एकान्त प्रिय,हिमालय सदृश शान्त, लघ्वाशी,विविक्तसेवी,प्रसन्नात्मा,असत्य का उन्मूलन,सत्य का साथ देनेहारा,त्वया मया रहित, ग्रामीण पृष्ठभूमि का सामान्य व्यक्ति।
औरंगजेब ने पूछाः "मतिदास कौन है?"...
तो भाई मतिदास ने आगे बढ़कर कहाः "मैं हूँ मतिदास। यदि गुरुजी आज्ञा दें तो मैं यहाँ बैठे बैठे दिल्ली और लाहौर का सभी हाल बता सकता हूँ। तेरे किले की ईंट से ईंट बजा सकता हूँ।"
औरंगजेब गुर्राया और उसने भाई मतिदास को धर्म परिवर्तन करने के लिए विवश करने के उद्देश्य से अनेक प्रकार की यातनाएँ देने की धमकी दी। खौलते हुए गरम तेल के कड़ाहे दिखाकर उनके मन में भय उत्पन्न करने का प्रयत्न किया, परंतु धर्मवीर पुरुष अपने प्राणों की चिन्ता नहीं किया करते। धर्म के लिए वे अपना जीवन उत्सर्ग कर देना श्रेष्ठ समझते हैं।
जब औरंगजेब की सभी धमकियाँ बेकार गयीं, सभी प्रयत्न असफल रहे, तो वह चिढ़ गया। उसने काजी को बुलाकर पूछाः "बताओ इसे क्या सजा दी जाये?"
काजी ने हुक्म सुनाया कि 'इस काफिर को इस्लाम ग्रहण न करने के आरोप में आरे से लकड़ी की तरह चीर दिया जाये।'
औरंगजेब ने सिपाहियों को काजी के आदेश का पालन करने का हुक्म जारी कर दिया।
दिल्ली के चाँदनी चौक में भाई मतिदास को दो खंभों के बीच रस्सों से कसकर बाँध दिया गया और सिपाहियों ने ऊपर से आरे के द्वारा उन्हें चीरना प्रारंभ किया। किंतु उन्होंने 'सी' तक नहीं की। औरंगजेब ने एक बार फिर फिर कहाः "अभी भी समय है। यदि तुम इस्लाम कबूल कर लो, तो तुम्हें छोड़ दिया जायेगा और धन दौलत से मालामाल कर दिया जायेगा।"
वीर मतिदास ने निर्भय होकर कहाः "मैं जीते जी अपना धर्म नहीं छोड़ूँगा।"
ऐसे थे धर्मवीर मतिदास ! जहाँ आरे से चिरवाया गया, आज वह चौक 'भाई मतिदास चौक' के नाम से प्रसिद्ध है।
@scribe9104 राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में यदि(बिना बेनीफिट्स) बर्खास्त करने का अभियान चलाया जाय तो ९०% से अधिक बर्खास्त करने पड़ेंगे।तभी वास्तविक सफाई होगी।
असली सफाई के लिए राष्ट्र विरोधियों की पहचान करने हेतु विश्वविद्यालय का नाम वीर सावरकर विश्वविद्यालय रख देना चाहिए।
भारत का संविधान बनाने में संविधान सभा में 23 सदस्य ऐसे थे जो 1946 में पाकिस्तान बनाने के लिए मुस्लिम लीग के टिकट पर जीते थे।
लेकिन जब इन्होंने पाकिस्तान बना लिया तो उसके बाद यह बड़ी होशियारी से पाकिस्तान नहीं गए और फिर नेहरू गांधी ने इनको भारत के संविधान बनाने का ही जिम्मा दे दिया है, इन सब ने भी अपना संविधान बनाया है।
यह सिर्फ भारत में नेहरू और गांधी ही कर सकते थे कि जिनको गद्दारी का चार्ज लगाकर जेल में डालना था उनको सीधे संविधान बनाने की जिम्मेदारी दे दी। इनमें से कुछ नाम है। यह सब बाद में बहुत सारे लोग केंद्र और राज्यो में मंत्री अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के चांसलर तक बने।
मद्रास से:
१. मुहम्मद इस्माइल साहिब
२. केटीएम अहमद इब्राहिम
३. महबूब अली बेग साहिब बहादुर
४. बी. पोकर साहिब बहादुर, मुम्बई से
५. अब्दुल कादिर मोहम्मद शेख
६. अब्दुल कादिर अब्दुल अजीज खान, असम से
७. मोहम्मद सादुल्ला,
८. अब्दुर रौफ, उत्तर प्रदेश से
९ बेगम क़ुदसिया ऐज़ाज़ रसूल नवाब, हरदोई से
१० सैयद फजल-उल-हसन हसरत मोहानी, AMU से
११ नवाब इस्माइल खान, मेरठ से जो बाद में AMU के चांसलर बने
१२. जेडएच लारी, बिहार से
१३. हुसैन इमाम, गया से
१४. सैयद जफर इमाम
१५. लतिफुर रहमान
१६. मोहम्मद ताहिर
आज इनके वंशज बड़े बड़े नेता बनकर बोल रहे हैं कि हमारा भी खून शामिल है इस देश में।
सबसे बड़ा आश्चर्य तो तब हुआ जब पूरा खोजा कि इनका नाम मिल जाए तो किसी भी वेबसाइट पर किसी भी हिंदूवादी पार्टी या संगठन ने इनका नाम तक गूगल पर नहीं डाला है। खोज खोज कर नाम ढूढे हैं। हम हिंदू वादियों को विचारधारा के स्तर पर अभी बहुत काम करने की जरूरत है।मुस्लिम हमसे इस मामले में हजार गुना आगे हैं कि इन सब करतूतों के बाद भी देश में इतने बड़े देश भक्त की भी इमेज बनाये हुए है। कांग्रेस पार्टी पाकिस्तान को मुस्लिम देश बनाने के बाद भारत को भी मुस्लिम लोगों का देश बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। अल्पसंख्यक आयोग वक्फ बोर्ड मदरसा शिक्षा मुस्लिम पर्सनल लॉ सभी कांग्रेस पार्टी की देन है।
"राष्ट्रहित सर्वोपरि" 💪💪
Source : Facebook
मिशनरी-चर्च नेक्सस में बंद किया कॉपर प्लांट, एक्सपोर्टर से इम्पोर्टर बना भारत
इसी नेक्सस ने लगाया न्यूक्लियर प्लांट में अड़ंगा, विझिंजम पोर्ट को भी रोकने के लिए किया एक्टिविज्म
अब आया FCRA तो बिलबिला उठी पूरी लॉबी
@Anurragmishra
@Profdilipmandal भारत सरकार को सोशल मीडिया के संबंध में घूमता आईना के अनुपम मिश्रा जी के दो सुझाव मानकर कानून बनाने से९०% सफाई हो जाएगी।
१-सोशल मीडिया में आने वालों को अपने वास्तविक नाम,देश की पहचान से ही आना चाहिए न कि फर्जी नामों से।
२-सोशल मीडिया में प्रकाशित सामग्री पर कोई भी पैसा न दिया जाय।
क्या आप ऐसी किसी महिला के बारे में जानते हैं जिसने...
१. हावड़ा में गंगा नदी पर पुल बनाकर कलकत्ता शहर बसाया?
२. अंग्रेजों को ना तो नदी पर टैक्स वसूलने दिया, और ना ही दुर्गा पूजा की यात्रा को रोकने दिया?
३. कलकत्ता में "दक्षिणेश्वर मंदिर" बनवाया?
४. कलकत्ता में गंगा नदी पर बाबू घाट और नीमतला घाट बनवाए?
५. श्रीनगर में "शंकराचार्य मंदिर" का पुनरोद्धार करवाया?
६. मथुरा में "श्री कृष्ण जन्मभूमि" की दीवार बनवाई?
७. ढाका में मुस्लिम नवाब से 2,000 हिंदुओं की स्वतंत्रता खरीदी?
८. रामेश्वरम से श्रीलंका के मंदिरों के लिए "नौका सेवा" आरम्भ करवाई?
९. कलकत्ता का "क्रिकेट स्टेडियम" इनके द्वारा दान दी गई भूमि पर बना है?
१०. "सुवर्णरेखा नदी" से पुरी तक सड़क बनाई?
११. "प्रेसिडेंसी कॉलेज" और "नेशनल लाइब्रेरी" के लिए धन दिया?
क्या यह विदुषी महान हस्ती आज तक के भारत में विद्यार्थियों के सिलेबस में सम्मिलित हुआ...!
इन महान हस्ती का नाम है "रानी रासमणि"!
ये कलकत्ता के जमींदार की विधवा थी! 1793 से 1863 तक के जीवन काल में, रानी रासमणि जी ने इतना यश कमाया है, कि इनकी बड़ी बड़ी प्रतिमाऐं दिल्ली और शेष भारत में लगनी चाहिए थी!
रानी रासमणि जी कैवर्त जाति की थी, जो आजकल अनुसूचित जाति में सम्मिलित है!
भारत के चाटुकार इतिहासकारों ने "रानी रासमणि" को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया!
1. जो लोग चुनाव नहीं जीत पाए वो सड़कों पर अराजकता फैलाकर जीतना चाहते थे
2. प्रधानमंत्री का आवास घेरना और संसद पर हंगामा बर्दाश्त नहीं किया जा सकता
3. भारत एक बड़ा देश है और ऐसी परिस्थितियों में इमरजेंसी के अलावा कोई और चारा नहीं था
4. पब्लिक की याददाश्त बहुत कमज़ोर होती है और वो पुरानी बातें भूल जाती है
~ 1977 चुनावों में हार के बाद इंदिरा गांधी
@SupriyaShrinate न्यायालय ने आखिरकार न्याय दिया पर बिलम्ब से!
एक निर्दोष को सफाई देते देते अपने अनमोल समय को दागी थोप दिए जाने के कलंक में बिताना पड़ा!
अभी भी निकृष्ट लोग उनको अपने और अपने खानदान जैसा ही समझ रहे हैं!!!
तमिलनाडु की पुलिस उदयनिधि स्टालिन को घर से घसीट कर उठा ले गयी, सैकड़ों डीएमके कार्यकर्ता रोक नहीं पाये
सनातन को गाली देते-देते उदय की ज़ुबान ख़राब हो गयी थी, कल मुख्यमंत्री जोसेफ़ विजय और अभिनेत्री तृषा को लेकर एक बयान दे डाला, विजय ने आज गिरफ्तार करा लिया
इस देश में सिर्फ सनातन को और नरेंद्र मोदी को गाली देना सुरक्षित है, बाकी हर बात की सजा है