NEET पेपर लीक केस
फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहले दिन ही सुनवाई टल गई, क्योंकि CBI के वकील नहीं आए थे. अब अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.
ये है फास्ट ट्रैक कोर्ट का हाल, जिसे मोदी सरकार अपनी जीत बता रही है.
जितने भी ऑनलाइन एग्जाम होते हैं यानी CBT (Computer Based Test), उनमें पेपर लीक होना लगभग नामुमकिन है।
कैसे होगा? पेपर तो exam time पर ही system में land होता है।
CBT में पेपर लीक नहीं, बल्कि cheating होती है।
System का remote access कराकर बाहर बैठे solver gang से live paper solve कराया जाता है। आज maximum CBT exams इसी बीमारी का शिकार हैं।
आज लगभग सब कुछ outsourcing और private companies के भरोसे चल रहा है। ज़रूरत है कि सरकार का अपना exam infrastructure हो या फिर सिर्फ़ उन्हीं credible agencies like TCS से exam कराए जाएँ जिनका track record मजबूत हो।
साथ ही एक Centre Affiliation Board होना चाहिए जो पूरे देश के CBT centres का audit करे, standards तय करे और उनकी accountability सुनिश्चित करे।
Paper leak और CBT cheating दोनों अलग-अलग समस्याएँ हैं।
जिस खबर का इंतजार पूरे देश को था वो आज आखिरकार आ ही गया है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को भेज दिया है।
पिछले एक महीने से उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जगह जगह पर प्रदर्शन चल रहे थे लेकिन कयास लगाया जा रहा था कि
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा। लेकिन
देश में भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं अपना इस्तीफा सौंप दिया।
पेपर लीक पर कानून जब बनेगा तब बनेगा, आप पहले ये जान लीजिए कि यूपी में दो विधायक खुद भी पेपर लीक के आरोपी हैं। दोनों बीजेपी के साथ गठबंधन में सरकार में हैं।
पहले हैं- बेदीराम। ये ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा से इस वक्त गाजीपुर की जखानिया सीट से विधायक हैं। दूसरे हैं- विपुल दुबे, ये संजय निषाद की निषाद पार्टी से इस वक्त भदोही की ज्ञानपुर सीट से विधायक हैं।
2006 में रेलवे ग्रुप-D का पेपर लीक हो गया था, परीक्षा रद्द करना पड़ा था। इसमें इन दोनों माननीयों को आरोपी बनाया गया था।
बेदीराम पर तो रेलवे भर्ती पेपर लीक से जुड़े 5 मामले हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन के 2 व पुलिस भर्ती एग्जाम का 1 मामला दर्ज है। विपुल दुबे पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज है। अब दोनों ही कहते हैं कि हमारे ऊपर दर्ज मामला झूठा है।
सवाल यही है कि जब पेपर लीक के आरोपी विधायक बनेंगे, तब दूसरे आरोपियों में डर कैसे आएगा, वह तो उत्साहित होंगे कि ऐसा करके विधायक बना जा सकता है।
पशुपालन विभाग में जिनके घर वालों पर अपनी ही योजना से सवा करोड़ की सब्सिडी बटोरने का विवाद चल रहा था, सरकार ने उन्हीं साहब यानी आईएएस नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का सचिव बना दिया है.
घर में "स्किल" पहले से मौजूद थी, बस मंत्रालय बदला है, बाक़ी हुनर बदलेगा या नहीं. इसकी कोई गारंटी नहीं.
ये अच्छी बात है। कम से कम कुछ issues का हल तो निकलेगा, जब बात होगी UPSC पर, SSC के issues पर, Railway exams के issues पर।
छोटी-छोटी जीत ऐसी पहल से ही मिलेंगी।
हमारे पास हर issue की पूरी list है, और हर point के साथ proof भी है। अब ज़रूरत है कि उन पर ईमानदारी से बात हो और समाधान निकले।
ये सिर्फ एक तस्वीर नहीं हुंकार है विपक्ष के दो सबसे बड़े नेताओं की, जिन्हें आज डिटेन किया गया है।
अखिलेश यादव जी और राहुल गांधी जी ने उन लोगों को दिखा दिया जो विपक्ष को कमतर आंकते थे, उनपर सवाल उठाते थे कि
विपक्ष डरा हुआ है, उसे लड़ना नहीं आता
देखो, आंखे खोलकर देखो यही विपक्ष आज सड़कों पर भी उतरता है और वर्तमान सरकार से तीखा सवाल भी करता है।
देश में सरकार तभी अच्छा काम कर पाती है जब उसके सामने विपक्ष का दबाव होता है, जितना विपक्ष मजबूत होगा उतना लोकतंत्र भी मजबूत होगा।
एक बात तो माननी पड़ेगी कि समाजवादी पार्टी के जितने भी कार्यकर्ता हैं
वो बिना किसी शर्त, बिना किसी स्वार्थ और बिना किसी लालच के सड़कों पर अपना जज्बा लेकर निकल पड़ते हैं।
इतना लॉयल तो मैंने किसी भी पार्टी के कार्यकर्ताओं को नहीं देखा।
जैसे ही खबर आई कि अखिलेश यादव जी को डिटेन किया गया है लोग अपने घरों से निकल पड़े, धरने पर बैठ गए, किसलिए?
सिर्फ और सिर्फ अपने नेता अखिलेश यादव जी के लिए जिन्हें उनके समर्थकों ने स्टेडियम तक नहीं पहुंचने दिया, रास्ता रोक दिया।
आज दिल्ली में नीट पेपर लीक के विरुद्ध छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होकर उनका हौसला बढ़ाया।
समाजवादी पार्टी पूर्ण रूप से छात्रों के साथ है। ये NEET नहीं CHEAT है।