क्या आपने एक्शन का रिएक्शन देखा?
अब हिंदुओं ने बर्दाश्त करना ब���द कर दिया है
जैसा करोगे वैसा भरोगे
कट्टरपंथियों ने भीड़ का फायदा उठा के हंगामा किया
हिंदुओं ने खोज खोज के ठोकना शुरू किया
PUTIN-XI VISITING INDIA FOR BRICS & PROTEST AT INDIA GATE (JUST 5 KM AWAY FROM THE VENUE)...!
CJP is calling people to India Gate on 5 Sept, calling it a “peaceful march.”
Sourav Das: “India Gate belongs to the people,” while accusing BJP-RSS “miscreants” of creating nuisance.
=> Any attempt to create ANARCHY must face STRICT ACTION.
मनुस्मृति पर राहुल गाँधी के पुणे में दिए बयान पर द्वारका पीठ के शंकराचार्��� नें नाराज़गी जताई।
प्रेस रिलीज़ में शंकराचार्य सदानंद सरस्वती नें कहा कि सांसद का बयान शर्मनाक है।
राहुल गांधी नें जिस श्लोक के जरिये मनुस्मृति और सनातन की बुराई की थी उस पर शंकराचार्य ने आध्यात्मिक और व्याकरण की व्याख्या भी प्रेस रिलीज़ में की है।
#RahulGandhi #Manusmriti
नमस्कार! कैसे हैं आप...!
हारिए ना हिम्मत... बिसारिए ना राम...!
जब भी ये दो विशुद्ध राष्ट्रवादी और एकदम शालिन स्वर कानों में गुंजते हैं पत्रकारिता पर भरोसा होता है कि कम से कम लाईक सब्सक्राइब और व्यूअर्स बढ़ाने की अंधी दौड़ में आज भी इन जैसे यूट्यूबरस हैं जिन्होनें कभी नैतिकता मर्यादा और तथ्यों स�� समझौता नहीं किया
वरना तो जय��ुरिया चच्चा, खरी-खरी वालें बाबाजी, तिरछी नजरों वाले लफ्फाजी मास्टर तिवारी जैसों ने तो गालीबाज यूट्यूबर के आगे घुटने टेक दिए और स्वजातीय होने की वजह से उस गालीबाज की बदबूदार विष्ठा को चंदन समझकर बेहयाई के साथ अपने माथे पर लगाना शुरू कर दिया
एक तो बाकायदा हाथों में तख्तियां लेकर गालीबाज का समर्थन करने आ गया था तो बाबाजी का पहलवान उस गालीबाज की तरह "रावण" को गरियाने लगा
तिवारी जी तो इन सबसे दो ���दम आगे जाकर गालीबाज यूट्यूबर को श्रीप्रकाश शुक्ला जैसा बताने लगा
खैर, बीजेपी IT सेल की नई टीम की घोषणा होते ही इन सभी राष्ट्रवादी भांडो के चेहरे से नकाब उतर गया और इन बहरूपियों का बेशर्म निर्लज्ज एकदम घिनौना चेहरा अब हमारे सामने है
कहावत है ��ा...
ज्ञानी को ज्ञानी मिलें... मिले नीच से नीच
🚨 FACT CHECK: RAHUL GANDHI’S CLAIM IS FALSE ❌
At a rally in Pune on August 22, 2026, Rahul Gandhi claimed:
“Boys can take examinations multiple times after the age limit, but the marriage age is 23 for women”.
Reality: FALSE ❌
There is no legal marriage age of 23 for women in India.
Under the law in force before the Modi government, the minimum legal marriageable age was 18 for women and 21 for men. This distinction was retained under the Prohibition of Child Marriage Act, 2006, enacted during the UPA era.
So, the Congress-led UPA government’s legal framework itself maintained the 18-for-women vs 21-for-men distinction.
The Modi government later moved to remove this disparity.
The Prohibition of Child Marriage (Amendment) Bill, 2021 proposed increasing the minimum marriage age for women from 18 to 21, bringing it at par with men.
So Rahul Gandhi’s claim is misleading on two counts:
❌ 23 is NOT the legal marriage age for women.
❌ The UPA-era framework retained the 18 vs 21 gender distinction.
Meanwhile, the Modi government proposed making the minimum legal marriage age 21 for both men and women.
Facts matter. Jhooth Ki Goonj will fact-check them.
That would take too long and will get derailed at the first available opportunity. We should do it in one go, call a meeting of historians from every side and thrash out the facts. Let it be a long sitting, over months, even years if need be. We are losing time, generations getting brainwashed.
रक्षाबंधन, रानी कर्णावती और कूट-रचित इतिहास
(अपना ही एक पुराना पोस्ट थोड़ा विस्तार से)
रक्षाबंधन से जुड़ी एक कहानी हमारे कक्षा छः के पाठ्यक्रम में हुआ करती थी जिसमें चित्तौड़ की महारानी कर्णावती मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेज कर गुजरात के शासक बहादुर शाह के आक्रमण के खिलाफ़ मदद मांगती है। हुमायूँ रानी के पत्रवाहक को वादा करता है कि एक भाई अपनी बहन की रक्षा के लिए जरूर आयेगा । कहानी इसी खूबसूरत मोड़ पर समाप्त हो जाती है।
वैसे तो यह अप्रमाणित कथा अपने आप में बेतुकी है क्योकि रानी कर्णावती के पति राणा सांगा, हुमायूँ के अब्बा बाबर से जिंदगी भर लड��ते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए। अतः बाबर के पुत्र से राणा की विधवा का मदद मांगना समझ के बाहर हैं।
परंतु जहाँ यह अप्रमाणित कथा पाठ्यपुस्तकों में समाप्त हो जाती है, उसके आगे का प्रमाणित इतिहास बताता है कि जब बहादुर शाह चित्तौड़ पहुंचा तो हुमायूँ अपनी "बहन" की रक्षा के लिए हाज़िर नहीं हुए और चित्तौड़ में 1535 ई ��ें दूसरा जौहर हुआ । किले के सारे राजपूत केसरिया पहन कर वीरगति को प्राप्त हुए और रानी कर्णावती ने 13000 राजपूत स्त्रियों के साथ अपने आप को आग के हवाले कर दिया ।
1303 ई में रानी पद्मिनी ने अलाउद्दीन खिलजी से बचने के लिए पहला जौहर किया था और चित्तौड़ का तीसरा और अंतिम जौहर 1568 में "भाई हुमायूँ" के पुत्र अकबर के हाथों राणा जयमल की मृत्यु के पश्चात् क्षत्राणियो ने किया था ।
कुछ इतिहासकार बताते हैं की हु��ायूँ के पहुँचने में देर होने की वजह से रानी कर्णावती को जौहर करना पड़ा और इसका बदला हुमायूँ ने न सिर्फ बहादुर शाह को मंदसौर के युद्ध में हरा कर लिया बल्कि चित्तौड़ की गद्दी पर कर्णावती के पुत्र विक्रमादित्य को बैठा कर अपनी "बहन" के प्रति अपना फ़र्ज़ पूरा किया।
परन्तु रोमिला थापर और इरफ़ान हबीब के इतिहास को रौंद कर अपने मुताबिक़ ढालने से पहले के इतिहासकारों को पढ़ें तो कुछ और ही नज़ारा साम���े आता है। हम्फ्री मिलफोर्ड ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा 1938 में प्रकाशित "हुमायूँ बादशाह" में एस के बनर्जी लिखते हैं हुमायूँ का इरादा चित्तौड़ की तरफ़ जाने का था ही नहीं वर्ना वो बंगाल अभियान से लौटते हुए उत्तर की तरफ़ बढ़ता। पर वो तो उल्टा दक्षिण की तरफ जाकर उज्जैन में बैठ कर चित्तौड़ युद्ध समाप्त होने की प्रतीक्षा करने लगा।
फ़ारसी इतिहासकार फरिश्ता 1611 की अपनी किताब "गुलशन-ए -इब्राह��मी" मे लिखते हैं कि बहादुर शाह के सिपहसालार सदर ने उसको भरोसा दिलाया कि हुमायूँ एक काफ़िर की ख़ातिर एक मुस्लिम शासक से युद्ध करने नहीं आएगा, और यही हुआ।
नए और विदेशी इतिहासकारों ने भी इस प्रसंग पर खुल कर प्रकाश डाला है। Mcfarland & Co द्वारा 1999 में प्रकाशित "The Muslim Diaspora" में एवरेट जेंकिन्स लिखते हैं कि हुमायूँ एक मुस्लिम के ख़िलाफ़ एक काफ़िर की मदद को लेकर हिचकिचा ��या और उसने सारंगपुर और उज्जैन में रुक कर चित्तौड़ की इस लड़ाई के अंजाम की प्रतीक्षा करना बेहतर समझा।
उल्लेखनीय है कि हुमायूँ और बहादुर शाह में कट्टर दुश्मनी थी और चित्तौड़ के युद्ध के बाद हुमायूँ ने मंदसौर में बहादुर शाह को परास्त भी किया। परन्तु उसके अपने सिपहसालार उसको यह समझाने में सफल रहे कि मुसलमानों का आपसी झगड़ा अपनी जगह, पर एक काफ़िर की मदद जिहाद की भावना के विपरीत होगी।
उक्त सभ�� इतिहासकार ये भी बताते हैं कि मंदसौर के युद्ध में हुमायूँ द्वारा बहादुर शाह की हार की खबर आते ही राजपूतों ने चित्तौड़ पर हमला करके न सिर्फ उसे वापिस हासिल कर लिया, बल्कि विक्रमादित्य को दोबारा गद्दी पर बैठा दिया। विक्रमादित्य बाद में अपने चाचा बनवीर के हाथों मारा गया जिसने विक्रमादित्य के छोटे भाई उदय सिंह का भी क़त्ल करने की कोशिश की, परन्तु जिसे "पन्ना धाय" ने अपने बच्चे की बलि देकर बचा लि���ा। कालांतर में उदय के बड़े पुत्र महाराणा प्रताप के नाम से जाने गए।
आधा-अधूरा और कूट-रचित इतिहास पढ़ कर बड़े हुए हम । किसी भी बदलाव की शुरुआत यहीं से होनी चाहिये। वरना ऐसे ही बेकार की बहस में अभी कई पुश्तें जायेंगी॥
(15 अगस्त 2019 को फ़ेसबुक पर प्रकाशित)
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“सत्ता में आया तो सब पत्रकारों को जेल भेज दूँगा”
इसीलिये मैंने 2022 में कहा था कि “आ र���े हैं अखिलेश” नारा नहीं धमकी है
और हाँ, सरकारी संपत्तियों को एक हज़ार करोड़ रुपये लेकर लीज़ पर देना बेचना नहीं होता
रामपुर के मुर्त��ा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का भवन समेत पूरा कैंपस केवल सौ रुपये प्रति वर्ष के किराये पर आज़म खान को 99 साल को “लीज” पर दिया गया था
इसे कहते हैं बेचना, वो भी कौड़ियों के भाव
A legal notice has been issued by @JaipurDialogues lawyer against 3 Leftist websites - The Wire, The News Minute and Newslaundry for defamation, intimidation and misrepresentation. They have 48 hours. Time to make them accountable.
Our previous Instagram handle was suspended by the left lobby, but we will not stop here. This is our new Instagram page.
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If anyone from Congress tries to threaten or intimidate you, don’t panic or back down. This is just a tactic to silence our movement.
Take screenshots of the messages and send them to us. Our team will review them and take the appropriate legal action.
Our founder who created the Jhooth ki goonj website has been continuously threatened by Rahul Gandhi’s PR team.
She is just 20 years old. Let this tweet spread and tell everyone what kind of person Rahul Gandhi is.
There ought to be an in-depth case study examining how Congress phone banking led to the accumulation of huge non-performing assets that were subsequently cleaned up by the the Modi government.
Karnataka celebrities and cricketers are paying tribute to Vande Mataram,the national song 🔥😍
I hope celebrities from other states recreate this masterpiece
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले कांग्रेस पार्टी सिर्फ़ दो बार सत्ता से बाहर रही, सवा दो साल मोरारजी सरकार और छ: साल अटल सरकार के दौरान
चरण सिंह, ��ंद्रशेखर, देवेगौड़ा और गुजराल सरकारें कांग्रेस समर्थन से ही चल रही थीं और कांग्रेस के समर्थन वापस लेते ही गिर गईं
इस बार 12 साल हो गये और सत्ता की दूर-दूर तक कोई आस नहीं
ऐसे में पार्टी की बौखलाहट समझ में आती है
Just some amount that was burnt by Justice Yashwant Verma would have saved many schools. Hope some day Indian judges grow spine to criticise corruption in judiciary rather than criticising Hindu faith which is the easiest things to do in India will full impunity.