दो तीन दिन से लगातार बहनजी व विशेष तौर से आकाश आंनद को टारगेट करके पूछ रहे है कि वो कँहा है;
"आकाश आंनद मैसूर में मराठा कुर्मी समाज से आने वाले शाहूजी महाराज की जयंती के बामसेफ के मैसूर कार्यक्रम में थे"
अधिकतर चाहते है कि आप पार्टी व कोंग्रेस व पीछे से भाजपाई की बिछाई बिसात पर आकाश आंनद आकर कपड़ा फाड़ प्रदर्शन करे।।
मुझे कल से व्हाट्सएप्प व फेसबुक पर आकाश आंनद पर टारगेट कर रहे है कि कँहा है आकाश आंनद।
अरे भाई में पहला व्यक्ति हूँ जिसने 2021 में आकाश आंनद से मुलाकात पर कहा था कि;
1.आकाश आंनद अभी अपरिपक्व है। उन्हें बहुजन मिशन की ABCD नही पता है। उन्हें अपना पीए श्रीवास्तव को हटाकर किसी बहुजन समाज के व्यक्ति को लाना चाहिए।
2.आकाश आंनद के त्यौहार सेलिब्रेट करने पर मैने ही एकमात्र विरोध किया। उन्होंने फिर सार्वजनिक प्रदर्शन नही किया।
3.उनके हाथ से कलावा का विरोध भी सबसे पहले मेने किया। उन्होंने हटा लिया।
4.बहनजी हाय हाय करने वाली आईडी को फॉलो बैक पर मेरे विरोध के 15 मिनट में उन्होंने unfollow कर दिया।
इसलिए मुझे टारगेट करने की मूर्खता न करे। लेकिन यह भी सत्य है कि;
"आकाश आंनद ने शालीनता से सभी बातों को स्वीकार किया। परिवर्तन लाया। जितनी अपेक्षा थी, उससे दस गुणा अच्छा उन्होंने किया है"
सबसे मुख्य बात की उन्होंने;
"श्री अखिलेश यादव की तरह पिता का अपमान करने का 1% भी नही सोचा, बहनजी ने जैसा कहा, चुपचाप स्वीकार किया, एक भी बयान विरोध में नही दिया, डिप्रेशन तक में आये, लेकिन बहनजी के आदेश के विरुद्ध कुछ नही किया। वर्तमान में भी बहनजी जो कह रही है उसे चुपचाप फॉलो कर रहे है"
अब जंतर मंतर हमारी पिच नही है। ठीक है जो कर रहे है, उनका स्वागत है। उनका कोई विरोध नही।
लेकिन हम अपनी शर्तों पर, अपने कार्यक्रम करेंगे। हम;
"भारत मे सबसे पहले आरक्षण लागू करने वाले व बाबा साहब को जो अपना सबसे प्रिय मानते थे, उन महाराजा शाहूजी महाराज को याद कर रहे है। शाहूजी महाराज ने एससी/एसटी/ओबीसी को सबसे पहले भारत में आरक्षण दिया। ओबीसी पार्टियां उन्हें सम्मान नही देती है। बहनजी द्वारा किंग जॉर्ज मेडिकल का नाम शाहूजी महाराज पर करने पर जिस पार्टी ने कहा था कि हम नही जानते किसी शाहू वाहू को, हम उनकी तरह ड्रामेबाजी नही करते है"
हमारे अपने कार्यक्रम है। हमारी विचारधारा बहुजन है। बहुजन महापुरुष जिसमे 80% ओबीसी समाज से है, उनके विचार व उनका सम्मान है। उनके संदेशों का प्रसार हमारे लिए सर्वोपरि है।।
उसे हम कर रहे है। जंतर मंतर पर आप जो कर रहे है, उसपर हमारा एक प्रतिशत विरोध नही बल्कि युवाओ के दर्द के साथ है। लेकिन इन युवाओ को हमने बहुजन विचारधारा में रोजगार दिया। सुरक्षा दी। प्रोफेशनल कोर्स तक कराए है, सरकारी सहायता देकर।
चन्द्रशेखर जंतर मंतर पर भाषण दिया, वँहा से निकलकर संसद में आ गए, धरने पर बैठे है, यह उनकी अपनी रणनीति है। उन्हें यह करना चाहिए, कर रहे है। उनकी रणनीति में जंतर मंतर विषय है जिसपर कोंग्रेस-आप पार्टी एक दूसरे पर कार्यक्रम को खत्म करने का आरोप लगाकर आपस मे लड़ रहे है। चन्द्रशेखर राजनीति कर रहे है। उन्हें करना भी चाहिए। कोंग्रेस, आप पार्टी, सपा कर सकती हैंतो उन्हें भी पूरा हक है।। लेकिन;
"उनके समर्थक, या सपा-कोंग्रेस पार्टी या उनके समर्थक यह निश्चित नही करेंगे कि आकाश आंनद को बामसेफ के शाहूजी महाराज को याद करने की जगह जंतर मंतर पर कपड़े फाड़ प्रदर्शन करना चाहिए"
कोंग्रेस, आम आदमी पार्टी की सरकार राज्यो में है। वो घोषणा कर दे कि उनके राज्यो में प्राइमरी से लेकर प्रोफेशनल कोर्स तक कि फीस फ्री होगी। कोई जाति का बंधन नही।। प्रत्येक बच्चे को एक प्रोफेशनल कोर्स सरकारी सहायता पर हम करवाएंगे। बस वो प्रवेश परीक्षा पास कर ले, चाहे एमबीबीएस हों या आईआईटी या आईआईएम।
ऐसा क्यो नही कह रहे?
हम अपनी बहुजन की सरकार में ऐसी घोषणा करते है।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP@ramjigautambsp@MP_SiddharthBSP@bspindia
छात्रों, तलवार या कोई हथियार लहराते उपद्रवियों को देखकर तुरंत दूरी बनाइए।
हिंसक तत्व अपनी आज़ादी अलग से मांगें, आप उनके मोहरे मत बन जाइए।
जैसे गोदी मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं, वैसे ही इन्हें देखकर भी दूरी बनाइए।
पूरा देश आपको देख रहा है, इस आंदोलन को एक मिसाल बनाइए। 🙏🙏
भाई आकाश आनंद बहुत जल्द पूरे यूपी का दौरा करने जा रहे है और उनका लक्ष्य है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले वो सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुँचे और लोगो से मिले ।
यकीन मानिए इस दौरे के बाद यूपी में सियासी भूचाल आने वाला है ।
यूपी की जनता आपका बेसब्री से इंतजार कर रही है भाई @AnandAkash_BSP
बहुजन समाज पार्टी तो
तगड़ा गेम खेल रही है बड़ी-बड़ी पार्टियों नतमस्तक हो जाएगी
और केतली छाप तो साले ढूंढे नजर नहीं आएंगे
एक तो लाल टोपी वाले पीटेंगे पीटेंगे
ऊपर से अगर बसपाई के हाथ लगेंगे वह हाथ धो लेंगे 😂
आप अपना नेता हुमायूँ को मानो, हमें क्या दिक्कत है? हमारा तो हाथी है। रही बात बराबरी की, तो उसका सवाल ही नहीं उठता वैसे भाजपा मंत्रालय से महीने का कितना मिलता है, जो पढ़ाई का खर्चा, घर का राशन, मम्मी-पापा की दवाई और छोटे भाई की चॉकलेट तक आराम से निकल जाती हो?
यही कारण है कि हम अपना नेता सिर्फ @BhimArmyChief भैया जी को मानते हैं। जो सम्मान, संविधान और बराबरी की बात करे, वही हमारे लिए नेतृत्व का हकदार है। जय भीम! 💙 @ASP4UP
आज दिनांक 12-07-2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के निर्देशानुसार जनपद सुल्तानपुर के विधानसभा क्षेत्र लंभुआ में बहुजन समाज पार्टी द्वारा आयोजित विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ जिसमें विशेष रूप से श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह जी को विधानसभा लंभुआ बहुजन समाज पार्टी का प्रभारी/ प्रत्याशी घोषित किया गया।
#जयभीम #मिशन_2027
#BSP #सुल्तानपुर #लंभुआ
#बहुजन_समाज_पार्टी
“अब तो टीवी चैनल में बैठे ज्योतिष भी बहन मायावती जी अगला सीएम बताने लगे हैं”🔥😂
हालांकि मैं ज्योतिष जैसी कोई भी चीज पर विश्वास नही करता हूँ लेकिन फिर भी जिस हिसाब से सर्व समाज का झुकाव बसपा में दिखाई दे रहा है और सत्ता से लेकर विपक्ष तक बसपा के ख़िलाफ़ झूठा प्रचार करने के लिए उसे किसी भी तरीक़े से रोकने के ऐडी से चोटी तक का ज़ोर लगा रहे हैं और अपने चमचों को भी बसपा के ख़िलाफ़ खड़ा कर दिया हैं इससे साफ़ मालूम पड़ता कि बसपा की सरकार फिर आने वाली हैं और इसलिए ही इसकी सुगबुगाहट ज्योतिष के कानों में गूँज उठी हैं।
चित्रा त्रिपाठी की शानदार रिपोर्टिंग!
मेरठ की घटना पर ABP News की चित्रा त्रिपाठी ने अपनी रिपोर्टिंग में SSP अविनाश पांडेय को जमकर धोया है।
उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग में मुख्यमंत्री योगी और गृहमंत्री अमित शाह के करीबी अफसर अविनाश पांडेय को कई बार "वर्दी वाला गुंडा" कहकर संबोधित किया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इसे गंभीरता से लिया है। सच कहूँ तो दलित समुदाय से जुड़े मामलों पर आज पहली बार चित्रा त्रिपाठी की पत्रकारिता जातीय कुंठा से परे थी। पुलिसकर्मी किसी भी जाति के हों, लेकिन अगर वे संविधान और कानूनी प्रक्रिया को धता बताकर आम जनता पर अपनी लाठी और वर्दी का जोर दिखाकर गुंडागर्दी करते हैं, तो उसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
SSP अविनाश पांडेय द्वारा "पूरी रोड गंदी कर दी सालों ने", "रोड तुम्हारे बाप की नहीं है.." जैसी गालियों का प्रयोग करते हुए दलित समुदाय के सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आम युवाओं को भीड़ में और बंदी वाहन में घुसकर पीटना पूरे समाज का अपमान है। गृहमंत्री अमित शाह को इसका संज्ञान लेना ही होगा। ऐसे सनकी, अमानवीय, गालीबाज़ और हिंसक प्रवृत्ति के इंसान का SSP जैसे पद पर रहना कानून-व्यवस्था का मखौल उड़ाने जैसा है।
दलित युवाओं के खिलाफ बड़ी साजिश!
प्रिय साथियों, दलित समुदाय के लोग स्वभाव से बहुत भोले होते हैं। दुःख की बात यह है कि इसी सीधेपन का फ़ायदा उठाकर कुछ स्वार्थी तत्व उनकी भावनाओं को भड़काते हैं और उन्हें हिंसक आंदोलनों की आग में झोंक देते हैं।
ऐसे में, विरोधी ताकतों के बहकावे में आकर तुरंत भावुक हो जाने वाले समाज के नौजवानों को आज बहुत ठंडे दिमाग से जमीनी हकीकत को समझने की ज़रूरत है। चुनाव को मद्देनजर देखते हुए इस समय विरोधी पार्टियों का पूरा तंत्र सक्रिय हो चुका है। वे जानते हैं कि बहुजन समाज को सीधे हराना नामुमकिन है; इसीलिए वे हमारे ही समाज के कुछ महत्वाकांक्षी युवाओं और उग्र संगठनों को मोहरा बना रहे हैं। ये लोग बड़ी-बड़ी बातें करके बसपा के नाम पर सहानुभूति बटोरते हैं और आंदोलन के बहाने भीड़ इकट्ठा करते हैं। फिर अपने पाले हुए हुड़दंगियों के ज़रिए माहौल को हिंसक बना देते हैं ताकि हमारे युवा सड़कों पर चक्का जाम व टकराव के आत्मघाती रास्ते पर धकेले जा सकें।
हमारे युवाओं के खिलाफ यह साज़िश कितनी गहरी है, इसे हम इन दो प्रमुख बिंदुओं के जरिए समझ सकते हैं।
1) युवाओं को मुकदमों के दलदल में धकेलना:
विरोधी चाहते हैं कि युवा आक्रोश में आकर कानून अपने हाथ में ले और पुलिस उन पर संगीन धाराएं ठोक दे। एक बार पुलिस रिकॉर्ड खराब हुआ, तो युवा का करियर, सरकारी नौकरी का सपना और परिवार की उम्मीदें हमेशा के लिए दम तोड़ देती हैं। बिना पुलिस NOC के न तो कैरेक्टर सर्टिफिकेट बनता है और न ही पासपोर्ट या सरकारी नियुक्तियां हो पाती हैं। फिर इस एक NOC के लिए हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक के चक्कर काटने पड़ते हैं।
परंतु इस हुड़दंग में फंसकर यदि कोई युवा जेल चला गया, तो पूरा घर बर्बाद हो जाता है। उन्हें पुलिस, प्रशासन, नेताओं और वकीलों के पीछे पीछे घूमते रहते हैं। सालों साल तक तारीख पर तारीख चलती रहती है। अगर आपको यकीन न हो तो एक बार सहारनपुर हिंसा, प्रयागराज हिंसा एवं अन्य जगहों पर पीड़ित युवाओं से पूछ लीजिए। मनुवादी सरकार एवं प्रशासन तो बस मौका ढूंढती है कि किस तरह वे दलितों को कुचल सकें। विरोधियों की असली चाल ही यही है कि बहुजन युवा पढ़-लिखकर अधिकारी बनने के बजाय कोर्ट-कचहरी और तारीखों के चक्कर काटता रहे, ताकि वे जीवनभर उन्हें अपनी पार्टियों का झंडा ढोने वाला अदना कार्यकर्ता बनाकर रख सकें।
2) 'मास्टर चाबी' से ध्यान भटकाना:
बाबासाहेब आम्बेडकर, मान्यवर कांशीराम साहब और आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी ने हमें हमेशा यही सिखाया कि सड़कों पर लाठियां खाना हमारी नियति नहीं है। हमारी असली मंजिल शासन करना यानी 'हुक्मरान जमात' बनना है। ये बरसाती मेंढक और उग्र संगठन हमारे युवाओं को इसी मुख्य राजनीतिक लड़ाई से भटकाना चाहते हैं, ताकि हम सिर्फ सड़कों के विवादों में उलझे रहें और सत्ता की उस 'मास्टर चाबी' तक कभी न पहुँच पाएं जिससे तरक्की के बंद दरवाज़े खुलते हैं।
आज जो लोग बसपा की नीतियों पर उंगली उठाते हैं, उन्हें इतिहास देखना चाहिए। बहन जी के चार बार के शासनकाल में यूपी में 'क़ानून द्वारा क़ानून का राज' था। उस दौर में किसी बड़े से बड़े जातिवादी अधिकारी या बाहुबली गुंडे की इतनी हैसियत नहीं थी कि वह दलितों के आत्मसम्मान को ठेस भी पहुँचा सके। बहन जी कानून के मामले में इतनी सख्त थीं कि उन्होंने गुंडागर्दी करने पर अपनी ही पार्टी के तत्कालीन सांसद उमाकांत यादव को मुख्यमंत्री आवास पर बुलाकर वहीं से गिरफ्तार करवा दिया था।
रोहित वेमुला को न्याय दिलाने के लिए जब बहन जी ने संसद भवन में हुंकार भरी थी, तो पूरी संसद हिल गई थी। यही नहीं, जब सहारनपुर हिंसा में दलित पीड़ितों की आवाज़ को दबाने की कोशिश की गई, तो बहन जी ने बाबासाहेब के पदचिन्हों पर चलते हुए राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि जिस सदन में मेरे समाज की बात न सुनी जाए, वहाँ रहने का कोई फायदा नहीं। इसे कहते हैं सिद्धांतों और आत्मसम्मान की असली लड़ाई!
इसलिए, साथियों! जोश और जुनून अपनी जगह बिल्कुल सही हैं, लेकिन याद रखिए कि जोश में होश खोने की गलती आत्मघाती साबित होती है। विरोधियों के इस विषैले षड्यंत्र को पहचानिए। मासूमों के भविष्य की कतरन पर अपनी राजनीतिक इमारत बनाने वाले इन स्वयंभू नेताओं के बहकावे में आकर अपनी जिंदगी और अपने परिवार का भविष्य दांव पर मत लगाइए। समाज की समस्याओं का असली समाधान खोखली डायलॉगबाज़ी या सड़कों पर बवाल करना नहीं है, बल्कि एकजुट होकर एक सामाजिक एवं राजनीतिक ताकत बनना है।
- सूरज कुमार बौद्ध (फाउंडर- मिशन आम्बेडकर)
वाराणसी में ग्राम प्रधान पति राजू तिवारी ने जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि इंजी. नवीन भारत को जातीय गालियां और जान से मारने की धमकी दी। सबकुछ SO के सामने हुआ।
इस घटना पर प्रशासन ने अभी तक FIR भी दर्ज नहीं किया है। कार्रवाई तो दूर तो दूर की बात है। क्या यही कानून है?
एसएसपी ने आपको मार दिया।
अजीब लगा न?
अब 1990 के दशक से पहले के दौर में चलते है। यह वो दौर था जब;
1.एससी बाउजी कहकर हाथ जोड़कर खड़ा रहता था।
2.डीएम व एसपी उंसके लिए राजा नही बल्कि महाराज से कम नही थे, जो कभी एससी बस्तियो के पास भी नही दिखते थे।
3.डीएम व एसपी का चपरासी हाथ जोड़कर बाउजी कह रहे समाज को भगा देता रहा। इंहा चरपासी ही उनके लिए सभी कुछ था।
फिर;
"आई । बहनजी। वो ही डीएम और वो ही एसपी दफ्तर छोड़कर हफ्ते में 3 दिन एससी बस्तियो में हाथ जोड़कर बाउजी कहकर घूमते मिलते थे। इससे एससी में इतना मनोबल आया की जँहा पहले इंस्पेक्टर ही नही सिपाही की मार भी खा लेते थे। एक एसपी को बतमीजी का कम से कम विरोध कर रहे है।
एक जानकार गाँव की बारात में गया, तब छोटा था। वँहा देखा कि इस बात पे विवाद हो रहा था कि एससी ने आछे कपड़े क्यो पहन रखे है। आज उसी समाज के युवा मूंछो ओर तांव देकर बुलैट पर घूम रहे है"
कारण?
"सत्ता की प्राप्ति। मान्यवर साहब कांशीराम इसलिए कहते कहते थे कि हमे इस देश का शासक बनना है। जिस दिन बन गए उसी दिन सिंघम टाइप आईएएस व आईपीएस गरीब, मजदूर के सामने फूल बिछाकर चलते मिलेंगे"
4.अब यह है कि;
प्रश्न : इन्ही सिंघम टाइप आईएएस/आईपीएस को एससी बस्तियो में किसने घुमवाया?"
उत्तर : बहनजी ने
प्रश्न : किसने दलितो पर अत्याचार किया?
उत्तर : श्री अखिलेश यादव ने।
प्रश्न : बहनजी कँहा है?
उत्तर : पुनः दलितो की बस्तियो में नौकरशाही को समस्या पूछते हुए घुमवाने की कोशिस में?
प्रश्न : श्री अखिलेश कँहा ही?
प्रश्न : अपने गुरुदेव अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों मे
प्रश्न : फिर बसपा ब्राह्मणवादी पार्टी व अखिलेश दलितो के नए नवेले रहनुमा कैसे हो गए?
उत्तर : इतना दिमाग हममें नही है। छोड़ो । बस हमे मायावती हाय हाय करना है।
5.सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है कि;.
"पांडे आईपीएस थप्पड़ मार रहा है। लेकिन कितने एससी आईएएस/आईपीएस तुम्हे फूलों का गुलदस्ता दे रहे है?"
एक भी नही। कारण। अवसरवादिता। समाज से भागना। आरक्षण लेकर उसी समाज को भूल जाना।।
6.वास्तव में समस्या यह है कि पांडे से लेकर अन्य तुम्हे मार रहे है लेकिन तुम्हारी जनसँख्या के प्रतिशत कर आधार पर जो उसी पद पर पहुच गए, वो भी तुम्हे भाव नही दे रहे। जबकिं अगर सभी आरक्षण से बने ग्रुप ए अधिकारी समाज के प्रति यह सोच ले कि इसी समाज के प्रतिशत के कारण मुझे नौकरी मिली है इसलिए समाज को देना है तो फिर एक समय बाद यह ही समाज महत्वयुक्त हो जाएगा। कोई अम्बेडकरवादी आईएएस आ गया तो वो तुम्हे काफी कुछ दे देगा। उदाहरण;
"सहरानपुर में बाबा साहब की शोभायात्रा 1992 में निकल रही थी।।मार्किट से जा रही थी। पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। अगले दिन डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन करने गए। मेरी माँ भी गयी थी। मुझे अभी भी याद है। डीएम योगेश सागर थे। जाटव थे। उन्होंने कहा कि दंगा वग़ैरह छोड़ो। में इससे ज्यादा दिलवाता हूँ।
उन्होंने सहरानपुर स्पोर्ट्स स्टेडियम का नाम डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर के नाम पर करवाया। बकायदा बाबा साहब की मूर्ति स्थापित करवाई।
आज लगभग 34 साल हो गए। हर 14 अप्रैल को वँहा हम सभ्य तरीके से कार्यक्रम करते है"
इसलिए आरक्षण से बने आईएएस/आईपीएस/पीसीएस का 20% भी समाज के प्रति Pay back to Society किसी न किसी रूप में अथार्त योजनाओं को लागू करके करने लगे तो इस समाज का इतना महत्व पैदा हो जाएगा कि उसे कोई थप्पड़ नही मारेगा।
विकास कुमार जाटव।
@Mayawati@AnandAkash_BSP@BhimArmyChief
जब सवर्ण प्रोटेस्ट करता है तो प्रशासन दांत निपोरते हुए उनके साथ हाहाहा करते हैं, पर जब दलित न्याय मांगता है तो यही पुलिसवाले उन्हें गाली देते हैं, थप्पड़ मारते हैं।
जाति और सत्ता का फर्क है बाबू। वर्ना अविनाश पांडेय की क्या औकात कि वह दलितों को बहन की गाली दे देता।
मैं इसीलिए कहता हूँ कि दलित समुदाय के लोग अपने घर में आग लगाकर पड़ोसी के महल में बैठकर खुश होने वाली सोच का दंश झेल रहे हैं। अगर समाज ने आज बसपा को कमजोर न किया होता, तो क्या एक IPS अफसर की इतनी औकात होती कि वह "पूरी रोड गंदी कर दी सालों ने, इनके पिता जी की रोड नहीं है" जैसी गालियां देता? क्या वह आंदोलन में खड़े युवाओं को थप्पड़ मारता और बंदी वाहन में घुसकर समाज के युवाओं पर अपना जातीय रौब दिखाता? चूंकि वह मुख्यमंत्री योगी और गृहमंत्री अमित शाह का खास अफसर है, जाति से ब्राह्मण है, इसलिए सरकार उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
दलितों को हिंदू कहकर हिंदू एकता का नारा देने वाले लोगों का दोहरा चरित्र देखिए। आज वे खुलकर गालीबाज SSP अविनाश पांडेय के समर्थन में हैशटैग चला रहे हैं। इससे साफ सिद्ध होता है कि सवर्णों की हिंदू एकता का मतलब सिर्फ सवर्ण हितों को सुनिश्चित करना है। वरना जो द्विज हिंदू कल तक बिहार के कुख्यात अपराधी भरत तिवारी के लिए विलाप कर रहे थे, आज वे अविनाश पांडेय की गालीबाजी और गुंडागर्दी का समर्थन क्यों कर रहे हैं? सवर्ण प्रभुत्व ही इनकी हिंदू एकता का सार है; भाजपा सरकार और उसके अफसर इसी हित को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।
मेरठ में अधिवक्ता रवि कुमार गौतम के साथ हुई घटना अत्यंत चिंताजनक है। न्याय की रक्षा करने वाले एक वकील का स्वयं को असहाय और असुरक्षित महसूस करना हमारी कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गहरे सवाल खड़े करता है। @Uppolice@myogiadityanath
बहन जी ने समाज के लोगो को हुड़दंग करने वाले नेताओं से सावधान किया है जो पीड़ितों के घर जाकर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश करते है और ये भी बोला है कि दलितों के ऊपर हो रहे जुल्म को अगर रोकना है सत्ता की मास्टर चाभी अपने हाथ मे लेनी होगी ।
चन्द्रशेखर का नगीना मॉडल : पढ़िए और सभी को शेयर कीजिये -
जिला गाजियाबाद में आसपा नेता ने दलित युवती का क़ई सालों तक किया,नगीना सांसद चन्द्रशेखर वहाँ क्यों नहीं गए?
जिला मुरादाबाद में मुस्लिम युवकों ने नाबालिग दलित छात्रा का अपहरण कर कई महीनों तक सामूहिक दुष्कर्म किया,नगीना सांसद वहाँ धरना-प्रदर्शन करने क्यों नहीं गए?
जिला प्रयागराज में मुस्लिम लड़के-लड़कियों गिरोह ने एक नाबालिग दलित लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और उसका धर्म परिवर्तन कराया,नगीना सांसद उस बिटिया को न्याय दिलाने क्यों नहीं गए?
जिला श्रावस्ती में मुस्लिम युवक ने दलित छात्रा का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया व बरेली में उसका धर्म परिवर्तन कराया, नगीना सांसद चन्द्रशेखर का मुँह क्यों नहीं खुला?
चार दिन पहले जिला हरदोई में मुस्लिम युवक ने घर में घुसकर नाबालिग दलित लड़की का बलात्कार किया,नगीना सांसद चन्द्रशेखर ने इसका विरोध नहीं किया।
चार दिन पहले जिला हरदोई में मुस्लिम वर्ग के क़ई युवकों ने दलित लड़की का सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर दी,नगीना सांसद चन्द्रशेखर चुप रहे।
दो हफ्ते पहले सन्त कबीर नगर में मुस्लिम युवकों ने एक दलित युवक की धारदार हथियार से गर्दन काटकर हत्या कर दी,नगीना सांसद चन्द्रशेखर ने एक शब्द तक नहीं बोला।
ऐसे सैंकड़ों मामले हैं,जिनपर चन्द्रशेखर ने चुप्पी साधी,क्योंकि इनमें दलितों पर अन्याय व अत्याचार करने वाले मुस्लिम वर्ग से थे।
मेरठ में चन्द्रशेखर आज़ाद धरने पर बैठ गए,क्योंकि ललिता गौतम हत्याकांड में आरोपी ठाकुर जाति से हैं।
युवाओं के नाम बहन जी का संदेश!
मेरठ की घटना का संज्ञान लेते हुए माननीया बहन जी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जहाँ उन्होंने दलित समुदाय के युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि हमें बाबासाहेब डॉ. आम्बेडकर के दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए। अपने ऊपर होने वाले किसी भी जुल्म-ज्यादती के विरुद्ध लड़ाई, कानून को हाथ में लेकर नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर लड़नी चाहिए।
न्याय के नाम पर हिंसा, हंगामा या सड़क जाम जैसा बवाल करने से पीड़ितों को न्याय मिलने वाला नहीं है; बल्कि इससे समाज के लोगों की मुसीबतें और परेशानियां और अधिक बढ़ जाती हैं। बहन जी ने स्पष्ट कहा कि न्याय के लिए समाज को बाबासाहेब के लिखित संविधान के अनुसार चलना चाहिए और जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय सहित अन्य कानूनी तरीकों का सहारा लेना चाहिए।
अब इस पर चंद्रशेखर आज़ाद का कहना है कि कोर्ट-कचहरी से न्याय पाने में तो 10-10 साल लग जाएंगे, तब तक क्या हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लुटती रहे और हम चुप बैठे रहें? दुनिया को छोड़िए, चंद्रशेखर आजाद पर खुद 36 मुकदमे दर्ज हैं। क्या उन्होंने अपने मामले में तत्काल इंसाफ दिलवा दिया? नहीं, क्योंकि कानून की प्रक्रिया के तहत सबको चलना ही पड़ता है।
चंद्रशेखर के इस बयान के बाद बहुत से लोग बहन जी को टारगेट कर रहे हैं। दरअसल, डायलॉगबाजी करने और नए लड़कों को खुश करने के लिए चंद्रशेखर का कहना सही लग सकता है, लेकिन आप ज़रा अपने विवेक का इस्तेमाल करके बताइए कि जिस भी घटना पर चंद्रशेखर जाते हैं, क्या वे उन परिवारों को तत्काल न्याय दिला पाते हैं? क्या वे कोई जज हैं जो ऑन-द-स्पॉट फैसला सुना देंगे? सहारनपुर, आजमगढ़, प्रयागराज, हरदोई, हाथरस... चंद्रशेखर आज़ाद ने इनमें से किस जगह पर तत्काल न्याय दिला दिया?
बहन जी ने चार-चार बार सरकार चलाई है, उन्हें अच्छी तरह पता है कि शासन और प्रशासन कैसे काम करता है। इसे छोड़िए, कोई भी व्यक्ति जो कानून की थोड़ी भी समझ रखता है, उसे पता होगा कि FIR होने के बाद पुलिस का इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (IO) विवेचना करता है, चार्जशीट दाखिल होती है, फिर सालों तक कोर्ट में तारीख पर तारीख चलती है और तब जाकर कोई फैसला आता है। अब वहाँ चाहे चंद्रशेखर जाएं या राहुल गांधी, कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया में सालों-साल तो लगते ही हैं।
हाँ, यह अलग बात है कि यदि आप सत्ता में हैं, तो फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करके एक तय समय-सीमा के भीतर न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है। पर इसके लिए तो सत्ता चाहिए! इसीलिए बहन जी ने समाज के युवाओं को संदेश दिया कि अगर अपने ऊपर हो रहे जुल्म-ज्यादती को हमेशा के लिए रोकना है, तो उन्हें केंद्र व राज्यों की राजनीतिक सत्ता की 'मास्टर चाबी' खुद अपने हाथों में लेनी होगी।
अब कुछ साथियों की यह भी नाराजगी है कि बहन जी ने मेरठ के SSP अविनाश पांडेय के खिलाफ सीधा कुछ क्यों नहीं बोला। देखो भाई, बहन जी चार बार देश के सबसे बड़े सूबे की मुख्यमंत्री रही हैं, उनका राजनीतिक कद बहुत बड़ा है। मुझे नहीं लगता कि उन्हें अविनाश पांडेय जैसे किसी अदने और गालीबाज़ अफसर का नाम लेकर अपने स्तर को नीचे गिराना चाहिए। वैसे भी आप बहन जी का ट्रैक रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, वह भाषणबाज़ी नहीं करतीं, सीधा एक्शन लेती हैं। उनकी सरकार के दौरान IG, DIG और DGP रैंक के बड़े-बड़े अफसरों में इतनी हिम्मत नहीं होती थी कि वे कानून और संविधान को धता बता सकें, फिर अविनाश पांडेय की क्या बिसात! उसके लिए तो हम लोग ही काफी हैं।
बाकी, ऐसे जातिवादी अफसरों को बल सत्ता के संरक्षण से मिलता है। अतः अगर समाज सच में अविनाश पांडेय के कृत्य से आहत है, तो भाजपा सरकार को इसका जवाब अपने वोट से दीजिए। लोकतंत्र में असली और सबसे गहरी चोट 'वोट की चोट' ही होती है। कुल मिलाकर बात यह है कि बहन जी ने समाज के युवाओं को जो संदेश दिया है, उस पर गंभीरता से अमल करें। वह बहुजन समाज की असली संरक्षक और मार्गदर्शक हैं।
संविधान विरोधी ताकतें हमेशा बहुजन समाज को सड़कों पर उलझाकर उनके भविष्य को मुकदमों के दलदल में धकेलना चाहती हैं। भावुकता में आकर सड़कों पर हुड़दंग करने से केवल हमारे युवाओं का करियर बर्बाद होगा, न्याय नहीं मिलेगा। इसलिए, इस सामंती व्यवस्था को नेस्तनाबूद करने के लिए जोश के साथ होश रखिए और बहन जी के नेतृत्व में 'वोट की ताकत' से अपनी खुद की हुक्मरानी स्थापित कीजिए।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 होने में छः महीने का समय बचा है।
नवम्बर 2026 या दिसम्बर 2026 के प्रथम सप्ताह में आचार संहिता लागू हो जायेगी।
बीएसपी आईटी सेल नहीं बना रही है,तो कम से कम बीएसपी के राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटरों को सोशल मीडिया पर अधिक से अधिक सक्रिय रहना चाहिए।
बहुजन समाज पार्टी को अब मीडिया में अपने प्रवक्ता बिठाने चाहिए,ताकि बीएसपी के खिलाफ किसी भी भ्रामक एवं विषैली खबर को जबाब दिया जा सके।
@Mayawati@AnandAkash_BSP@bspindia
यह लोग ऐसे ही चुनाव के समय जनता को डरा कर वोट लेकर भाजपा को जीता देते हैं।
एक वोट मत देना वोट बर्बाद करना है तो सपा को देना बीजेपी को हराना हो तो बसपा को देना।।
@PriyaSarojMP
बीएसपी के राष्ट्रीय समन्वयक श्री @AnandAkash_BSP जी ,मैं आपका ध्यान कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर लाना चाहता हूँ,आप इसपर ध्यान दीजिए।
यूपी चुनाव 2027 नजदीक है। हमारी बहुजन समाज पार्टी भी पिछले क़ई महीनों से जमीनी स्तर पर जोरदार तरीके से तैयारी कर रही है।
दिन-प्रतिदिन टिकट की घोषणा हो रही है। जमीन पर एक फिर बहुजन समाज पार्टी की चर्चाएं हो रही हैं।
जनता बहुजन समाज पार्टी की पाँचवीं बार सरकार चाहती है।
आकाश भैया, जातिवादी मानसिकता से ग्रसित लोग ,विरोधी दल और न्यूज चैनल वाले बहुजन समाज पार्टी के विरुद्ध भ्रामक,झूठी और विषैली खबरों को प्रचारित कर रहे हैं,जिससे बीएसपी को काफी नुकसान हो सकता है।
आप संज्ञान में लें और त्वरित ऐसे चैनलों,ट्विटर अकाउंट और लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करवाएं।