#DIGRangeMeerut श्री कलानिधि नैथानी द्वारा आज दिनांक 26.04.2026 को रिर्जव पुलिस लाइन्स बुलन्दशहर मे रिक्रूट आरक्षियो के दीक्षांत परेड समारोह के अवसर पर पासआउट हुए आरक्षियो को सम्बोधित किया गया तथा उनको पुलिस परिवार का हिस्सा बनने पर हार्दिक शुभकामनायें दी गयीं ।
#UPPolicePOP
6⃣6⃣4⃣ international matches 🙌
3⃣4⃣,3⃣5⃣7⃣ international runs 🫡
Only cricketer to score 1⃣0⃣0⃣ international hundreds 💯
Member of #TeamIndia's ICC Men's ODI World Cup 2011 winning campaign 🏆
Wishing the legendary Sachin Tendulkar @sachin_rt a very happy birthday 🎂🥳
“24 घंटे काम लो, छुट्टी मत दो, पर्याप्त वेतन-भत्ते भी मत दो… फिर कहो सिपाही-दरोगा भ्रष्ट हैं”
भूमिका
देश में एक अजीब सोच बन चुकी है।
जनता कहती है—पुलिस को अच्छा वेतन मिलता है, फिर भी भ्रष्टाचार है।
सरकार कहती है—चूंकि भ्रष्टाचार है, इसलिए और सख्ती करो, छुट्टियाँ मत दो, 24 घंटे काम लो, और पर्याप्त वेतन-भत्ते भी मत दो।
इन दोनों के बीच जो सच्चाई दब जाती है, उसे सिर्फ सिपाही और दरोगा ही जीते हैं।
1. 24 घंटे की ड्यूटी: कोई तय समय नहीं
कब बुलावा आ जाए, कोई समय तय नहीं
दिन हो या रात, हमेशा तैयार रहना
त्योहार, शादी, परिवार—सब पीछे छूट जाता है
👉 यह नौकरी नहीं, लगातार चलता हुआ दबाव है।
2. छुट्टी नहीं, आराम नहीं
वीकली ऑफ का कोई सिस्टम नहीं
छुट्टी माँगना भी कई बार “गुनाह” जैसा लगता है
बीमार होने पर भी ड्यूटी करनी पड़ती है
👉 जब शरीर और दिमाग को आराम नहीं मिलेगा, तो इंसान कब तक टिकेगा?
3. वेतन और भत्तों की सच्चाई
काम के हिसाब से वेतन संतुलित नहीं
पर्याप्त भत्ते नहीं मिलते या सीमित हैं
जोखिम, समय और दबाव के मुकाबले आर्थिक समर्थन कम
👉 फिर भी उम्मीद—काम बिना शिकायत चलता रहे।
4. जनता क्या देखती है?
👉 वर्दी, अधिकार और कभी-कभी गलत व्यवहार
लेकिन नहीं देखती—
टूटा हुआ इंसान
मानसिक तनाव
ऊपर का दबाव, नीचे की जिम्मेदारी
👉 और एक लाइन में फैसला—“पुलिस भ्रष्ट है।”
5. सिस्टम क्या सोचता है?
👉 “नीचे वाले गलत हैं, इसलिए कंट्रोल बढ़ाओ।”
लेकिन अनदेखा—
काम का असमान बोझ
कर्मचारियों की कमी
इंसान की सीमाएँ
👉 नतीजा: दबाव और बढ़ता है।
6. असली समस्या क्या है?
इंसान को मशीन समझ लेना
लगातार दबाव में काम कराना
सम्मान और समझ की कमी
👉 यहीं से शुरू होती है थकान, गुस्सा और टूटन।
7. मशीन नहीं हैं सिपाही-दरोगा
उनका भी परिवार है
उनका भी शरीर और दिमाग थकता है
उनकी भी सीमाएँ हैं
👉 लेकिन उनसे उम्मीद—हमेशा परफेक्ट रहो।
8. नतीजा: बदनाम वही, जो सबसे ज्यादा काम करता है
जनता दोष देती है
सिस्टम कंट्रोल करता है
👉 और बीच में पिसता है—सिपाही और दरोगा।
9. समाधान क्या है?
तय कार्य-घंटे
वीकली ऑफ
पर्याप्त वेतन और भत्ते
मानसिक और शारीरिक आराम
सम्मान और सहयोग
निष्कर्ष
जब 24 घंटे काम लेकर, बिना छुट्टी दिए, और पर्याप्त वेतन-भत्ते भी न देकर एक इंसान से मशीन जैसा व्यवहार किया जाएगा—
👉 तब तक समस्या खत्म नहीं होगी।
और अगर फिर भी हम कहेंगे—
“सिपाही-दरोगा भ्रष्ट हैं”,
तो हम सच्चाई से आँखें चुरा रहे हैं।
@RajShuklaTFF@DelhiPolice Please report on the CEIR portal also. It is a government of India portal for lost phones. By this you will get notifications automatically when your phone is on.
@DutyFamilyHonor Sir, your trust in your subordinates, your ability to lead from the front, and your ability to stand shoulder to shoulder with your team during difficult times, is what sets you apart. Commendable work. Salute Jai hind
Back to back hundreds for the #KingKohli . You beauty. Real master of the game. India still needs you most. Please come back. People should be ashamed who make a comment on virat availability in the next WC. Millions of fans wanted to play you back in #Testcricket@BCCI@imVkohli
दिलेर खून में होती, बाजार में नहीं मिलती..
मुजफ्फरनगर SP सिटी सत्यनारायण प्रजापत फिल्मी परदे से नाराज. पुलिस रोकेगी भी और इलाज भी करेगी।कोई पुलिस को ओवर पावर करने की सोच ना रखे.पुलिस की दस गोलियों में नौ पैर में लगती हैं.इतनी नालायक नहीं पुलिस।
आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम, लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम।"
जय जय श्री राम
अदभुद दृश्य। देश का प्रधान, धर्म का प्रधान और व्यवस्था का प्रधान ऐसा संयोग कई सदी बाद इस आर्यावर्त को मिला है। नमन।
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