रेल मंत्री श्री @AshwiniVaishnaw जी देशभर में रेलवे के “आधुनिकीकरण” और “विश्वस्तरीय स्टेशन” के दावे करते नहीं थकते, लेकिन CAG की रिपोर्ट ने इन दावों की चमकदार तस्वीर के पीछे की बदहाल हकीकत को उजागर कर दिया है |
CAG के ऑडिट में देश के 512 रेलवे स्टेशनों की जांच की गई, जिनमें 458 स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक यात्री सुविधाओं में कमी मिली।
राजस्थान में रिपोर्ट में सम्मिलित किए गए 29 रेलवे स्टेशनों में से 20 रेलवे स्टेशन यात्री सुविधाओं के मानकों पर खरे नहीं उतरे।
कहीं पीने का पानी नहीं, कहीं पार्किंग की कमी, कहीं रैंप नहीं, तो कहीं दिव्यांग यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं।
सवाल यह है कि रेल मंत्री जी के भाषणों में स्टेशन “विश्वस्तरीय” हैं या फिर CAG की रिपोर्ट में सामने आए ये स्टेशन वास्तविक हैं?
मैं रेल मंत्री जी पूछना चाहता हूं यह कैसी “अमृत भारत” की तस्वीर है, जहां विज्ञापनों में स्टेशन एयरपोर्ट जैसे दिखाई देते हैं और जमीन पर यात्री पानी, शौचालय, बैठने और रैंप जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं ?
रेल मंत्री जी,
रेलवे का विकास सोशल मीडिया के पोस्टर और उद्घाटन समारोहों से नहीं, स्टेशन पर खड़े उस आम यात्री की सुविधा से मापा जाता है जो पानी, शौचालय, बैठने की जगह, पार्किंग और रैंप जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान है।
मैं रेल मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि दावों की चमक बहुत हो चुकी, अब CAG की रिपोर्ट में सामने आई कमियों पर जवाब कब दोगे ?
@RailMinIndia
राजस्थान की भजनलाल सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति को छुपाने के लिए मीडिया की आवाज पर पाबंदी लगाने और स्कूल परिसरों में फोटो-वीडियो बनाने पर रोक लगाने का तुगलकी फरमान पूरी तरह अनुचित और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
अगर सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाएं बेहतर हैं, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है और सरकार अपने दावों पर खरी उतर रही है, तो फिर मीडिया से डर कैसा ?
सरकारी स्कूल जनता के पैसे से चलते हैं। वहां की व्यवस्थाओं, शिक्षण व्यवस्था, भवनों, मूलभूत सुविधाओं और बच्चों की समस्याओं की वास्तविक तस्वीर सामने रखना मीडिया और समाज का अधिकार है।
कमियां छुपाने के बजाय सरकार को उन्हें दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।
सरकार चाहे जितनी पाबंदियां लगा दे, राजस्थान की जनता अपने बच्चों के भविष्य से जुड़े सवालों पर चुप नहीं बैठेगी ।
@RajCMO
अंध विश्वास के नक्शे कदम पर नही चले 12-12, 15-15, 16-16 साल के बच्चे कावड़ लेकर जा रहे थे हम ईश्वर का मानते है ईश्वर को मानना चाहिए लेकिन किस उम्र मे क्या काम करना चाहिए वो ही करना चाहिए इन कामो से उद्धार होगा क्या🤔 पढने और कर्म करने से होगा इन यात्राओ मे कितने विद्वान और बडे लोग जा रहे है, कितने करोडपति, अरबपति सेठ जा रहे है आपको लगा दिया की आप शिक्षा, धंधा, रोजगार, काम और नौकरी मत मांगो आप तो पानी भरकर निकल लो ये जो 70 साल मे हमने विकास किया आज बडी सोची समझी नीति के तहत प्लानिंग से आपको वापिस उसी स्थिति मे ले जाने के प्रयत्न किए जा रहे है
- मुरारीलाल मीना (सांसद दौसा)
ऐसे लोग गिरगिट की तरह होते है पहले ये लोग आदिवासियों का अपमान करते है और फिर इधर उधर बात घुमाने लगते है। लेकिन जब तक माफ़ी नही मानते हैं इन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।
ऐसे ही लोगों ने हमारी संस्कृति, इतिहास और पहचान पर हमला किया और उसे नष्ट कर दिया। हमें इनकी राजनीति का मुंहतोड़ जवाब देना होगा। हमें सोशल मीडिया से लेकर किताबों तक, सड़क से लेकर संसद तक इन्हें जवाब देना होगा।
#मदन_राठौड़_माफी_मांगो
#संविधान_सभा_में_आदिवासी
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष @madanrrathore, आपने विश्व आदिवासी दिवस मनाने वालो को भेड़चाल कहकर घोर अपमानित किया है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित विश्व आदिवासी दिवस का संबंध भारत से नही है तो विश्व योग दिवस और विश्व महिला दिवस भी तो संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित किये हैं। फिर तो इनका संबंध भी भारत से नही होना चाहिए।
पूरे आदिवासी समाज व आदिवासी की कद्र करने वाले उस प्रत्येक व्यक्ति व संगठन को आपने भेड़चाल चलने वाला कहकर अपमानित किया है। उसका जवाब जरूर मिलेगा आपको।
#मदन_राठौड़_माफी_मांगो
जनता इलाज के लिए अस्पताल जाती है, लेकिन राजस्थान में अस्पताल ही जानलेवा साबित हो रहे हैं।
अब इस वीडियो को ही देखिए 👇🏼
चुरू में एक महिला सरकारी अस्पताल पहुंची थी, मगर डॉक्टर तक पहुंचने से पहले ही छत का प्लास्टर उसपर गिर पड़ा।
BJP सरकार के भीषण भ्रष्टाचार के चलते हर तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर ढह रहा है। इस सरकार की नजरों में लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है।
दरअसल, सरकार का पूरा फोकस सिर्फ माल बटोरने और जमकर कमीशनखोरी करने पर है। जनता जिए या मरे।
शर्मनाक!!
स्कूल हो या अस्पताल, भाजपा सरकार में हर जगह यही हाल...जर्जर भवन, बदहाल व्यवस्था और जनता की जान से खिलवाड़।
राजस्थान में कभी स्कूल की छत गिरती है, तो कभी अस्पताल के भवनों का प्लास्टर मरीजों पर टूटकर गिरता है। चूरू में इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पहुंची महिला डॉक्टर तक भी नहीं पहुंच पाई कि छत का प्लास्टर उसके ऊपर आ गिरा। ईश्वर से घायल महिला के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।
ये सिर्फ हादसा नहीं, भाजपा सरकार में पनपे भ्रष्टाचार, लापरवाही और बदहाल व्यवस्थाओं का सच है। जनता इलाज कराने जाए या बच्चे स्कूल पढ़ने जाए, हर जगह जान का खतरा बना हुआ है। भाजपा सरकार की प्राथमिकता में केवल प्रचार, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार दिखाई देता है।
मोदी के भ्रष्टाचार को पंखे से सुखाया जा रहा है 👇
जनता के 4,200 करोड़ रुपए लगाकर ये घटिया सड़क बनवाई गई, जो 2 दिन भी नहीं चल पाई।
सोचिए किस लेवल की लूट खसोट हुई होगी।
मोदी अपनी देखरेख में भ्रष्टाचार का गिरोह चला रहे हैं, जो जनता के पैसों पर डाका डाल रहा है।
गोपालपुरा बाईपास पर बिना अनुमति चल रहे 130 कोचिंग संस्थानों पर सुप्रीम कोर्ट को सख्त सवाल पूछने पड़े, यह जेडीए और भाजपा सरकार की प्रशासनिक विफलता उजागर करता है।
हमारी कांग्रेस सरकार ने प्रतापनगर में 350 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक कोचिंग हब इसलिए बनाया था ताकि शहर भर के कोचिंग संस्थान एक जगह आएं और छात्रों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित माहौल मिले। 100 से अधिक कोचिंग संस्थानों ने अपने लिए स्थान भी आरक्षित कर लिया परन्तु सरकार बदलने के बाद भाजपा सरकार इसे लागू नहीं करवा पाई।
त्रिवेणी नगर से महेश नगर तक करीब 1.5 किमी में बिना पार्किंग, बिना भवन सुरक्षा मानकों के 130 कोचिंग संस्थान चल रहे हैं और रोज जाम लगता है। क्या भाजपा सरकार अब कम से कम नींद से जागेगी और सभी कोचिंग संस्थाओं को कोचिंग हब में शिफ्ट करवाएगी।
बांकीपुर में ये गेट लगा है। विकास के नाम पर वोट माँगने से चुनाव आयोग को भी दिक्कत नहीं है। अगर विपक्ष इस इस तरह के बैनर लगवा दे कि मंदिर में चंदा चोरी करने वालों को वोट नहीं दें तो चुनाव आयोग चारों तरफ़ दिखाई देने लगेगा। इसलिए इस देश में चुनाव मज़ाक बन गया है। कई दिनों से इस तरह के तोरण द्वार लगे हैं।
इसका एक और मतलब है। विपक्ष के नेता और कार्यकर्ता गलियों में घूम नहीं रहे हैं और घूम भी रहे हैं तो इन बातों पर नज़र नहीं पड़ रही है।
बीजेपी प्रवक्ता –– राहुल गांधी भारत के लिए बहुत खतरनाक हैं।
रूबिका लियाकत 😂 –– "क्या आप सरकार में बैठकर पॉपकॉर्न खा रहे हैं?"
बीजेपी प्रवक्ता –– अपनी ज़बान संभालिए, आपको अंदाज़ा नहीं है कि आप क्या बोल रही हैं।
रूबिका लियाकत 😂 –– "मुझे धमकी मत दीजिए, मैं किसी चीज़ से नहीं डरती।"
यह हमेशा यादगार रहेगा। अगर 'गोदी मीडिया' ने ऐसी पत्रकारिता नियमित रूप से की होती, तो उनकी विश्वसनीयता खत्म नहीं होती।