सरकारी बैंक प्राइवेट बैंकों से मुकाबला करते हुए बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं , लेकिन कुछ मूर्खों को आज भी लगता है कि बैंक वाले “कुछ काम नहीं करते”, बस AC में बैठते हैं और शाम ��ो घर चले जाते हैं।
भाई , सरकारी बैंक में भीड़ सिर्फ बैंक कर्मचारियों की वजह से नहीं होती।
यहाँ किसान , बुजुर्ग , महिलाएँ और ग्रामीण इलाकों से आने वाले बहुत से ग्राहक बैंकिंग की बेसिक प्रक्रियाओं से परिचित नहीं होते। ऐसे में बैंक कर्मचारी सिर्फ अपना काम नहीं करते, उन्हें फॉर्म भरने , प्रक्रिया समझाने, ऑनलाइन काम कराने और छोटी-छोटी बैंकिंग दिक्कतें सुलझाने में भी मदद करनी पड़ती है।
इसके अल��वा लोन , रिकवरी, KYC, ऑडिट, सरकारी योजनाएँ, पेंशन , जनधन , डिजिटल बैंकिंग और रोज़ की पब्लिक डीलिंग सबकी जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है।
एक दिन बैंक की कुर्सी पर बैठकर देख लेना भाई,
सिर्फ पैसे नहीं गिने जाते , लोगों की समस्याएँ और गुस्सा भी स��भालना पड़ता है।
इसलिए बैंक कर्मचारियों को “कुछ काम नहीं करते” कहने से पहले उनके काम का पूरा हिसाब देख लिया करो।
2 रुपया में बिकने वाले को लाखों की सैलरी से जलन हो��ा लाजमी है
सैलरी की बात करें तो एक MLA का वेतन और सुविधाएँ देख लेना, पर उनके बारे में बात करने के लिए जो चाहिए उसको गूदा कहते हैं
SBI ब्राँच मैनेजर की सैलरी - 165000
SBI ब्रांच डिप्टी मैनेजर की सैलरी -95000
SBI ब्रांच क्लर्क की सैलरी - 40000
SBI ब्रांच चपरासी की सैलरी -18000
लेकिन ये काम क्या करते हैँ?
मैनेजर - छुट्टी पर है
डिप्टी मैनेजर - Kyc कराओ, आधार पैन कॉपी दो
क्लर्क - काउंटर नंबर 4 पर जाओ
चपरासी - बाहर बीड़ी पीने गय�� है
और इनको 5 Days Banking चाहिए
जूता लाओ रे मेरा.
बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कारण पूछने पर यही लगा कि जिस बैंक की नौकरी को अच्छी नौकरी में गिना जाता था, उसकी हालत बदतर हो गई है। टारगेट के नाम पर कर्मचारी देर शाम तक रोके जाते हैं, छुट्टी नहीं दी जाती है,
तनाव रोज़ का हिस्सा है। काम करने की जगह भी अच्छी नहीं है। ऐसा लगता है कि बैंकर को सज़ा दी जा रही है कि उन्होंने बैंक की नौकरी क्यों की। लोगों ने बताया कि अत्यधिक ��नाव के कारण बीमारियाँ होने लगी हैं।
एक बैंकर ने यह भी बताया-
सुबह 8:00 बजे घर से निकलने वाला बैंकर रात को 8:00 या 9:00 बजे के बाद ही घर लौट पाता है, क्योंकि एनपीए (NPA - गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) को रोकने का भारी दबाव होता है। हर खाते की मंथली ईएमआई (EMI) होती है, और यदि वह 90 दिनों तक जमा न हो, तो खाता एनपीए हो जाता है। ऐसे में रीजनल ऑफिस से ब्रांच हेड पर दबाव आता है कि यह खाता आज किसी भी हाल में एनपीए नहीं होना चाहिए। पहले केवल महीने की आखिरी तारीख को एनपीए रोकने का दबाव होता था, लेकिन अब हर सिंगल डे (प्रतिदिन) यह प्रेशर रहता है।
रात के 9:00 बज रहे होते हैं और रीजनल ऑफिस से फोन आता है कि "किसी भी तरह इस खाते को बचाइए।" थक-हारकर जब ब्रांच हेड को लगता है कि उसे अब घर जाना चाहिए, तो वह अपनी जेब से 2,000, 4,000 या 10,000 ��ुपये तक की ईएमआई खुद भर देता है। बाद में ग्राहक वह पैसा लौटाता नहीं है, जिससे बैंक मैनेजर के अपने पैसे डूब जाते हैं।
बैंक में दिनभर कई तरह के मानसिक तनाव झेलने पड़ते हैं। आपको रिकवरी के लिए फील्ड में निकलना होता है। वहाँ कोई ग्राहक आपको ब्लैकमेल करता है कि "मेरे घर मत आओ, नहीं तो मैं पैसा जमा नहीं करूँगा, सिर्फ़ फोन पर बात करो।" फोन पर बात करने के दौरान ग्राहक कभी-कभी अभद्र और गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग करते हैं। उस तनाव में यदि मैनेजर के मुँह से गलती से भी कोई गलत बात निकल गई, तो ग्राहक उसकी कॉल रिकॉर्डिंग करके ब्लैकमेल करने लगता है।
कृपया बैंकर की बात सुनें । कोई रास्ता निकालें।
@Gobhiji3 स्कूल के ट��चर की ड्यूटी 6 घंटे की है
पोस्ट ऑफिस का 5 डे अप्रूव हो चुका है
सभी सरकारी ऑफिस पहले ही 5 डे में हैं
सिर्फ बैंक वालों को हफ्ते में 60 घंटे तक काम करना पड़ रहा है
देश की 80 करोड़ जनता भीख पर पल रही है
Facts पढ़ लो पहले
@impkchaurasiya Prove it.
Judiciary, Education Dept and many other have more holidays.
Banks have least number of holidays under NI Act. Get your facts correct.
@jassneetsingha Banker get holidays under NI Act, similar to Central Govt Employees, who are already enjoying 5 day work week.
No. of holidays under NI Act in most states is less than 20 in a year.
@alashshukla Only the Katora Community living off the taxes paid by us have issues with every working individual.
खुद बिक जाएंगे 500 में और हमें बताएंगे कि सैलरी हमारे पैसे से मिलती है 🤣
@idesibanda Their Genius and excellency has been tested at the time of Demonetisation when each day a new Instruction was issued.
मुहँ उठा, बिना सोचे कर कुछ भी लागू कर दो फिर पैनिक में रोज नए नियम बनाते जाओ।
This is the only thing this Govt and their bureaucrats are good at.
@siddhiman Can't understand what's lacking at Tata. Safari Storme was the only good looking Car Tata had and they just ruined it.
Maruti has good designer but making Cars out of Beer Cans just to achieve some extra mileage at the cost of safety.
@bigulchugh Private Banks definitely have an excellent service but there is a basic difference... A PSB with twice the number of branches and approx 50 times the number of customers have less employees comparatively.
There goes the quality of Service.
A govt that wants us to Sanction and Disburse a Loan upto 2 Crores in 59 minutes, couldn't decide on a demand for nearly a decade and can't implement the same even after 1000 days of agreement.
Hypocrisy ki bhi seema hoti hai......
#5DaysBanking@idesibanda@alashshukla