यह ताजुल मस्जिद का निर्माण मुगल काल में हुआ था। शाहजांबेगम (1844-1901) ने इसका काम शुरू करवाया था जो 1985 में मौलाना सैयद हशमत अली साहब पूरा कराया। बाहदुर शाह ज़फर की हुकुमत में शाहजांहा बेगम ने इसका काम शुरू करवाया था।ये है एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद बनने में लग गए थे 85 साल।
जुनैद ख़िदमत करने में और गंगा-जमुनी तहज़ीब वाले लेक्चर देने में इतना खो गये कि वो भूल बैठे कि वो एक मुसलमान हैं और उनका नाम 'मुहम्मद जुनैद' है।
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तस्वीर में दिखाई दे रहे शख़्स (मुहम्मद जुनैद) से शायद ही कोई अंजान होगा। जुनैद भाई जंतर मंतर पर प्रोटेस्टर्स को पिछले एक महीने से खाना/पानी बाँट रहे हैं। जुनैद भाई ने कई मर्तबा अपनी वीडियोज़ में कहा था कि 'जंतर मंतर पर कोई धर्म नहीं है, यहां इंसानियत है।
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जुनैद के परिवार को अपना परिवार मानकर उनकी सिक्युरिटी की ज़िम्मेदारी उठाएंगे। जिस तरह से जुनैद ने जंतर मंतर पर 'इंसानियत का परचम' उठाया हुआ था, क्या वो लोग अब जुनैद के लिए भी 'इंसानियत का परचम' उठाएंगे?
قرآن نے سود لینے سے منع کیا لیکن پاکستان کا آدھا بجٹ سودکی نذر ہورہا ہے۔ ہم بجٹ کا 50 فیصد اللہ اور رسول ﷺ سے جنگ پر خرچ کر رہے ہیں
ہندو سینیٹر دنیش کمارسود کے خلاف بول پڑے، سود سے متعلق قرآن کی آیات بھی پڑھ دیں
@Millat_Times Achha
Jab khud par kuch hota h tab hi musalman yad aate h
Bahot sare masle h kya ap nhi jante k musalmano k sath kya ho raha h
Ap khud bhi utha sakte ho
आज की सबसे बड़ी सीख:
काम छोटा हो या बड़ा, ईमानदारी और मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।
लोग तुरंत परिणाम देखते हैं, लेकिन असली सफलता सब्र, लगातार कोशिश और सही नीयत से मिलती है।
हार मानना आसान है, लेकिन कोशिश जारी रखना ही इंसान को अलग बनाता है।
अपने लक्ष्य पर भरोसा रखो,
इनको फ़ीरौन,नमरूद और अबू कहल जैसे लोगों के बारे में पढ़ना चाहिए, उनके सामने इनकी तो हैसियत भी कुछ नहीं है,ये भी दुनिया से रुख़्सत हो गए यही सपना लेके की वो इस्लाम को मिटा देंगे, लेकिन अल्लाह का शुक्र है की इस्लाम और ज़्यादा फ़ैला, अल्लाह हिदायत दे !
यह कोई स्वामी आनंद स्वरूप हैं। इनका कहना है कि यही वो व्यक्ति होंगे जो इस दुनिया से इस्लाम को मिटाएंगे, यह इनकी कुंडली में लिखा है। हालांकि यह हेट स्पीच है, चूंकि आरोपी ‘दूसरा’ नहीं है इसलिए मदर ऑफ डेमोक्रेसी की पुलिस इन्हें छू भी नहीं पाएगी।
खैर बाबा जी! को सपने देखने और मुग़ालता पालने का पूरा अधिकार है, इसलिए ये खुश रहें। बाक़ी इस्लाम तो तब ना मिटा जब इसके मानने वाले महज़ 313 थे, और तब भी नहीं मिटा जब करबला में नवासा-ए-रसूल को उनके खानदान के साथ शहीद कर दिया था, तो अब क्या खाक मिटेगा। अब तो इस्लाम की रोशनी लगभग दुनिया के हर देश में पहुंच चुकी है। सुनो बाबा जी! इक़बाल ने सवा सो पहले लिखा था-
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
यह कोई स्वामी आनंद स्वरूप हैं। इनका कहना है कि यही वो व्यक्ति होंगे जो इस दुनिया से इस्लाम को मिटाएंगे, यह इनकी कुंडली में लिखा है। हालांकि यह हेट स्पीच है, चूंकि आरोपी ‘दूसरा’ नहीं है इसलिए मदर ऑफ डेमोक्रेसी की पुलिस इन्हें छू भी नहीं पाएगी।
खैर बाबा जी! को सपने देखने और मुग़ालता पालने का पूरा अधिकार है, इसलिए ये खुश रहें। बाक़ी इस्लाम तो तब ना मिटा जब इसके मानने वाले महज़ 313 थे, और तब भी नहीं मिटा जब करबला में नवासा-ए-रसूल को उनके खानदान के साथ शहीद कर दिया था, तो अब क्या खाक मिटेगा। अब तो इस्लाम की रोशनी लगभग दुनिया के हर देश में पहुंच चुकी है। सुनो बाबा जी! इक़बाल ने सवा सो पहले लिखा था-
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
@WasimAkramTyagi इनको फ़ीरौन,नमरूद और अबू कहल जैसे लोगों के बारे में पढ़ना चाहिए, उनके सामने इनकी तो हैसियत भी कुछ नहीं है,ये भी दुनिया से रुख़्सत हो गए यही सपना लेके की वो इस्लाम को मिटा देंगे, लेकिन अल्लाह का शुक्र है की इस्लाम और ज़्यादा फ़ैला, अल्लाह हिदायत दे !
پاکستان کے محترم عوام؛
یہ جنگ آپ کی فوج نے شروع کی ہے، اور اس کی کمان براہِ راست وائٹ ہاؤس کی طرف سے ہونی ہیں۔ ان کے حکم پر یہاں مدارس اور مساجد پر بمباری کی جاتی ہے۔
کیا ایسے لشکر کی حمایت کرنا جو اسلام کے خلاف جنگ کر رہا ہو، ایک مومن کے لیے مناسب ہے؟ اگر امریکہ حکم دے تو یہی فوج آپ کو بھی قت۔ل کر دے گی۔ یہ ظالم فوج ہرگز کسی مومن کی حمایت کے لائق نہیں