@Misha22331 @beauty_plus7 चित्र प्रसँग सार "सौदर्य हमेशा अवर्णनीय होता हैं"। इसकी कभी कोई आलोचना नहीं कर सकता। इसलिए तो पृथ्वी से स्वर्ग लोक तक इसपर विभिन्न मापदंडो से देखा गया जो हम आज खुलकर प्रयोगधर्मी बने।
@vratika1920 @beauty_plus7 चित्र प्रसँग सार"सुन्दर दिखने के लिए"। सौंदर्य ही सृष्टि का एक मात्र प्रतिक हैं जो सबको मन को भाने लगता है... प्रकृति जो दिखता है अपने मे सुन्दरतम हैं। कितना रँगीन हैं। इसे देख कर कवियोँ ने काव्य लिये। सब कुछ सौंदर्य हैं।
@P_Katyayan "इश्क बोया हैं बजँर धरती पर" यह प्रसँग का सार सँकेत करता है कि यह सृजन का मूल शब्द का अर्थ हम भूल जाते है तो बजँर बन जाते है। लेकिन वह उमडता हैं तो बहार आ जाता है। चारो तरफ रँगीन नजारा। इसलिए उमडऩे दो सृष्टि को बनाये रखने।
@sandyyk9 भोलापन ही सारे प्राकृतिक सँपदा को सहेजें हुए हैं। जो उदार हाथों से सारे प्राणी जगत और वनस्पति जगत मे अपना प्यार उडेल दिया है। उसी उपहार का हम सब उपभोग करते है।
@sandyyk9 "बहुत भोली हैं मेरी जान कहीं बदनाम न हो जाय"। प्रसँग का सार हैं भोलापन ही शाश्वत सत्य है इस सृष्टि का। विवाद तो हमारे अहँकार के कारण है। स्वर्गीय वातावरण को जब भी विचलित किया अहँकारो ने।
@sandyyk9 दिल naughty(नादानी, बचपनापन)हो रहा और दिल से hate(इर्ष्या, घृणा) निकल रहा। यही तो हमारी मूल स्वभाव है जो कुदरत से मिला है। जब जब हमारे भीतर का नादानी, बचपनापन खो जाता हैं तो वही दृश्य देखते हैं जो नहीं होना चाहिए।
@Jyotipa95799272 यही तो परेशानी हैं आज की उस चेहरा पहचानने की कला जानने वाले के लिए। एक इँसान मे अनेक मुखडे। आज भ्रमित हैं हर कोई कि क्या होगा इस वैज्ञानकीय युग में, क्योंकि हर राष्ट्र शक्ति सँपन्न हैं शस्त्रों के मामले में। कैसे पहचानें सभी विश्व कल्याण की सोच रखते हैं।
@Jyotipa95799272@RajivRanjanRa16@cutepari89@sandyyk9 @priyasha_jii @Its__Lucky_ @_Sumedhprabhas @Chahat__14 @9dreamgirl @SadhanaTilak @Heeriye5@BhavanaPoetess क्या हाल चाल हैं? (How are you) यह शब्द इतना महानता लिए हुए हैं, जो जग दर्शन कराता है। लेकिन हम सब के लिए महत्वहीन हैं। यह विश्व, राष्ट्र, देश, समाज, और व्यक्ति के ठीक अठीक स्थिति को झलकाता हैं। और इस महत्वपूर्ण शब्द को ही भूल गए।
@Jyotipa95799272@RajivRanjanRa16@cutepari89@sandyyk9 @priyasha_jii @Its__Lucky_ @_Sumedhprabhas @Chahat__14 @9dreamgirl @SadhanaTilak @Heeriye5@BhavanaPoetess हाल पूछने मे ही पता चलता है कि हम किस हाल में है। कोई न पूछे तो हमें कैसे पता चले हम कहाँ है, किस हाल में है, या यहाँ हैं कि नहीं। यही तो एक कडी हैं जग को जानने के लिए"क्या हाल चाल हैं"? यह एक शब्द ही मात्र नहीं अपितु जीवन के केंद्र बिन्दु हैं।जहाँ सभी इसी के आस-पास केंद्रीत हैं।
@sandyyk9 दिल मे जिसे बसाया और खुद को समर्पित किया। वही उपस्थित हैं खुदा की। यह सच्चाई युगो-युगो से घटा हैं किसी न किसी पर। इसलिए दर्ज हैं ऐसे नाम जो इतिहास के पन्नो मे याद किये जाते हैं।
@Heeriye5@Jyotipa95799272@AnkitRa16833671@deepupaul2 @Its__Lucky_ @naveen_jex @Suresh_745 उसी का जीवन असली जीना हैं, जो हर हाल में भीतर मस्ती बरकरार रखा। क्योंकि उपरवाले ने जन्म दिया है आनंद से जीवन जीने के लिए। क्यों मोल लेते है अकारण विवादों को। भीतर मस्ती हो तो हर कठिनाई बन जाती हैं सस्ती।
@Jyotipa95799272 तुलनात्मक दृष्टिकोण अच्छा है लेकिन दुसरा से नहीं, अपने से हो बेहतरीन सोच हैं अपनी विकास के लिए। क्यों कि हम भूतकाल में कैसे थे, और आज किस हाल में है। यहीं सही विकास की जड हैं।बाकी दूसरे की तुलना में परेशानी मोल लेना है,खुद के जीवन में।उच्चतम विचार।
@ProudResister@herman91215421 हम जहाँ से सृजित हुये उसीको गँदा कर अपना ही विनाश का उपक्रम,यह इस बात का सँकेत हैं कि उपरवाला अपना काम जारी रखा है कि उसके शब्द कोश मे निर्माण और विनाश का महत्व समान हैं। यह प्रकृति का नियम है।
@sandyyk9 जीन्दगी एक ख्वाब हैं। सँसार कितनी हसीन हैं? यह आँखो के देखने की नजरिया पल निर्भर करता है। बस यहीं निरीक्षण की खासियत हैं। जिसनें भीतर की गहराई में जाकर झाँका उसी ने यह सब जाना। बाकी के लिए शब्द अर्थ नहीं।
@sandyyk9 भौतिक जगत में बस एक ही बात याद रहता है,कि कहाँ से, कैसे दौलत(सँपन्नता)अर्जित करें। और घर भर लेते है, लेकिन विपत्ति मे यह सब असफल होते देख याद आता है उस दुवा का जो अजर-अमर है। वह हैं आत्मा की पुकार परमात्मा के लिए... वह हैं असली दौलत जो कभी भी नाश नहीं होता ।
@Botanygeek @herman91215421 यह नजारा पूरी दुनिया को सँदेस हैं कि लोग पर्यावरण को साफ-सुथरा और प्रदूषण मुक्त बनाने में इस विधि से बहुत कुछ कर सकते है। घर हो हरीयाली से सुसज्जित खुसबुओ से भरा आबहवा। यह है पृथ्वी को प्राणी जगत के लिए स्वर्ग बनाना।
@_Sumedhprabhas @sandyyk9@Beatking_Sumedh@iammallikasingh प्रेम दो आत्माओं का मिलन। जैसे राधा और कृष्ण। मिलन समग्रता से हो गया तो मिलन और समा गया एक दूसरे मे फिर कहाँ रहा कृष्ण और राधा एक हो गया।इसलिए अद्वैत ही सबका लक्ष्य। शाश्वत, अद्वैत ,पूर्णता,अनन्त आदि नामों से जानते हैं।