बीजेपी कैसे धर्म को प्रमोट करके आपके बच्चों का भविष्य ख़राब कर रही है. दोनों तस्वीरें ध्यान से देखने पर पता लगेगा.
फ्लाइट में अभिनव अरोड़ा धार्मिक झंडा लेकर एंट्री करता है. जयश्रीराम, जय सियाराम बोलते हुए.
फ्लाइट में मौजूद लोग उसका समर्थन करते हैँ, पर रुकिए वहां बीजेपी नेता प्रेम शुक्ला पहले से ही बैठा हुआ है और वो अभिनव का हौसला बढ़ा रहा है.
अभिनव अरोरा 10 पास भी नहीं है. ढंग से बोल भी नहीं पाता, फर्क को फड़क बोलता है, फ्लाइट के नियम अनुसार आप धार्मिक चीज़े नहीं कर सकते.
एक नेता और प्रवक्ता होने के बावजूद प्रेम शुक्रला बच्चे को टोक नहीं रहा? मतलब वो नहीं चाहता बच्चे शिक्षा हासिल करें,, वो सिर्फ धर्म प्रमोट करना जानता है.
वीडियो हाल का नहीं है, कुछ महीने पहले का होगा.
पर इनकी सोच Neet प्रोटेस्ट वाले बच्चों पर डंडे बरसाने की है,
आपको अगर अब भी लगता है बीजे���ी शिक्षा देगी बच्चों को तो आप बेवकूफ़ हो. गलत कहा कुछ?
🚨 ब्रेकिंग: कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य
ठिकानों पर ईरानी forces ने जोरदार हमला किया, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को तेजी से
लॉकडाउ��/कड़ी निगरानी में कर दिया गया। ⚠️🔥🇮🇷🇰🇼
आज फिर संविधान का कत्ल हुआ, लोकतंत्र की धज्जियाँ उड़ाई गईं और कानून को कुचला गया।
सहारनपुर में सुबह 5 बजे एक षड्यंत्र रच कर हमारी मस्जिद को शहीद कर दिया गया। यह सिर्फ एक मस्जिद पर हमला नहीं, बल्कि संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
क्या देश में मुसलमान होना जुर्म होगया है ?
एक नमाज़ी पर FIR करना मुस���लिम महिला पत्रकारों पर लाठी डंडे बरसाना ये मुसलमानों पर ज़ुल्म है।
इसका जवाब जनता अपने वोट से देगी और बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकेगी।
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण पर मौलाना अरशद मदनी ने गहरा दुख जताते हुए कड़े शब्दों में निंद��� की!
सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद गिराए जाने की ख़बर पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी का सख़्त बयान सामने आया है। इंग्लैंड में मौजूद मौलाना मदनी ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए प्रशासन की कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की।
मौलाना मदनी ने कहा कि सहारनपुर पुलिस-प्रशासन की यह कार्रवाई न सिर्फ़ संविधान की धज्जियां उड़ाने वाली है, बल्कि धार्मिक स्थलों के संरक्षण से जुड़े Places of Worship Act, 1991 (धार्मिक स्थल उपासना अधिनियम, 1991) की भी खुली अवहेलना है।
उन्होंने इसे धर्म के आधार पर होने वाली नाइंसाफी की इंतहा क़रार देते हुए कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस मामले में आगे की क़ानूनी कार्रवाई के रास्ते तलाश रही है।
मौलाना मदनी ने इस कार्रवाई के बाद कई बुनियादी सवाल भी उठाए हैं। उन्होंने सरकार और सिस्टम से पूछा कि क्या इस देश में क़ानून अब भी सबके लिए बराबर है? क्या इंसाफ़ का पैमाना संविधान और क़ानून होगा, या फिर यह ��ी देखा जाएगा कि सामने वाले का धर्म क्या है? देश संविधान से चलेगा या धार्मिक और सियासी चश्मे से देखकर कार्रवाई तय होगी? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में क़ानून की ताक़त सर्वोपरि होनी चाहिए, न कि किसी व्यक्ति या समुदाय की धार्मिक पहचान।
@ArshadMadani007 @ArshadMadanijuh
#Saharanpur #ArshadMadani #JamiatUlamaeHind #Masjid #PlacesOfWorshipAct1991 #PlacesOfWorshipAct #Constitution #Justice #RuleOfLaw #UttarPradesh
गुजरात पुलिस हत्या के आरोपी फैजल को क्राइम सीन क्रिएट कराने ले गई है -
इस दौरान पुलिस ने बर्बरता से आरोपी को डंडो से
पीटा है..कई अलग अलग स्थानों के वीडियो
वायरल हैं..!
मैं सिर्फ ये जानना चाहता हूं कि क्या अब न्यायालय अथवा जेलों की आवश्यकता नहीं बची...?
ऐसे तमाम वीडियो वायरल है..मैं हैरान हूं मानवाधिकार आरोप न जाने क���ां सो रहा है..!
एक प्रश्न और क्या ऐसी सजा देने से अपराध पर नियंत्रण लगेगा..?
वालिद खान और याकूब खान की गाटा संख्या 539 की जमीन पर सहारनपुर कलेक्ट्रैट की मस्जिद बनी हुयी थी। खास बात उन्होंने ही जमीन को कलैक्ट्रेट, कोषागार और तहसील बनाने के लिए डोनेट किया था!
अब वही प्रशासन कह रहा है कि मस्जिद ही अवैध है! है न गजब
जब नरेंद्र मोदी 2013 में दिल्ली विश्वविद्यालय गए थे, तब वहां उन्होंने कहा था-
अगर आधा ग्लास पानी से भरा है, तो आधे ग्लास में हवा भरी है- लेकिन अब समझ आया कि आधे ग्लास में PR भरा है।
नरेंद्र मोदी आज फिर SRCC गए हैं, लेकिन इसमें चुनिंदा Alumni को ही बुलाया गया और बाकी छात्रों की एंट्री रोक दी गई।
जरूरी बात ये है कि जिस SRCC ने देश को इतना कुछ दिया है, मोदी जी ने उसे भी अपना चुनावी मंच बना दिया है, क्योंकि 18 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय में स्टूडेंट यूनियन का चुुनाव है।
: NSUI प्रभारी @kanhaiyakumar जी
📍 दिल्ली
यह ब्रेनवॉशिंग की हद है 😭
पत्रकार –– आपको कांग्रेस क्यों पसंद नहीं है?
अंधभक्त –– क्योंकि कांग्रेस सरकार के समय भारत पर बहुत कर्ज़ था
पत्रकार –– कितना कर्ज़?
अंधभक्त –– $1000 बिलियन 😂😂
पत्रकार –– BJP सरकार का क्या?
अंधभक्त –– अब कर्ज़ कम है। सिर्फ़ $500 हज़ार करोड़ बिलियन 😂😂
पत्रकार –– कितना? 🤯
अंधभक्त –– $5000 करोड़ अरब बिलियन
ज्ञान : 00%, आत्मविश्वास : 100% 🤡
Delhi police facial recognition technology claimed to catch criminals but investigation exposed how jailed inmates were falsely marked present at protests. This massive failure proves their data and accountability are completely broken.
बताया जा रहा है ये मस्जिद 1947 से पहले अंग्रेजों ने बनवाया था किसी मुगल ने नहीं और ये मस्जिद वक़्फ़ बोर्ड में रजिस्टर्ड भी है!
इसीलिए रात में चोरों की तरह आये और इसे गिरा दिया मतलब ये मस्जिद सिर्फ वोट बैंक मजबूत करने के चक्कर में नफरत की भेंट चढ़ गई!
ये बस एक दिखावटी गिरफ्तारी थी....
उपर से निचे तक ���ारा सिस्टम है खराब है इस देश का आप किसी के ऊपर भी यकीन नहीं कर सकते.....
स्वतंत्र भारद्वाज की एक दिन की पुलिस कस्टडी पर निशु आज़ाद के वकील ऋषभ रंजन ने कहा, हम सभी क��र्ट में मौजूद थे और सुनवाई शुरू होने का इंतज़ार कर रहे थे।
बाद में हमें पता चला कि लीगल एड काउंसिल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शामिल हुए और आरोपी को जज के घर पर उनके सामने पेश किया गया।
इतने गंभीर अपराध में एक दिन की पुलिस कस्टडी मांगी गई।
हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली कि कौन से आरोप जोड़े गए और FIR में क्या बदलाव किए गए... मुझे नहीं पता कि क्या छिपाया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने अब तक ��ाराओं के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।"
Breaking News 🔥
ओम बिड़ला का खुलेआम कानून से खिलवाड़....
लोकसभा स्पीकर ���म बिड़ला ने सुप्रीम कोर्ट की खुली अवमानना कर दी है।
तृणमूल के 20 सांसदों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट ने 18 सि��ंबर की तारीख दी थी।
लेकिन ओम बिड़ला ने इन बागी सांसदों को 22 सितंबर तक का समय और दे दिया है नोटिस का जवाब देने के लिए।
इसका मतलब है कि जब 18 सितंबर को यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँचेगा, तब तक शायद उनके जवाब रिकॉर्ड पर भी न हों।
सवाल यह नहीं है कि क्या सांसदों को अपना पक्ष रखने के लिए और समय मिलना चाहिए था। असली सवाल यह है कि तब क्या होगा जब जवाब देने की समय-सीमा सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद की ��ो?
एक और अहम बात है, सुप्रीम कोर्ट पहले कह चुका है कि अयोग्य ठहराने की कार्यवाही का फैसला आम तौर पर तीन महीने के अंदर हो जाना चाहिए।
क्या समय-सीमा का पालन हो रहा है, या कानून की समय-सीमा बस एक सुझाव बनकर रह गई है?