सोनिया गांधी तो सच में सोना चोर निकली!
सबरीमला का सोना हो, इमरजेंसी का सोना हो, 1962 के युद्ध का सोना हो या मंदिरों का सोना… कांग्रेस और गांधी परिवार ने कभी कुछ नहीं छोड़ा।
सोना हो या क्रेडिट, कांग्रेसी सब चुराते हैं।
एक तरफ मंदिरों का सोना गायब, दूसरी तरफ आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी दिल्ली जाकर सोनिया गांधी से मुलाकात करता है। केरल के मंत्री तक छापे और गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, लेकिन गांधी परिवार हमेशा की तरह चुप।
इमरजेंसी में देश की जनता को जेल में ठूंसकर सोना और संपत्ति हड़पने का काम हुआ। 1976 के प्रतापगढ़ वाले किस्से आज भी याद हैं। 1962 के युद्ध में देश के सिर पर संकट था, तब भी सोने का खेल चला।
अब वही परिवार नैतिकता का पाठ पढ़ाता है। राहुल गांधी वोट चोरी का शोर मचाते हैं, जबकि उनका अपना परिवार दशकों से देश का सोना, जमीन और संस्थान हड़पता रहा है। नेशनल हेराल्ड हो या मंदिरों का सोना, पैटर्न एक ही है, जनता का माल परिवार की तिजोरी में।
देश देख रहा है। सोना चोर परिवार अब नैतिकता का पाठ मत पढ़ाओ।
कांग्रेस आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से कांग्रेस क्या-क्या किया ये बताया जा रहा है। लेकिन कांग्रेस ये क्यों नही बता रही है, कि प्रियंका गांधी और उनके पती रॉबर्ट वाड्रा ने ₹80 करोड रूपए टैक्स के डकार चुके है। इतना ही नही आज तक गांधी परिवार ने कांग्रेस मुख्यालय का बकाया किराया है। 1/2
RAW had already informed the Congress government about the 26/11 terrorist attack, but the Congress government did not take any steps to prevent the attack.
After 26/11, when the Indian Army wanted to carry out a retaliatory action against Pakistan, the Congress government stopped the Army.
Today, Rahul Gandhi is mocking Prime Minister @narendramodi ji’s foreign policy. He should first read the dark history of Congress.
It is hard to understand what kind of relationship exists between Congress and Pakistan that Congress has been maintaining with all its heart and soul.
The Congress government had given Pakistan ₹215 crore and hundreds of tonnes of food grains. The terrorists of that same Pakistan carried out the 26/11 attack.
In 2008, when Pakistan was carrying out terrorist attacks and blasts in India, Sonia Gandhi and Rahul Gandhi met the Bhutto family in Beijing. Was any secret deal made between the Gandhi family and the Bhutto family under which the Congress government gave money and food grains to Pakistan?
RAW had already informed the Congress government about the 26/11 terrorist attack, but the Congress government did not take any steps to prevent the attack.
After 26/11, when the Indian Army wanted to carry out a retaliatory action against Pakistan, the Congress government stopped the Army.
Today, Rahul Gandhi is mocking Prime Minister @narendramodi ji’s foreign policy. He should first read the dark history of Congress.
It is hard to understand what kind of relationship exists between Congress and Pakistan that Congress has been maintaining with all its heart and soul.
The Congress government had given Pakistan ₹215 crore and hundreds of tonnes of food grains. The terrorists of that same Pakistan carried out the 26/11 attack.
In 2008, when Pakistan was carrying out terrorist attacks and blasts in India, Sonia Gandhi and Rahul Gandhi met the Bhutto family in Beijing. Was any secret deal made between the Gandhi family and the Bhutto family under which the Congress government gave money and food grains to Pakistan?
An accident victim lay on the road for hours, only so that Keralam Chief Minister V.D. Satheesan’s convoy could arrive and photographs could be taken. This is not governance; it is a display of callousness.
Public service does not mean a photo-op. Immediate first aid and rushing an injured citizen to hospital is the first duty, not making him wait for a leader to arrive. If this scene is true, it is one of the most shameful examples of the arrogance of power and PR culture.
The office of Chief Minister is a constitutional responsibility, not a platform for image management. Turning the people’s suffering into publicity material is an insult to democracy. Such an incident is not expected from a state like Keralam.
A responsible government is one that first shows humanity, and only then the camera.
#VDSatheesan #KeralaCM #PublicServiceNotPR #Kerala #Congress
𝐓𝐇𝐄 “𝐈𝐑𝐎𝐍 𝐋𝐀𝐃𝐘” 𝐖𝐇𝐎 𝐃𝐈𝐕𝐈𝐃𝐄𝐃 𝐏𝐀𝐊𝐈𝐒𝐓𝐀𝐍 𝐈𝐍𝐓𝐎 𝐓𝐖𝐎 𝐏𝐀𝐑𝐓𝐒 𝐖𝐀𝐒 𝐒𝐋𝐀𝐏𝐏𝐄𝐃 𝐒𝐈𝐗 𝐓𝐈𝐌𝐄𝐒 𝐁𝐘 𝐇𝐄𝐑 𝐎𝐖𝐍 𝐒𝐎𝐍 𝐒𝐀𝐍𝐉𝐀𝐘 𝐆𝐀𝐍𝐃𝐇𝐈.
Can any leader of a family whose members do not respect their own mother protect “𝐌𝐨𝐭𝐡𝐞𝐫 𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚” after becoming the Prime Minister of India?
@ShwetaSoni2510 You should also tell the public the history of Sukanya Devi and her family. And it should also be told what happened to Sukanya Devi and who did it. Today the people of the country also want to know where Sukanya Devi and her family are.
https://t.co/b7koSzX8dW
नेता प्रतिपक्ष का पहला कर्तव्य संसद, संविधान और भारत के नागरिकों के प्रति है। जब संसद सत्र चल रहा हो और देश के अंदर गंभीर मुद्दे लंबित हों, तब बार-बार विदेश जाकर उन वैश्विक मंचों पर सक्रिय रहना जिनकी विचारधारा राष्ट्रवाद, संप्रभुता और चुनी हुई सरकारों के प्रति संदेह रखती है, यह सामान्य कूटनीति नहीं, प्राथमिकताओं का सवाल है।
कांग्रेस प्रोग्रेसिव अलायंस की सदस्य है और श्री राहुल गांधी उसके प्रेसीडियम में एशिया के प्रतिनिधियों में शामिल बताए जाते हैं। यही संगठन खुले समाज, सीमाहीन प्रगतिशीलता और राष्ट्र-राज्य की पारंपरिक अवधारणा पर सवाल उठाने वाली वैश्विक धारा से जुड़ा माना जाता है। बार-बार सोरोस-समर्थित संस्थानों से जुड़े व्यक्तियों से मुलाकातें और संसद छोड़कर ऐसे सम्मेलनों में उपस्थिति इन तथ्यों को महज संयोग कहकर टाल देना पर्याप्त नहीं है।
देश को साफ जवाब चाहिए:
संसद में उपस्थिति और विधायी जिम्मेदारी बनाम वैश्विक प्रगतिशील नेटवर्क प्राथमिकता क्या है?
भारत की आंतरिक राजनीति, चुनावी प्रक्रिया और आर्थिक नीतियों पर विदेशी वैचारिक प्रभाव कहाँ तक स्वीकार्य है?
कांग्रेस इन संबंधों की पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाती? धन, विचारधारा और एजेंडे का स्रोत क्या है?
विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करना है, लेकिन आलोचना का आधार राष्ट्रीय हित होना चाहिए, न कि उस वैश्विक धारा का प्रवक्ता बनना जिसे भारत विरोधी एजेंडे से जोड़ा जाता है। सोनिया गांधी के परिवार की राजनीति लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों से जुड़ी रही है। अब जब नेता प्रतिपक्ष स्वयं ऐसे मंचों का चेहरा बन रहे हैं, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि वे भारत के हितों की रक्षा कर रहे हैं या किसी बड़े वैश्विक प्रोजेक्ट के स्थानीय प्रतिनिधि बन गए हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर ये प्रश्न वैध हैं। इन्हें “प्रोपगैंडा” कहकर खारिज करना पर्याप्त नहीं होगा। कांग्रेस और श्री राहुल गांधी को स्पष्ट, दस्तावेजी जवाब देना चाहिए।
#RahulGandhi #Congress #ProgressiveAlliance #NationalInterest #Accountability
जब हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी किसी देश में दौरे पर जाते हैं, तो उन्हें वो देश अपने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित करता है।
नहीं तो कांग्रेस एक प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे, जब वो श्रीलंका के दौरे पर गये थे, तो उन्हें ये सम्मान श्रीलंका द्वारा दिया गया था। 👇
राहुल गांधी देशभर में छात्रों की गुंज कर रहे हैं, लेकिन हमारे देश के जो छात्र है और जो GenZ है उनका राहुल गांधी के बारे में क्या कहना है वो इन GenZ से सुन लो।
राहुल गांधी को लगता है कि वो छात्रों की गुंज में प्रधानमंत्री @narendramodi जी को अपमानित करने से GenZ उन्हें वोट देंगे।
लेकिन जो बात राहुल गांधी को समझ नहीं आई वो बात हमारे देश के GenZ समझ चुकें हैं। हमारे देश के GenZ किसी भी हाल में देश के प्रधानमंत्री का अपमान सहन नहीं करेंगे।
राहुल गांधी और कांग्रेसियों को समझना चाहिए देश की जनता आपकी बकवास नहीं बल्कि मोदी जी का Hello Friends कनेक्ट, डिजिटल ड्रीम, ग्लोबल लीडरशिप और तेज फैसले युवा इन्हीं चीजों से जुड़ रहे हैं। विकास दिखता है, काम दिखता है, दिशा दिखती है। इसलिए सवाल जब राहुल गांधी पर आया तो जवाब घुमाया नहीं गया सीधा जवाब दिया गया था।
नेता प्रतिपक्ष का पहला कर्तव्य संसद, संविधान और भारत के नागरिकों के प्रति है। जब संसद सत्र चल रहा हो और देश के अंदर गंभीर मुद्दे लंबित हों, तब बार-बार विदेश जाकर उन वैश्विक मंचों पर सक्रिय रहना जिनकी विचारधारा राष्ट्रवाद, संप्रभुता और चुनी हुई सरकारों के प्रति संदेह रखती है, यह सामान्य कूटनीति नहीं, प्राथमिकताओं का सवाल है।
कांग्रेस प्रोग्रेसिव अलायंस की सदस्य है और श्री राहुल गांधी उसके प्रेसीडियम में एशिया के प्रतिनिधियों में शामिल बताए जाते हैं। यही संगठन खुले समाज, सीमाहीन प्रगतिशीलता और राष्ट्र-राज्य की पारंपरिक अवधारणा पर सवाल उठाने वाली वैश्विक धारा से जुड़ा माना जाता है। बार-बार सोरोस-समर्थित संस्थानों से जुड़े व्यक्तियों से मुलाकातें और संसद छोड़कर ऐसे सम्मेलनों में उपस्थिति इन तथ्यों को महज संयोग कहकर टाल देना पर्याप्त नहीं है।
देश को साफ जवाब चाहिए:
संसद में उपस्थिति और विधायी जिम्मेदारी बनाम वैश्विक प्रगतिशील नेटवर्क प्राथमिकता क्या है?
भारत की आंतरिक राजनीति, चुनावी प्रक्रिया और आर्थिक नीतियों पर विदेशी वैचारिक प्रभाव कहाँ तक स्वीकार्य है?
कांग्रेस इन संबंधों की पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाती? धन, विचारधारा और एजेंडे का स्रोत क्या है?
विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करना है, लेकिन आलोचना का आधार राष्ट्रीय हित होना चाहिए, न कि उस वैश्विक धारा का प्रवक्ता बनना जिसे भारत विरोधी एजेंडे से जोड़ा जाता है। सोनिया गांधी के परिवार की राजनीति लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों से जुड़ी रही है। अब जब नेता प्रतिपक्ष स्वयं ऐसे मंचों का चेहरा बन रहे हैं, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि वे भारत के हितों की रक्षा कर रहे हैं या किसी बड़े वैश्विक प्रोजेक्ट के स्थानीय प्रतिनिधि बन गए हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर ये प्रश्न वैध हैं। इन्हें “प्रोपगैंडा” कहकर खारिज करना पर्याप्त नहीं होगा। कांग्रेस और श्री राहुल गांधी को स्पष्ट, दस्तावेजी जवाब देना चाहिए।
#RahulGandhi #Congress #ProgressiveAlliance #NationalInterest #Accountability
नेता प्रतिपक्ष का पहला कर्तव्य संसद, संविधान और भारत के नागरिकों के प्रति है। जब संसद सत्र चल रहा हो और देश के अंदर गंभीर मुद्दे लंबित हों, तब बार-बार विदेश जाकर उन वैश्विक मंचों पर सक्रिय रहना जिनकी विचारधारा राष्ट्रवाद, संप्रभुता और चुनी हुई सरकारों के प्रति संदेह रखती है, यह सामान्य कूटनीति नहीं, प्राथमिकताओं का सवाल है।
कांग्रेस प्रोग्रेसिव अलायंस की सदस्य है और श्री राहुल गांधी उसके प्रेसीडियम में एशिया के प्रतिनिधियों में शामिल बताए जाते हैं। यही संगठन खुले समाज, सीमाहीन प्रगतिशीलता और राष्ट्र-राज्य की पारंपरिक अवधारणा पर सवाल उठाने वाली वैश्विक धारा से जुड़ा माना जाता है। बार-बार सोरोस-समर्थित संस्थानों से जुड़े व्यक्तियों से मुलाकातें और संसद छोड़कर ऐसे सम्मेलनों में उपस्थिति इन तथ्यों को महज संयोग कहकर टाल देना पर्याप्त नहीं है।
देश को साफ जवाब चाहिए:
संसद में उपस्थिति और विधायी जिम्मेदारी बनाम वैश्विक प्रगतिशील नेटवर्क प्राथमिकता क्या है?
भारत की आंतरिक राजनीति, चुनावी प्रक्रिया और आर्थिक नीतियों पर विदेशी वैचारिक प्रभाव कहाँ तक स्वीकार्य है?
कांग्रेस इन संबंधों की पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाती? धन, विचारधारा और एजेंडे का स्रोत क्या है?
विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करना है, लेकिन आलोचना का आधार राष्ट्रीय हित होना चाहिए, न कि उस वैश्विक धारा का प्रवक्ता बनना जिसे भारत विरोधी एजेंडे से जोड़ा जाता है। सोनिया गांधी के परिवार की राजनीति लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों से जुड़ी रही है। अब जब नेता प्रतिपक्ष स्वयं ऐसे मंचों का चेहरा बन रहे हैं, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि वे भारत के हितों की रक्षा कर रहे हैं या किसी बड़े वैश्विक प्रोजेक्ट के स्थानीय प्रतिनिधि बन गए हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर ये प्रश्न वैध हैं। इन्हें “प्रोपगैंडा” कहकर खारिज करना पर्याप्त नहीं होगा। कांग्रेस और श्री राहुल गांधी को स्पष्ट, दस्तावेजी जवाब देना चाहिए।
#RahulGandhi #Congress #ProgressiveAlliance #NationalInterest #Accountability
@TheAnilkumarG94 आपल्या देशात जॉर्ज सोरोस आणि डीप स्टेट चे अनेक एजेंट येतील आणि जातील पण असा एजेंट कधीच झाला नाही आणि कधी होणार पण नाही...!
https://t.co/0rIJphBYS7
नेता प्रतिपक्ष का पहला कर्तव्य संसद, संविधान और भारत के नागरिकों के प्रति है। जब संसद सत्र चल रहा हो और देश के अंदर गंभीर मुद्दे लंबित हों, तब बार-बार विदेश जाकर उन वैश्विक मंचों पर सक्रिय रहना जिनकी विचारधारा राष्ट्रवाद, संप्रभुता और चुनी हुई सरकारों के प्रति संदेह रखती है, यह सामान्य कूटनीति नहीं, प्राथमिकताओं का सवाल है।
कांग्रेस प्रोग्रेसिव अलायंस की सदस्य है और श्री राहुल गांधी उसके प्रेसीडियम में एशिया के प्रतिनिधियों में शामिल बताए जाते हैं। यही संगठन खुले समाज, सीमाहीन प्रगतिशीलता और राष्ट्र-राज्य की पारंपरिक अवधारणा पर सवाल उठाने वाली वैश्विक धारा से जुड़ा माना जाता है। बार-बार सोरोस-समर्थित संस्थानों से जुड़े व्यक्तियों से मुलाकातें और संसद छोड़कर ऐसे सम्मेलनों में उपस्थिति इन तथ्यों को महज संयोग कहकर टाल देना पर्याप्त नहीं है।
देश को साफ जवाब चाहिए:
संसद में उपस्थिति और विधायी जिम्मेदारी बनाम वैश्विक प्रगतिशील नेटवर्क प्राथमिकता क्या है?
भारत की आंतरिक राजनीति, चुनावी प्रक्रिया और आर्थिक नीतियों पर विदेशी वैचारिक प्रभाव कहाँ तक स्वीकार्य है?
कांग्रेस इन संबंधों की पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाती? धन, विचारधारा और एजेंडे का स्रोत क्या है?
विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करना है, लेकिन आलोचना का आधार राष्ट्रीय हित होना चाहिए, न कि उस वैश्विक धारा का प्रवक्ता बनना जिसे भारत विरोधी एजेंडे से जोड़ा जाता है। सोनिया गांधी के परिवार की राजनीति लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों से जुड़ी रही है। अब जब नेता प्रतिपक्ष स्वयं ऐसे मंचों का चेहरा बन रहे हैं, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि वे भारत के हितों की रक्षा कर रहे हैं या किसी बड़े वैश्विक प्रोजेक्ट के स्थानीय प्रतिनिधि बन गए हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर ये प्रश्न वैध हैं। इन्हें “प्रोपगैंडा” कहकर खारिज करना पर्याप्त नहीं होगा। कांग्रेस और श्री राहुल गांधी को स्पष्ट, दस्तावेजी जवाब देना चाहिए।
#RahulGandhi #Congress #ProgressiveAlliance #NationalInterest #Accountability
@T_RexRoars राहुल गांधी झूठ की गुंज करते हुए देश-भर में घुम रहे हैं फिर क्यों DUSU में NSUI का सुपड़ा साफ हो गया? वहां तो ईवीएम भी नहीं था, तो इस बार क्या हैक हो गया?
https://t.co/SzEEwjy4vW
राहुल गांधी देशभर में छात्रों की गुंज कर रहे हैं, लेकिन हमारे देश के जो छात्र है और जो GenZ है उनका राहुल गांधी के बारे में क्या कहना है वो इन GenZ से सुन लो।
राहुल गांधी को लगता है कि वो छात्रों की गुंज में प्रधानमंत्री @narendramodi जी को अपमानित करने से GenZ उन्हें वोट देंगे।
लेकिन जो बात राहुल गांधी को समझ नहीं आई वो बात हमारे देश के GenZ समझ चुकें हैं। हमारे देश के GenZ किसी भी हाल में देश के प्रधानमंत्री का अपमान सहन नहीं करेंगे।
राहुल गांधी और कांग्रेसियों को समझना चाहिए देश की जनता आपकी बकवास नहीं बल्कि मोदी जी का Hello Friends कनेक्ट, डिजिटल ड्रीम, ग्लोबल लीडरशिप और तेज फैसले युवा इन्हीं चीजों से जुड़ रहे हैं। विकास दिखता है, काम दिखता है, दिशा दिखती है। इसलिए सवाल जब राहुल गांधी पर आया तो जवाब घुमाया नहीं गया सीधा जवाब दिया गया था।
राहुल गांधी देशभर में छात्रों की गुंज कर रहे हैं, लेकिन हमारे देश के जो छात्र है और जो GenZ है उनका राहुल गांधी के बारे में क्या कहना है वो इन GenZ से सुन लो।
राहुल गांधी को लगता है कि वो छात्रों की गुंज में प्रधानमंत्री @narendramodi जी को अपमानित करने से GenZ उन्हें वोट देंगे।
लेकिन जो बात राहुल गांधी को समझ नहीं आई वो बात हमारे देश के GenZ समझ चुकें हैं। हमारे देश के GenZ किसी भी हाल में देश के प्रधानमंत्री का अपमान सहन नहीं करेंगे।
राहुल गांधी और कांग्रेसियों को समझना चाहिए देश की जनता आपकी बकवास नहीं बल्कि मोदी जी का Hello Friends कनेक्ट, डिजिटल ड्रीम, ग्लोबल लीडरशिप और तेज फैसले युवा इन्हीं चीजों से जुड़ रहे हैं। विकास दिखता है, काम दिखता है, दिशा दिखती है। इसलिए सवाल जब राहुल गांधी पर आया तो जवाब घुमाया नहीं गया सीधा जवाब दिया गया था।
देश की आंतरिक राजनीति में विदेशी प्रभाव का सवाल अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाल ही में एक टेलीविजन चर्चा में एंकर ने कांग्रेस प्रवक्ता के सामने स्पष्ट तथ्य रखे। हिंडनबर्ग रिसर्च और OCCRP जैसी रिपोर्ट्स अक्सर संसद सत्र से ठीक पहले आती हैं। इसके तुरंत बाद विपक्ष इन्हीं रिपोर्ट्स को आधार बनाकर हमला बोलता है। समय का यह संयोग संयोग मात्र नहीं लगता।
चर्चा में कांग्रेस पक्ष की ओर से इन तथ्यों का सीधा जवाब देने के बजाय जॉर्ज सोरोस का बचाव किया गया। जब कोई राजनीतिक दल विदेशी फंडिंग वाले संगठनों के नैरेटिव को बिना स्वतंत्र जांच के अपनाता दिखता है, तो राष्ट्रहित को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
भारत एक संप्रभु राष्ट्र है। किसी भी राजनीतिक दल का एजेंडा देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक समरसता से ऊपर नहीं हो सकता। विपक्ष का कर्तव्य सरकार की आलोचना करना है, विदेशी शक्तियों के एजेंडे को आगे बढ़ाना नहीं।
देश की जनता अब इन पैटर्न को समझ रही है। राजनीति राष्ट्रहित से ऊपर नहीं होनी चाहिए।
देश की आंतरिक राजनीति में विदेशी प्रभाव का सवाल अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाल ही में एक टेलीविजन चर्चा में एंकर ने कांग्रेस प्रवक्ता के सामने स्पष्ट तथ्य रखे। हिंडनबर्ग रिसर्च और OCCRP जैसी रिपोर्ट्स अक्सर संसद सत्र से ठीक पहले आती हैं। इसके तुरंत बाद विपक्ष इन्हीं रिपोर्ट्स को आधार बनाकर हमला बोलता है। समय का यह संयोग संयोग मात्र नहीं लगता।
चर्चा में कांग्रेस पक्ष की ओर से इन तथ्यों का सीधा जवाब देने के बजाय जॉर्ज सोरोस का बचाव किया गया। जब कोई राजनीतिक दल विदेशी फंडिंग वाले संगठनों के नैरेटिव को बिना स्वतंत्र जांच के अपनाता दिखता है, तो राष्ट्रहित को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
भारत एक संप्रभु राष्ट्र है। किसी भी राजनीतिक दल का एजेंडा देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक समरसता से ऊपर नहीं हो सकता। विपक्ष का कर्तव्य सरकार की आलोचना करना है, विदेशी शक्तियों के एजेंडे को आगे बढ़ाना नहीं।
देश की जनता अब इन पैटर्न को समझ रही है। राजनीति राष्ट्रहित से ऊपर नहीं होनी चाहिए।