मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM से रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री राकेश रंजन, पुलिस अधीक्षक, श्री पारस राणा एवं पुलिस अधीक्षक, यातायात श्री राकेश सिंह ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री से उनकी यह शिष्टाचार भेंट थी।
@ranchipolice
डाल्टनगंज पचमोहन पर एक गरीब आदमी को थप्पड़ एवं डंडा से मार रहा है इसकी गलती यह है कि रोड पर कुछ सजावट का सामान घूम-घूम कर बेच रहा है / 13/9/ 2025 का वीडियो है पुलिस से निवेदन की इस पर जांच करके उचित दंडित करने की कष्ट करे ((viral video)) @deepakbiruajmm@JharkhandPolice
मुख्यमंत्री श्र�� @HemantSorenJMM से @TataMotors के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की।मुख्यमंत्री को प्रतिनिधिमंडल ने @TataMotors द्वारा हाइड्रोजन इंजन एवं इलेक्ट्रिक ट्रक निर्माण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों से संबंधित कार्य प्रगति की जानकारी
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पलामू में पुलिस बल और उग्रवादी संगठन के बीच भीषण मुठभेड़ में 2 जवानों, संतन कुमार और सुनील राम के शहीद होने की सूचना प्राप्त हुई।
जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। समाज में शांति स्थापित करने के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों का हम सब सदैव कृतज्ञ रहेंगे।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें एवं शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुख सहन करने की शक्ति दें।
भारत के रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के संस्कार भोज में शामिल होने हेतु नेमरा पहुंचे। रक्षा मंत्री ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी ए���ं उनके परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की।
मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM से आज नेमरा, रामगढ़ स्थित पैतृक गांव में फिल्म निर्माता/ निर्देशक श्री प्रकाश झा ने मुलाकात कर दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
कहानी — “तेरह हज़ार का सपना”
सूरज की पहली किरण गाँव के कच्चे घर की टूटी खिड़की से झांक रही थी। अभिषेक सोरेन, जो पिछले आठ साल से झारखंड में सहायक पुलिस के रूप में काम कर रहा था, अपने बिस्तर से उठ चुका था। पत्नी राधा चुपचाप चूल्हे पर पानी गरमा रही थी, और कोने में बैठा उनका बेटा किताबों में सिर झुकाए पढ़ने की कोशिश कर रहा था।
अभिषेक सोरेन की जेब में हर महीने तेरह हज़ार रुपये आते थे—उसी में घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई, बुज़ुर्ग माता-पिता की दवा, और रोटी-कपड़ा सब कुछ चलता था। कभी-कभी तो महीने का आधा हिस्सा ही बीतता और जेब खाली हो जाती।
ड्यूटी पर निकलते वक्त अभिषेक सोरेन की वर्दी साफ़ त�� थी, लेकिन उसके भीतर छुपा दर्द कोई नहीं देख पाता था। दिन में 12-14 घंटे धूप, बारिश और सर्दी में खड़ा रहना, अपराधियों से भिड़ना, और कभी-कभी जान पर खेलकर लोगों की जान बचाना—ये सब वही करता था। मगर जब वेतन की बात आती, तो अधिकारी सिर्फ एक वाक्य कहते—
“तुम अनुबंध पर हो, नियम यही है।”
रात को घर लौटते समय, अभिषेक सोरेन ने बाज़ार से बेटे के लिए किताब खरीदने का सोचा। लेकिन जेब में सिर्फ 80 रुपये थे—दवा और दूध के बीच चुनना पड़ा। अभिषेक सोरेन की आँखों में पानी भर आया, लेकिन बेटे के सामने मुस्कुरा कर बोला,
“पापा अगले महीने ले आएंगे।”
उस दिन अभिषेक सोरेन को समझ आया—यह लड़ाई सिर्फ अपराधियों से नहीं है, यह लड़ाई उस व्यवस्था से है जो उसकी मेहनत को त���रह हज़ार में तौल रही है। उसके सपने छोटे हो गए थे, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं।
क्योंकि अभिषेक सोरेन जानता था—अगर वो हार गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ भी तेरह हज़ार के इस पिंजरे में कैद रहेंगी।
ज़ुल्म सहना भी गुनाह है, ये मत भूलो,
अपने हक़ की लड़ाई में कभी पीछे मत झुको।
हक़ उसी का मिलता है जो मैदान में उतरता है
Learn from Dishom Guru Shibu Soren how to get your rights and entitlements.
@sunny_sharad @ZeeBiharNews @JharkhandCMO @DainikBhaskar @JagranNews
कहानी: “माटी का वादा”
झारखंड के एक छोटे से गाँव में आदिवासी परिवार का बेटा मनोज था। उसका सपना था—खाकी पहनकर अपने गाँव की रक्षा करना। पिता खेतों में मजदूरी करते, माँ जंगल से लकड़ी लाती, ताकि मनोज पढ़ सके और अपने लोगों का सहारा बन सके।
किस्मत ने साथ दिया, और मनोज सहायक पुलिस में भर्ती हो गया। तनख्वाह कम थी, लेकिन उसे लगा—
"सेवा में गर्व है, पैसों में नहीं।"
लेकिन हकीकत उससे अलग थ��। महीनों तक मनोज और उसके साथी नक्सल इलाकों में ड्यूटी देते, शहरों में धूप हो या बारिश हो तभी भी डियुटी करते,पसीना ही नहीं कभी-कभी खून भी बहता। फिर भी उन्हें सिर्फ "तेरह हज़ार रुपये मिलते।"
उधर राजधानी तथा अन्य क्षेत्रों में मुख्यमंत्री जी मंच से बार-बार कहते—
मैं अपनी माटी, अपने आदिवासियों का बेटा हूँ।
लेकिन जब उसी माटी के बेटे का हक मार लिया जाता, अधिकारियों के अन्याय से उसका मनोबल टूटता, तब मुख्यमंत्री जी खामोश रहते।
गाँव के लोग पूछते—
जब मुख्यमंत्री जी खुद को माटी का बेटा कहते हैं, तो क्या माटी के बेटों का दर्द सुनना उनका फर्ज़ नहीं?
मनोज ने उस दिन ड्यूटी पर खड़े-खड़े सोचा—
शायद हम इस माटी के बेटे हैं, लेकिन सरकार के लिए हम बस एक सस्ती ताकत हैं, जो चुपचाप जान दे भी दे, तो भी वे समझते हैं कि हमको ज्यादा दे रहे हैं।
और उस दिन मनोज की आँखों में सिर्फ़ गुस्सा नहीं, बल्कि अपने ही माटी के नेताओं से टूटा हुआ भरोसा भी था।
यही हकीकत है माननीय। कि आपलोग को लगता है कि हम सहा��क पुलिस को 13000 ज्यादा दे दे रहे हैं। आज हमारे गांव में एक मजदूर को भी हमसे (433रू) से कहीं ज्यादा मिलता है। झारखंड के आम जनमानस से भी पुछ लिजीए की क्या एक सहायक पुलिस का पारिश्रमिक 13000 देना सही है या नहीं।
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#jharkhand_sahayak_police
माननीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी मुझे याद है सहायक पुलिस को लेकर विधानसभा में हमलोग ने कितनी लंबी लड़ाई लड़ी थी, उस वक्त आपने कहा था की इनका समायोजन पुलिस में कर लिया जाएगा परंतु एक साल से ऊपर हो गया सहायक पुलिस का ना समायोजन हुआ ना ही मानदेय में आपकी सरकार ने सम्मानजनक बढ़ोतरी किया उल्टा उनका अनुबंध समाप्त करने की धमकी दी जा रही है ..
मैं आग्रह करूँगा की यह ��हायक पुलिस के बदौलत जो आज थोड़ा बहुत क़ानून व्यवस्था बचा है उस पर सहानुभूति पूर्वक विचार करें ..
@BJP4Jharkhand @yourBabulal
जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक की जिसमें जिले में चल रही विकास सहित अन्य योजनाओं की समीक्षा की गयी।आवास व मनरेगा योजना,छात्रवृत्ति की अद्यतन स्थिति,केसीसी,सीएम रोजगार प्रोत्साहन योजना आदि की समीक्षा करते हुए पदाधिकारियों को समय पर क���र्य पूरा करने का निर्देश दिया.
@prdjharkhand
मुख्तार अंसारी गैंग के कुख्यात शूटर अनुज कनौजिया की जमशेदपुर में हुए मुठभेड़ म���ं मारे जाने की सूचना है। जानकारी के मुताबिक, अनुज जमशेदपुर के एक इलाके में पिछले कई महीनों से छुपा हुआ था और बड़े वारदातों को अंजाम देने की तैयारी में था।
@Jsr_police को बताना चाहिए कि आखिर अनुज को शरण देने वाले कौन थे? कौन लोग उसकी मदद कर रहे थे? क्या जमशेदपुर में संगठित अपराध को बढ़ावा देने वाला कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है?
जनता को सचेत करने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस को उन सभी लोग���ं के नाम सार्वजनिक करने चाहिए, जिन्होंने इस कुख्यात अपराधी की छिपने में सहायता की।
जब तक ऐसे अपराधियों को संरक्षण देने वाले चेहरे बेनकाब नहीं होंगे, तब तक अपराध की जड़ें खत्म करना मुश्किल रहेगा!
@JharkhandPolice
@BJP4India @narendramodi @JPNadda @AmitShah @blsanthosh @BJP4Jharkhand
वासना साफ साफ चेहरे पर नजर आ रही है. मुस्कान ने जेंटलमैन सौरभ की जगह टपोरी साहिल शुक्ला को पसंद क्यों किया.
लड़के घंटों जिम में पसीना बहाते हैं. अ���्छे कपड़े पहनते हैं, क्लीन शेव में रहते हैं ताकि महिलाओं को आकर्षित कर पाए.
दूसरी तरफ साहिल शुक्ला जो देखने में लगता है महीनों से नही नहाया है. पूरा व्यक्तित्व गंजेड़ी चरसी की तरह है. मुस्कान के ड्राइवर ने कहा साहिल शुक्ला हर दिन दो बोतल शराब पीता था.
अब ऐसे लड़के में मुस्कान रस्तोगी ने क्या देखा. अपने पति की हत्या करने के बाद मुस्कान साहिल के साथ मनाली घूमने जाती है, दोनों होटल में मजा करते हैं, होली खेलते हैं.
कुछ न कुछ साहिल शुक्ला के अंदर है जो मुस्कान को आकर्षित कर रहा था जो LUST और DHOKHA का कारण बना. वो क्या है इसका सटीक जवाब Psychologist ही दे सकता है.
मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM ने बिरसा मुंडा एयरपोर्ट, रांची के स्टेट हैंगर में वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। विदित हो कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए विशेष विमान से नई दिल्ली ले जाया जा रहा है।