ABP न्यूज़ वालों... भाजपा की दलाली और नमक का हक़ अदा कर रहे हो या दलाली खाकर तुम्हारा पेट नहीं भरा जो बेटियों का सम्मान खाना चाहते हो?
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ABP न्यूज ने लोकगायिका नेहा सिंह राठौर के हॉस्टल में 'सेक्स रैकेट' को लेकर फर्जी खबर चलाई !
नेहा ने वीपी रजनीश आहूजा को फोन किया तो फोन काटकर भागा, चैनल ने माफी मांगी
नेहा बोली- कोर्ट में मिलो, माफी नहीं न्याय चाहिए !
सुनो @ABPNews अपने कर्मचारियों से फ़ोन करवाकर माफ़ी माँगना बंद करो. माफ़ी गलती की माँगी जाती है बदमाशी की नहीं. मेरे बारे में अफ़वाह उड़ा कर तुम IT सेल को स्क्रीनशॉट मुहैया करा रहे थे? तुम्हारी इस घटिया हरक़त से मेरी छवि और गरिमा को जो ठेस पहुँची है उसकी कोई माफ़ी नहीं है.😡
ज्ञानेश कुमार एक नंबर का फ्रॉड है
26 सितंबर को ज्ञानेश कुमार ने एक प्रेस नोट जारी किया, जिसमें कहा: फॉर्म-6 में बदलाव सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर किया गया।
लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है 👇
“किसी भी संशोधित फॉर्म-6 को हमने मंजूरी नहीं दी है।”
ज्ञानेश पूरे देश में वोट चोरी को अंजाम दे रहा है और अब पकड़े जाने पर ऐसे फ्रॉड कर देश को गुमराह कर रहा है।
ज्ञानेश को तत्काल गिरफ्तार करो, जेल में डालो।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, अविक साहा समेत कई वकील साथियों और युवाओं के साथ जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे हैं।
जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र में हमारा अधिकार है।
पुलिस के दम पर यह अधिकार हमसे नहीं छीना जा सकता।
शिवाजी पार्क मुंबई में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा के लिए लाखों लोग इकट्ठा हो गए हैं,
अगर थोड़ी सी भी शर्म बची हुई हो तो खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए,
लोगों का अब आप पर एक परसेंट भी भरोसा नहीं रहा,
लोग अब आपको वोट चोर समझने लगे हैं क्योंकि अपने काम ही ऐसा किया है।
जंतर-मंतर: DYFI और SFI के कार्यकर्ताओं ने हिरासत में लिए जाने से बचने के लिए पुलिस की बसों के सामने लेटकर विरोध जताया, जिससे वहां नाटकीय हालात बन गए।
पुलिस प्रदर्शनकारियों को पकड़ रही है और कई लोगों को हिरासत में भी ले लिया गया है।
भारी पुलिस तैनाती और बैरिकेडिंग के बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर के पास ही डटे रहने की कोशिश कर रहे हैं।
अपनी डेमोक्रेसी को बचाने के लिए, हम ये 3 मांगें रखते हैं:
1: ज्ञानेश कुमार को इस्तीफ़ा देना चाहिए, उन पर आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें बताना चाहिए कि आदेश किसने दिए थे।
2: SIR को फ़्रीज़ करें, जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट को बहाल करें और एक स्वतंत्र जांच का आदेश दें।
3: 2023 के अपॉइंटमेंट कानून को रद्द करें और सिविल सोसाइटी की भागीदारी के साथ एक पारदर्शी कानून बनाएं।
~अभिजीत दीपके