कल जयपुर में राजस्थान के यशस्वी पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री मान अशोक जी गहलोत ने अपने निवास स्थान 49 ,सिविल लाइन में कांग्रेस सोशल मीडिया से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ बैठक ली एवं सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी को मजबूत करने व सत्य कि राह पर चलते हुए,सही कंटेंट को सोशल मीडिया पर डालने कि सीख दी, साथ ही जनहित और सोशल मीडिया के मुद्दों पर संवाद किया! @ashokgehlot51@iRishabhKSharma@ShashiK_Sharma
"समय की आवश्यकता के मुताबिक हर संभाग में खोला जाना चाहिए क्षेत्रीय कैंसर संस्थान।"
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव और इसके सफल निदान के लिए समय पर स्क्रीनिंग सर्वाधिक आवश्यक है। स्क्रीनिंग जितनी जल्दी और सटीक होगी, इलाज की प्रक्रिया उतनी ही प्रभावी रूप से शुरू हो सकेगी। प्रदेश में ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामले बेहद चिंता का विषय हैं।
आज के समाचार पत्रों में प्रकाशित कैंसर से संबंधित समाचार तथा ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग वैन की कमियों को उजागर करने वाली रिपोर्ट राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्वास्थ्य विभाग को इस खुलासे पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और इन तकनीकी व प्रशासनिक कमियों को अविलंब दूर करना चाहिए।
इसमें कोई शक नहीं कि कैंसर ने अब लगभग एक महामारी का रूप ले लिया है। हमारी कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में इसे गंभीरता से लेते हुए जयपुर के प्रताप नगर में 'स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट' बनाया और 2022 में जोधपुर में 'क्षेत्रीय कैंसर संस्थान' का काम भी शुरू करवाया था जो अब सरकार बदलने के बाद बहुत धीमा हो गया है। अब वक्त की जरूरत है कि हर संभाग पर क्षेत्रीय कैंसर संस्थान बनाने की दिशा में काम हो।
हमने विभिन्न बजट घोषणाओं के जरिए यह सुनिश्चित किया था कि कैंसर की महंगी दवाएं आम आदमी की पहुँच में हों। आज इलाज में AI जैसी आधुनिक तकनीक की बड़ी भूमिका है, जिससे शुरुआती लक्षणों का जल्द पता लगाया जा सकता है। वर्तमान सरकार को स्क्रीनिंग में इन तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए।
मेरी सभी प्रदेशवासियों से अपील है कि समय-समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच अवश्य करवाएं। शरीर में कोई भी लक्षण नजर आने पर डरें या झिझकें नहीं, तुरंत डॉक्टर से मिलें। संकोच न करें, क्योंकि समय पर इलाज मिलने से अनमोल जीवन को निश्चित रूप से बचाया जा सकता है।
राजस्थान में अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान और उनका अध्ययन स्वागत योग्य है। यदि हमारे विश्वविद्यालयों में मराठी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, कन्नड़ जैसी समृद्ध भाषाओं के केंद्र खुलेंगे तो इससे भाषाई विविधता मजबूत होगी और 'राष्ट्रीय एकता' (National Integration) की भावना को बल मिलेगा।
लेकिन यह चिंता का विषय है कि आज प्रदेश के मात्र 4 विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा का अलग विभाग है। मैं राज्य सरकार और राजभवन से आग्रह करता हूँ कि बाहरी भाषाओं से पहले प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में 'राजस्थानी' भाषा के विभाग और अध्ययन केंद्र स्थापित कर इसे मजबूत किया जाए।
हमारी कांग्रेस सरकार ने 25 अगस्त 2003 को विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मेवाती, बृज, वागड़ी, मालवी और शेखावाटी जैसी समृद्ध बोलियों सहित 'राजस्थानी भाषा' को संवैधानिक दर्जा दिलाने की जो मुहिम शुरू की थी। केंद्र सरकार राजस्थानी भाषा को अविलंब 8वीं अनुसूची में शामिल कर संवैधानिक मान्यता दे। मायड़ भाषा का सम्मान और इसका संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
@arvindchotia लेकिन सबसे बड़ी बात राजस्थान के मुख्या भी इस मुद्दे पर नहीं बोल रहें हैं हम राजस्थानवासियों के लिए राजस्थानी भाषा महत्वपूर्ण होनी चाहिए, राजस्थानी भाषा के केन्द्र खुलनें चाहिए, लेकिन राजस्थानी भाषा को छोड़ मराठी क्यों ?
प्रदेश सरकार के लिए इससे अधिक शर्मनाक स्थिति और क्या होगी कि पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही जानबूझकर देरी पर माननीय हाईकोर्ट को यहाँ तक कहना पड़ रहा है कि 'आयोग चुनाव नहीं करवा सकता तो बताएं, जज करवा देंगे।' यह सरकार की घोर प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।
राज्य निर्वाचन आयोग का यह कथन बेहद गंभीर और चिंताजनक है कि पंचायती राज विभाग को 6 चिट्ठियाँ लिखने के बावजूद SC, ST, OBC और महिला आरक्षण संबंधी जानकारी नहीं दी गई। यह स्पष्ट दर्शाता है कि सरकार के दबाव में पंचायतीराज विभाग ने ऐसा किया और सरकार की मंशा ही चुनाव करवाने की नहीं है और वह संवैधानिक संस्थाओं को पंगु बना रही है।
माननीय न्यायालय के आदेशों की बार-बार अवहेलना करना संविधान और न्यायपालिका का सीधा अपमान है। जो सरकार न्यायपालिका का सम्मान न कर सके और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को रोके, उसे एक पल भी सत्ता में बने रहने का नैतिक और संवैधानिक अधिकार नहीं है। लोकतंत्र के लिए यह स्थिति बेहद घातक है।
कांग्रेस पार्टी के कट्टर समर्थक, सोशल मीडिया के साथी भाई @Jeetuburdak जी को जन्मदिन कि हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु कि मंगल कामना करता हूं
Happy Birthday Bhai sahab 🎂
देश-दुनिया में राजस्थानी गानों को एक नई पहचान दिलाने वाले, वीणा कैसेट्स के मालिक और सुर संगम के संस्थापक, मेरे पारिवारिक मित्र श्री के सी मालू का आकस्मिक निधन बेहद दुखद है।
पिछले सप्ताह ही 49, सिविल लाइंस आवास पर मेरी उनसे मुलाकात और लम्बी बातचीत हुई थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन संगीत जगत के लिए समर्पित किया। उनका निधन हम सबके लिए एक बड़ी क्षति है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुख सहने की शक्ति दें।
"भाजपा का महिलाओं के साथ धोखा"
भाजपा का 'डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर' से 'डायरेक्ट वोट ट्रांसफर' मॉडल अब देश के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। इनकी नीयत साफ है: चुनाव से ठीक पहले जनता को पैसों का लालच दो और सत्ता हासिल होते ही अपना मतलब साधकर उन्हें दरकिनार कर दो।
महाराष्ट्र में 'लाडकी बहीण योजना' के नाम पर वोट बटोरे और चुनाव बीतते ही 92 लाख महिलाओं के नाम एक झटके में काट दिए गए। मध्य प्रदेश में भी 'लाडली बहना' योजना का ढिंढोरा पीटने के बाद अब केवाईसी के बहाने लाखों बहनों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब बिहार में चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये डाले गए और चुनाव जीतते ही 'तकनीकी खामी' का बहाना बनाकर रिकवरी के नोटिस भेजे जाने लगे।
वोट के लिए सरकारी खजाने की ऐसी खुली लूट और चुनाव के बाद जनता के साथ ऐसा भद्दा धोखा सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही कर सकती है। लोकतंत्र में देश की जनता इस फरेब को साफ-साफ देख रही है और वोट की खरीद-फरोख्त को देखकर भी चुनाव आयोग तथा सुप्रीम कोर्ट मूकदर्शक बने हुए हैं।
प्रदेश में प्रसूताओं की मौतों की बढ़ती संख्या बेहद डरावनी, स्तब्ध करने वाली और जन स्वास्थ्य सेवा के गहराते संकट की पुष्टि कर रही है। अब बांसवाड़ा से 4 प्रसूताओं की मौत के बाद दो माह में 18 मौतों की खबर है। सरकार की ओर से कोई जवाबदेही नहीं होना स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
इस संकट को संभालना, प्रसूताओं की जान बचाना और स्वास्थ्य प्रणाली में विश्वास को वापस लौटाना इस सरकार के बस से बाहर हो चुका है। इस सरकार की असंवेदनशीलता और गैर जवाबदेही इस संकट को बढ़ा रही है।
मैंने कल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम को राजस्थान भेजने की मांग की थी, केंद्र सरकार को इस हालात पर गंभीरता से विचार कर तुरंत सुधारात्मक कदम लेने होंगे वरना न जाने और कितनी प्रसूताएं दम तोड़ देंगी।
आज जयपुर में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा सिंह से मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम पूछी।
मैं ईश्वर से श्रीमती सुमित्रा सिंह के जल्द स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूं।
प्रदेश में कमजोर मानसून और बारिश की कमी से खरीफ की बुआई में आई भारी गिरावट चिंता का विषय है। 34 जिलों के किसान संकट का सामना कर रहे हैं और लाखों हेक्टेयर भूमि अब तक बिना बुआई के है। सरकार तत्काल विशेष कार्ययोजना बनाकर किसानों को बीज, सिंचाई, बिजली और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराए, ताकि फसल और अन्नदाता दोनों सुरक्षित रह सकें।
@RajCMO@BhajanlalBjp