🛑 आरा जंक्शन: सफर या मौत को दावत? 🛑
बिहार के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से एक, आरा जंक्शन पर पिछले 10 वर्षों से प्लेटफॉर्म संख्या 2 और 3 का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। यह लापरवाही अब यात्रियों की जान पर भारी पड़ रही है।
♦️प्रमुख बिंदु जो आपको विचलित कर देंगे:
⚠️ 'मौत का प्लेटफॉर्म':
प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 की हालत इतनी जर्जर है कि स्थानीय लोग इसे अब 'मौत का प्लेटफॉर्म' कहने लगे हैं।
📊 डराने वाले आंकड़े:
पिछले 3 सालों में यहाँ अलग-अलग हादसों में 678 लोगों की जान जा चुकी है।
📐 डिजाइन में बड़ी खामी:
लगभग 55 से 60 मौतें सिर्फ प्लेटफॉर्म की खराब बनावट और मानक से कम ऊँचाई के कारण हुई हैं। ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की दूरी इतनी ज्यादा है कि यात्रियों को करीब 3 फीट की छलांग लगानी पड़ती है।
⌛ 10 साल का लंबा इंतजार:
2016 में इन प्लेटफॉर्म्स को ऊँचा और मजबूत बनाने की योजना बनी थी, टेंडर भी हुआ, लेकिन आपसी खींचतान और विभागीय सुस्ती के कारण काम आज भी अधूरा है।
👨👩👧👦 कौन है सबसे ज्यादा खतरे में?
हर रोज यहाँ 50-60 हजार यात्रियों की आवाजाही होती है। प्लेटफॉर्म की कम ऊँचाई के कारण महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और दिव्यांगजन सबसे ज्यादा हादसों का शिकार हो रहे हैं।
आम जनता की पुकार 🗣️
रेलवे प्रशासन की इस सुस्ती का खामियाजा आखिर कब तक आम आदमी अपनी जान देकर चुकाएगा?
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