'मेरे एक दो नंबर कम आते तो अच्छा रहता. मुझे अपने चेहरे पर उगे लंबे बालों का अहसास पहली बार हाईस्कूल बोर्ड में टॉप करने पर ट्रोल करने वालों ने ही करवाया'
यूपी बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में टॉप करने वाली प्राची की कहानी...
रिपोर्ट : नीतू सिंह
शूट : यश सचदेव
एडिट : शाहनवाज़ अहमद
#Watch | #Paytm ने रेगुलेटर से लिया पंगा तो अर्श से फर्श पर आ गई कंपनी, #RBI के एक्शन और उसके रिएक्शन की पूरी कहानी, देखिए रेगुलेटर्स के बड़े और कड़े फैसलों पर #NDTVProfit हिंदी की खास सीरीज का पहला एपिसोड
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सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है.दो मजदूर बाहर निकाल लिए गए हैं.
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#WATCH | त्योहारों के सीजन में कितना चमक रहा है दिल्ली का ज्वेलरी मार्केट और सोने की कीमतों का शॉपिंग पर कितना है असर?
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On 30 September we recorded atmospheric fluctuations that included parts of and near Pakistan. This is correct. It can be an indicator of an upcoming stronger tremor (as was the case with Morocco). But we cannot say with certainty that it will happen.
केसरिया हिंदू वस्त्र नही है ...
यह बौद्ध सिंबल है। बुद्ध के चीवर का रंग..
श्वेत-वसन जैन साधुओं से अलग दिखने के लिए, चैत्य विहारों मे भिक्खुओं की अलग यूनिफार्म तय हुई।के दूर से ही दिखे -
देखो, बौद्ध आ रहा है।
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सिंधु घाटी सभ्यता के बाद, 500 सौ साल एक अंधकार का युग है। क्या हुआ इस दौर मे, कोई नही जानता।
इसके बाद वैदिक संस्कृति का दौर है। ये गांव मे बसने वाले कबीले है, गौपालन करते हैं, खेती करते है। प्रकृति की पूजा करते हैं।
सूर्य देव, चन्द्र देव, अग्नि देव, पवन देव, जल देव, गंगा माता, जमुना माता, सरस्वती माता ... हर शै का एक देवता है, देवी है।
वेदों में ,वैदिक धर्म मे मंदिर का कोई कंसेप्ट ही नही।
हां जी। मंदिर वहीं बनाएंगे, वाले लोग अचरज मत खाइये। सचाई आप भी जानते है कि कोई कर्मकांड, मंदिर में नही होता। तमाम ऋषि मुनि जंगल मे रहते थे, मठ मन्दिर में नही। पेड़ के नीचे, नदी किनारे, मैदान या वन मे पवित्र अग्नि जलाइये।
और बस, स्वाहा से तथास्तु तक की यात्रा, उसी वेदि पर कीजिए।
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ये फ्रीडम है। हम आजाद है, हमारा ईश्वर भी आजाद है। ब्रम्ह किसी भवन में बंधा नही, वो मूरत में कैद नही।
वो सर्वत्र है। लेकिन इस धर्म मे एक समस्या आती है। इसमे जातियां आती हैं, जिनमे उंच नीच होती है। तिरस्कार, विषेशाधिकार, शोषण बाकायदा इंस्टीट्यूशनलाइज हो जाते है।
तो जाहिर है इसका रेबेलियन भी होना है। हुआ, और फिर इतिहास कहता है कि वैदिक धर्म से अलग कोई फलसफा और संप्रदाय बनाने वाले आजीवक थे।
लेकिन स्पस्ट रूप से पहली बार वैदिक फलसफों से अलग कोई धर्म बना, तो वो जैन थे। अहिंसा, सत्य, ज्ञान, शांति ...
और सबसे लोकप्रिय बात - समानता।
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लेकिन जैन धर्म तब एलीट, बौद्धिक, जागरूक लोगो को आकर्षित करता था।
असल समाजवाद बुद्ध लाये। समाज की निचली पिछड़ी जातियो को धम्म मे प्रवेश दिया। संघ मे स्थान दिया।
बुद्ध की शरण, धम्म की शरण, संघ की शरण..
सबको बराबर उपलब्ध थी। और समानता को प्रोनाउंस करने लिए सबकी एक यूनिफार्म थी - फ्रेश आरेंज यलो।
देयरफ़ॉर एवरीबडी हैज टू वियर,
आरेंज यलो चीवर ..
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इसके पहले सफेद रंग का बोलबाला था।
सफेद क्यों??
सफेद, कपास का रंग है। वीविंग के बाद कोई कलर न लगाया तो कपास सफेद ही रहे
लेकिन आपको कुछ चटक-मटक चाहिए, तो कपास के कपड़े को रंग लीजिए- नीला, पीला, हरा, गुलाबी, कच्चा पक्का रंग।
आम आदमी के चटक मटक वस्त्र रंगीन थे। यह रंग बिरंगापन ही असल धड़कता भारत था। इससे विरक्त, अलग रहने वाले वैदिक वानप्रस्थी, या जैन साधारण सफेद मे रहते।
ऐसे मे बुद्ध की टीम के लोग अलग कैसे दिखें।
सॉल्यूशन- भगवा !!
- क्षितिज में दूर से दिखे।
- वनो की हरियाली के बैक ग्राउंड मे दिखे,
- आम लोगो के आम वस्त्रो के बीच खिले
- अभिजात्यों के रंगों के बीच साधारण दिखे।
- कम्पटीशन में खड़े जैनियों से अलग दिखे
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और बुद्ध के साथ, बुद्ध का रंग भी इज्जत कमाने लगा। भगवे ने सम्मान कमाया।
देश देखते देखते बौद्ध होने लगा। भगवा घर घर फहराने लगा। बराबरी की बात करने वाला यह धर्म, वैदिक के समांतर, वैदिक से बड़ा जन आंदोलन हो गया।
याने पापुलर, राजनैतिक खतरा हो गया। तो इसको कन्ट्रोल की जरूरत हुई।
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एक दौर आया, जब बौद्धो को देशद्रोही घोषित कर दिया गया। बौद्ध भिक्खु खोज खोजकर मारे गए।
एक भिक्खु का सिर,
एक स्वर्णमुद्रा इनाम।
लेकिन भगवा वस्त्र, संबकांशस माइण्ड मे पवित्रता का प्रतीक तो हो चुका था। सो मारने वालो ने, भिक्खुओं की लाशो से चीवर उतार, खुद पहन लिया।
बुद्ध की धरती से बौद्ध मिट गए। लेकिन चीवर, त्याग और वैराग्य का प्रतीक बना रहा।
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वक्त का मजाक देखिए, गृहस्थ, धंधेबाज,और राजमहलो मे अधकचरे भोगी, चीवर पहनकर बैठे हैं।
स्वयं तमाम सुखों और और ऐशोआराम के बीच रहकर, भक्तजनों को वैराग्य का संदेश देते है।
बुद्ध के चीवर का रंग, आक्रामकता की पहचान बना दिया गया है।
क्योकि आप किसी को कपड़े से पहचानते है, तो वो भी आपको गमछे से पहचानता हैं।
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सामान्य धारणा है, कि गले मे भगवा गमछा है, तो उधार की सोच, उधार का फलसफा, उधार का सीमित ज्ञान होगा।
अडियल, गालीबाज, विघ्नसंतोंषी होने की संभावना है। दरअसल इज्जत रंग की नही होती, उसे पहनने वाले से रंग निखरता है।
और धूमिल भी होता है।
व्हाटसप ग्रुप से इतिहास, धर्म और राजनीति की "दूषित शिक्षा" लेकर आए इन मासूमों को कतई नही मालूम...
कि गमछे का केसरिया, पार्टी का सिंबल जरूर है
हिदुत्व का, भारत का..
ईश्वर का एकमात्र रंग नही है
#RebornManish
आई हैवन्ट डाइड येट!!
लन्दन, पार्लियामेंट स्क्वेयर पर टहलते हुए अचानक गांधी दिखे। आश्चर्य हुआ।ब्रिटिश क्राउन का सबसे बड़ा ज्वेल- हिंदुस्तान!! जिसने अंग्रेजों से छीना,
उस शख्स की तांबे की सजीव मूर्ति,अंग्रेजो ने अपनी संसद के सामने.. ऐसी आइकॉनिक लोकेशन पर लगाई है?
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मूर्ति की जानकारी न थी, कहीं पढ़ा न था। खोजा, तो पता चला, अभी 2015 में ही लगी। PM डेविड कैमरॉन ने, गांधी के अफ्रीका से भारत लौटने के शताब्दी वर्ष पर, अनावरण किया।
क्या ही विडंबना है, कि जब गांधी को नकारने का बवंडर भारत मे उठा, दुनिया में उनकी स्वीकृति बढ़ती जा रही है।
ये गांधी भारत का आइकन नही है। ये तो उनका निजी दैवत्व है।ईसा की आराधना, फिलिस्तीन की पूजा नही होती। फिलिस्तीन ईसा का, तो भारत गांधी का, रंगमंच भर है।
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रामचन्द्र गुहा ने 2013 में गांधी की जीवनी लिखी। प्रचार के लिए अमेरिका गये। कमरा साफ करने आये होटल कर्मचारी ने किताब पर तस्वीर देखी, पूछा- यह युवा गांधी हैं न??
वकील की पोशाक वाले गांधी को पहचाने जाने से विस्मित गुहा ने हामी भरी। कर्मचारी बोला- मेरे देश मे गांधी का बड़ा सम्मान है।
तो पूछने की बारी गुहा की थी- तुम्हारा देश??
-"डोमिनिकन रिपब्लिक"
गांधी ने डोमिनिक रिपब्लिक का नाम न सुना हो। लेकिन आज, डोमिनिकन रिपब्लिक को, गांधी का पता है।
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क्योकि गांधी का संदेश सत्य, सहिष्णुता, सत्याग्रह और मनुष्यता है। इनमे बुध्द, और ईसा की सततता है। ये सन्देश, किसी पॉलिटिशियन की यादगार स्पीच नही। जीवन है, जीवन शैली है।
उस दुनिया ने दो महायुद्ध देखे। पाया, कि जब भाषा,धर्म,रंग,रेस की उच्चता का झगड़ा, मानवता को विनाश के मुहाने तक ले जाये। तो थके मन को गांधी, मनुष्यता की तरफ लौटा लाते हैं।
अगर अमेरिका और तमाम यूरोप, गांधी को मानवता की रिसेंट मेमरी का मसीहा समझता है। तो भारत भूमि की इसमे हिस्सेदारी नहीं।
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गांधी की महानता, उनसे अभय में है। महान वही, जिसकी विशालताआतंकित न करे। जिसकी आप, आलोचना कर सकें।
तौल सकें। गांधी की अहिंसा को स्त्रैण बताया गया। निर्णयों पर सवाल हुए, यौन व्यवहार पर टिप्पणियां हुईं। गांधी पर तो हर किस्म का विमर्श खुला है।
पर चीन में माओ, पाकिस्तान में जिन्ना, वियतनाम में होची की आलोचना का विमर्श खुला नही। लिंकन और फ्रैंकलिन पर सवाल कर नही सकते।गांधी, नकारने के लिए उपलब्ध हैं।
उन्हें मानिये, मत मानिये। पर आप देखते है कि गांधी से दूर जाता हर मार्ग भयावह है। वह नफरत, विनाश की तरफ जाता है। कौतुक में आप कुछ दूर जाते हैं, औऱ खून का गुबार देख लौट आते हैं।
हाँ। आप मनुष्य है, तो आपको गांधी की ओर ही लौटना है।
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क्योकि गांधी आपकी ताकत है। गांधी, भीरुओ की ताकत है। आम, डरपोक, शांति चाहने वाला व्यक्ति, विरोध से डरता है, क्रांति से डरता है, हथियार उठाकर बढ़ने से डरता है।
जो कानून, पुलिस, जेल, सरकार और मौत से डरता है। गांधी उसे वहीं से उठाते हैं।
अहिंसक रहकर, निडरता से दिल की कहने का आग्रह करते हैं। निडरता, सत्य खुलने से,कर्तव्य जागने से आती है।औरों का दर्द महसूस करने, उसे दूर करने की जिम्मेदारी से आती है।
गांधी आपकी करुणा को जगाते हैँ। चरखा कातने को कहते है, कपड़ो की होली जलवाते हैं, नमक बनवाते हैं। मामूली कामों को प्रतिरोध का प्रतीक, और क्रांति का हथियार बना, हाथ मे थमा देते हैं।
आप जो बंदूक उठाने, हत्या करने से डरते हैं, बम नही चलाना चाहते, तकली चलाते हैं। आपके जैसे लाखों लोग चलाते हैं।अब चरखा सबका रंग है, मजहब है, भाषा है। यह एकीकृत प्रतिरोध है।
ये काम तो कोई गुनाह नही। इसके लिए आप जेल भी जाएं, तो भीतर अपराध बोध नही, गर्व होगा। और जब जेल जाना गर्व की बात बन जाये..
तो उस कौम को भला कब तक दबाया जा सकता है। यही बूंद बूंद प्रतिरोध का सागर,उस ब्साम्राज्य को बहा ले गया है।
जिसका सूर्य अस्त नही होता था।
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उसी पार्लियामेंट स्क्वेयर में चर्चिल की भी मूर्ति है। जिसने जमकर युद्ध लड़ा, साम्राज्य बचाया। वह चर्चिल, जिसने बंगाल का सारा चावल ब्रिटेन मंगाकर, 4 लाख लोगों को भूखा मार दिया।
जब इन मौतों की सूचना आई, तो फाइल नोटिंग पर पूछा- वाय हैवन्ट गांधी डाइड येट ???
लेकिन गांधी मरा नही। वह फैल गया, दुनिया के हर कोने में। आज ब्रिटेन सिकुड़ चुका है, और जितने देशो में गांधी की मूर्तियां लग चुकी, उस साम्राज्य में सूरज अस्त नही होता।
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आज भारत से उन्हें हटाने की कोशिशें है। लेकिन गांधी जरा भी नहीं हिलता। वह अपने कातिलों से निगाहें मिला रहा है,
ठठा रहा है, हिंदुस्तान में।
मैं देखता हूँ, वह लन्दन की संसद को भी देखकर मुस्कुरा रहा है। अगर आप सहसा सुन सकें, तो धीमी, गम्भीर सी आवाज आती है..
नो। आई हैवन्ट डाइड येट!!!!
बेटी को IFS बनना है..
ऐसे सपने का इन्सेप्शन, बीवी उसके दिमाग मे कर रही है। मुझसे भी योगदान करने की अपेक्षा की।
भोजन की मेज पर बात शुरू हुई।
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बेटी यूएन में रिप्रेजेंट करना कितना अच्छा लगेगा। फॉरेन में रहोगे, लैविश लाइफ स्टाइल, एम्बेसडर बन जाना.. ओपनिंग लाइन बीवी ने दी।
आगे मेरा मैदान था।
UPSC में टॉप के 10-12 सलेक्शन को विदेश सेवा मिल सकती है, यदि आपने वैसा प्रिफरेंस दिया है। इसके बाद ट्रेनिंग होती है। जैसे IAS मसूरी में और IPS हैदराबाद में होती है, IFS ट्रेनिंग दिल्ली में होती है।
आप भारतीय इतिहास, कल्चर, भारत की विदेश नीति के मुख्य टर्निंग पॉइंट, उसके स्टैंड और रेशनल को समझते है। फिर एक फॉरेन लैंग्वेज सीखनी होती है।
पसर्नलिटी महत्वपूर्ण है। बात, भाषा, वाइन पीना, ड्रेसिंग, कनवरेशन, जैसी चीजें होती है जो बकायदा सिखाई जाती हैं। उसके बाद प्रोबेशन पर साल भर के लिए विदेश भेजा जाता है।
लौटकर आप MEA में थर्ड सेक्रेटरी बनते है। प्रमोशन पर सेकेंड सेक्रेटरी, फर्स्ट सेक्रेटरी, काउंसलर, एम्बेसडर, फॉरेन सेक्रेट्री तक जा सकते हैं।
पोस्टिंग, कैरियर मे 60 प्रतिशत दिल्ली 40 प्रतिशत फॉरेन कैपीटल होती है।
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कैडर की तरह डिवीजन होते है।
जैसे EU, इंडो पैसिफिक एंड आसियान डिवीजन आदि आदि। आपने स्पेनिश सीखा तो साउथ अमेरिका के देश वाला डिवीजन मिलने की संभावना है। चीनी सीखा तो आसियान और ईस्ट एशिया...
अब आप अमूमन अपने करियर में वही डेस्क देखेंगे, वहीं पोस्टिंग मिलेगी। उसी डिवीजन में थर्ड, सेकेंड, फर्स्ट सेक्रेटरी बनेंगे।
अब सोचो बेटा- जाम्बिया के एम्बेसडर बन गए तो। फिजी में पटक दिया तो?? और न सोचो कि UPSC रैंकिंग से बात बनेगी। वैकेंसी किधर है, वो डिसाइड करेगा।
और वैकेंसी तो सड़ियल देशों में अधिक होगी।
आधी जिंदगी दिल्ली में जाम्बिया से आई रिपोर्ट को पढ़ते, चिट्ठी बनाते बीतेगी। जब किसी देश मे पोस्टिंग रहेगी, तो वहां टूरिस्ट की तरह, या आम जिंदगी नही बिता सकते। घेरे में रहना है, और घेरे से बताकर निकलना है।
आपके एक एक कदम पर इंटेलिजेंस की नजर हो सकती है।
नो प्राइवेसी...
ग्लोरिफाइड जेल..
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- तुम तो केवल नेगेटिव बात करो। जबरन का ज्ञान- अरे, कभी कुछ पॉजिटीव भी बता दो।
- पॉजिटिव है- मैनें कहा..
जब आप किसी देश मे है, आप भारत के प्रतिनिधि है। दरअसल आप ही भारत हैं।
जब ओलंपिक मेडल कोई खिलाड़ी जीतता है, तो उसकी वजह से देश का झण्डा ऊंचा होता है। मजबूत से मजबूत शख्स को विव्हल होते देखा है। देश को रिप्रेजेंट करना, एक क्षण के लिए ही सही, इंसानी जीवन की इससे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है ??
-तो ये बात पहले नही बोल सकते थे??
-बोल सकता था !! मगर तुम्हारी बात शुरू हुई थी लैविश लाइफस्टाइल और विदेश भ्रमण के मजे से।
ये पाने के तो हजार दूसरे तरीके हैं। एक गिलास दूध पीने के लिए भैस नही पाली जाती। तब ये जान लेना जरूरी है, कि उसके गोबर उठाने पड़ेंगे, चारा काटना पड़ेगा। उसके भोजन पानी, रहवास का भी इंतजाम सोचना पड़ेगा।
हां, सब जानकर भी आप भैस की सेवा करना चाहते है, तो दूध भी अवश्य मिलेगा।
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काम और कॅरियर, उससे जुड़े पैसे और लाइफस्टाइल के लिए चूज नही किये जाते। इसलिए चूज किये जायें की आप वो "काम" करना चाहते है।
शिक्षक बनकर बच्चे गढ़ना चाहते है, डॉक्टर बनकर लोगो की बीमारियों में राहत देना चाहते है। या IFS बनकर देश को डिप्लोमेटिक ऊंचाई देना चाहते है??
एक्सेल करने के लिए, उसे जिंदगी बनाने के लिए आपका पर्पज इंपोर्टेन्ट है।
अपने करियर का, योग्यता का, पद का आप अल्टीमेटली क्या उपयोग करेंगे, वह आपका पर्पज ही तय करेगा।
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मेरी बात खत्म हुई। बीवी अभी भी कन्विंस न थी, मगर शायद बेटी समझ गयी।
वो यह समझ हई, कि पिता ये नही चाहता कि वह किसी दिन प्रधानमंत्री बने..
तो विदेशी हेड ऑफ गवर्नमेंट से कहे- मेरे दोस्त को अपने यहां दो खदान, एक पोर्ट और 3 पावर प्लांट खुलवा दो।
अरे भई।
ये दलाली तो किसी और पद या प्रोफेशन में रहकर की जा सकती थी न..?
Chandrayaan-3 Mission:
'India🇮🇳,
I reached my destination
and you too!'
: Chandrayaan-3
Chandrayaan-3 has successfully
soft-landed on the moon 🌖!.
Congratulations, India🇮🇳!
#Chandrayaan_3#Ch3