रंग-बिरंगे कलेंडर में नहीं
चूल्हे पर भात पकाती
औरत की जुबान पर चढ़नी
चाहिए थी तुम्हारी कविता,
दुबले मोची की जुबान से फूटनी
चाहिए थी तुम्हारी कविता
ठीक अफसर की कार गुजरते वक्त,
नाई के टेप से चिपकाए शीशे से
अगर नहीं झांकती है तुम्हारी कविता
तो तुम असफल हुए कवि
बुरी तरह 'कवि'