सामाजिक आंदोलन के जरिए सदैव अपनी आवाज़ बुलंद करने वाले गुर्जर समाज के नेतृत्वकर्ता श्रद्धेय कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला जी जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन एवँ विनम्र आदरांजलि।
हम सबकों उनके जीवन से यह सीखना चाहिए कि कैसे एक सोए हुए समाज को जगाया जा सकता है!
आज दिल्ली के अंबेडकर भवन में भीम आर्मी का एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर उत्तर प्रदेश की टीम के साथ आयोजित हुआ।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को संविधान, आंदोलन और संगठन की ताक़त से परिचित कराना है।
@BhimArmyChief@VinayRatanSingh@pawankumarLoni_
जब “सत्ता की आहट” गाँवों से आरम्भ होगी तभी हमारा शोषित-वंचित समाज हुक़्मरान बनेगा ।
बस्ती जनपद के सभी संघर्षशील साथियों के लिए मंगलकामनाएँ।
भाई @BhimArmyChief जी के नेतृत्व को मजबूत करके हम सब“बहुजन-राज” स्थापित करेंगे।
"भीम आर्मी पाठशाला के इंचार्ज साथी सचिन जी का बीमारी से निधन अत्यंत पीड़ादायक है। आज उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुआ। यह संगठन व समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रकृति परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति दे। 🙏"
भीम आर्मी (आजाद समाज पार्टी) यूनिट- मुज़फ्फरनगर के तत्वावधान में शाहपुर में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में जन संबोधन करते हुए सामाजिक,आर्थिक व राजैतिक परिवर्तन करने का संदेश दिया इस दौरान सैकड़ो साथियो को सदस्यता ग्रहण कराई
बाराबंकी जिले के पूर्व माध्यमिक विद्यालय, खरतला (मजरा हाजीपुर, ब्लॉक निन्दूरा, तहसील फतेहपुर) में भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार, शोषितों-वंचितों और महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न, परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी का नाम लेने पर बच्चों को अपमानित करना, डांटना और धमकाना गंभीर चिंता का विषय है।
विद्यालय में प्रतिदिन प्रार्थना के समय सभी महापुरुषों के नारे लगाए जाते हैं, लेकिन जब बच्चे “डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जय” बोलते हैं, तो जातंकवादी प्रधानाचार्या बच्चों को चिल्लाकर डांटती हैं, पीटने की धमकी देती हैं और यहाँ तक कि स्कूल से निकाल देने तक की बात कहती हैं।
यह आचरण न केवल परम पूज्य बाबा साहेब का अपमान है, बल्कि शिक्षा के मंदिर में घोर अन्याय भी है।
हम @UPGovt से माँग करते हैं कि दोषी प्रधानाचार्या पर कठोर कार्रवाई की जाए और बच्चों को सम्मानजनक व सुरक्षित वातावरण दिया जाए।
@CMOfficeUP@myogiadityanath
उत्तर प्रदेश में बाढ़ ने किसानों की मेहनत को पूरी तरह तबाह कर दिया है।बिजनौर,मुरादाबाद, बहराइच, सीतापुर, गोंडा, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी समेत कई ज़िलों के सैकड़ों गाँव बाढ़ की चपेट में आकर बर्बाद हो गए। खेत पानी में डूब गए, खड़ी फसलें चौपट हो गईं और किसानों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
लेकिन अफ़सोस, *अब तक प्रभावित किसानों का मुआवजा तय नहीं हो पाया है।* प्रशासन रिपोर्ट और सर्वे के नाम पर समय बर्बाद कर रहा है, जबकि किसान हर दिन कर्ज़ और भूख की मार झेल रहे हैं।
हम @UPGovt से माँग करते हैं कि—
1. बाढ़ प्रभावित किसानों का तुरंत सर्वे कर मुआवज़ा घोषित किया जाए।
2. जिनकी फसलें 100% नष्ट हुई हैं, उन्हें विशेष राहत पैकेज दिया जाए।
3. किसानों के लिए अगली फसल की बुआई हेतु बीज व खाद मुफ्त उपलब्ध कराई जाए।
4. राहत वितरण में लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
बाढ़ से तबाह किसानों को अब वादों और काग़ज़ी सर्वे की नहीं, तुरंत न्याय और मदद की ज़रूरत है।
@CMOfficeUP@myogiadityanath
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र में 16 वर्षीय दलित बेटी के साथ हुआ सामूहिक बलात्कार न केवल अत्यंत शर्मनाक अपराध है, बल्कि उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी खड़ा करता है।
पीड़िता को रास्ते में सुनसान जगह पर दो युवकों ने जबरन पकड़कर उसका मुंह दबाया और बाइक पर बैठाकर जंगल ले गए। वहां दो अन्य युवकों को बुलाया और चारों ने मिलकर किशोरी के साथ सामूहिक बलात्कार किया। विरोध करने पर उसकी बेरहमी से पिटाई की ,गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की और फिर दूसरी जगह ले जाने लगे। किसी तरह पीड़िता ने अपनी जान बचाई।
दुखद और चिंताजनक यह है कि परिजनों के आरोप के अनुसार पुलिस ने शुरुआत में कार्रवाई में हीलाहवाली की। यह रवैया अस्वीकार्य और पीड़िता के साथ अन्याय है। पुलिस की यह लापरवाही भी अपराधियों को संरक्षण देने जैसी है।
हम @UPGovt माँग करते हैं कि—
1. सभी आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की जाए।
2. संबंधित पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए, जिन्होंने शिकायत पर हीलाहवाली की।
3. मुकदमा SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम और POCSO की कठोर धाराओं में दर्ज हो।
4. पीड़िता को सुरक्षा, मुआवजा और न्यायपूर्ण पुनर्वास मिले।
5. फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर दोषियों को कठोरतम सज़ा दी जाए।
@CMOfficeUP@myogiadityanath
मुरादाबाद के जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय (समाज कल्याण विभाग) का मामला अत्यंत गंभीर, शर्मनाक और चिंता का विषय है।
विद्यालय के छात्रों को घटिया भोजन, शौचालयों की बदहाली, पानी में करंट और शिक्षकों द्वारा जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के खिलाफ देर रात सड़क पर उतरना प्रशासन की लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर करता है।
बच्चों का सुबह से भोजन न मिलना और बार-बार की गई शिकायतों को अनसुना करना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि बच्चों के संवैधानिक अधिकारों का घोर उल्लंघन भी है।
माननीय समाज कल्याण एवं अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री @asim_arun जी से हमारी माँगें हैं—
1. विद्यालय में बच्चों के लिए तुरंत पौष्टिक भोजन, साफ-सफाई और सुरक्षित वातावरण की व्यवस्था हो।
2. जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने वाले दोषी शिक्षकों पर SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
3. पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
बच्चे हमारे भविष्य हैं, उन्हें अपमान और अभाव नहीं, बल्कि गरिमा, पोषण और सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।यह आंदोलन केवल छात्रों का विरोध नहीं, बल्कि संविधान और समाज की आत्मा को बचाने की पुकार है।
@UPGovt@CMOfficeUP@myogiadityanath
छत्तीसगढ़ की राजधानी बिलासपुर में मात्र 3 माह पूर्व ज्वाइन हुए 25 वर्षीय रेलवे ठेका मज़दूर प्रताप बर्मन (निवासी ग्राम मुलमुला, थाना पामगढ़, जिला जांजगीर-चांपा) की मृत्यु रेलवे प्रशासन की लापरवाही और ठेका प्रथा की अमानवीय व्यवस्था का परिणाम है।
23 अगस्त को बिलासपुर रेलवे कोचिंग यार्ड में एसी लीकेज सुधारते समय हाई टेंशन तार (25,000 वोल्ट) की चपेट में आने से प्रताप गंभीर रूप से झुलस गए। पाँच दिन तक अपोलो अस्पताल में इलाज चलता रहा, लेकिन परिवार इलाज के लिए पैसे की व्यवस्था करने में दर-दर भटकता रहा। रेलवे प्रशासन ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर ठेका कंपनी पर दोष मढ़ दिया। पैसे की कमी के कारण अच्छे से इलाज नहीं हो पाया और प्रताप बर्मन की मृत्यु 28 अगस्त को सुबह 8:30 बजे अपोलो अस्पताल में हो गई।
प्रताप बर्मन की मृत्यु की सूचना रेलवे अधिकारियों तक पहुँच गई थी। माननीय उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए बिलासपुर रेलवे जोन के जीएम से जवाब माँगा। इसके बाद जब रेलवे जीएम और डीआरएम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सुनवाई में जुड़े, तो उन्होंने अदालत को यह जानकारी ही नहीं दी कि प्रताप बर्मन की मृत्यु हो चुकी है।
माननीय प्रधान न्यायाधीश ठेकाकर्मी के बेहतर इलाज और जान बचाने के लिए निर्देश देते रहे, तब भी उनकी तरफ से यह बात नहीं बताई गई कि प्रताप बर्मन की मौत हो चुकी है। उल्टा रेलवे जोन के जीएम ने घटना के लिए मृतक प्रताप बर्मन को ही जिम्मेदार ठहराकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को गुमराह किया। यह न केवल मृतक और उसके परिवार के साथ अन्याय है, बल्कि न्यायपालिका के साथ भी छल है।
मौके पर 1 घंटे 13 मिनट तक अफसरों और परिजनों के बीच बातचीत चली। अफसरों ने रेलवे की तरफ से 16 लाख रुपये (श्रम न्यायालय के आदेश के बाद) और राज्य सरकार की तरफ से 5 लाख रुपये मुआवज़ा देने की बात कही। लेकिन मृतक की पत्नी (आयु 22 वर्ष) ने स्पष्ट कहा कि यह लापरवाही रेलवे और ठेकेदार की है, जिसके कारण उनके पति की जान गई। पति और जेठ ही घर के कमाने वाले थे, अब परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन पर है। इसलिए उन्होंने 1 करोड़ रुपये मुआवज़ा, सरकारी नौकरी, बच्चों की पढ़ाई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग रखी।
अभी भी प्रताप का शव जिला अस्पताल की मर्चुरी में रखा हुआ है। परिजन, भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) लगातार बिलासपुर डीआरएम कार्यालय के सामने धरना दे रहे हैं और अपनी माँगों पर अड़े हुए हैं।
मैं रेल मंत्रालय और राज्य सरकार को स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि जब तक परिजनों को न्याय और उचित मुआवज़ा नहीं मिलता, यह संघर्ष जारी रहेगा। यह लड़ाई सिर्फ़ प्रताप बर्मन के लिए नहीं बल्कि पूरे ठेका मज़दूर वर्ग की सुरक्षा और सम्मान के लिए है।
@RailMinIndia@ChhattisgarhCMO@AshwiniVaishnaw@vishnudsai@gmsecr
आज जिला उधमपुर में @BhimArmy4Jk की एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों युवाओं ने भीम आर्मी का दामन थामा और परम पूज्य बाबा साहब डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी की विचारधारा को घर-घर तक पहुँचाने का संकल्प लिया
हमारी ओर से सभी साथियों को बहुत-बहुत बधाई एवं मंगल कामनाएं
@BhimArmyChief
पहाड़ को चीर कर रख देने का हौसला देने वाले अभूतपूर्व साहस की बेमिसाल मूरत 'माउंटेन मैन' दशरथ मांझी जी के स्मृति दिवस पर उन्हें शत्-शत् नमन एवं विनम्र आदरांजलि।