ओडिशा से लेकर पूरे देश में
एक ही कहानी दोहराई जा रही है,
“जल, जंगल, ज़मीन” पर हमला और आदिवासियों का हक़ छीनना।
रायगढ़ा और कालाहांडी के सिजिमली पर्वत हों या देश के अन्य आदिवासी क्षेत्र, जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकार है, वहाँ कॉरपोरेट को खुश करने के लिए आदिवासियों की ज़मीन बेची जा रही है।
जिन जंगलों ने पीढ़ियों को जीवन दिया, जिन पहाड़ों से नदियाँ निकलती हैं, जिन ज़मीनों से आजीविका चलती है, उन्हें मुनाफ़े के लिए सौंपा जा रहा है। और विरोध करने वाले आदिवासियों को दबाया जा रहा है, डराया जा रहा है।
किसी आदिवासी को राष्ट्रपति बना देने से आदिवासियों के साथ भाजपा द्वारा किये जा रहे पापों को छिपाया नही जा सकता।
भाजपा का असली चेहरा यही है,
कॉरपोरेट को फायदा, आदिवासियों से विश्वासघात।
याद रखिए,
जल-जंगल-जमीन किसी सरकार की संपत्ति नहीं, यह आदिवासियों का अधिकार है।
हम इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाते रहेंगे। ✊