झूठ मत बोलो इतिहास साक्षी है तुम्हारे पूर्वज गाय बैल घोड़ा सब खाते थे. तुम्हारे ग्रंथों में लिखा है.
इतिहासकार डी एन झा ने अपनी महान रचना THE MYTH OF THE HOLY COW में प्रमाण देते हुए विस्तार सहित लिखा है प्राचीन काल में आर्य मांस का सेवन करते थे.
इतनी ही समस्या है तो कट्टर शाकाहारी लोग अपना अलग देश क्यों नहीं मांग लेते? वहाँ सारे लोग मिलकर वेज बिरयानी और वेज मोमो खाएँ। 78% माँसाहारियों को भारत में शांति से रहने दें। दक्षिण और पूर्वी भारत तो 99% तक मांसाहारी है। शाकाहारियों से कौन ज़बर्दस्ती कर रहा है कि वे मांस खाएँ?
भारत के 78% लोग तो कह कर मांसाहारी हैं। इनमें वे लोग शामिल नहीं हैं जो होटल में वेज थाली में चिकन या मटन का शोरबा यानी करी यानी झोल डालने की माँग करते हैं और इसके लिए अलग रुपया माँगने पर झगड़ा करते हैं। अंडा वाले भी उसमें नहीं हैं। भारत में मांसाहारी बहुसंख्यक हैं।
नाम शेर रख लेने से आदमी शेर नही बन जाता हैं।
एक निहथ्थि महिला पर गोली मारकर भागने वाले शेर नही होते है।
शेर बनने का शौक था तो जब फूलन के हाथ मे हथियार था तब सामने आता पेंट मे ना मुत देता तो कहता।
वीरांगना फूलन देवी एक ऐसी सख्शियत थी जिसे देख जालिमों की पतलून गिल्ली हो जाती थी
21वीं सदी में एक नौजवान की हत्या इस वज़ह से हो जाती है क्योंकि उन्होंने मूँछ रख ली।
राजस्थान के जितेन्द्र पाल मेघवाल की हत्या सामंती-ब्राह्मणवादी लोगों द्वारा मूँछ रखने के वज़ह से कर दी गई है।