1. देश में पेपर लीक के जघन्य अपराध व उसके कारण नौजवान छात्र-छात्राओं का उनका भविष्य अंधकार होता देख अनेकों द्वारा आत्महत्या जैसी अति-दुखद घटनाओं की रोकथाम की उपाय के रूप में संसद ने एक बार फिर से एक और सख़्त सज़ा के प्रावधान वाला क़ानून बनाने वाला बिल लोकसभा ने आज अन्ततः पास कर दिया है, लेकिन क्या केवल इससे समस्या का समाधान हो जायेगा, इसकी चिन्ता लोगों में बरक़रार है, क्योंकि लोगों को यह आपाधापी/जल्दबाज़ी में लिया गया एक और क़दम ज़्यादा लगता है, जबकि अन्य और भी उपायों को तत्काल सख़्ती से लागू करना ज़रूरी है।
2. वास्तव में यह कदम भी पेपर लीक होने के बाद सख़्त सज़ा का प्रावधान करता है, जबकि पेपर लीक का पूरा मामला इस महा अपराध को होने देने से पहले ही इसे रोकने का है, अर्थात् अपराध नियंत्रण ज़्यादा महत्वपूर्ण है, जो कि अधिकतर मामलों में यहाँ कहीं भी प्रभावी होता हुआ नज़र नहीं आता है, और यह पेपर लीक के पिछले क़ानून के निष्प्रभावी होने से भी स्पष्ट है।
3. हकीकत में अन्य अपराधों की तरह पेपर लीक जैसे जघन्य अपराध के नियंत्रण के लिये सख़्त से सख़्त कानून से अधिक इसकी रोकथाम हेतु बेहतर से बेहतर उपाय करने की ज़रूरत है, जिसके तहत् शिक्षा के लिये शोषणकारी ऋण को सस्ता करके उसे कल्याणकारी बनाना, सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा आदि सहित पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की ज़रूरत है, ताकि ग़रीबों, उपेक्षितों, शोषितों व अन्य मेहनतकश लोगों के बच्चे भी समता व समानता के साथ आगे बढ़ सकें, जो परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कल्याणकारी संविधान का उद्देश्य तो है किन्तु इसका हर स्तर पर वर्तमान में घोर अभाव है।
4. दरअसल अमीर परिवारों के लोग तो धनबल के आधार पर अपनी मनमानी व मनचाही पढ़ाई आदि प्राप्त कर लेते हैं, किन्तु करोड़ों ग़रीब परिवारों के बच्चे-बच्चियों का क्या जो होनहार होने के बावजूद अपना जीवन संवार नहीं पाते हैं।
5. वैसे भी पेपर लीक शिक्षा व्यवस्था में बिगाड़ का केवल एक उदाहरण है, जबकि शिक्षा व्यवस्था में बिगाड़ की जड़ काफी गहरी व अति-गंभीर है। इसके निदान के लिये दृढ़ इच्छाशक्ति व नेक नीयत के साथ अनवरत ईमानदार प्रयास की ज़रूरत है, तभी कुछ मुट्ठी भर लोगों के बजाय करीब 140 करोड़ लोगों का यह देश आगे बढ़ पायेगा।
6. लेकिन यह अति-दुखद है कि पेपर लीक रोकथाम सम्बंधी बिल पर भी बहस के दौरान अधिकतर पार्टियाँ दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ पायीं अर्थात् संसद में चर्चा के दौरान पूरी गंभीरता कम व एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप ही ज़्यादा रहा। ऐसे में क्या नया बनने वाला यह पेपर लीक निरोधक क़ानून कितना सार्थक होगा इससे लोगों का शंकित होना उचित है।
7. ऐसे में मूल प्रश्न यही है कि क़ानून पर क़ानून क्या इस जटिल समस्या का सही समाधान कर पायेगा? सरकार इसके अलावा भी अन्य बेहतर उपायों पर भी ज़रूर विचार करे तो यह देश के उज्जवल भविष्य के लिये बेहतर होगा।
1. यूपी के ज़िला रामपुर में समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आज़म ख़ान के पारिवारिक ट्रस्ट द्वारा स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित यूनिवर्सिटी की 38 शिक्षण इमारतों को, उसका स्वीकृत नक्शा आदि के अभाव में, ध्वस्त करने की रामपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई पर अब रोक लगाने का फैसला उचित व इसका स्वागत।
2. वैसे केवल जौहर विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में अगर अन्य और भी शिक्षण संस्थायें हैं जो अपने निर्माण आदि में सरकारी नियमों आदि का सही से अनुपालन नहीं कर पाये हैं, तो उन पर भी बुलडोजर चलाकर तोड़ने की सख़्ती करने के बजाय, सरकार को उन सबको सही व नियमित कराने के सम्बंध में ज़रूरी कार्रवाई करने की नीति अपनानी चाहिये, ताकि वहाँ शिक्षा हासिल करने वाले सभी छात्र-छात्राओं का जीवन किसी भी प्रकार से प्रभावित ना होने पाये। उम्मीद है कि सरकार बी.एस.पी. की इस जनहितैषी सलाह पर ज़रूर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
1.काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का देश की राजधानी नई दिल्ली में संसद के नज़दीक जन्तर मन्तर में पिछले कई दिनों से, ख़ासकर मेडिकल की नीट जैसी विशेष परीक्षा आदि में पेपरलीक व अन्य गड़बडियों के दुष्परिणामों से छात्र-छात्राओं व उनके परिवार के काफी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे जीवन को लेकर जारी अनिश्चितकालीन आन्दोलन के कारण सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त हंगामा बरपा है और अब इसका राजनीतिकरण करने से यह मुद्दा सरकार के साथ सीधे टकराव का हो गया है, जिस विषम स्थिति से देश को निकालना ज़रूरी है, क्योंकि इससे दिल्ली में ही नहीं बल्कि विभिन्न राज्यों में भी आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
2.वैसे चाहे पूरे देश में अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा चोरी/ग़बन आदि का गर्म मामला हो या फिर आल-इण्डिया व राज्यों की परीक्षाओं आदि में पेपरलीक का मुद्दा हो, यह सभी मूलतः भ्रष्टाचार के हर स्तर पर पनपने का ही परिणाम है।
3.इसके साथ ही यह संवैधानिक नैतिकता (constitutional morality) से भी जुडा़ मामला है, जिसके अभाव में यह देश को दीमक की तरह खाता चला आ रहा है, जबकि संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने गुड गवरनेन्स हेतु इस पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत पर विशेष बल दिया है।
4.संक्षेप में मेरा यही कहना है कि देश व जनहित से जुड़े वर्तमान विकट हालात के सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु सरकार तथा माननीय कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी भूमिका निभाने की पहल करनी चाहिये तो यह बेहतर होगा।
5.साथ ही, सीजेपी के व्यापक हो रहे आन्दोलन का अब विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने-अपने संकीर्ण स्वार्थ में राजनीतिकरण करके सड़क से लेकर संसद तक में टकराव व हिंसा किया जाना घोर अनुचित। सरकार व आन्दोलनकारी दोनों मिलकर इसका शान्ति व सौहार्दपूर्ण समाधान जितना जल्द निकालें उतना ही उचित।
1.देश में नीट-यूजी सहित विभिन्न परीक्षाओं के पेपरलीक व उसके उपरान्त परीक्षार्थियों द्वारा होने वाली आत्महत्याओं से उपजे छात्र-छात्राओं/युवाओं के ’कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) आन्दोलन के नई दिल्ली जन्तर-मन्तर में लगातार जारी शान्तिपूर्ण धरना को हालाँकि लोगों की व्यापक सहानुभूति हासिल है, किन्तु सरकारी जवाबदेही के रूप में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उनकी ज़िद्दी माँग को लेकर विपक्ष व सरकार दोनों के बीच ज़बरदस्त राजनीति का बाज़ार काफी गर्म है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में ज़रूरी व्यापक सुधार का असली मुद्दा ही कहीं लुप्त ना हो जाये?
2.वैसे इस गर्म मुद्दे को भुनाने हेतु विशेषकर विरोधी पार्टियों में सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त होड़ लगी हुई है, उससे भी सरकार व विपक्ष के बीच तनाव व टकराव की भी परिस्थिति हिंसक होकर किसी न किसी रूप में राज्यों में भी फैल रही हैै, जिससे अपनी पार्टी के लोगों को सचेत व सजग रहने की सलाह।
3.इस प्रकार इस मुद्दे का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो जाने के साथ ही जन्तर-मन्तर में आन्दोलनकारियों के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाईयों ने स्थिति को और अधिक गर्म व गंभीर बना दिया है।
4.इस भारी तनाव व टकरावपूर्ण स्थिति के कारण संसद का वर्तमान मानसून सत्र अभी तक एक दिन भी सही व सुचारू रूप से नहीं चल पाया है, जिससे देश व जनहित के और भी अनेकों महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही एक प्रकार से रुक सी गयी है।
5.इसके साथ ही, सरकार सीजेपी के आन्दोलन से निपटने हेतु जो उपाय ढूंढने का प्रयास कर रही है वह भ्रष्टाचार एवं अयोग्यता आदि के कारण होने वाले पेपरलीक होने के बाद की सख़्त कार्रवाई के द्योतक हैं, जबकि पेपरलीक के जघन्य अपराध ना हों इसके नियंत्रण हेतु उचित उपाय नहीं होता दिखने से भी लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
6.इसलिये वर्तमान राजनीतिक हालात में उग्र व निराश होने के बजाय अपने लागों को अपने मिशन के प्रति पूरी लगन व तन, मन, धन से लगातार डटे रहना है, यही अपील।
1.आज से जब संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, सदन से लेकर सड़कों व दिल्ली के जन्तर-मन्तर तक में विभिन्न ज्वलन्त मुद्दों को लेकर ज़बरदस्त टकराव की स्थिति है, जिसे देश के विकट राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक हालात के मद्देनज़र ज़रूर बेहतर सूझबूझ से टाला जाना चाहिये।
2.वैसे भी सर्वसमाज के करोड़ों परिवारों के लिये जीवनदायी मेडिकल आदि की अति-महत्वपूर्ण व विशेष आल-इण्डिया परीक्षायें सहित राज्यों में नौकरी सम्बंधी परीक्षायें आदि भी लगातार हो रहे पेपरलीक/गड़बड़ी आदि के कारण रद्द होने की अनिश्चितता से ख़ासकर युवा वर्ग व बेरोज़गार लोग लगातार काफी ज़्यादा परेशान हैं, जो विभिन्न जगहों पर अनेकों प्रकार से व्यक्त किये जा रहे उनके आक्रोश व आन्दोलन आदि से भी प्रकट है और यह देश व जनहित से जुड़ा ऐसा अति-गंभीर मामला है जिसपर पूरी तरह से क़ाबू में करने के लिये सरकारों को तत्काल सख़्त क़दम उठाना नितान्त आवश्यक है।
3.साथ ही, इसके लिये ज़िम्मेदारी भी ज़रूर तय होनी चाहिये तथा ख़ासकर परीक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े उच्च पदों पर बैठे लोगों के विरुद्ध भी कड़ी क़ानूनी सज़ा हो ताकि देश की तरक्की की नींव युवा पीढ़ी का भविष्य इस प्रकार की अनिश्चितता और अंधकार से आगे बच पाये।
4.इसी क्रम में यूपी, राजस्थान, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों/शहरों में जिस प्रकार से, अच्छे सरकारी स्कूलों व सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के घोर अभाव में, प्राइवेट स्कूल एवं बड़ी-छोटी कोचिंग संस्थायें, तेज़ी से पनप रही हैं, उससे यह स्पष्ट है कि देश का युवा वर्ग व उनका परिवार, ज़बरदस्त महंगाई के इस दौर में भी अपना पेट काटकर एवं अन्य परेशानियों को झेलकर भी, अपने स्तर से पूरा जी-जान लगाकर आगे बढ़ने हेतु प्रतिबद्ध है।
5.वे लोग आउटसोर्सिंंग की शोषणकारी छोटी-मोटी नौकरी आदि से आगे बढ़कर स्थाई व स्वाभिमानी नौकरी में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं ताकि इज्ज़त से दो वक्त की रोटी कमाकर अपना व अपने परिवार का पेट पाल सकें, जो सराहनीय है।
6.ऐसे में सरकारें कोचिंग संस्थाओं आदि पर भय भ्रष्टाचार-मुक्त कड़ी निगरानी ज़रूर रखें, किन्तु प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर सम्पूर्ण सरकारी शिक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को आगे बढ़ाने में भी अपना अहम् दायित्व निभाने का ईमानदार प्रयास ज़रूर करें।
7.वैसे भी यह सर्वविदित है कि देश व समाज को शिक्षित बनाना अनवरत प्रक्रिया है और जिसमें सरकारों द्वारा समुचित बजट प्रावधान के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता को भी अच्छे से अच्छा बनाने जैसी सही सोच रखना भी बहुत ज़रूरी है, तभी युवाओं के उज्जवल भविष्य के सहारे परिवार, समाज, प्रदेश व देश का भविष्य संवर पायेगा, वरना जीडीपी ग्रोथ देश की नैया का सही खिवैया क्या बना पायेगा, इसमें शक है।
8.इसीलिये यूपी व देश में भी विकास का मूल आधार संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के उद्देश्यों के अनुसार शिक्षित, सुरक्षित, कल्याणकारी व सभ्य भारत हो तो यह हमेशा ही बेहतर होगा।
9.और अगर इन बातों पर तत्काल ज़रूरी ध्यान दिया जाये तो जन्तर-मन्तर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के हो रहे आन्दोलन जैसी कार्रवाईयों के लिये लोगों में भी ख़ासकर युवा पीढ़ी को बाध्य नहीं होना पड़ेगा। सरकार इनके प्रति सहानुभूति का रवैया अपनाकर स्थिति का सही समाधान करें तो यह उचित होगा।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में सपा सांसद श्री अखिलेश यादव जी को आज उनके जन्मदिन पर उन्हें व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं उनके अच्छे जीवन व लम्बी उम्र की शुभकामनायें।
अयोध्या में श्रीराम मन्दिर से चढ़ावे की हुई चोरी, ग़बन व हेराफेरी आदि करने की मीडिया में आएदिन क़िस्म-क़िस्म की आ रही ख़बरें अति-गम्भीर व चिन्तनीय। ऐसे लोग क़तई भी बख़्शे नहीं जाने चाहिये, लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं।
साथ ही, अब यहाँ मन्दिर में श्रद्धा के चढ़ावे आदि में आगे कोई भी शिकायत ना आये, इसके लिए देश के दूसरे विख्यात व प्रसिद्ध मन्दिरों में चढ़ावे आदि के हिसाब-किताब के लिए जो वहाँ व्यवस्था है तो उनका यहाँ अयोध्या में भी अनुशरण करके इस प्रकरण को जल्दी ही सुलझाना चाहिये तो यह उचित होगा।
इतना ही नहीं बल्कि देश में राजनीति का अपराधीकरण व अपराध का राजनीतिकरण तथा धर्म का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अंध धर्मीकरण ना किया जाये तो यह सही व संवैधानिक होगा, ऐसी बी.एस.पी. की राजनीतिक पार्टियों को देश व जनहित में सलाह और साथ ही देशवासियों से भी यह अपील।
कोई माने या ना माने. इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़ा नेता कोई नही है.
नंम्बर दो राहुल गांधी हैं, प्रधानमंत्री मोदी जी के बाद देश में सबसे बड़ा नेता राहुल गांधी हैं.
अगर आपका प्रिय नेता इन दोनों नेताओं के अलावा कोई और है, तो अपने नेता को नंम्बर तीन पर रखें.
ममता बनर्जी के भक्तों को भी यही लगता था ममता बनर्जी देश की नंम्बर One हैं. अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे के भक्तों को भी यही लगता था.
TMC और SS-UBT को खत्म कर दिया गया. AAP भी ICU में हैं. आपके प्रिय नेताओं को नंबर One बताने वाला केवल आप लोगों को चढ़ा रहा है. आज जहां MODI हैं कल कोई और था. आज ये हैं कल कोई और होगा. कोशिश हर नेता को करते रहना चाहिए.
राहुल गांधी मुंबई में मुकेश अंबानी के बेटे की शादी में आइस क्रीम खाने नही गए थे.
राहुल गांधी कल मुंबई में इंडिया गठबंधन की सहयोगी पार्टी NCP नेता सुप्रिया सुले की बेटी की शादी में गए,
राहुल गांधी सफेद कुर्ता पजामा में, बिल्कुल अपने चाचा संजय गांधी की स्टाइल में गए. यहां राहुल गांधी भव्य स्वागत किया गया.
शादी में हर नेता राहुल गांधी के साथ फोटो खिंचवाने के लिए उतावले थे. पूरा शादी समारोह राहुलमय में बदल गया.
राहुल गांधी ने सादगी और संस्कार के मामले में गांधी परिवार की परंपरा को जिंदा रखा है.
यूपी की राजधानी लखनऊ के पड़ोसी ज़िला हरदोई में एक सरकारी अधिकारी शाहाबाद के एसडीएम श्री सुशील मिश्रा पर सरकारी निरीक्षण के दौरान दबंगों द्वारा ईंट व पत्थर आदि से किया गया जानलेवा हमला तथा उसमें उनके घायल होकर इलाज के लिये अस्पताल में भर्ती होने की ख़बर है, जो दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं बल्कि अति-चिन्ताजनक भी है। ऐसी घटनाओं की रोकथाम ज़रूरी है ताकि सरकारी कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के साथ-साथ प्रदेश को अराजक तत्वों से बचाया जा सके। सरकार व्यापक जनहित के मद्देनज़र, इस ओर ज़रूर समुचित ध्यान दे।
जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. देश में ’बहुजन समाज’ व अपरकास्ट समाज के ग़रीब शोषित-पीड़ित व उपेक्षितों द्वारा, उनके संवैधानिक हक़ व न्याय आदि के लिये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताये रास्तों पर चलने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सच्ची व ईमानदार अम्बेडकरवादी पार्टी है, जो दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के सहारे और उनके इशारे पर नहीं चलती है बल्कि अपने लोगों के ही तन, मन और धन के बलबूते पर चलती है, जो स्वाभाविक तौर पर संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व पूंजीवादी ताक़तों को यह फुटी कौड़ी नहीं सुहाता है और इसी लिये वे समय-समय पर और ख़ासकर चुनाव के नज़दीक आने पर क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करके बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट को तथा उसके आयरनलेडी नेतृत्व को भी बदनाम करने में लगे रहते हैं।
इसी क्रम में मीडिया के एक वर्ग द्वारा दूसरी पार्टियों की चुनावी जुगाड़ आदि पर से लोगों का ध्यान बाँटने तथा उन पर पर्दा डालने के लिये बी.एस.पी. पार्टी उम्मीदवार के चयन को लेकर सवालिया निशान खड़े करते रहते हैं, जबकि बी.एस.पी. को जो भी आर्थिक सहयोग हासिल होता है वह पार्टी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने पर ही क़ानूनी तौर से ज़्यादातर ख़र्च कर दिया जाता है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। फिर भी उसको लेकर षडयंत्र के तहत् गुमराह करने वाली तरह-तरह की ग़लत बातें व अफवाहें आदि फैलाना मीडिया को शोभा नहीं देता है।
इसके साथ ही यहाँ यह भी सर्वविदित है कि केवल बी.एस.पी. यूपी स्टेट यूनिट के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ पाल ही नहीं बल्कि पार्टी के अन्य सभी छोटे-बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्तागण भी इस समय पार्टी संगठन की मज़बूती तथा पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के साथ-साथ आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव हेतु पार्टी उम्मीदवारों की संभावित सूची बनाने तथा उनकी ठोस स्क्रीनिग करने आदि में लगे हुये हैं और पार्टी की उम्मीदवारी को लेकर उनसे मिलने वालों से अन्य बातों के अलावा उनकी सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हैसियत के साथ ही उनके पार्टी के प्रति वफादारी व टिकाऊपन आदि को भाँपने के लिये, कोर्ट में जिरह की तरह, उनसे तरह-तरह के सवाल-जवाब भी करते रहते हैं, जिसकी गहराई में गये बिना ही उसे उसके पूरे फेस वैल्यू पर अन्यथा लेना उचित नहीं है, यह मीडिया से भी अनुरोध है तथा पार्टी के लोगों से भी अपील है कि वे विरेाधी पार्टियों के ऐसे प्रायोजित किसी भी षडयंत्र का शिकार होकर गुमराह ना हों बल्कि अपने मिशन 2027 के लक्ष्य में पूरे जी-जान से लगे रहें, जिस बी.एस.पी ज़िन्दाबाद की आपकी जबरदस्त तैयारी को देखकर ही विरोधियों की नींद काफी उड़ी हुई है। जय भीम जय भारत।
आज आपके जन्मदिन पर मैं बस इतना कहना चाहती हूँ कि मेरी ज़िंदगी में आपका स्थान कोई और नहीं ले सकता। आपने हर कदम पर मेरा हाथ थामा, मुझे गिरकर संभलना और चलना सिखाया और हर मुश्किल में मेरी ढाल बनकर खड़े रहे। आपका प्यार, त्याग और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बेशकीमती धरोहर है। ईश्वर से मेरी यही प्रार्थना है कि आपको लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, हर पल सिर्फ और सिर्फ खुशी मिले और आपके आशीर्वाद का हाथ सदैव मेरे सिर पर रहे।
जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ पापा .. हैप्पी बर्थडे
🎂🎉🥮🎊🙏
@ppbajpai 55 यादव SDM वाली झूठी खबर चलाने वाले उस पत्रकार का नाम आप जानते हैं ? और उस पत्रकार का नाम भी जानते हैं जो रोज अपने यूट्यूब चैनल पर बीजेपी सरकार के गिरने का दावा करता है ?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता योगी आदित्यनाथ जी को आज उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं उनके स्वस्थ्य जीवन व दीर्घायु होने की भी शुभकामनायें।
1. यू.पी. के ग्रेटर नोएडा के जेवर में की गई लगभग 15 वर्ष के गोपाल शर्मा की हत्या अति दुःखद व चिन्ताजनक। सरकार इस घटना की उच्च-स्तरीय जाँच कराये और इसके सभी अभियुक्तों को कड़ी सजा दी जाये।
2. साथ ही कल हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल के गिरने से कई मजदूरों की हुई मौत के प्रकरण को भी सरकार गम्भीरता से लेते हुये मृतकों के आश्रितों को उचित आर्थिक मदद दे तथा घायलों का भी विशेष ध्यान रखा जाये, बी.एस.पी. की यह भी मांग।
यू.पी. के जिला गाजियाबाद में खोड़ा के एक नौजवान युवक सूर्या चौहान की हुई हत्या की घटना अति दुखद व चिन्ताजनक। इस प्रकार की आयदिन हो रही घटनाओं की रोकथाम के लिए शासन व प्रशासन को सही कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही इस घटना में शामिल अपराधियों की पहचान करके उन्हें कानूनी सजा जरूर दी जाए।
इसके साथ ही चुनाव का समय जैसे-जैसे नज़दीक आता जाएगा ऐसी घटनाओं के व्यापक दुष्परिणाम होंगे। अतः सरकार पूरी तरह सतर्क रहे।
देश में न्यायप्रिय, धर्मनिर्पेक्ष एवं लोक कल्याणकारी महान शासक के रूप में प्रसिद्ध अहिल्याबाई होलकर जी की जयन्ती पर शत्-शत् नमन एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।
भारतीय इतिहास की महान शासक अहिल्याबाई होलकर जी ने अपने आदर्शों, सेवा-भाव और जनहितकारी कार्यों से समाज को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता एवं जनसेवा का प्रेरणा स्त्रोत है। आज उनकी जयन्ती के पावन अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं उनके अनुयायियों को शुभकामनाए।