जय भीम साथियों 🙏🙏
आओ मिलकर थोड़ा समझें नए अंधभक्त क्या है कौन है इनका काम क्या है आओ जाने इनके बारे में विस्तारपूर्वक,,,,,,,,,
साथियों आपको पता होगा कि पिछले चार पांच साल से भीम आर्मी चीफ़ नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद जी ने पार्टी बनाई उसी पार्टी के बनने के बाद जन्म होता है नए अंधभक्त लोगों का और इनको काम मिला भीम आर्मी चीफ़ नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद जी को नीचा दिखाने का पार्टी व संगठन कि बुराई करने का लोगों में बिखराव पैदा करने का जिसे आप हम इनको कामयाब नहीं होने देंगे
साथियों क्या भाई किसी को पैसा देकर बुलाते हैं कि आप हमारी पार्टी में शामिल हो जाओ या संगठन में काम करो उत्तर नहीं है
पहले से मजबूत पार्टी को हमने कैसे बिखरते लड़खड़ाते देखा है जब तो आजाद समाज पार्टी नहीं थी जब तो कोई आपका वोट काटने वाला समाज में बिखराव करने वाला नहीं था फ़िर भी आपका स्तर गिरता गया आखिर क्यों
क्योंकि पहले तो लोग अपने दुःख से परेशान नहीं है दूसरे के सुख से परेशान है और उस समय अंधभक्त बौखलाए हुए हैं
इनकी हिम्मत या यह कहे कि इनकी औकात नहीं है कि किसी मनुवादियों कि मनुवादी विचारधारा पार्टी के खिलाफ बोल सके लिख सके बस इनको ये हजम नहीं हो पा रहा है कि कैसे एक गरीब व्यक्ति आगे बढ़ रहा है उसे रोको
बेचारे नए अंधभक्त 🥰😄🥰
@BhimArmyChief@MK_jatav_up76@BSSVERMA@KishanASP@KammoMeghwal333@Shailen40840272@Gordhanlilawat@ASP4UP
सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस प्रकार की बातें लिख रहे हैं कि @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद जी ने बहनजी से डरकर अपनी लखनऊ की रैली रद्द की है
सर्वप्रथम तो आजाद समाज पार्टी ने 9 अक्टूबर को किसी महारैली का आधिकारिक ऐलान किया ही नहीं था, यह मात्र 'ओबीसी अधिकार सम्मेलन' था न कि कोई रैली, जिस प्रकार मुस्लिम अधिकार सम्मेलन हुआ था
रही बात डरने की, तो ये वही चन्द्रशेखर आजाद है जिसके नेतृत्व में भोपाल में लगभग 10 लाख की भीड़ जमा हुई थी, जिसके नेतृत्व में अनेकों बार दिल्ली में लाखों लाख का जनसैलाब एकत्रित हुआ है
9 अक्टूबर को मान्यवर कांशीराम साहब का परिनिर्वाण दिवस है और उस दिन प्रदेश की राजधानी में समाज के दो बड़े नेता आमने-सामने खड़े होते तो यह कांशीराम साहब जी के सपने की हत्या के समान होता
चन्द्रशेखर आजाद जी के द्वारा लिया गया यह फैसला स्वागत योग्य है...!!
@AzadSamajParty@Ravinder_ASPK
भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों वंचितों व महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती से शुरू हो रहे आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सदस्यता अभियान से जुड़ें।
7292060060 पर मिस्ड कॉल करें, सदस्य बनें।
#AmbedkarJayanti
#राष्ट्रीय_पर्व #राष्ट्रीय_समानता_दिवस
#संविधान_निर्माता_दिवस
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#BabasahebAmbedkar #जयभीम
लश्कर भी तुम्हारा है सरदार तुम्हारा है
तुम झूठ को सच लिख दो अखबार तुम्हारा है।
इस दौर के फरियादी जायें तो कहां जायें,
कानून तुम्हारा है दरबार तुम्हारा है।
सूरज की तपन तुमसे बर्दाश्त नहीं होती,
इक मोम के पुतले सा किरदार तुम्हारा है।
लेकिन पुलिस को आगे करके लोकतंत्र को कुचलने वालो तानाशाहो सुन लो,
तानाशाहों को अगर जिद है हम पर पहरा बैठाने की...
तो हमने भी ठानी है इस बहुजन समाज को न्याय दिलाने की...
अगर बरेली में मेरे मुस्लिम भाइयों के साथ कुछ गलत नहीं हुआ है? नाइंसाफी नहीं हो रही है? तो योगी सरकार अपनी पुलिस के दम पर मुझे वहां जाने से क्यों रोकना चाहती है?
शामली में अपने सीने पर ‘I Love Mohammad लिखने पर जेल में ठूंसने का मुद्दा हो या बरेली में 26 सितंबर को पुलिस का बर्बर लाठीचार्ज, ये घटनाएं एक धर्म लोगों को बदनाम करके वोट बैंक हासिल करने सुनियोजित साजिश ही नहीं बल्कि सरकार की तानाशाही और घमंड की पराकाष्ठा है।
बरेली में मुस्लिम समाज के लोगों का सिर्फ़ एक शांतिपूर्ण ज्ञापन देने का कार्यक्रम था। इसमें किसी भी तरह की हिंसा का इरादा नहीं था। यदि सामान्य तरीके से ज्ञापन सौंपने दिया जाता तो हालात बिगड़ते ही नहीं। ज्ञापन तो छोड़िए नमाज़ अदा करने तक की अनुमति नहीं दी गई और इसके बाद अपने आका को खुश करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज करके बेगुनाहों को घायल कर दिया।
अब बरेली में मुसलमानों को इसकी आढ़ में सामूहिक सज़ा दी जा रही है। झूठे इल्ज़ाम लगाकर तमंचे, पेट्रोल बम और तेज़ाब की बोतलों से हमले का आरोप लगाया जा रहा है। जबकि वायरल वीडियो से साफ़ है कि छतों से पत्थरबाज़ी एक सोची-समझी साज़िश थी। मगर पुलिस साज़िशकर्ताओं पर कार्रवाई करने के बजाय बेगुनाहों को परेशान कर रही है।
बेगुनाह मुसलमानों को थानों में बेरहमी से पीटा जा रहा है, मीडिया के सामने परेड कराई जा रही है, उनके घरों पर बुलडोज़र चलाए जा रहे हैं। दबिश के दौरान महिलाओं और बच्चों तक को निशाना बनाया जा रहा है। मस्जिदों में इमामों और मुअज्ज़िनों का उत्पीड़न किया जा रहा है, जिससे नमाज़ जैसी बुनियादी इबादत भी मुश्किल हो गई है।
मुस्लिम भाईयों और बहिनों पर तानाशाह के इशारे पर किया जा यह अन्याय–अत्याचार न सिर्फ संविधान की प्रस्तावना बल्कि संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 का स्पष्ट उल्लंघन है। जिसमें धर्म और उपासना की स्वतंत्रता को देश के प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार बताया गया है।
@UPGovt से हमारी माँगें :
1. बेगुनाह मुसलमानों की गिरफ़्तारी और उत्पीड़न पर तुरंत रोक लगाई जाए।
2. पुलिस की मनमानी दबिश और बुलडोज़र कार्रवाई बंद की जाए।
3. निर्दोषों पर दर्ज झूठे मुक़दमे वापस लेकर उन्हें फ़ौरन रिहा किया जाए।
4. दोषियों की पहचान कर उन पर सख़्त कार्रवाई की जाए।
मैं कल बरेली पहुँचकर मौजूदा हालात का जायज़ा लूँगा और पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात करूँगा।
#iLoveMuhammad
बाराबंकी ज़िले के ग्राम मऊथरी, थाना जैदपुर में हुई दुखद घटना दलित-बहुजन समाज और न्यायप्रिय नागरिकों के लिए गहरी पीड़ा और चिंता का विषय है।
अशोक कुमार जी, जो भीम आर्मी में तहसील न्याय पंचायत अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे, मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उन्हें झूठे मामले में छोड़ने के लिए ज़बरन 75,000 रूपए की रिश्वत माँगी गई और पैसे न देने पर उन्हें NDPS एक्ट जैसे गंभीर मुक़दमे में फँसाने की धमकी दी गई। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अशोक कुमार जी यह रकम नहीं दे पाए। उन्होंने ज़मीन बेचने की कोशिश भी की, लेकिन तत्काल कोई खरीदार नहीं मिला।
लगातार होने वाले उत्पीड़न, अपमान और झूठे मुक़दमे की आशंका से गहरे आहत होकर अशोक कुमार जी ने 1 अक्टूबर की रात गाँव से बाहर एक पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उनकी लाश सुबह खेतों में पेड़ से लटकी हुई मिली। मरने से पहले उन्होंने एक पत्र लिखा और कई लोगों को व्हाट्सएप संदेश भेजे, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए थाना जैदपुर के पुलिसकर्मी संतोष इंस्पेक्टर और निर्मल दरोगा सहित अन्य को जिम्मेदार ठहराया है।
इसके बावजूद, उनकी पत्नी और परिवार की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। पुलिस उल्टा दबाव बना रही है कि अगर मृतक द्वारा नामज़द आरोपी पुलिसकर्मियों के नाम हटाएं तभी FIR दर्ज की जाएगी। यह न केवल अमानवीय है बल्कि कानून और संविधान की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाना है।
हम @UPGovt से तत्काल निम्नलिखित माँग करते हैं:
1. मामले में लिप्त सभी के खिलाफ सख्त धाराओं में FIR दर्ज की जाए।
2. मृतक के परिवार को कम-से-कम ₹50 लाख मुआवज़ा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
3. मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच किसी उच्च-स्तरीय समिति या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
4. थाना जैदपुर के दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर गिरफ़्तार किया जाए।
@CMOfficeUP@myogiadityanath
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को शहीद का दर्जा एवं समकक्ष सुविधाएँ प्रदान करने हेतु माननीय केंद्रीय गृहमंत्री @AmitShah जी को पत्र लिखा।
@mygovindia@HMOIndia