@nethrapal Don't worry sir, देश में यूपी में सबसे ज्यादा बुद्धिस्ट होंगे बीजेपी की केंद्र से लेकर राज्य सरकारों ने चमारों की उपेक्षा की और उन्हे प्रतिनिधित्व नहीं दिया किसी भी दलित को भारत रत्न नही दिया उपवर्गीकरण किया कोई भी दलित मुख्यमंत्री नही बनाया जिसका फायदा आंबेडकरवादियों को मिलेगा|
@ProfNoorul 600 साल शासन का दाबा करने वाले लोग और अल्लाह के सामने सिर झुकाने वाले आज बीजेपी के डर से किसी को भी अपना बाप बना लेते हैं खासकर अखिलेश यादव जी और राहुल गाँधीजी के यहाँ झाड़ू पोंछा लगाते हैं इन लोगों ने तो अपना स्वाभिमान बेच दिया है |
देश में जाति के आधार पर सदियों से तोड़े व पछाड़े गये ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों एवं अन्य कमज़ोर तबक़ों आदि को उनके वोट की ताक़त के माध्यम से सत्ता की मास्टर चाबी देकर उन्हें शोषित से शासक वर्ग बनाने हेतु इनके मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के रुके एवं बिखरे हुये कारवाँ को आगे मंज़िल तक पहुँचाने के लिये बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को आज उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर बी.एस.पी. परिवार की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।
मान्यवर श्री कांशीराम जी के मिशनरी संकल्प का ही यह सुखद परिणाम था कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल व महत्वपूर्ण राज्य में मेरे नेतृत्व में बी.एस.पी. की चार बार सरकार बनी और इसके माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ के ऐतिहासिक कार्य करके ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज व बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर आदि के समता व समानता के हक़ के लिये उनके अतुलनीय संघर्ष व बहुमूल्य योगदान को ज़मीनी स्तर पर उतारकर संविधान के पवित्र मंशा की पूर्ति की गयी।
यही नहीं बल्कि इन महापुरुषों की प्रेरणा से, यूपी में सर्वसमाज के हित में अपराध नियंत्रण व क़ानून व्यवस्था के मामलों में क़ानून द्वारा क़ानून का राज क़ायम करके तथा जनहित, जनकल्याण एवं विकास के मामलों में भी, बेहतरीन सरकार देकर मान्यवर श्री कांशीराम जी को सच्ची श्रद्धांजलि व श्रद्धा-सुमन अर्पित किया गया।
@badripal@rn_samrat@PalVishwnathbsp बसपा का हमेशा वोट 20 फीसदी के आसपास रहा है और इतना ही उप मे दलितों की आबादी है, लेकिन जब 2007 mein बसपा की पूर्ण बहुमत सरकार बनी तब 30% तक पहली बार वोट बसपा को मिला उसमें थोड़ा बहुत ब्राह्मण और मुसलमानों का योगदान था| पिछले कुछ चुनाव में दलित वोट बट गए बसपा कमजोर हो गयी|
@badripal सिर्फ राज्यसभा नही 90 के दसक तक अति पिछड़ी जातियों से यूपी के विधानसभा में विधायक तक नहीं बने थे बसपा ने उन्हे पहली बार जिताकर भेजा जब 1995 मे बसपा सरकार बनी तब बसपा के पास पिछड़ी जातियों से 11 MLA थे सभी को मंत्री बनाया और उन्हे देश, प्रदेश की राजनीतिक मुखधारा मे लाकर खड़ा किया|
#stop#nautanki
क्या नाटक चला रखा एक लड़का इंजीनियरिंग छोड़ कर बसपा के लिए साईकिल यात्रा कर ऑनलाइन मदद मांग रहा है, ठीक ऐसी चार अन्य लफंगे स्कूल छोड़ मिशन के नाम पर साइकिल चला डिजिटल भीख मांग रहे है !
ऐसे चमन सूतियाँ की कोई मदद मत किया करो अपना सुनहरा भविष्य बर्बाद करके समाज पर अहसान कर रहे हो,
ये साइकिल यात्रा की नौटंकी जय प्रकाश ने शुरू करी तब डायलॉग छोड़ा मान्यवर कांशीराम गांव गांव साइकिल से घूमे इन्होंने बस इतना ही पढ़ा उसके बाद का कांशीराम पढ़ने और समझने की इनकी औकात नहीं है !
कांशीराम साहिब एक इंटरव्यू बोले में साइकिल यात्रा तब तक की जब तक मोटरसाइकिल मेरे पास नहीं आई, बाइक मिली तो कम थकान के साथ समाज को जगा सका और मोटरबाइक के बाद खुली जीप ली ताकि और शीघ्रता से मिशन को बढ़ा सकूं अब मेरे पास हेलीकॉप्टर है, अब एक प्रदेश नहीं पूरे देश की यात्रा मिनटो में करता हूं, उनका विजन उन्नति था अगर आज साइकिल चलाते तो में भी उन्हें बौद्धिक नहीं मानता !!
कांशीराम साहिब के साइकिल चलाने के पीछे एक विजन स्पष्ट था और ये जय प्रकाश और अन्य ढक्कन साइकिल चला के समाज पर अहसान दिखा छाती पर बैठ रहे है,
अगर सक्षम नहीं हो तो घर बैठो किसी ने जिम्मेदारी नहीं दी तुम्हे समाज जगाने की अगर दुबारा मदद मांगने को फोन किया तो खोज के वही आऊंगा और तुम्हारी साइकिल तोड़ दूंगा और तुम मेरा अंग विशेष के बाल ना उखाड़ पाओ !
मदार खोद पढ़ने लिखने की उम्र में 2026 में साईकिल चला के दिखा रहे है !
बसपा पदाधिकारी और बौद्धिक व्यक्ति के अलावा किसी ऐसे व्यक्ति की मदद मत किया करो जब किसी मूढ को लगे वो सबसे सही है वहीं सबसे घातक अपने समाज के लिए हो जाता है !
साइकिल चलाना कोई महानता का घोतक नहीं ना बौद्धिकता समाज को जागरूक बौद्धिक व्यक्ति कर सकता है, सिर्फ साइकिल चलाने वाला नहीं कर सकता ! नमस्ते
#Baba_Manish
#BSP
मुस्लिम यूनिवर्सिटी में इस्लामिक आरक्षण को मौलिक अधिकार से जोड़ दिया इसलिए वो 50% अधिक आरक्षण अल्पसंख्यक के आधार पर जारी रख सकता है,
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम यूनिवर्सिटी का उद्देश्य जाना वो मुस्लिमों के उत्थान के लिए बनाई गई है !
मुस्लिम यूनिवर्सिटी में केंद्र अलग से राशि अनुदान देगा और राज्य अलग से अनुदान मुस्लिम उत्थान के लिए देगा !
ऐसा तर्क सुप्रीम कोर्ट में जज ने दिया !
कम्पोजिट ऐक्शन प्लान के तहत बसपा सरकार में चार मेडिकल कॉलेज खुले जिसमे दलित उत्थान के लिए 50% अधिक आरक्षण दलितों को मिलता था, केवल मेडिकल MBBS में चारों कॉलेज की 200 सीट पर लागू,
अब सुप्रीम कोर्ट ने वर्डिक्ट दिया जब धन राशि राज्य सरकार से दी जा रही है, फिर 50% से अधिक का आरक्षण मान्य नहीं होगा इसे रोका जाए !
दलित उत्थान गया तेल लेने कोई मानवीय या सामाजिक उद्देश्य नहीं देखा गया !
सुप्रीम कोर्ट का जज इनकी उपयोगिता नहीं बताएगा में बता देता हूं
ये चार कॉलेज बसपा सरकार में SCP के तहत बने, और MBBS की पढ़ाई शुरू हुई (हर जगह करीब 100 सीटें)
अटैच्ड सरकारी अस्पताल चलने लगे
कई जगह PG (MD/MS) सीटें मंजूर हुईं — यानी संस्थान सिर्फ स्नातक कॉलेज नहीं रह गया
आसपास के जिलों के मरीजों को जिला स्तर पर इलाज मिला, जो पहले लखनऊ/दिल्ली रेफर होते थे !
कन्नौज (डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर राजकीय मेडिकल कॉलेज)
चारों में अपेक्षाकृत आगे दिखता है। Collegedunia की 2026 मेडिकल रैंकिंग में भारत में 107/517 और यूपी में 14वाँ तक गया !
बसपा सरकार में बने इन कॉलेजों के मूल नाम कुछ इस प्रकार १ महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, अंबेडकर नगर !
२ जालौन (उरई) मान्यवर कांशीराम जी राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज
३ डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज !
(अखिलेश यादव ने अंबेडकर नाम हटाकर सिर्फ राजकीय मेडिकल कॉलेज कर दिया )
४ सहारनपुर मान्यवर कांशीराम जी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज !
( अखिलेश यादव ने शेख-उल-हिन्द मौलाना महमूद हसन राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज कर दिया )
कॉलेज के अलावा लखनऊ में बसपा ने : छत्रपति शाहूजी महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी (CSMMU) नाम रखा बाद में मुलायम सिंह यादव ने इसका नाम बदल एक छोटे से कॉलेज को यूनिवर्सिटी में मर्ज कर उसका नाम दिया कॉलेज नाम पर यूनिवर्सिटी नाम किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी KGMU कर दिया )
KGMU टॉप-10 में है — 2024 में 19वें से 2025 में 8वें पर आया। यूपी के अंदर KGMU सबसे मजबूत मेडिकल विश्वविद्यालय है !
NIRF में AIIMS का रिसर्च (RPC करीब 92) KGMU का RPC 2025 में करीब 51 रहा !
यूपी का सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल विश्वविद्यालय, ज्यादा MBBS सीटें, सस्ता इलाज, अच्छा क्लिनिकल एक्सपोजर, और राज्य सेवा/PG के लिए मजबूत आधार !
चारों कॉलेजों ने मिलकर उत्तर प्रदेश में गरीबों के लिए मजबूत मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर दिया ,
हर कॉलेज के साथ करीब 470 बिस्तरों का टीचिंग हॉस्पिटल है। OPD, इमरजेंसी, प्रसव और सर्जरी अब अंबेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर में ही होती है, जो पहले लखनऊ या कानपुर रेफर होती थी,
हर साल करीब 400 MBBS सीटें चारों में 100-100 सीटें हैं 2012–13 के बाद से कई बैच निकल चुके हैं, यानी इन जिलों से सैकड़ों नए डॉक्टर बने,
PG सीटें खुलीं। कन्नौज को 12 विभागों में 52 MD/MS सीटें मिलीं,
अंबेडकर नगर को मेडिसिन, सर्जरी, पैथोलॉजी समेत 20 PG सीटें मिलीं , विशेषज्ञ डॉक्टर जिले में रुकने लगे।
सस्ता सरकारी इलाज,
आयुष्मान कार्ड पर भर्ती और ऑपरेशन इन्हीं अस्पतालों में होते हैं कन्नौज में ब्लड कंपोनेंट मशीन और ऑक्सीजन प्लांट, अंबेडकर नगर में NABL लैब और ट्रॉमा सेंटर जुड़ चुके हैं, इसलिए प्लेटलेट, ऑक्सीजन और जाँच के लिए बाहर कम जाना पड़ता है !
आजादी के बाद से दलितों की स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने और दलितों में ही डॉक्टर बनाने की पहल बहन मायावती जी द्वारा ऐसी योजना अस्तित्व में आई, ना इसके बाद बनी ना इसे पूर्व कोई थी !
अखिलेश यादव ने दलितों के उत्थान में बनी योजना तो बंद करी ही उसके नामों निशान मिटाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी , अब कोई यादव कोई मुस्लिम कोर्ट जाकर बची हुई योजना भी कितनी आसानी से रोक लगवा आता है,
मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 100 प्रतिशत आरक्षण से भी भारत में 80 साल में भी कभी किसी को समस्या नहीं हुई पर दलितों, आदिवासियों, ने 4 कॉलेज स्पेशल कंपोजिट स्कीम के तहत बनाए तो मात्र 16 साल में आपत्ति दर्ज करवा खत्म करवा दी गई !
बसपा भले ही चुनाव हारी पर बसपा से ज्यादा नुकसान दलित समाज का हुआ, दलित उन्नति करने के बजाय समय से करीब 100 साल पीछे धकेल दिया गया, नमस्ते !
#Baba_Manish
परम आदरणीय बहन जी,
आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ माँ भी हैं।
राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूँ।
पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की ख़बरें और अफ़वाहें चल रही हैं। मैं साफ़ कर देना चाहता हूँ: मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहा। न आज, न कभी। BSP मेरे लिए सिर्फ़ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है।
श्री अशोक सिद्धार्थ जी को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फ़ैसला पूरी तरह उचित है, और मैं उस फ़ैसले के साथ खड़ा हूँ। रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है। व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी ज़िम्मेदारी है।
उस समय मैंने ख़ुद को सोशल मीडिया से दूर कर लिया था, इसलिए आपके उस पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाया। मेरी उस चुप्पी को ग़लत समझा गया, और अफ़वाहों को जगह मिली। अगर इससे आपको ठेस पहुँची है, तो मैं उसके लिए आपसे क्षमा चाहता हूँ।
मैं सिर्फ़ आपके नेतृत्व में फिर से पार्टी और मिशन की सेवा का अवसर चाहता हूँ। विश्वास शब्दों से नहीं, काम से बनता है, और मैं उसे अपने आचरण और अपनी मेहनत से साबित करूँगा।
बाबा साहेब का मिशन, मान्यवर साहेब का रास्ता, और आपका नेतृत्व। यही मेरी राजनीति है।
जय भीम।
जय बसपा।
@IAasMohd 15% नही बल्कि 25-30 फीसदी किसी सीट पर तो 50% तक यादव बीजेपी को वोट करते हैं माध्य प्रदेश में बीजेपी ने यादव मुख्यमंत्री बनाया बिहार में उप मुख्यमंत्री बनाया और केंद्र में कई मंत्री सपा का आधा परिवार बीजेपी में है लेकिन बी टीम तो बसपा है और ओबेसी साहब है|
पोंगा वकील ने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया है।
लेकिन दिन-रात मेरिट का डमरू बजाने वाली नेहा दास जैसे जातिवादी सवर्ण इसी फेक न्यूज के सहारे SC-ST Act एवं वंचित वर्गों के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर देते हैं।
10वीं का छात्र भी बता सकता है कि BNS की धारा 20 के अनुसार, सात वर्ष से कम आयु के बच्चे द्वारा किया गया कोई भी कार्य अपराध नहीं माना जाता है।
पहली बात तो 1 साल के बच्चे पर FIR के इस दावे में कितनी सच्चाई है, यह चेक करना होगा। दलितों एवं आदिवासियों के खिलाफ दुष्प्रचार करने में इन लोगों का कोई ईमान नहीं होता है। झोलाछाप वकील की भाषा ही बता रही है कि कैसे वह SC-ST समुदाय के खिलाफ जहर उगला रहा है। अगर यह सच भी है, तो जरूर थाने का SHO भी इनकी तरह ही पोंगा मेरिट वाला होगा, इसीलिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के खिलाफ जाकर एक साल के बच्चे पर FIR दर्ज कर दी। ऐसे में चाहे सिर्फ BNS का मामला हो या फिर BNS के साथ किसी अन्य विशेष लॉ की, अगर इंवेस्टिगेशन ऑफिसर ने 7 साल तक के किसी बच्चे पर चार्जशीट लगा भी दी तो Circle Officer, SHO सहित सभी जिम्मेदार पुकिसकर्मी नाप दिए जाएंगे।
दूसरी बात, SC-ST Act एक Special Law है। किसी भी व्यक्ति पर पहले BNS की धाराओं में मामला दर्ज होता है, क्योंकि BNS भारत का General Criminal Law है। हर बात पर जाहिलों की तरह मुंह उठाकर SC-ST Act के खिलाफ बक-बक करना तुम्हारी गोबरबुद्धि का परिचय देता है।
हालांकि मुझे पता है कि तुम लोग गोबरबुद्धि नहीं हो। तुम जातिगत श्रेष्ठता-बोध में जीने वाले नीच प्राणी हो, जो दिन-रात केवल इसी चिंता में मरे जा रहे हो कि तुम्हारे पुरखों की बनाई सड़ियल जातिवादी संस्कृति को दलित अपने पैरों तले क्यों कुचल रहे हैं।
चूंकि तुम्हारे श्रेष्ठता-बोध का दिन-रात सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाला जा रहा है और पूरी दुनिया के मानवाधिकारों के लंबरदार तुम्हारी मानसिकता पर लाखों लानतें भेज रहे हैं, अतः तुम लोग इसी कुंठा और छटपटाहट में SC-ST Act एवं वंचित समुदाय के खिलाफ जहर उगलते रहते हो।
अच्छा है। तुम्हारी ये छटपटाहट और बौखलाहट देखकर हमें ऊर्जा मिलती है। वैसे भी करुणा और समानता की उम्मीद इंसानों से की जाती है। दलितों के खिलाफ जातीय द्वेष में लबरेज होकर जहर फैलाने के मामले में तुम लोग न तो इंसान रहते हो और न ही तुममें कोई इंसानियत रहती है।
अनुसुचित जातीयो, आरक्षण, एससी एसटी एक्ट के खिलाफ चल रही मुहिम के निर्णायक सदस्य आनंद स्वरूप का वर्ण व्यवस्था के बारे में यह कहना है। वैसे इस बन्दे का कहना सही है। यह वो कह रहा है जो इसके धर्मग्रन्थ कहते है।।इसमे यह कोई ऐसी नई विवादित बात नही बोल रहा जो अजीब लगे।यह हर उसपर लागू होता है जो;
"ब्राह्मणवादी वर्ण व्यवस्था को स्वीकार करता है। वो इससे भाग नही सकता है, उसे यह मानना ही पड़ेगा कि वो कभी श्रेष्ठ या बराबर नही हो सकता है। यह सिद्धांत है। इससे भाग नही सकता"
लेकिन आंबेडकरवादी ऐसे लोगो को "भाग इंहा से, हमारा कुछ भी तुम्हारी ब्राह्मणवादी वर्ण व्यवस्था से लेना देना नही है" कह देते है इसलिए आजकल बाबा साहब हाय हाय ऐसे ज्यादा करते है।
अनुसुचित जातीयो के पास;
1.बाजारों में दुकान नही है।
2.व्यापार नही है।
3.90% से ऊपर मजदूर वर्ग है।
https://t.co/lpBA6YlsvQ टेक्नोलॉजी से सबसे अंत में जुड़ता है।
5.क्रिकेट में 100 साल के इतिहास में एक भी एससी राष्ट्रीय स्तर की टीम में खिलाड़ी नही रहा (कांबली ओबीसी भंडारी)
इसके बाद भी इस समय;
"चारो तरफ से हमले झेल रहा है। इतने ज्यादा की सरकारी तौर पर भी व जमीनी स्तर पर भी"
6.कारण?
7.बीच मे फँसे होने की वजह से। ब्राह्मणवादी धर्म उन्हें अपना नही मानता, अन्य धर्म भी उन्हें हीनभावना से देखते है। जिसके कारण बेचारा बीच मे फँसा हुआ है। एक स्वतंत्र एलग वर्ग नही बन पाया है। जिसके कारण सरकारें भी उसपर ध्यान नही देती है जैसा मुस्लिम, ईसाई पर देती है। अब;
"ब्राह्मण, बनिया क्षत्रिय से आपका विवाद तब तक है जब तक कि आप ब्राह्मणवादी वर्ण व्यवस्था को स्वीकार कर रहे हो। क्या कभी ईसाई व मुस्लिम से ब्राह्मणवादी वर्ण व्यबस्था का टकराव देखा है? नही। क्योंकि यह तीनों स्वतंत्र पक्ष है।
प्रश्न है कि " स्वतंत्र पक्ष कैसे बने"
उत्तर है कि "बाबा साहब इसका उत्तर देकर गए है"
8.बाबा साहब के दिए रास्ते का परिणाम क्या रहा।
"महाराष्ट्र में बाबा साहब के साथ 5 लाख लोगों ने शपथ ली कि ब्राह्मणवादी वर्ण व्यवस्था से आजसे वो एलग हो रहे है। यह 5 लाख 80 लाख हो चुके है। उंसके बाद आज महाराष्ट्र में एससी में उधोगपति तक निकल रहे है।। इंजीनियरिंग, मेडिकल व अन्य सभी फील्ड में उपलब्धि हासिल कर रहे है। विदेशों तक में सफल है।। भारत के दो राज्य महाराष्ट्र व पंजाब से अधिकतर एससी विदेश में है। सफल है। दोनो जगह ही ब्राह्मणवादी वर्ण व्यवस्था से उन्होंने अपने आप को एलग किया और आज भारत के सभी राज्यो से ज्यादा सफल एससी इन्ही दो राज्यो में है"
9.सिर्फ एक शब्द की "ब्राह्मणवादी वर्ण व्यवस्था" से हमारा कुछ लेना देना नही है से आप;
A. ब्राह्मण बनिया ने शोषण कर दिया से मुक्ति प्राप्त करेंगे।
B. मन्दिर में घुसने नही दिया कि बकैती से दूर चले जायेंगे।
C. आप एक स्वतंत्र पक्ष बन जाएंगे।
D. आपका समय ध्यान ब्राह्मण बनिया हाय हाय की जगह अन्य क्षेत्र में लगेगा।।
E. स्वतंत्र पक्ष बनने के कारण मनोबल बढ़ेगा। सन्गठन बनेगा। दवाबकारी समूह बनोगे।
आप उदाहरण देख सकते है। एट्रोसिटी का ज्यादा रोना गैर अम्बेडकरवादी एससी ज्यादा रोते है। क्योंकि अम्बेडकरवादी होना ही "उच्च मनोबल" का प्रथम रूप से होना ही सिद्ध करता है। जिसका उच्च मनोबल होगा वो अम्बेडकरवादी होगा। यह सभी बहुजन जातीयो पर लागू होता है।
10.अब समस्या यह है की;
ईसाई के पास मजबूत सन्गठन है।
मुस्लिम के पास सबसे ज्यादा मजबूत सन्गठन है
सिख, जैन तक के पास सन्गठन है।
लेकिन एससी के पास क्या है? कुछ नही। हाँ। गली गली मोहल्ले में बने सन्गठन जरूर है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत सन्गठन नही है । कोई रॉडमेप नही की किस प्रकार एकाएक स्वतंत्र पक्ष बना जाए।।
इसी उलझन के कारण सबसे ज्यादा टारगेट एससी हो रहा है।
आने वाला समय एससी के लिए और ज्यादा चुनौतीपूर्ण होने वाला है।।
विकास कुमार जाटव
#dalitstudent#iitbombay ने पहले बोल दिया साहिल मोबाइल chatgpt से नकल करते पकड़ा गया जबकि एग्जामरूम के चारों कौनो में कैमरे लगे हुए है, मूढ से मूढ छात्र भी ऐसी हरकत नहीं करेगा वो मोबाइल निकाल के नकल करे !!
जब उसके पिता ने SC ST ACT में मुकदमा दर्ज किया उसने तीन महीने हो रहे जातिय शोषण के सबूत रखे तो IIT ने अपना स्टैंड एकदम पलट दिया अपने बयान पर माफ़ी मांग ली !!
अब आईआईटी बोम्बे बोल रहे है, कम्युनिकेशन गैप हुए जिसके चलते ये जानकारी गलती से सार्वजनिक बिना की जांच के हुई,
ये पूरा प्री प्लान मर्डर प्रोफेसर कर रहा था, जैसी ही साहिल के पिता ने जांच की मांग करी प्रोफेसर फिल्मी स्टाइल में धरने पर बैठ गया और जैसी मुकदमा दर्ज हुआ तो इस्तीफा दें स्वैग दिखाने लगा, साहिल ने कोई सुसाइड नोट नहीं लिखा अब किस आधार पर संस्था ने इसे अपनी तरफ से आत्म ह त्या घोषित कर दिया ? और पुलिस ने उसका मोबाइल जांच में पाया उस समय तक किसी प्रकार की CHATGPT का उपयोग नहीं हुआ , ये पुलिस की फॉर्मल रिपोर्ट में आया है !!
कोई भी साधारण से साधारण बुद्धि वाला इतना बेवकूफ नहीं जो नकल को उचित ठहरा दे पर भारत में ऐसे मूढ की भरमार है, जिनका रोम रोम बस दलितों को गलत दिखाना चाहता है, किसी भी प्रकार दलित छात्र के साथ भारतीय समाज सहानुभूति नहीं रखता,
अब ये प्रोफेसर जिसको जांच में सहयोग करना चाहिए था, जब उसे पूछा नकल के दौरान जिस गैजेट का उपयोग होगा उसकी जब्त किया जाता उसकी इनफॉर्मेशन दर्ज होती है तो अपने ही बयान पलट रहा है, बोल रहा में साहिल को मॉरल सपोर्ट देता था, यकायक नकल से सीधा सहानुभूति अर्जित करने लगा जो कल तक इस्तीफा फेंक के दिखा रहा था,
खैर अगर आप दलित हो तो आपको इतना मनोबल सदा ऊंचा रखना चाहिए, भारतीय संस्कृति और भारत का साढ़ा हुआ समाज सदा से दलित के प्रति नफरत रखे हुए है,
भारत में sc st act का उपयोग करना पड़ रहा है, इन्हें इस बात का खेद नहीं हमने अपने समाज को कितने नीचे स्तर तक गिरा दिया जो उनके लिए हमें अलग कानून लाने पड़े
दलितों के प्रति हीनता का कोई ईलाज नहीं अब सबल दलित नफरत के बदले नफरत लौटा रहा है, जब दलित अधिक सबल हो जाएंगे तो जरूरत पड़ी तो सवर्ण बचाव नियम भी लाएंगे हम भी नहीं चाहेंगे किसी सवर्ण छात्र में भविष्य में किसी दलित प्रोफेसर अनन्य करे तब सवर्ण बचाओ नियम के तहत मुकदमा जरूर लिखा जाएगा पर मोबाइल खोल के ChatGPT से नकल करी ऐसा बचकाना बचाव तो बिल्कुल अनुचित है,
इंजिनियरिंग कॉलेज में 10 प्वाइंट का CGPA - Cumulative Grade Point Average से किसी की बौद्धिकता आसानी से पता चल जाती है, अगर में किसी के हाथ लैपटॉप भी दे दु तो उसका CGPA 5 या 6 होगा इसे ऊपर नहीं जा सकता परिजन से बात कर मुझे आश्चर्य इसे हुआ साहिल की ऑल इंडिया रैंक 614 और साथ में गणित ओलंपियाड में गोल्ड मेडलिस्ट और उसका CGPA 8.5 है अर्थात गूगल और माइक्रोसॉफ्ट , टेस्ला जैसी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां ऐसे छात्रों से सब्जेक्टिव सवाल नहीं करती सीधा कट ऑफ कर ज्वाइनिंग लेटर हाथ में देती है,
जो यूट्यूबर SC ST ACT को टारगेट करके साहिल की क्षमता पर वीडियो बनाए तो आपको लगा डर जाएंगे और चार कदम आगे बढ़ के छाती पर पैर रखेंगे, अपनी बात सही कारण के साथ स्थापित करेंगे और क्या लगा उस प्रोफेसर को बचा लोगे हाथों से फाड़ के हृ/दय निकालेंगे,
नकल करने वाले छात्र गले में फंदे ना लगाते ना उनका CGPA 8.5 होता वो मेरे जैसे छात्र होवे जो नकल करे जिनका cgpa आठ सेमेस्टर में 7 से ऊपर नहीं जाता और प्रोफेसर के पकड़ने पर फंदे ना लगाते उल्टा प्रोफेसर का मटर कर, i am very innocent sir बोलते है, नमस्ते !
#Baba_Manish
🍁 पाकिस्तान बनने से पहले पंजाब की मुसलमान की जातिगत स्थिति 🍁
जाट मुस्लिम ➡️ 1901 1931
⬇️ ⬇️
12.1 मिलियन 14.9 मिलियन
( 49 % ) ( 52 % )
राजपूत मुस्लिम ➡️ 1901 1931
11 % 12 %
अरैन मुस्लिम ➡️ 1901 1931
8% 10 %
जुलाहा ➡️ 1901 1931
3% 5 %
बलूच ➡️ 1901 1931
4% 4 %
पठान ➡️ 1901 1931
2 % 2 %
अगर जाट + राजपूत + अरैन + बलूच + पठान को मिलाकर अबादी देखे तो 52 % + 12 % + 10 % + 4% + 2% = 80 % मुस्लिम अपर कास्ट थी , जिसके पास सारी जमींदारी ( किसानी) और अकड़ थी । सोचिए इनके पाकिस्तान बनाने की मांग को कौन टाल सकता था ?❗ पाकिस्तान बनने के समय पंजाब में मुस्लिमों की अबादी के 20 % ही लोग छोटी जाति के थे और उसमें भी जुलाहा मात्र 3 % !
आज पढ़ें लिखे जुलाहा कहते हैं कि हमने पाकिस्तान की मांग का समर्थन नहीं किया । करते भी कैसे,आप राजनीति में थे ही नहीं , जुलाहा मांग का समर्थन भी कर लेता तो कौन जाट , राजपूत , पठान,बलूच और अरैन उन्हें पंजाब अर्थात उस समय के पश्चिमी पाकिस्तान आज के पाकिस्तान मे उन्हें अपना जमीन देकर वहां बसने देता?!
इसलिए पाकिस्तान बनने को केवल हिंदू और मुस्लिम नजरिए से मत देखिए, जाति के नजरिए से देखिए।
➡️ Undivided पंजाब में मुस्लिम आबादी 52 % थी ,हिंदू 30 % , सिख 14 % थी ।
➡️ पाकिस्तान बनने के बाद पश्चिमी पाकिस्तान की मुस्लिम आबादी 95.6 % थी ,हिंदू अबादी 1.6 % , अल्पसंख्यक क्रिश्चियन और Schedule Caste 3.4 % ( उस समय पाकिस्तान में शेड्यूल कास्ट अल्पसंख्यक में गिने गए )
➡️ आज भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की अबादी 3 . 65 % है जिसमें Schedule Caste हिंदू भी शामिल हैं । मतलब करीब 80 साल बीत जाने के बाद Consistent हैं ,वहीं जो विभाजन के समय था ।
➡️ Undivided पंजाब में हिंदू अबादी 30 % थी । हिंदुओं में ब्राह्मण 12 % , राजपूत 12 % , जाट 11. 5 % , चमार 11 % , अरोड़ा 8 % , खत्री 5.5 % , चूहरा 5.5 % , अन्य 35 % । सिख 14 % थे ।
➡️ आज के पंजाब में सिख 58 % हैं ,हिंदू 38.5 % , अन्य 3.5 % । दलितों की अबादी 32 % है , जिसमें 60 % सिख हैं और 39 % हिंदू ।
निष्कर्ष ➡️ पाकिस्तान बनने से 49 % मुस्लिम जाटों को अलग देश मिल गया , 14 % सिखों को अपना प्रदेश, लेकिन 30 से 35 % दलितों को क्या मिला ?
न हिंदुओं ने कुछ दिया,न सीखों ने , न मुसलमान ने ... मिला क्या अपमान, विभाजन और पलायन ।
दलितों के अलग - अलग धर्म में जाने से कुछ मिला ❓❗
न मानवीय अधिकार, न जमीन ,न देश ,न सत्ता में भागीदारी । जो कुछ भी मिला,वह है राजनीतिक आरक्षण और नौकरियों में आरक्षण ( जो अब करीब - करीब शून्य है क्योंकि सरकारी नौकरी ही नहीं बची)
जबकि इस देश को रचने - गढ़ने में दलितों के अलावा किसका हाथ है ❓ आज से नहीं 5000 साल से 🍁
दलित सोचे , उन्हें केवल रोना है या उसके आगे की रणनीति भी है क्योंकि इस देश पर पहला हक उसका है ।
#PartitionOfIndia #DalitRights #reservation
लेख :– @Manishchand01 पासवान जी की कलम से
@nitinmeshram बुद्ध, गुरु रविदास, गुरु कबीर, फुले जी, शाहू जी, आंबेडकर जी कांशीराम जी, बहन जी आदि को मानने वाले लोग अर्थात दलित|बुध्द का तो मतलब ही है स्वयं को जगाने की क्षमता बुद्ध है |
@Shubhamshuklamp सवर्णों को भी यह चिंता चाहिए सवर्ण प्रत्याशी सभी पार्टी से सवर्ण हारे विचारणीय है !
सवर्ण जातियों की फैलाई नफरत का जवाब समाज दे रहा है, इन्होंने हर धर्म वर्ग को गालियां दी और अंत में खुद बेचारे बने की नीति विफल हुई ! और हरियाणा में बीजेपी ने चुनाव जीतने के बाद वर्गीकरण किया|