संसाधनों पर पहला हक़ किसका था वीडियो जरूर सुनें और रीट्वीट करें
क्या आपको पता है कांग्रेस सरकार आज जो कह रही है की आपकी सम्पत्ति का बटवारा किया जाएगा वह सिर्फ कह नही रही अपने शासनकाल में उन्होंने ऐसा किया है
एक बार जरूर सुने Pil Man Of India, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता @AshwiniUpadhyay जी को।
अपने नौजवान पुत्र का भविष्य संवारने और सुनिश्चत करने में जी-जान से लगे पूर्व मुख्यमंत्री जी ने काश प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य की भी चिंता की होती। प्रदेश में पेपर लीक का मुद्दा हावी है और विधानसभा चुनावों में इसी मुद्दे पर हमें युवाओं की बड़ी भारी नाराज़गी झेलनी पड़ी थी। रीट पेपर लीक मामले में भी युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ हुआ... रीट पेपर लीक मामले में जब दबाव बढ़ा तो एक्शन की बात करते हुए मीडिया मैनेज करने के लिए कहा गया...
आपस में चर्चा हुई कि जारोली 'अपना ही आदमी है बेचारा, अपन ने ही तो बनाया है'
उसके ऊपर कार्रवाई को लेकर कौनसा शब्द प्रयोग में लिया जाए इसे लेकर बड़ी पशोपेश थी। आखिर में बड़े भारी मन से चेयरमैन के लिए बर्खास्तगी शब्द का उपयोग लिया गया। उधर जारोली ने कहा कि पेपर लीक राजनीतिक संरक्षण में हुआ।
मिलीभगत ही थी कि प्रदेश के युवाओं की उम्मीदें धराशायी हो गई। बड़ा मामला था लेकिन अपना आदमी है के चक्कर में सबकुछ दबा दिया।
जिनके साथ धोखा हुआ उन युवाओं के भविष्य को संवारने और सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी कौन लेगा...??
सोचिये क्या ये संयोग है ?
1- संजय गांधी मरे आकाश में तिथि थी #गोपाष्टमी
2- इन्दिरा गाँधी मरी आवास में तिथि थी #गोपाष्टमी
3- राजीव गाँधी मरे मद्रास में तिथि थी #गोपाष्टमी
आपको याद होगा की इंदिरा गाँधी, करपात्री जी महाराज के पास आशीर्वाद लेने गई तब करपात्री जी ने कहा आशीर्वाद तो दूँगा लेकिन सरकार बनते ही पहले गौ हत्या के विरुद्ध कानून बना कर गौ हत्या बंद करनी होगी।
इंदिरा ने हामी भरी, दो महीने बाद करपात्री जी इंदिरा से मिले, उनका वादा याद दिला कर गौ हत्या के विरुद्द कानून बनाने के लिए कहा तो इंदिरा जी ने कहा कि महाराज जी अभी तो मैं नई हूँ, कुछ समय दीजिए। कुछ समय बाद करपात्री जी फिर गए और कानून की मांग की लेकिन इंदिरा ने फिर टाल दिया।
कई बार मिलने वादा याद दिलाने के बाद भी जब इंदिरा ने गौ हत्या बंद नहीं की, कानून नहीं बनाया तो 7 नवम्बर 1966, उस दिन कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, देश का संत समाज, शंकराचार्य, अपने छत्र आदि छोड़ पैदल ही, आम जनता के साथ, गायों को आगे कर संसद कूच किया।करपात्री जी के नेतृत्व में जगन्नाथपुरी, ज्योतिष पीठ व द्वारका पीठ के शंकराचार्य, वल्लभ संप्रदाय के सातों पीठों के पीठाधिपति, रामानुज संप्रदाय, मध्व संप्रदाय, रामानंदाचार्य, आर्य समाज, नाथ संप्रदाय, जैन, बौद्ध व सिख समाज, निहंग व हजारों की संख्या में नागा साधुओं को पंडित लक्ष्मीनारायण जी चंदन तिलक लगाकर विदा कर रहे थे।
लालकिला मैदान से आरंभ होकर चावड़ी बाजार होते हुए पटेल चौक से संसद भवन पहुंचने विशाल जुलूस ने पैदल चलना आरंभ किया। रास्ते में घरों से लोग फूल वर्षा रहे थे।
हिंदू समाज के लिए ऐतिहासिक दिन था, सभी शंकराचार्य और पीठाधिपति पैदल चलते हुए संसद भवन के पास मंच पर समान कतार में बैठे।
उसके बाद से आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ। नई दिल्ली का पूरा इलाका लोगों की भीड़ से भरा था। संसद गेट से लेकर चांदनी चौक तक सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे। कम से कम 10 लाख लोगों की भीड़ जुटी थी, जिसमें 10 से 20 हजार तो केवल महिलाएं ही शामिल थीं। जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक के लोग गौ हत्या बंद कराने के लिए कानून बनाने की मांग लेकर संसद के समक्ष जुटे थे। उस वक्त इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थी और गुलजारी लाल नंदा गृहमंत्री थे।
इस सिंहनाद को देख कर इंदिरा ने सत्ता के मद में चूर होकर संतों, साधुओं, गायों और जनता पर अंधाधुंध गोलियों की बारिश करवा दी, हजारों गाय, साधु, संत और आमजन मारे गए। गौ रक्षा महाभियान समिति के तत्कालीन मंत्रियों में से एक और पूरी घटना के गवाह, प्रसिद्ध इतिहासकार एवं लेखक आचार्य सोहनलाल रामरंग के अनुसार इस गोलीबारी में कम से कम 10 हजार से अधिक मार दिये गये।
इंदिरा ने ढकने के लिए ट्रक बुलाकर मृत, घायल, जिंदा सभी को उसमें ठूंसा जाने लगा। जिन घायलों के बचने की संभावना थी, उनकी भी ट्रक में लाशों के नीचे दबकर मौत हो गई। आखिरी समय तक पता ही नहीं चला कि सरकार ने उन लाशों को कहां ले जाकर फूंक डाला या जमीन में दबा डाला। पूरे शहर में कर्फ्यू लागू कर दिया।
तब करपात्री जी महाराज ने मरी हुई गायों के गले से लिपट कर रोते हुए कहा था कि *"हम तो साधु हैं, किसी का बुरा नहीं करते लेकिन तूने माता समान निरपराध गायों को मारा है, जा इसका फल तुझे भुगतना पड़ेगा,*
मैं श्राप देता हूँ कि एक दिन तेरी देह भी इसी प्रकार गोलियों से छलनी होगी और तेरे कुल और दल का विनाश करने के लिए हिमालय से एक ऐसा तपस्वी आएगा जो तेरे दल और कुल का नाश करेगा"।
जिस प्रकार करपात्री जी महाराज का आशीर्वाद सदा सफल ही होता था उसी प्रकार उनका श्राप भी फलीभूत होता था।
इस घटना की चर्चा गावँ गावँ में बच्चे बच्चे की जुबान पर थी और सभी इंदिरा को गालियां, बददुआएं दे रहे थे कि "हत्यारी ने गायों को मरवा दिया इसका भला नहीं होगा, भगवान करे ये भी इसी प्रकार मरे। भगवान इसका दंड जरूर देंगे"।
अब इसे संयोग कहेंगे या करपात्री जी महाराज का श्राप कि इंदिरा का शरीर ठीक *गोपाष्टमी* के दिन उसी प्रकार गोलियों से छलनी हुआ जैसे करपात्री जी महाराज ने श्राप दिया था
और अब नरेंद्र दामोदर मोदी के रूप में वह तपस्वी भी मौजूद है जो कांग्रेस का विनाश कर रहा है, जिसका खुला आव्हान है
"कांग्रेस मुक्त भारत"
सोचिये क्या ये संयोग है ?
1- संजय गांधी मरे आकाश में तिथि थी *गोपाष्टमी ,
2- इन्दिरा गाँधी मरी आवास में तिथि थी *गोपाष्टमी,
3- राजीव गाँधी मरे मद्रास में तिथि थी *गोपाष्टमी
साधु संतों का श्राप व गौमाता की करुण पीड़ा ने इंदिरा को मारा।
कौन सलाह दे रहा है और कौन पैरवी कर रहा है खुलासा होना चाहिए पता तो लगे प्रदेश में कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाने की तैयारी के पीछे कौन लोग हैं। जो लोग चुनाव नहीं लड़ना चाहते उन्हें टिकट दिए गए.. प्रदेश के राजनैतिक इतिहास में कांग्रेस को ब्राह्मण प्रतिनिधित्व विहीन कर दिया...
गलती केंद्रीय नेतृत्व और आलाकमान की नहीं है क्यूंकि ज़मीनी हक़ीकत बताए बिना और सही तथ्यों के बिना स्थानीय नेता जो ब्रीफ़ करते हैं उसके अनुरूप ही फैसले लिए जाते होंगे.. 2023 के विधानसभा चुनाव इसका जीता-जागता उदाहरण हैं कि स्थानीय नेता ने अपनी हठधर्मिता के चलते आलाकमान को मुग़ालते में रखा और जीत की गारंटी लेते हुए सबकुछ जानते-बूझते भी टिकट रिपीट करवाए। हमारे प्रभारी जी ने तो यहां तक कहा कि हम टिकट बदलना चाहते थे लेकिन हमारी चली नहीं.. और परिणाम सबने देखा...
आज जो स्थितियां बन रही हैं कि घोषित प्रत्याशी मना कर रहे हैं हमें चुनाव नहीं लड़ना और जो कुछ पिछले 3-4 दिन से घटित हो रहा है उसके ज़िम्मेदारों का पता लगना चाहिए। प्रदेश में कांग्रेस की मज़बूती और आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए यह अतिआवश्यक है।
#LokSabhaElection2024 #Rajasthan
@_lokeshsharma में कुर्सी को छोड़ना चाहता हूं पर ये कुर्सी मेरे को नही छोड़ रही हैं मेने तो इस्तीफा कभी का आलाकमान को शोप रखा है।जो इंसान पार्टी से ज्यादा पद और पुत्र मोह में हो उसको जनता और पार्टी की परवाह नहीं है। धृतराष्ट्र भी अपने दुर्योधन के चक्कर में हस्तिनापुर का विनाश किया था।
कांग्रेस ने अपने राज में विभिन्न परियोजनाओं को दशकों तक अटकाया, लेकिन 2014 के बाद सारी परियोजनाएं तीव्र गति से पूरी होने लगी।
सोचा आपको याद दिला दूं!
#TabAurAb
@ashokgehlot51@RahulGandhi में क्या करू मेरे को कुर्सी नही छोड़ रही है।
मेरा इस्तीफा तो आलाकमान के पास रखा है।
आज आपको युवाओं की बेरोजगारों की याद आ रही है।
कुर्सी पर रहे तब तो बहुत मजे किए
जब 28000 CHA को नौकरी से निकाला तब खा चला गया था राहुल गांधी और मारवाड़ के गांधी का ज्ञान। तब क्यों और अब क्यों
@SupriyaShrinate Congress me to bahut khyal rakhte h mahilao ka jese neharu rakhte the. Jese Sashi thatur rakhte h.
Tum jesi orte keval Rahul gandi ki Charan chumbak hi ban sakti ho .
मशहूर गजल गायक पद्मश्री से सम्मानित पंकज उधास जी के निधन का दुखद समाचार मिला। संगीत जगत में उनका निधन एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों व प्रशंसकों को संबल प्रदान करें।
।।ॐ शांति।।
#PankajUdhas
"चिट्ठी ना कोई संदेश, कहाँ तुम चले गये.."
गजलों का एक दौर थम गया..!
मशहूर गजल गायक पंकज उदास जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिजनों, प्रशंसकों को यह दुख सहने का संबल प्रदान करें।
ॐ शांति...!
#पंकज_उधास
#फार्मासिस्ट_प्रोविजनल_सूची_जारी_करो
आज से फिर धरने पर बैठेंगे चिकित्सा विभाग की फार्मासिस्ट भर्ती 2023 के अभ्यर्थी /सरकार तथा विभाग की वादाखिलाफी ??
ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचे फार्मासिस्ट भर्ती के अभ्यर्थी सीफू संस्थान के बाहर!
@GajendraKhimsar@RajCMO