“लेकिन मैं, एक व्यक्ति के रूप में, क्या कर सकती हूँ? 😥”
मैं अक्सर लोगों को ब्रांडेड कपड़े, घड़ियाँ, सनग्लासेस, गहने, जूते, बेल्ट, हैंडबैग वगैरह दिखाते हुए देखती हूँ...
मैं अक्सर लोगों को अपनी पसंदीदा किताबें अपने साथ लिए हुए देखती हूँ, जहाँ भी वे जाते हैं। चाहे पार्क जा रहे हों या दफ़्तर।
मैं उन्हें बसों, ट्रेनों, ट्रामों, फ़्लाइट्स में अपनी किताबें पढ़ते हुए देखती हूँ।
*यह तो मुफ़्त में विज्ञापन और मार्केटिंग है!!!*
लोग उन चीज़ों को देखते हैं 👀
वे बड़े‑बड़े ब्रांड के नाम
वे आकर्षक कवर और रंग
उन्हें ये इतनी बार दिखाई देता है कि उनके मन में एक बीज बो दिया जाता है।
लेकिन वह बीज किस तरह का फल देने वाला है?
ये भी उपभोग करो, वो भी उपभोग करो, ये भी लो, वो भी लो, और फिर भी बेचैन ही रहो... 😔
दुनिया को आचार्य प्रशांत जी ने भौतिक पुस्तकों के रूप में इतने सुंदर उपहार दिए हैं, *निःशर्त प्रेम*, जो हर समय, सभी के लिए उपलब्ध है ❤️
पिछले कुछ हफ़्तों से मैं Truth Without Apology अपने साथ अलग‑अलग बुक‑रीडिंग कार्यक्रमों में ले जा रही हूँ ताकि लोगों को भेंट कर सकूँ, सफ़र के दौरान तो मैं उसे अपनी बाँहों में पकड़े रखती थी ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की नज़र उस पर पड़े।
हाँ, मैं अपनी किताब फख़्र से दिखाना चाहती हूँ!
हाँ, मैं चाहती हूँ कि हर कोई इस अद्भुत किताब के बारे में जाने!
फिर भी, कई बार मुझे किताब को अपने बैकपैक में रखना पड़ता था और मैं उन सबके बारे में सोचती थी जो उसे देख ही नहीं पाते थे...
फिर मुझे कुछ साल पहले देखे हुए वे पारदर्शी प्लास्टिक टोट बैग याद आए, जो हर जगह नज़र आते थे; मुझे वे अजीब लगते थे, उनका यूज़‑केस समझ नहीं आता था—आप दुनिया को क्यों दिखाना चाहते हैं कि आपके बैग के अंदर क्या है?
सिगरेट का पैकेट, वेप, पानी की बोतल, टिश्यू, घर की चाबियाँ, कभी‑कभी कोई किताब?
और यही सब बार‑बार लोगों (छोटे बच्चों सहित) की आँखों के सामने चमकाया जाता है...
जब मैं 10वीं कक्षा में थी, तो लगभग हर लड़की वह Twilight फ़ैंटेसी नावेल पढ़ रही थी जो बहुत वायरल हो गई थी।
जब मैं कॉलेज में थी, तो 50 shades of grey हर जगह थी...
मैंने उन दोनों में से किसी किताब को हाथ भी नहीं लगाया।
मुझे याद आया कि मेरे पास तो कुछ इतना महत्वपूर्ण है, जिसके बारे में मैं चाहती हूँ कि हर कोई जाने; इस बैग के लिए तो मेरे पास साफ़‑साफ़ यूज़‑केस है। मैंने हाल ही में यह बैग ख़रीदा (मिनिमलिस्ट होने के नाते, मैंने यह फ़ैसला बहुत सोच‑समझकर लिया) और उसमें अपनी TWA की प्रति रखना शुरू कर दिया। 😎
सड़क पर, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में, कैफ़े में, को‑वर्किंग स्पेस में—वह हमेशा मेरे साथ रहती है ❤️
*जब प्यार किया तो डरना क्या 🙃*
मेरे पास एक चुनाव है; हर क्षण मेरे सामने एक चुनाव उपस्थित होता है। जो चुनाव मैं करती हूँ, जो निर्णय मैं लेती हूँ, वह केवल मेरे लिए ही मायने नहीं रखता, केवल मुझे ही नहीं प्रभावित करता, बल्कि मेरे आस‑पास के हर व्यक्ति को प्रभावित करता है। मुक्ति केवल व्यक्तिगत चीज़ नहीं है, यह समझाने के लिए आचार्य जी का धन्यवाद...
शायद इसी तरह, एक क्रांति शुरू हो सकती है? :)
#AcharyaPrashant
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Acharya Prashant in Britain: Special Podcast with PETA International President Poorva Joshipura 🎙️
During his visit to Britain, Acharya Prashant engaged in an in-depth podcast conversation with PETA International President Poorva Joshipura, on important issues such as the climate crisis, animal rights, consumerism, education, and human consciousness. During the discussion, Acharya Prashant emphasised that the root cause of violence against the environment and animals lies not outside us, but in the ignorance and ego embedded within the human mind. He stated that lasting solutions to the world's major problems cannot come from policies and technology alone, but require self-knowledge and the right kind of education.
This dialogue became an important chapter in Acharya Prashant’s historic Britain tour. His landmark address at the Cambridge Union and an unprecedented session on the Ishavasya Upanishad at the University of Oxford brought the significance of self-knowledge to life for audiences from around the world. His public sessions in London witnessed large in-person attendance, while more than 1 lakh people watched them online. He also addressed young leaders from around the world at the UK India Youth Leadership Conclave 2026. In the coming days, Acharya Prashant will participate in several major international forums, including London Climate Action Week, engaging in discussions on a range of contemporary issues. Videos from the podcast will be shared with you soon.
Today, what the world needs most from India is not more products, but higher consciousness.
❤️ Acharya Prashant is carrying that timeless wisdom to the UK Parliament.
🇮🇳 🤝 🇬🇧
#APatUKParliament#AcharyaPrashant
लंदन में आचार्य प्रशांत का पहला सार्वजनिक सत्र: कुछ और ख़ास झलकियां✨
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में हुए ऐतिहासिक संवाद के बाद 31 मई को आचार्य प्रशांत का लंदन में पहला सार्वजनिक सत्र आयोजित हुआ। अवधूत गीता पर आधारित इस विशेष सत्र में दुनिया भर से बड़ी संख्या में लोग प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए, जबकि 1 लाख से अधिक लोगों ने इसे ऑनलाइन भी देखा। आचार्य प्रशांत ने अवधूत गीता के गहन सूत्रों के माध्यम से जीवन, संबंधों, भय, महत्वाकांक्षा और आत्मबोध से जुड़े प्रश्नों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मनुष्य की अधिकांश समस्याओं का मूल बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि स्वयं को न समझ पाने में है। लोगों ने अपने दैनिक जीवन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका आचार्य प्रशांत ने सरल, व्यावहारिक और गहन उत्तरों के माध्यम से समाधान किया।
सत्र के दौरान एक अत्यंत भावुक क्षण तब आया जब एक बुज़ुर्ग महिला ने आचार्य जी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, “आपने मेरे भीतर किसी सच्चे बिंदु को स्पर्श किया है।” सत्र के बाद लोगों ने आचार्य प्रशांत से भेंट की और उनके प्रति आभार व्यक्त किया। यह संवाद कैम्ब्रिज में भारतीय दर्शन की ऐतिहासिक उपस्थिति के बाद ब्रिटेन में आचार्य प्रशांत के दौरे का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। 1 जून को आचार्य प्रशांत ने NISAU द्वारा आयोजित UK India Youth Leadership Conclave को भी संबोधित किया और आगामी दिनों में वे ब्रिटेन में कई और प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं बौद्धिक मंचों से लोगों को संबोधित करेंगे। सत्र के वीडियो आपके साथ जल्द ही साझा किए जाएँगे।
🪔* गीता का श्लोक अगर सरल (मुझे पता है) लगे तो ग़लत ही होगा। क्योंकि श्लोक समझ आ गया होता, तो जीवन ही बदल गया होता। *
*हमें "ग" से गीता नहीं "ग" से गलतफहमी पता है।*
~ चल रहे सत्र से 🙏
@Advait_Prashant@Prashant_Advait#AcharyaPrashant#IndianPhilosophy
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On World Environment Day, philosopher Acharya Prashant takes climate message to Britain's most prestigious venues
· In a tour that has placed an Indian philosopher on the stage of some of Britain's most prestigious intellectual and policy stages, Acharya Prashant has spent the past week carrying a climate message to capacity audiences at the Cambridge Union, in a one-on-one dialogue with a British peer of the realm, in public sessions that have drawn British audiences well beyond the Indian community, and across a sequence of upcoming engagements at Oxford, the London School of Economics, King's College London, and London Climate Action Week.
🔗: https://t.co/CsYuVqlbVP
Miss Nepal World 2025 is here to listen to Acharya Ji!
Luna Luitel , Miss Nepal World 2025, who will represent Nepal at Miss World 2026, is present at Kalinga Literary Festival where Acharya Ji was being honoured.
#AcharyaPrashant#Nepal
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'On World Environment Day, philosopher Acharya Prashant takes climate message to Britain's most prestigious venues'~ IANS Coverage
"In a tour that has placed an Indian philosopher on the stage of some of Britain's most prestigious intellectual and policy stages, Acharya Prashant has spent the past week carrying a climate message to audiences at the Cambridge Union, in a one-on-one dialogue with a British peer of the realm, in public sessions that have drawn British audiences well beyond the Indian community, and across a sequence of upcoming engagements at Oxford, the London School of Economics, King's College London, and London Climate Action Week."
Read full article: https://t.co/vPLE5hDC4X
Oxford has hosted scientists, philosophers, and Nobel laureates.
Today it hosts a man asking a more fundamental question:
"Who is the one seeking knowledge?"
#AcharyaPrashant#OxfordUniversity
1️⃣* क्या आपने भी आचार्य जी को केवल उनकी डिग्रियाँ, बौद्धिक क्षमता, या कुछ और देखकर सुनना प्रारंभ किया था? आज आपका रिश्ता उनके साथ कैसा है? मनन करें और अपना अवलोकन साझा करें।*
🌿 प्रारंभ में मैं भी आचार्य जी को उनकी असाधारण बौद्धिक क्षमता, स्पष्टता और तर्कशक्ति के कारण सुनने लगी थी। ऐसा लगता था कि कोई व्यक्ति इतनी जटिल बातों को इतनी सरलता और निर्भीकता से कैसे कह सकता है।
🍀 लेकिन समय के साथ समझ में आया कि केवल ज्ञान किसी व्यक्ति को इतने वर्षों तक निरंतर सक्रिय नहीं रख सकता। धीरे-धीरे उनके शब्दों के पीछे छिपी करुणा, प्रेम और मनुष्य के प्रति गहरी चिंता दिखाई देने लगी।
🌱 आज मेरा रिश्ता आचार्य जी से किसी वक्ता, लेखक या शिक्षक जैसा नहीं रह गया है। वे मेरे लिए एक ऐसे दर्पण हैं जो बार-बार मुझे मेरी ही नींद, भ्रम और कमजोरियों से परिचित कराते हैं।
🪷 पहले मैं उन्हें सुनती थी क्योंकि वे सही बातें कहते हैं। आज सुनता हूँ क्योंकि उनके जीवन में उन बातों की सच्चाई दिखाई देती है। उनकी ओर आकर्षण केवल बुद्धि के कारण नहीं, बल्कि उस निस्वार्थ प्रेम और करुणा के कारण है जो उनके प्रत्येक प्रयास में झलकती है।
🌻 शायद यही कारण है कि अलग-अलग देशों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग भी उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं। सत्य और प्रेम की भाषा शब्दों से बड़ी होती है, और उसे समझने के लिए किसी विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं होती। ✨
2️⃣* कबीर साहब कहते हैं, "ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।" क्या हम आचार्य जी के शब्दों को पढ़ रहे हैं, या उस स्थान को भी देख-समझ पा रहे हैं जहाँ से वे शब्द आ रहे हैं?*
🌻 कबीर साहब का "ढाई आखर प्रेम" शायद पुस्तकों में नहीं, बल्कि ऐसे ही जीवनों में दिखाई देता है — जहाँ व्यक्ति स्वयं को पीछे कर देता है और केवल सत्य तथा करुणा को प्रवाहित होने देता है।
✨ इसलिए मेरे लिए अब आचार्य जी केवल एक महान वक्ता या विचारक नहीं हैं। वे उस संभावना की याद दिलाते हैं कि मनुष्य ज्ञान से आगे बढ़कर प्रेम का माध्यम भी बन सकता है।
3️⃣ *आचार्य जी के निरंतर देश और दुनिया में दौरों के बावज़ूद, आपके लिए सत्र, परीक्षाएँ, रात और चाँद, संस्था के अन्य कार्य कभी रुकते नहीं। क्या आप भी उतने ही प्रेम और एकनिष्ठा के साथ प्रयासरत हैं?*
🌿 हम अक्सर कहते हैं कि आचार्य जी हमारे लिए कितना कर रहे हैं, लेकिन शायद अधिक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि हम उनके लिए नहीं, बल्कि सत्य के लिए कितना कर रहे हैं।
🍀 यदि कोई व्यक्ति दशकों तक बिना रुके लोगों तक पहुँचने का प्रयास कर सकता है, तो क्या हम अपने हिस्से का छोटा-सा उत्तरदायित्व भी पूरी निष्ठा से निभा पा रहे हैं?
🌾 सत्र सुनना सरल है, प्रेरित हो जाना भी सरल है। कठिन यह है कि उस प्रेरणा को अपने दैनिक जीवन, अपने कर्म और अपने निर्णयों में उतारा जाए।
🪷 आचार्य जी का परिश्रम हमें केवल प्रभावित करने के लिए नहीं है, बल्कि हमें भी सक्रिय करने के लिए है। प्रश्न यह नहीं कि वे कितना दे रहे हैं, प्रश्न यह है कि हम जो पा रहे हैं उसका क्या कर रहे हैं।
🌻 कहीं ऐसा तो नहीं कि हम दर्शक बने हुए हैं, जबकि जीवन हमें सहभागी बनने के लिए बुला रहा है?
#AcharyaPrashant
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Posted by Fija Bano on Acharya Prashant's Gita Mission App.
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Cambridge में हुए सफल संवाद के बाद,
आज बारी है Oxford की।
आचार्य प्रशांत के साथ जुड़िए लाइव
8 जून, रात 10:30 बजे
Acharya Prashant App पर
लिंक: https://t.co/qhXzcfgAZQ
#AcharyaPrashant#Oxford#UKTour#APatOxford#LiveSession