@kkarthikkgs Calling yourself a CEO while running on cheap prejudice is embarrassing. You dare question men from Rajasthan? Open a history book before you speak—this is the land where generations literally laid down their heads to defend the honor and dignity of women.
@kkarthikkgs One person's misconduct should never define millions of people. Rajasthan’s history stands witness to ultimate sacrifices made in defense of women's honor and dignity. Hold individuals accountable—don't normalize regional discrimination in hiring. #FairHiring
माननीय @SEC_Rajasthan एवं @SikarDPR से निवेदन है कि वार्ड नं. 58, जगमालपुरा-भादवासी, सीकर में चुनावी बूथ/कैंप के लिए निर्धारित 200 मीटर की सीमा का निष्पक्ष एवं नियमानुसार पुनः सीमांकन करवाया जाए।तीनों प्रत्याशियों द्वारा इस माप/सीमांकन को लेकर असंतोष व्यक्त किया गया है। @dmsikar
आखिर थक कर सावित्री सक्सेना ने बेटे का शौर्य चक्र लौटाने का फैसला किया है...
असिस्टेंट कमांडेंट विवेक सक्सेना 8 जनवरी 2003 को मणिपुर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे...उनकी वीरता के सम्मान में राष्ट्र ने उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया...
सरकार ने उनके परिवार को जमीन और एक स्मारक देने का वादा किया था....
लेकिन 22 साल बाद भी उनकी मां सावित्री सक्सेना को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं...
कभी उनसे डोमिसाइल का प्रमाण जाता है...कभी पूछा जाता है कि वो अपनी शादी से पहले वह कहां रहती थीं...80 साल की उम्र में वो क्या बताए... वो फिर भी चक्कर काटती हैं और पर उन्हें बस इंतजार करने के लिए कहा जाता है...
अब वह कहती हैं कि उनमें बार-बार इन दफ्तरों के चक्कर लगाने की ताकत नहीं बची है....
शहीद की ये मां देश से नाराज़ होकर नहीं है...बल्कि सिस्टम से थककर, टूटकर और निराश होकर वो ये कदम उठा रही हैं..
इसलिए शौर्य चक्र लेकर वह एक शिकायत निवारण शिविर में पहुंचीं और कहा कि अगर शहीद की मां को यही सम्मान मिलता है, तो यह सम्मान वापस ले लीजिए...उनके बेटे ने देश के लिए अपनी जान दे दी...और आज उसकी मां से यह साबित करने को कहा जा रहा है कि वह इस देश की है...
यह सिर्फ एक मां की पीड़ा नहीं है...यह हम सबको शर्मिंदा करने वाली बात है..
माँ के निधन के बाद पैतृक गाँव लौटा बेटा, अब जान बचाने की गुहार, SC-ST Act की धमकियों से हालात ऐसे कि कह रहा है: “या तो गाँव छोड़ना पड़ेगा, या मेरी जान चली जाएगी!”
"मैं राजपूत ठाकुर जाति से संबंध रखता हूँ और मेरा जिला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश है। दरअसल, मैं काफी लंबे समय से दिल्ली में रह रहा था। अभी दो महीने पहले मेरी माता का निधन हुआ, तो मुझे अपने पैतृक गाँव में आकर रहना पड़ा।
तो यहाँ की स्थिति ये है कि मेरे पड़ोसी जो भीम आर्मी संगठन से जुड़े हुए हैं। उन लोगों ने मुझे इतना बुरी तरह से प्रताड़ित कर रखा है कि वे मेरे घर में जबरदस्ती घुसने का प्रयास करते हैं, मुझे हमेशा गालियाँ देते हैं, धमकियाँ देते हैं और आते-जाते हुए रास्ते में मुझे परेशान करते हैं।
मेरे पास वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिसमें मुझसे ये तक कहा गया है कि, तू हमारी तरफ देखता क्यों है? तू हमारी तरफ देखेगा नहीं और तू जमीन कि तरफ नीचे नज़र करके चलेगा, हमारे सामने।
मैंने पुलिस को भी इस संबंध में कई बार शिकायत दी है। एक महीने से मैं कई बार पुलिस को शिकायत दे चुका हूँ। पुलिस का हमेशा आश्वासन रहता है कि कार्रवाई की जाएगी।
इसी क्रम में आज सुबह मेरे साथ इन लोगों ने मारपीट की है, गाली-गलौज की है और मुझे धमकी दी है कि हम तुम्हें फर्जी एससी-एसटी एक्ट और महिला उत्पीड़न के केस में किसी न किसी तरह फँसाकर जेल भेजवा देंगे। तुम्हें आज के आज यहाँ से जाना पड़ेगा, या तो तुम यहाँ से कहीं बाहर चले जाओ, नहीं तो हम तुम्हें जेल भेज देंगे।
मेरे घर में बहुत सारे लोग नहीं हैं। दरअसल, मैं अकेला हूँ और मेरे वृद्ध पिता हैं। मेरा बहुत बुरी तरह से शोषण और उत्पीड़न किया जा रहा है।
तो मेरा सभी संगठनों से, जो भी सवर्ण संगठन हैं या जो भी इस तरह के कुकृत्यों के संबंध में हम जैसे लोगों की रक्षा करते हैं या सुरक्षा करते हैं, उनसे निवेदन है कि मेरी सुरक्षा की जाए।
आज जिस तरह से मेरे साथ मारपीट की गई है, मुझे अपनी हत्या तक किए जाने का डर है। अगर मुझे कुछ होता है तो यही लोग, जिनके खिलाफ मैंने शिकायत और प्रार्थना पत्र में नाम दिया है, वही लोग उसके जिम्मेदार होंगे।
इन लोगों के द्वारा गलियों में तलवारें लहराई जाती हैं, गली में नीला गमछा डालकर और तरह-तरह से मुझे उत्पीड़ित किया जाता है।
तो मेरा यही निवेदन है कि सभी लोग मेरी सुरक्षा सुनिश्चित करें, क्योंकि मैं पुलिस में भी कई बार कंप्लेंट दे चुका हूँ। आज पुलिस के द्वारा मुझे आश्वासन दिया गया है कि जो संबंधित लोग मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं, उनके खिलाफ आज मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
परंतु मेरा कहना ये है कि अगर मुझे इसी तरह प्रताड़ित किया गया और मेरे बचाव में कोई संस्था या कोई लोग नहीं आते हैं, या मेरे ऊपर किसी तरह का फर्जी मुकदमा दर्ज होता है, तो मेरे पास दो रास्ते होंगे। एक रास्ता होगा कि मैं अपने प्राणों की आहुति दे दूँ या अपनी जीवन समाप्त कर लूँ, क्योंकि मैं एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति हूँ और मुझे इस तरह प्रताड़ित करके या जेल भेजने का अगर काम किया जाएगा, तो मैं अपने प्राण देने के लिए मजबूर रहूँगा और मेरे पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं होगा।
इसके अलावा, मुझे पलायन करना पड़ेगा। मुझे समझ में नहीं आता कि मेरे कई पीढ़ियों से मेरे पूर्वज यहाँ पर रहे हैं, तो अचानक ऐसा क्या हुआ है कि मुझे यहाँ से भगाया जा रहा है।
चूँकि मेरा घर इस गाँव में अंतिम पंक्ति में है, ठाकुरों के गाँव में जो घर होते हैं, उसकी अंतिम पंक्ति में मेरा घर है। इन लोगों की कम्युनिटी ने चारों तरफ घर बनाकर हमें चारों तरफ से घेर रखा है।
तो अब इन लोगों का ये है कि इन्होंने मुझे वल्नरेबल समझ लिया है कि मैं इनके लिए बहुत ईज़ी टारगेट हूँ।
तो अगर मेरी किसी तरह हत्या हो जाती है या मुझे किसी केस में फँसाया जाता है, तो उसके लिए वही लोग जिम्मेदार होंगे।
मेरे पास दूसरा रास्ता ये भी है, जो मेरे दिमाग में आ रहा है, कि मुझे धर्म परिवर्तन कर लेना चाहिए, ताकि मेरे ऊपर से ये ठाकुर वाला दाग हट जाए। इसको मैं दाग कहूँगा।
एक्चुअली, मैं इस पर पहले गर्व महसूस करता था। गर्व इसलिए महसूस करता था कि हमारे पूर्वजों ने काफी वीरताएँ दिखाई हैं, युद्ध लड़े हैं और कई युद्ध जीते हैं। उन्होंने देश को आगे बढ़ाने में प्रयास किया है।
लेकिन अभी मुझे इस बात का भय है कि जिस जाति से मैं बिलॉन्ग करता हूँ, वही जाति मेरे प्राणों के लिए काफी कष्टकर साबित हो रही है।"
आठ पहर चौसठ घड़ी घुड़ले ऊपर वास।
सैल अणी हूँ सेंकतो बाटी दुर्गादास।।
मारवाड़ की धरा के वीर सपूत,परमप्रतापी, अदम्य शौर्य,त्याग,अनुशासन के प्रतीक वीर दुर्गादास जी राठौड़ की जयंती पर सादर नमन करता हूँ।
#दुर्गादासजी_राठौड़
@AshwiniVaishnaw@IRCTCofficial@NWRailways I m travelling Delhi to jaipur in double decker catering staff is looting the passengers like anything they are charging almost double and refusing the bill as well @RailMadad