निश्चय करो मेरे जीवन में तब तक एक भी क्षण नहीं है, जब तक जीवन के और क्षणों की स्मृति का लोप होकर सहज भाव से भगवान् की स्मृति नहीं होने लगती.!!!
श्रीराम 👏
तुम्हारा यह अहंकार मिथ्या है। कि मेरे करने से कुछ हो जाएगा। जो तुमसे कराया जा रहा है करते जाओ। जिस समय अलग होने की सूचना मिले, अविलम्ब अलग हो जाओ। कर्म की पूर्णता और उसका फल तुम्हारे अधिकार से बाहर हैं। तुम अपने जीवन को उस “महतो महीयान्” का यंत्र बना दो..!!!
श्रीराम 👏
तुमने संसारके साथ बहुत से संबंध जोड़ रखे हैं, क्या भगवानके साथ भी तुम्हारा कोई संबंध है ? यदि होने पर भी तुम उसे नहीं जानते हो तो उसे जानो, फिर तुम देखोगे कि वे कितने निकट हैं।वो इतने निकट हैं कि ऐसी निकटता तो और किसी से है ही नहीं..!!!
श्रीराम 👏
उनकी हथेलियों के साथ जब अपनी हथेलियाँ
मिला कर हमनें ख़्यालों में देखा
तो उनके हाथों की लकीरों को देख कर जाना कि
वो तो अनमोल कोहिनूर है
जो किसी राजकुमारी के सर का ताज बनेंगे
हमारे जैसी साधारण सी स्त्री की चूड़ियों की खनक़ में
उनकी खिलखिलाहट खनक़े इतने सस्ते नहीं हैं वो...!!