दिल्ली में ECI तक INDIA गठबंधन के सांसदों के विरोध मार्च पर AIMIM प्रमुख बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी साहब कहते हैं, "मैं वहां नहीं गया क्योंकि मैं उस (गठबंधन) का हिस्सा नहीं हूं। बेगानी शादी में मेरा क्या काम? मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की प्रक्रिया गलत है। यह पूरी तरह से {1/3}
سالوں پہلے اس مصری نوجوان نے فلسطین مصر بارڈر پر بنائی گئی دیوار میں سوراخ کرکے فلسطینیوں کو کھانے کی اشیاء دینی شروع کی تھیں۔
دنیا کی دولت کا 70 فیصد سے زائد رکھنے والے عرب حکمران مظلوموں کی مدد کے لیے آج تک اس نوجوان جتنی کوشش بھی نہ کر سکے۔
आज अजमेर शरीफ में गरीब नवाज़ सरकार की बारगाह में चादर पेश की और देश की खुशहाली, अमन और मोहब्बत के लिए दुआ की। 🤲❤️
राजस्थान में AIMIM को मिली कामयाबी के लिए जनता का दिल से शुक्रिया। असदुद्दीन ओवैसी साहब को लोगों ने मोहब्बत और दुआओं से नवाज़ा। 6 में से 2 हमारे पार्षद जीते और बेनीवाल साहब के साथ गठबंधन में 68 जगहों पर कामयाबी मिली।
राजस्थान तो सिर्फ़ एक झांकी है, पूरा उत्तर प्रदेश अभी बाकी है। इंशाअल्लाह, वहाँ भी हमें जनता की मोहब्बत और दुआओं से बड़ी कामयाबी मिलेगी। ❤️
नफ़रत हारे, मोहब्बत जीते—यही हमारी दुआ है। 🇮🇳🤲@asadowaisi@jameelwecan@AadilHasanAdv1@aimim_national
मुस्लिमो दूसरो की मदद करने की बहुत चूल मची है लेकिन किसी मुस्लिम की मदद नही होपाती है
3महीने से पानी बंद95% मुस्लिम बहुत बड़े खतरे मे शाहीइमाम मुफ्ती मुकर्रम
जो शख्स किसी मुस्लिम की दुनियावी परेशानी दूर करे अल्लाह कयामत की परेशानियो मेसे उसकी कोई परेशानी दूर फरमाएगा(सही मुस्लिम
मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया-फिर हमारी मस्जिद क्यों ढहाई गई?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को आज सुबह 5 बजे ढहा दिया गया।
क्या मुसलमानों के लिए अब मज़हबी आज़ादी का संवैधानिक हक़ भी नहीं बचा है? हमारी इबादतगाहों पर बार-बार कमज़ोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोज़र क्यों चलाया जाता है?
मस्जिद कमेटी ने 1911 के दस्तावेज़ अदालत में पेश करके यह साबित करने की कोशिश की कि यह मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी। एक सदी से भी ज़्यादा वक़्त से वहाँ लगातार नमाज़ होती रही है। यानी यह कोई आज खड़ी कर दी गई इमारत नहीं है, बल्कि लंबे अरसे से एक इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होती रही है। यही वक़्फ़ बाय यूज़र की बुनियाद है, जिसे क़ानून में भी मान्यता मिली है।
मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया।
कुछ लोगों को शायद मस्जिद दिख जाने पर भी तकलीफ़ होती है। लेकिन यह उनका मसला है, हमारा नहीं। नज़र फेरनी है तो फेर लो। लेकिन अपनी खुन्नस मिटाने के लिए हमारी मस्जिद पर बुलडोज़र नहीं चला सकते।
हमारी मज़हबी आज़ादी आपकी रहम-ओ-करम पर मबनी नहीं है।
#SaharanPur #Masjid
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Aashiqan E Mustafa ﷺ Se Guzarish Hai, Aaj 19 September 2025 Dopher 3 Baje #iLoveMuhammadﷺ Ko Khoob Tweet Aur Retweet Karein Aur Is Image Ko Apne Dost-O-Ahbaab Mein Share Karein
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📲 19-09-2025 | 3:00 PM
Jamat Raza E Mustafa