ऐसी स्थिति में सभी विभागों की पूर्व में जारी वरिष्ठता सूचियों को संशोधित करना पड़ेगा, जिससे प्रशासनिक स्तर पर बड़ी अव्यवस्था उत्पन्न होगी। इसलिए यह मामला अब किसी एक विभाग का न रहकर वृहद स्तर का बन गया है, जिस पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।
इस आधार पर सरकार SLP दायर करे।
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*यदि राज्य सरकार ���्वारा कॉमन सीनियोरिटी के पक्ष में कोई भी कदम उठाया जाता है, तो इसका सीधा असर केवल माध्यमिक शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। इसका परिणाम ऐसी ही समान भर्तियां करने वाले संस्कृत शिक्षा विभाग, कॉलेज शिक्षा विभाग तथा अन्य विभागों में भी पड़ेगें।
@rajofficial@rajcmo
आदरणीय मुख्यमंत्री महोदय,
यथास्थान उप-प्राचार्यों की आपसे तीन ���ांगे हैं-
1 सरकार सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर करें।
2 यथास्थान उप प्राचार्य की काउंसलिंग करें।
3 COMN SNRTYका नियम 2021 का है।डीपीसी2017-18 पर लागू नहीं हो सकता है।
@Madandilawar@BhajanlalBjp
आदरणीय मुख्यमंत्री तथा शिक्षा मंत्री महोदय,
यथास्थान उप-प्राचार्यों की आपसे तीन मांगे हैं-
1. सरकार सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर करें। 2. यथास्थान उप प्राचार्य की काउंसलिंग करें। 3. COMN SNRTYका नियम 2021 का है।डीपीसी2017-18 पर लागू नहीं हो।
बाड़मेर नगर परिषद चुनाव के बाद अब सबकी नजर बोर्ड बनने पर है।
कांग्रेस के अंदर मेवाराम जैन खेमा और उम्मेदाराम बेनीवाल खेमा अपने-अपने पार्षदों को साथ रखने में जुटे हैं।
वहीं RLP भी इस बार मजबूत दावेदार के रूप में अपना खेल दिखा सकती है।
अब असली बात यह है कि किसके पास कितने पार्षद रहते हैं और कौन किसके साथ जाता ��ै।
निर्दलीय और बागी पार्षद भी इस पूरे खेल में बड़ा रोल निभा सकते हैं।
भाई, बोर्ड बनाते समय एक-दो पार्षद भी पूरा हिसाब-किताब बदल सकते हैं। 😄
अब देखना दिलचस्प रहेगा कि
कांग्रेस का कौन सा खेमा भारी पड़ता है, RLP कितना दम दिखाती है और आखिर बोर्ड की चाबी किसके हाथ लगती है।
चुनाव तो हो गया…
अब बाड़मेर में असली सियासी जोड़-तोड़ शुरू होगी।
@SachinPilot@Hemaram_INC
माणकी धोरीमना की पावन धरा पर छत्तीस कोम के लोकप्रिय नेता स्वर्गीय श्री गोरधन राम जी मूर्ति अनावरण कार्यक्रम मे पधारने के लिए माननीय श्री सचिन जी पायलट एवं श्री हेम��राम जी चौधरी का बहु�� -बहुत आभार।