अमन चोपड़ा की शक्ल देखने लायक है।
झारखंड पुलिस ने केवल पूछताछ करने के लिए अमन चोपड़ा को थाने पर बैठा लिया है।
लेकिन अमन चोपड़ा का हलक सूख गया है, और अपने मालिकों का फोन कॉल्स कर रहा है
यह वही अमन चोपड़ा है जो जंतर मंतर छात्र आंदोलन से गायब था ।
लेकिन Aman Chopra झारखंड में हेमंत सोरेन के खिलाफ अफवाहें फैला रहा है।
जिस तरह से अमन चोपड़ा से झारखंड पुलिस के अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं।
बेचारे अमन चोपड़ा की शक्ल देखने की लायक है , आपको नहीं भूलना चाहिए यह वही अमन चोपड़ा है।
जिसने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी को साजिश के तहत बदनाम करने की कोशिश की।
IB से सीधे पूछ लीजिए महाराज @girirajsinghbjp .. कहां ये सोशल मीडिया के चक्कर में पड़े हैं। चलिए छोड़िए आप तो ये बताइए कि बिहार में टेक्सटाइल पार्क वाला मामला कहां तक पहुंचा...
Non-Veg बिरयानी बिक रही थी, हिंदू संगठनों को बुरा लगा, पुलिस आई, दुकान तोड़ दी।
कितनी सस्ती है इस मुल्क में एक मुसलमान की ज़िंदगी। उसकी जान-माल का कोई मोल नहीं? क्या इस देश में कोई जज, कोई अदालत बची है ? क्या अब गुंडागर्दी ही इंसाफ़ है ?
ये तमाशे किसके संरक्षण में हो रहे हैं? @dgpup और @Uppolice की ऐसी कौनसी मजबूरी है जो इन संगठनों के फ्रिंज एलिमेंट्स के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के लिए तैयार नहीं है? ये अराजक तत्व माहौल खराब करने के लिए नए-नए षडयंत्र रच रहे हैं, और पुलिस इनके खिलाफ सख्त एक्शन लेने के लिए तैयार ही नहीं!
इस मंच पर तक़रीर करने वाले ‘मुक़र्रिर’ को देखिए, सुनिए! फिर यह भी देखिए कि जब यह तक़रीर की जा रही थी तब ‘मुक़र्रिर’ क्या था! और आज क्या है। जिस शख्स को मुक़र्रिर ने ‘बाप की हैसियत’ दी थी, उस शख्स के परिवार पर ग़म का पहाड़ टूटा है, और यह एक बार नहीं कई बार हुआ है। सवा तीन साल पहले उस परिवार में 24 घंटे के भीतर तीन जनाज़े उठे, जिसमें एक जनाजा उस शख्स का भी था, जिसे इस मुक़र्रिर ने ‘बाप की हैसियत’ दी थी। बाकी दो जनाज़े उस शख्स के भाई और बेटे के थे। लेकिन वह मुक़र्रिर उस वक्त भी उन जनाजों पर सार्वजनिक तौर पर शोक प्रकट भी नहीं कर पाया था।
बीते रोज़ उसी परिवार का एक और सदस्य सुपुर्द-ए-खाक हुआ है। लेकिन मजाल भला कि यह मुक़र्रिर जो अब ‘सांसद’ भी है वह उस दुर्घटना पर सार्वजनिक तौर पर ग़म का इज़हार भी कर पाता। जब कांधों पर चढ़कर ‘बड़ा’ बनना था, तब भरे मंच से उस शख्स को ‘बाप’ बता दिया था। और जब बारी कांधा देने की आई तो ‘बेख़बरी’ की चादर तान ली। क्यों? क्या यह ‘डर’ था कि इससे राजनीतिक ‘तरक्की’ रुक सकती? माना हालात ‘अच्छे’ नहीं हैं, लेकिन इतने भी बुरे नहीं हैं कि किसी ‘अपने’ की मौत पर ग़म का इज़हार भी ना कर सकें।
बात सही भी है! जब फ्री किया हुआ है तो फिर कैसा ‘किराया’! कांवर लेने जा रहे हैं, कोई Gen-Z प्रोटेस्ट में थोड़े ना जा रहे हैं, जो TTE इतने सवाल कर रहा है।
उसी इलाहाबाद में उस शख्स की कब्र है जो शख्स इस ‘शाइर’ के लिए ‘बाप की हैसियत’ रखता था। उसी ‘बाप’ की हत्या पर यह शाइर सार्वजनिक तौर पर “इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैही राजिऊन” तक नहीं कह पाया था। आज उसी शहर में आबान का दफनाया गया है, आबान उसी शख्स का बेटा था जो शख्स इस शाइर के लिए ‘बाप की हैसियत’ रखता था। जब ‘अज्ञात’ शायरी पोस्ट करके पुरानी याद को ज़िंदा कर ही रहे हैं, तो इस याद में उन कब्रों पर भी फातिहा पढ आना, जिनमें दफन लोगों के कांधों का इस्तेमाल ‘ऊंचाइयों’ पर पहुंचने के लिए किया था।
उसी शहर से आप भी निकले हैं,
आप ने सीढ़ियों का इस्तेमाल किया और फिर सीढिय़ों को तोड़ दिया ताकि कोई और ना चढ़ सके।
नीचे वाला शेर भले अज्ञात है लेकिन ये वाला शेर ज़रूर इमरान प्रतापगढ़ी का है।
एक शायर का दावा है कभी भी रद नहीं होगा।
तेरे कद के बराबर अब किसी का कद नहीं होगा।
इलाहाबाद वालों मेरी बात याद रखना तुम।
कई सदियों तक कोई "अतीक अहमद" नहीं होगा।
जो इंसान बाप की तरह था उसके लिए भी एक शब्द नहीं निकले और अब उनके बेटे जो तुम्हारे भाई की तरह थे उनके लिए एक पोस्ट तक नहीं कर पाए।
छात्रों की गूंज के साथ साथ ये भी तो जरूरी था। कमसे कम एक पोस्ट तो कर देते पुरानी ही सही।
इनकी तरह इनकी शायरी भी झूठी निकली। इमरान भाई आप की बहुत इज्जत करता था। आप सेल्फिश निकले।
अतीक अहमद साहब के बेटे के इन्तिकाल में शरीक न हो पाने की वजह हो सकती है लेकिन सोशल मीडिया पर भी दुख संवेदना न व्यक्त कर पाना अजीब है
@ShayarImran भाई हम आपकी इज़्ज़त करते हैं लेकिन आप जब मुश्किल वक्त में अपनों के ही साथ न खड़े होंगे तो कैसे काम चलेगा ?
आपकी कामयाबी में अतीक भाई भी शरीक रहे हैं आपने उनके तारीफ़ में क्या कुछ नहीं कहा पर आज उनके जाने के बाद उनके परिवार का साथ भी नहीं दे सकते हैं तो कलको मुझपर कोई परेशानी आई तो कैसे उम्मीद कर सकूँगा ?
बाक़ी दिल का हाल अल्लाह ही जानता है।
इसी स्याही से हम इंक़लाब लिख देंगे..
झारखंड के छात्र अभी भी साथ मिलकर लड़ रहे हैं एक बेहतर कल लिखने के लिए
जो लोग कभी छात्रों के मुद्दे और जीवन के बारे में जाने की कोशिश नहीं कर पाए उनको स्याही का काम कैसे पता होगा
झारखंड में स्टूडेंट के प्रोटेस्ट को समर्थन देने पहुंचीं नेहा के ऊपर एक लड़के ने स्याही फेंकी है। जब उससे पूछा गया कि क्यों किया ऐसा तो वही बेवकूफी और नफरती बातें कि मुझे नेहा पसंद नहीं है क्योंकि वो उमर खालिद का सपोर्ट करती है वो देशद्रोही है।
ये सब मीडिया और बीजेपी IT सेल का जहर है जो पिछले 12 सालों में युवाओं के दिमाग में भरा गया है।
यह @Uppolice के सिपाही ही हैं? या हफ्ता वसूली करने वाला गैंग है? इसका अंदाज़ा लगाना ज़रा मुश्किल है। घटना ग़ाज़ियाबाद के खोड़ा कॉलोनी की है। मुफ्तखोरी की लत ने एक दुकानदार से पहले सामान लिया, पैसे मांगने पर दुकान बंद कराने की धमकी दी जाने लगी। @ghaziabadpolice को आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए।
संभल में हिंसा कैसी भड़की यह ‘सरकारी आयोग’ ने उसका पता लगा लिया है। संभल हिंसा में चार लोग मार दिए गए, वो किसने मारे यह पता नहीं लगा? संभल हिंसा के दौरान जिस पुलिस अधिकारी को गोली मारो बे कहते हुए सुना गया, उस पुलिस अधिकारी को गुनहगार माना जाएगा? उस पुलिस अधिकारी पर हत्या का मुकदमा चलेगा? या ‘सरकार’ का ‘आयोग’ सरकार को खुश करने के लिए, सरकार के फेवर में ही रिपोर्ट देता रहेगा?
काम वगैरह कौन करवाए जब सारा काम प्रचार से हो जाना है।
देश को प्रचारजीवी लोग खा गए।
2.32 करोड़ रुपए उस राज्य का विज्ञापन खर्च है, जिस राज्य में मिड डे मील की सब्जी में सिर्फ पानी मिलता है।
दुर्भाग्य
“BJP विधायक विनोद सिंह ने मेरे साथ रेप करने की कोशिश की, शराब के नशे में मेरे प्राइवेट पार्ट छुए और कपड़े फाड़ दिए
अब वो मेरी बेटी पर एसिड अटैक करवाने की धमकी दे रहे हैं. पुलिस वाले मेरी लोकेशन निकालकर BJP विधायक को देते हैं”
ये काली करतूत यूपी के सुल्तानपुर से BJP विधायक विनोद सिंह की है
ऐसे ही दरिंदों से भरी पड़ी है BJP
उत्तरप्रदेश के अतरौली पेड़ चौराहे पर एक गरीब टेम्पो वाला गलती से कावड़ियों से टकरा गया , कावड़ियों ने गरीब व्यक्ति के टेम्पो को तोड़फोड़ करके चलाने लायक भी नहीं छोड़ा ,
कोई अगर गलती से टकरा जाये तो आप हिंसा पर उतारू हो जायेंगे , ये कौनसा धर्म कहता है ?