीं जोड़ा है, जो कि पार्टी की अपेक्षा के विरुद्ध इनका यह सब कृत्य होने की वजह से पिछले कई लोकसभा व विधानसभा आमचुनावों में पार्टी को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है।
4. किन्तु उसके बाद से पार्टी में लम्बे अरसे से ईमानदार व हर मामले में पार्टी के प्रति लगातार समर्पित एवं निष्ठावान चले आ रहे पार्टी के वरिष्ठ लोगों द्वारा आएदिन नये कर्मठ व ईमानदार लोगों व ख़ासकर युवाओं को पार्टी की नर्सरी में तैयार किया जाता रहा है, जो यह अभियान पूरी तरह से जारी है।
5. और अब वे लोग काफी हद तक पार्टी की अपेक्षा के अनुसार जी-जान से लगातार लगे हुये हैं। पार्टी को पूरी उम्मीद है कि ये सभी नये व पुराने लोग हर मामले में ज़्यादा बेहतर, साफ-सुथरे व मिशनरी मानसिकता के बनकर उभरेंगे और वे सच्चे अम्बेडकरवादी एवं संविधानवादी संघर्ष के भरपूर तौर पर काम आयेंगे।
6. इसके साथ ही, पार्टी ख़ासकर ब्राह्मण समाज को यह भी विश्वास दिलाना चाहती है कि वे अपनी पूरी मज़बूती के साथ पार्टी से जुड़े रहें और उन्हें हर चुनाव में उनकी तैयारी के आधार पर उनकी भागीदारी यानी चुनावी उम्मीदवार बनाने तथा सरकार बनने पर सन 2007 की तरह ही इनको व अन्य सभी समाज को भी पूरा-पूरा उचित मान-सम्मान ज़रूर दिया जाता रहेगा। और सर्वसमाज आधारित ऐसी अपनी बी.एस.पी. पार्टी को ज़मीनी स्तर पर तैयार करने के मामले में अब विशेषकर दलित समाज को ही अपनी अह्म भूमिका निभानी है। वैसे बी.एस.पी. की नर्सरी, सर्वसमाज के हसीन गुलदस्तों से ही, अधिकतर हरी-भरी व सजी रहती है
मैं पार्टी से जुड़े हुए 24 सितंबर को 27 साल हो जाएंगे। इसलिए बता रहा हूँ कि BSP एक मिशनरी पार्टी है, एक विचारधारा अंबेडकरवाद, एक पार्टी BSP, एक नेता कांशीराम साहब के बाद बहन मायावती जी, और करोड़ों समर्पित कार्यकर्ताओं की पार्टी है। इसमें जात-पात, धर्म, भाषा और प्रदेश को कोई महत्व नहीं है। समतामूलक समाज बनाकर लोक कल्याण और लोक कल्याण से देश कल्याण पार्टी के लिए अंतिम सत्य है, और इससे बढ़कर BSP के लिए कोई दूसरी प्राथमिकता नहीं है।
1. उत्तराखण्ड स्टेट के हल्द्वानी में अभी हाल ही में, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के हुये प्रोग्राम के बाद उनके मंच का दलित होने की वजह से शुद्धीकरण किया गया है। यह जानकारी कल संसद के ज़रिये भी देश को मिली है। यह मामला अति-निन्दनीय व चिन्तनीय है तथा वहाँ कि सरकार बिना कोई देरी किये हुये ऐसे जातिवादी एवं सामन्ती तत्वों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनों के तहत् उचित कार्रवाई करके उन्हें जेल भेजे।
2. साथ ही, इस घटना आदि के सम्बंध में आर.एस.एस. के मुखिया को भी संज्ञान लेकर ज़रुर गंभीरता से सोचना चाहिये जो कि दलितों के आर्थिक तौर पर थोड़ा मज़बूत हुये लोगों को आरक्षण से वंचित करने की बात कर रहें हैं।
3. इसके इलावा, अभी हाल ही में महाराष्ट्र के नान्देड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख श्री सुखबीर सिंह बादल पर किये गये हमले की घटना भी अति-दुःखद व चिन्तनीय है। केन्द्र व महाराष्ट्र की सरकार इस घटना को पूरी गम्भीरता से लेते हुये दोषियों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करे।
#Bsp #india
उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे श्री अनन्त कुमार मिश्रा उर्फ अन्टू मिश्रा को उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों आदि के फलस्वरूप आज तत्काल प्रभाव से उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
वैसे भी अब जबकि ख़ासकर उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल काफी गरमाया हुआ है, पार्टी के सभी स्तर के लोगों को विरोधियों के सभी प्रकार के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों से सावधान रहते हुये अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ बी.एस.पी. के अम्बेडकरवादी मिशन को आगामी विधानसभा आमचुनाव में सफल बनाने में पूरे जी-जान से लगे रहना है, यही संदेश व अपील भी है।