चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सूर्यकांत ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मिलने से इनकार किया।
वाह।
बहुत खूब।
राष्ट्रपति मिल लीं थीं।
उनसे भी ज्यादा वफादार दिखने की कोशिश कर रहे हैं।
भूल गए की एक स्थिति ऐसी आई थी कि उन्हीं की कुर्सी पर बैठे एक चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ वहां के चार न्यायाधीश पत्रकारों के पास आये थे न्याय मांगने के लिए।
याद है ना।
सूर्यकांत जी यह सत्ता आनी जानी है।
न्याय व्यवस्था हमेशा बनी रहनी है।
न्याय की किताबें भी और उसका इतिहास भी।
और यह केवल भारत में नहीं पढ़ा और पढ़ाया जाता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पढ़ा और पढ़ाया जाता है।
वहां क्या लिखेंगे और कहेंगे लोग आपके बारे में।
सोच लीजिए।
पुनर्विचार!
कल राहुल से ससम्मान मिलिए और उनकी बात ध्यान पूर्वक सुनिए।
#BREAKING: Chief Justice of India Surya Kant has declined permission for Congress leaders Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge and others to meet him on Monday, October 12.
The Opposition leaders had sought a meeting with the CJI to raise concerns over alleged electoral irregularities, the SIR exercise and police action against protesters.
#SupremeCourt @RahulGandhi@kharge
Manhandled, dragged, assaulted n misbehaved inside a police vehicle and dumped by the roadside - for the crime of speaking to the media.
This is not merely an assault on an MP. It is an assault on democratic freedoms and the rule of law. More chillingly, it happened within hours of the Supreme Court issuing directions to safeguard peaceful protest and constitutional rights.
I have written to the Hon’ble President of India @rashtrapatibhvn , the Chairman of the Rajya Sabha @VPIndia and the Chief Justice of India seeking urgent intervention and fixing accountability for the police personnel, and action on the question of parliamentary privilege.
The Government cannot intimidate democracy into silence. It cannot substitute the force of the baton for the force of debate. And it shouldn’t expect the people to surrender their constitutional freedoms merely because those in power find dissent inconvenient. The strength of a democracy lies not in its capacity to suppress dissent, but in its ability to address it.
इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी संविधान के प्रावधानों के तहत लगाई थी जो आज भी संविधान में मौजूद हैं. इमरजेंसी में जो कुछ हुआ उसकी आलोचना होती है.
लेकिन कुछ फैक्ट लोगों को मालूम होने चाहिये
1. गिरफ्तारियां नेताओं की हुई थी आम जनों की नहीं.
2. इमरजेंसी की आड़ में राष्ट्रीय धरोहर उद्योगपतियों को नहीं बेची गई.
3. इमरजेंसी खुद इंदिरा गांधी ने हटाई और निष्पक्ष चुनाव हुये जिसमें वो हार गई, पार्टी भी और रायबरेली की अपनी सीट भी.
4. चुनाव आयोग के जरिये विपक्ष को चुनाव में हराया नहीं गया.
5. चुनाव हारने के बाद सत्ता शांतिपूर्ण ढंग से जनता पार्टी को सत्ता हस्तांतरित हुई.
6. सीबीआई और एजेंसियां लगा कर जनता पार्टी में तोड़ फोड़ नहीं कराई गई.
Tomorrow, 12th October, India marches peacefully as one to the Supreme Court.
Students, civil society organisations, Opposition parties: Please join us to defend our democracy.
#ChaloDilli
सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, "संविधान के आर्टिकल 358 में कहा गया है कि आर्टिकल 19 के तहत मिलने वाले अधिकारों पर तभी रोक लगाई जा सकती है जब इमरजेंसी लागू हो। क्या सरकार यह कह रही है कि उसने बिना औपचारिक घोषणा के ही इमरजेंसी लागू कर दी है?"
लोकसभा के नेता विपक्ष राहुल गांधी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का एलान किया है.
उन्होंने एक वीडियो शेयर कर कहा, "नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अजित डोभाल और मोहन भागवत भारत की आवाज को दबा नहीं सकते. ये कायर हमें डरा नहीं सकते. इन्हें पीछे हटना ही होगा.
हम सब साथ चलेंगे - मोहब्बत, भाईचारे और देशभक्ति के साथ"
ये @DelhiPolice के Kucchu Pucchu है,
वकील, पत्रकार, नेता, युवा सब पीटे जा रहे है,
लेकिन ये माननीय गण बेखौफ होकर लट्ठ बजा रहे है।
@CPDelhi - New Recruitment?
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने हर भारतीय को बुलावा दिया है.
कल सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला जाएगा और CJI को मेमोरेंडम दिया जाएगा.
इस मार्च में पार्टी-ग्रुप से ऊपर उठकर शामिल होने की अपील है. भारतीय होने के नाते इसमें शामिल हों.
अब कल होगा जबर प्रोटेस्ट
Yesterday, the nation's young came out in Delhi to peacefully protest. They came with love in their hearts, not hatred or anger. They were beaten, both by cops and BJP goons.
This is not the India we want.
Tomorrow, we will march to the Supreme Court as Indians, united beyond party, gender, caste, community and state.
Youth, all opposition parties, civil society groups, all those who believe in democracy and stand by the Constitution of India, will walk with us.
We will submit a memorandum to the Chief Justice on behalf of the nation, demanding an end to vote chori, halting of SIR and the resignation of Gyanesh Kumar.
Narendra Modi, Amit Shah, Ajit Doval and Mohan Bhagwat cannot silence India's voice. These cowards cannot intimidate us. They will have to step aside.
We will march together, with love, brotherhood and patriotism.
Daro mat.
Tomorrow, all of India will march to the Supreme Court.
कल दिल्ली में देश का युवा शांतिपूर्ण विरोध के लिए सड़कों पर उतरा। उनके दिलों में नफ़रत या गुस्सा नहीं, मोहब्बत थी। लेकिन उन्हें पुलिस और BJP के गुंडों, दोनों ने पीटा।
ऐसा भारत हम नहीं चाहते।
कल, सोमवार 12 अक्टूबर को, हम भारतीय होने के नाते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की हर दीवार से ऊपर उठकर, हम सब एक साथ चलेंगे।
देश का युवा, तमाम विपक्षी दल, सिविल सोसाइटी और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले, भारत के संविधान के साथ खड़े सभी लोग हमारे साथ चलेंगे।
हम देश की ओर से मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपेंगे। हमारी माँग है - वोट चोरी बंद हो, SIR पर रोक लगे और ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें।
नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अजित डोभाल और मोहन भागवत भारत की आवाज़ को दबा नहीं सकते। ये कायर हमें डरा नहीं सकते। इन्हें पीछे हटना ही होगा।
हम सब साथ चलेंगे - मोहब्बत, भाईचारे और देशभक्ति के साथ।
डरो मत।
कल पूरा भारत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा।
#ChaloDilli
10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान सरेआम गुंडागर्दी देखने को मिली.
प्रदर्शन में आए लोगों में एक धड़ा ऐसा था, जो सरकार के ख़िलाफ़ बोल रहे प्रदर्शनकारियों को हिंसक जवाब दे रहा था. ये हिंसा शारीरिक और मौखिक, दोनों ही रूपों में हो रही थी.
इंडियन एक्सप्रेस के हमारे साथियों के साथ भी इन्होंने बदसलूकी करने की कोशिश की.
सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो की सर्विस और ट्रैफिक पर उसके आदेश को न मानने पर कंटेम्प का नोटिस दिया है.
याचिका में गृह सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, DMRC चेयरमैन को पार्टी बनाया गया.
ये सिर्फ कोर्ट के आदेश की अवमानना है या संवैधानिक संकट?
केंद्र सरकार ही कोर्ट का आदेश न माने तो संविधान कैसे चलेगा.
पूरा वीडियो अंत तक देखिए
निहत्थे छोटे छोटे बच्चों को 6-6 बैरिकेड लगाकर रोकने वाली दिल्ली पुलिस हथियारों और डंडों से भरी गाड़ी को गुंडों समेत सेफ्टी से निकाल रही है।
पत्रकार और पास खड़े लोग बार बार पुलिस के जवानों को गाड़ी की तलाशी लेने को कहते हैं, लेकिन वो उसे भगा देते हैं।
ये अपमान.. ये क्रूरता.. ये बर्बरता...अधिकारों पर आक्रमण..दमन सब याद रखा जाएगा...एक बात कहती हूँ डरा नहीं पाओगे किसी के बाप का हिन्दुस्तान नहीं है..अभी वीडियो आएगा सारी बदतमीजी देश देखेगा..