ज्ञानेश कुमार 'वोट चोरी' पकड़े जाने पर लोगों को धमकाकर चुप करा रहे हैं
ये संजय गोयल हैं - गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी - इन्होंने 97 वोटर्स को वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए 7 दिन में 8 मेल भेजे थे
खुलासा होने के बाद कह रहे हैं- मैं रिकॉर्ड चेक करूंगा
''भाजपा में आए 4 साल हो गए, लेकिन इस पार्टी में आकर कुछ नहीं मिला। वो हमसे पंजाब के बारे में कुछ पूछते नहीं हैं''
- कैप्टन अमरिंदर सिंह, पंजाब के पूर्व CM
देश विरोधी गतिविधियों में शामिल अमेरिका नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को एक महीने के लिए अपने परिवार से मिलने की अनुमति दी गई है।जब कि NIA की तरफ से कहा जा रहा है कि,आतंकवाद से जुड़े आरोपों की जाँच अभी जारी है।माननीय My Lords और आदरणीय साहेब को सलाम है।जो भारतीय ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से अमेरिका में सिर्फ़ रोज़गार के लिए रह रहे थे उन्हें हथकड़ी लगाकर भारत भेजा गया था।कोई भी भारतीय किसी आतंकवादी गतिविधि में लिप्त नहीं था।और आख़िरी बात मैथ्यू एक महीने बाद भारत लौटेगा ? शायद नही…
BhikuMhatre is a funny guy, his funniest joke is:
“CIA tried too hard for the release of Mathhew Aaron VanDyke, but the Modi Sarkar told it to STFU in uncompromising language.”
“मुझे 2021 से चुनाव सही तरीके से होने पर शक है। कई राज्यों में BJP को चुनाव आयोग से मदद मिल रही है।”
“वोटर लिस्ट से लेकर कई चीजों में BJP को फायदा मिलता है।
अगर किसी सीट पर मुकाबला 5,000 वोटों के आसपास का हो, तो BJP जीत जाती है।”
— प्रशांत किशोर का चौकाने वाला दावा
ज्ञानेश कुमार की बेटी मेघा रूपम को स्पेशल ट्रीटमेंट देना सीजेआई सूर्यकांत के गले की हड्डी बन गया है। बेशर्मी देखिए जिस रोज ज्ञानेश के घोटालों का सच इंडियन एक्सप्रेस ने छापा उसी रोज उनकी बेटी सुप्रीम कोर्ट की म्यूट कर दी गई सुनवाई में बच निकली। द लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ कंस्टीट्यूशन ने इसको लेकर सीजेआई को चिट्ठी लिखी है।चिट्ठी में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि
"सुप्रीम कोर्ट में बैठे न्यायाधीशों की प्रचलित रोस्टर व्यवस्था के अनुसार यह मामला स्पष्ट रूप से उस न्यायालय के समक्ष नहीं आता जिसमें इसे सूचीबद्ध किया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को विशेष रूप से एक विशेष पीठ को सौंपा गया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि याचिकाकर्ता, जो एक लोक सेवक हैं, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त की पुत्री भी हैं। मामले का अनियमित/आउट-ऑफ-टर्न सूचीबद्ध होना विशेष व्यवहार का संकेत देता है और गलत मिसाल कायम करता है।
न्यायालय में सुनवाई सार्वजनिक होती है। यह विशेष रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के माध्यम से संभव होता है, जो वकीलों, पत्रकारों और आम मुकदमेबाजों के लिए उपलब्ध है।
एक ऐसे मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा का म्यूट किया जाना, जो मीडिया और जनता के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्रों की एनएसए के अंतर्गत गिरफ्तारी से संबंधित है, चिंता का विषय है।
पुलिस वालों को समझ ही नहीं आ रहा है कि करें तो करें क्या ?
अब डिटेन करके तो बस में ले ही जा रहे हैं . बोलने से तो रोक सकते नहीं .
चुपचाप सुनकर रहे हैं . @neha_aisa उन्हें भी ज्ञानेश कुमार की बेईमानी और धांधली से परिचित करा रही है .
अपने नेता की गिरेबान में भी झाँक लेते केशव जी!
एक तरफ़ मोदी जी हकीम उस्मानी की दवा भी पचा गए, और मानसी सोनी भी हाथ से निकल गई।
और दूसरी तरफ़ यहाँ युवा तैयार बैठा है..मोदी जी की फ़र्ज़ी इमेज पहले भी धुली गई थी अब ‘अमरोहा की ढोलक’ की तरह बजाई जाएगी।
जय हिन्द, जय संविधान!