मुझे लगता है दिसंबर की सर्द भरी किसी सुबह को आंगन में लगी तुलसी पर जल देती तुम्हारी सुंदर मुस्कान का दरस ईश्वर को पा लेने जैसा होगा। तुम अन्यतम हो प्रिये !!
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शबाना आजमीं के पैर मे मोंच आ जाता है तो साहब ट्वीट करते है लेकिन,
इसी तथाकथित हिंदूवादी सरकार मे राजधानी लखनऊ मे हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी का जिहा*दियों ने हत्या कर दिया जिसपे साहब का जुबान नहीं खुला |
खुद का सरकार है लेकिन अपने ही पार्टी की महिला प्रवक्ता नूपुर शर्मा आज किस हालत मे है किसी से छुपा नहीं है |
जब से सरकार बना है विनय कटियार और प्रवीण तोगड़िया जी जैसे लोग का ना पार्टी मे कुछ पता है ना संगठन मे |
बात स्पष्ट है पार्टी मे वही रहेगा जो शाह और तानाशाह के हाँ मे हाँ मिलाएगा, साहब अपने से ऊपर किसी को नहीं देख सकते |
आरक्षण हटाओ आंदोलन के योद्धाओं का बयान सुना| मुझे अपनी मांगकर को लेकर स्पष्टता नहीं दिखी | इन्होंने कुछ आरक्षित जातियों के नाम गिनाए कि उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा | जब उन्हें नहीं मिल रहा तो उन्हें सोचना चाहिए,वो वर्गीकरण के लिए आंदोलन करे | तुम्हें लगता है कि ऐसा करके उनका समर्थन ले लोगे तो बहुत बड़ी भूल कर रहे हो | तुम्हारी अपनी मांग तो कुछ है नहीं बल्कि तुम वर्गीकरण और क्रीमीलेयर के लिए आवाज उठा रहे हो | ये ध्यान रखो कि वही चाहते है कि आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हो | क्योंकि उनके मन में बिठा दिया गया है कि ऐसे करके आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा | आंदोलन हमेशा अपने दम और मांग पर करो | आंदोलन करने से पहले रूपरेखा तैयार कर लो वरना मजाक बनकर रह जाओगे| नेतृत्व कभी भी चाटुकारो के हाथ मत दो,जो कहते है कि वोट तो किन्नरेंद्र हो ही देंगे |
" ब्रिटिशकालीन भारत में अंग्रेजों ने........... पहले से सामाजिक एवं राजनीतिक प्रभुत्व रखने वाले वर्गों को अपने शासन में सहयोगी बनाया।
इसके परिणामस्वरूप धन, धरती और राजपाट पर कुछ विशेष वर्गों का वर्चस्व और मजबूत हुआ।"
Meanwhile, B.R. Ambedkar's house during ब्रिटिशकाल.
माँगे थी एससी एसटी एक्ट संशोधन की मांगे थी आरक्षण संशोधन की मांग थी यूजीसी खत्म की मांग थी EWS सरलीकरण की वो पत्र कहा गया हर्ष तुम डिप्टी सीएम को ये कौनसा पत्र दे दिए जिनकी मांग ही नहीं थी...!
वयस्कों के लिए SC/ST ऐक्ट, कॉलेज के छात्रों के लिए UGC ऐक्ट। गर्भ में पल रहा शिशु अनजान है कि वो एक ऐसे देश में पैदा होने वाला है जहाँ उसे जन्मजात अपराधी बनाया जाएगा।
जिन लोगों को आरक्षण का A, B, C तक नहीं पता, जिनको ना संविधान की समझ है, ना कानून की, ऐसे लोगों के साथ बातचीत करके हल नहीं निकलेगा, सिर्फ लोगों को झूठा आश्वासन दिया जाएगा, ताकि वो चुपचाप घर चले जाएं!
बातचीत करनी है तो एक कमिटी बनाओ-
1. आरक्षण expert वकील
2. आरक्षण expert organizations (YFE)
3. सवर्ण organizations
4. वंचित वर्गों (भील, मातंग, वाल्मीकि ) के प्रतिनिधि
5. आरक्षण की जानकारी रखने वाले activists
इन सबको लेकर आरक्षण सुधार की मांग पर विचार हो!
वरना ये किसी को भी बिठाकर चाय समोसा खिलाना और "विचार करेंगे" का आश्वासन देकर घर भेजने को बातचीत करना नहीं कहते!
GC वाले Debate के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
बस ध्यान रहे, Debate में भी आरक्षण लागू करने की माँग मत कर देना.
वरना बाद में कहोगे:
"5000 साल तक Debate करने नहीं दिया, इसलिए अब आरक्षण के हिसाब से हमें 10 मिनट मिलेंगे और General Category को 2 मिनट."
फलाना का विरोध नहीं हैं, ढिमकाना का विरोध नहीं है ,सरकार का विरोध नहीं है ,भाई जब कोई विरोध ही नहीं है तो कोई आपकी बात क्यों सुने ?राष्ट्र बचाना है तो बढ़िया से बचाया जाए ,100 प्रतिशत आरक्षण दे दीजिए और अपने लिए SC /ST केस में फांसी मांग लीजिए ।हो गया राष्ट्र सुरक्षित , और क्या ?
आरक्षण का मुद्दा उठते ही हिन्दू बंट चुका है ,, जिसका सीधा नुकसान " बंटोगे तो कटोगे" बोलने वाले योगी जी को होगा ,, अमित शाह यही चाहता है के योगी जी सत्ताईस हारे,, ताकि वो प्रधानमंत्री बन जाए बिना किसी विरोध के ..