1. आज मेरा पुनः पार्टी के लोगों से यही कहना है कि मेरे ख़ुद के अनुभव को मद्देनज़र रखते हुये यदि इनको राजनीति में कामयाब होना है और समाज के लिए कुछ करना है तो उन्हें मेरी तरह अपने भाई-बहिनों व नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि के मोह से ऊपर उठकर अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करना है,
* इसीलिए बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी ने राजनीति में आने के बाद, फिर अपने सभी नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूर रखा है। उन्हें केवल निःस्वार्थ भावना से पार्टी संगठन में कार्य करने की ही इजाज़त दी है। इतना ही नहीं बल्कि इन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी, अपना ख़ुद का परिवार ना बनाकर, ’बहुजन समाज’ के हित व कल्याण के लिए ही समर्पित की है।
2. जिनसे प्रेरित होकर फिर मैंने भी उन्हीं के ही पदचिन्हों पर चलने का फैसला लिया और अपनी पूरी ज़िन्दगी ’बहुजन समाज’ के लिए समर्पित कर दी है।
* लेकिन मैं एक लड़की होने की वजह से फिर मजबूरी में मुझे अपने किसी ना किसी भाई-बहिन आदि को हमेशा अपने साथ रखना पड़ा है, जिसके तहत् ही मेरा छोटा भाई श्री आनन्द कुमार यह पिछले काफी वर्षों से मेरी सेवा में कार्यरत है।
3. और इनके विशेष आग्रह करने पर फिर इनके परिवार में से मुझे इनके बड़े बेटे श्री आकाश आनन्द को राजनीति में आगे करना पड़ा है।
* जिनकी शादी होने के बाद से अब श्री आकाश आनन्द का क़दम-क़दम पर ऐसा रवैया व गतिविधियाँ आदि रही हैं कि जिसकी वजह से अभी कुछ दिन पहले फिर से इनको पार्टी से अलग भी करना पड़ा है।
* अर्थात् अब वह अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह से फंस चुके हैं, जिसे अब पार्टी में वापिस लेना यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात ही होगा, जो मैं यह पार्टी विरोधी ग़लत कार्य कदापि नहीं कर सकती हूँ।
4. ऐसे में अब मैं श्री आनन्द कुमार के परिवार में से किसको पार्टी में आगे करूँ या ना करूँ, यह मेरे लिए पिछले कुछ समय से काफी दुविधा सी बनी हुई है, जिस पर विराम देते हुए अब मैंने हर पहलू पर काफी गम्भीरता से सोच-विचार करने के बाद यह फैसला लिया है कि इनके परिवार में से ऐसे किसी सदस्य को अब पार्टी में आगे किया जाये, जो आकाश के नक्शेकदम पर बिल्कुल भी ना चले।
5. और जहाँ तक आगे चलकर, इनकी बेटी की मदद लेने का सवाल है तो इनकी शादी होने के बाद, फिर इनका मामला भी यदि श्री आकाश आनन्द की तरह ही निकल गया तो यह भी पार्टी हित में सही नहीं होगा।
* ऐसी सम्भावना को भी ध्यान में रखकर अब पार्टी हित में यही उचित होगा कि श्री आकाश आनन्द व इनकी बहिन को भी अब पार्टी की कोई भी ज़िम्मेवारी देने से इन दोनों को एकदम दूर रखा जाये अर्थात् अब इनके इस फैसले में कोई भी फेरबदल नहीं किया जायेगा।
6. और अब इन दोनों के स्थान पर श्री आनन्द कुमार के परिवार में से केवल श्री ईशान आनन्द को ही, पार्टी में सम्मानजनक ज़िम्मेवारी देकर इनको आगे किया जायेगा, जिसका श्री आकाश आनन्द व इनकी बहिन की तरह कभी भी कोई चक्कर नहीं रहेगा। अभी तक ऐसा ही लग रहा है। आगे तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है
7. फिर भी यदि इन्होंने पार्टी विरोधी ऐसा कोई भी गम्भीर कृत्य किया तो फिर इनको भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा, लेकिन तब ऐसी स्थिति में श्री आनन्द कुमार के परिवार में से अन्य किसी भी सदस्य को पार्टी की कोई भी छोटी-बड़ी ज़िम्मेवारी नहीं दी जायेगी।
* बल्कि इसके स्थान पर, तब फिर पार्टी में ही कार्यरत दलित वर्ग के किसी भी एक मिशनरी व वफादार कार्यकर्ता को ही आगे कर दिया जायेगा। इसलिए देश व जनहित के ज़रूरी मुद्दों के साथ-साथ इस ख़ास मुद्दे को भी लेकर अब दिनांक 23 सितम्बर की बी.एस.पी. की अत्यन्त ज़रूरी ऑल-इण्डिया की बैठक बुलाई गई है ताकि फिर पार्टी के लोग अपनी पार्टी के कार्यों में पूरे जी-जान से जुट जायें।
8. अन्त में अब मैं यही कहना चाहती हूँ कि ख़ासकर परिवार को लेकर पार्टी व मूवमेन्ट के हित में मैंने यह फैसला मान्यवर श्री कांशीराम जी से प्रेरित होकर तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी के भी लिखे गये एक पत्र से प्रभावित होकर लिया है, जिस पत्र का सारांश इस प्रकार से है:
9. बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने, दिनांक 23 फरवरी सन् 1956 को 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइन्स, नई दिल्ली से बम्बई में अपने पुत्र श्री यशवन्त बी. अम्बेडकर को पत्र में लिखा है कि,
* मुझे तम्हें सूचित करना है कि श्री उपशम के कई पत्राचार मिले हैं कि तुम उन्हें बौद्ध भूषण प्रिन्टिंग प्रेस के एकाउण्टेन्ट व कैशियर के रूप में उनकी ड्यूटी नहीं करने दे रहे हो।
* तुम्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करके तुम प्रेस को अपने कब्जे में ले लोगे। मैं तुम्हें आगाह कर रहा हूँ कि प्रेस पब्लिक प्रापर्टी है, ना तुम्हारा है और ना मेरा, और एक पब्लिक अकाउण्ट में किसी भी प्रकार की अनियमितता की अनुमति देना संभव नहीं है।
* तुम्हारा आचरण उचित नहीं रहा है...अगर तुमने मेरी अन्तिम व फाइनल निर्देश की परवाह नहीं कि तो फिर मैं तुम्हें प्रेस से निकाल-बाहर करूंगा और इस चेतावनी के नहीं मानने पर फिर मैं आपके विरुद्ध अभियोजन (मुक़दमा) (prosecute) भी करूंगा।
10. संक्षेप में अब मैं अपने ख़ुद के बारे में भी यही कहना चाहती हूँ कि समस्त ’बहुजन समाज’ ही मेरा असली परिवार है तथा सत्ता की मास्टर चाबी के ज़रिये ही उन्हें ’शोषित से शासक वर्ग’ बनाकर उनका हित व कल्याण सुनिश्ति करना ही मेरा मिशनरी लक्ष्य व मेरी प्रतिज्ञा भी है, जिसके लिए मैं अपने भाई-बहिनों आदि के ख़िलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हूँ, जैसाकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने उदाहरण पेश किया, यही मेरा भी संकल्प है।
1. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर अर्थात जीडीपी ग्रोथ के सरकारी दावे को लेकर ज़बरदस्त बहस छिड़ी हुई है, और देश में ख़ासकर अति-महंगाई, अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी आदि की मार से पीड़ित आमजनता अचंभित भी है कि वह किस पर भरोसा करे और किस पर ना करे।
2. वैसे इसके सम्बंध में सरकार के आसमान छूते दावे को प्रथम दृष्टया मान लिया जाये तो यह अच्छी बात होगी, किन्तु अगर यह जुगाड़ के आँकड़े हैं तो यह चिन्ता की बात ज़रूर है। इसीलिये जनता में उम्मीद जगाने हेतु सरकार को विश्वसनीय ढंग से यह ज़रूर बताना चाहिये कि इस उच्च विकास दर का क्या लाभ देश की करोड़ों ग़रीब मेहनतकश जनता को मिला है और आगे में इसका क्या लाभ होगा।
3. इतना ही नहीं बल्कि यह मुद्दा आमजनहित से जुड़ा होने के कारण विकास के आँकड़े व दावे दोधारी तलवार की तरह हैं। इसीलिये उन्हें ज़मीनी हक़ीक़त से भी ज़्यादातर आँका जाता है अर्थात् विकास वही सही व उपयोगी जो जनता को भाये यानी जनता के जीवन में समतामूलक परिवर्तन लाये और लोग ख़ुश व खुशहाल बनें।
4. अतः जीडीपी ग्रोथ के आँकड़े व दावे आदि अपनी जगह है, लेकिन विकास की असल हक़दार देश की करोड़ों मेहनतकश जनता को भी इसका लाभ मिलना और उसे इसका महसूस होना भी देश व जनहित में ज़रूरी है, वरना यहाँ के लगभग 140 करोड़ लोग ’धनवान सरकार की ग़रीब जनता’ होने का बोझ लगातार ढोती रहेगी। देश का विकास तभी ’अच्छे दिन’ वाला होगा जब यहाँ की करोड़ों बहुजन मेहनतकश जनता ग़रीबी, बेरोज़गारी व भ्रष्टाचार आदि से मुक्त आत्म-सम्मान का थोड़ा सुखी जीवन जीने योग्य बनेगी।
5. इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों का दोगुना तक मानदेय बढ़ाने तथा 20 लाख लागों को सुरक्षा कवर आदि यूपी आउटसोर्स सेवा निगम की स्थापना के माध्यम से देने के फैसले से कहीं बेहतर होता लोगों को सीधे तौर पर सरकारी नौकरी देना, ताकि यह व्यवस्था अफसरशाही की मनमानी, भ्रष्टाचार एवं शोषण आदि की जंजाल से मुक्त हो।
1. दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई माँग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुँचे।
2. वैसे भी देश में सदियों से जातिवाद की अमानवीयता का शिकार रहे एस.सी., एस.टी. व ओबीसी समाज के लोगों हेतु संविधान में की गई आरक्षण की व्यवस्था के बारे में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का यह कहना था कि ’जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है’। अतः लोग सही देशभक्ति का परिचय ज्यादा दें तो यही उचित होगा।
3. जहाँ तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है, तो केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा भी ग़रीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष ख़र्च किया जाता है, किन्तु उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है।
4. इसके अलावा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के ग़रीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है।
5. वास्तव में ख़ासकर यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी व्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से ज़मीन पर लागू ही नहीं होने दिया है, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग, आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद आज तक भी, ग़रीबी, जातिवादी द्वेष, शोषण, अत्याचार व जातिवाद के ज़हर का दंश हर दिन हर स्तर पर लगातार झेलते रहते हैं।
6. अतः सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण बिल्कुल भी ना दें तो यह व्यापक देश व जनहित में होगा। लोगों से भी अपील है कि वे आरक्षण जैसे अहम् एवं संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति ना करें और ना ही होने दें।
7. हालाँकि उसी ही दिन पार्लियामेन्ट थाना के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री राहुल गाँधी कई घन्टों तक धरने पर बैठे रहे, जिसका पार्टी को कोई ऐतराज़ नहीं है।
ऽ लेकिन उसके बग़ल में जंतर-मंतर पर दलित व शोषितों के जातीय आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण को ख़त्म करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा था, वहाँ पर वे व उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन्हें समझाने तक के लिये भी नहीं गये, जिससे इन वर्गों के प्रति इनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता अभी भी साफ झलकती है।
Raghav Chadha out as Rajya Sabha Deputy Leader. Speaking time cut. AAP moving on.
But the record stays.
₹10 airport chai. 28-day recharge scam exposed. Went undercover as a Blinkit delivery boy. Fought for crypto, paternity leave, Right to Recall.
Titles come and go.
Work is forever.
@raghav_chadha
#RaghavChadha #AamAadmiParty #RajyaSabha #ParliamentWork #IndianPolitics
मायावती ने आज फिर पश्चिम उत्तर प्रदेश को एक अलग राज्य बनाने के वादे को दोहराया
मायावती ने अपनी सरकार में उत्तर प्रदेश से
चार नए प्रदेश बनाने का प्रस्ताव पास किया था उस समय समाजवादी पार्टी ने इसका विरोध किया था।
2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के चार हिस्से कर नए प्रदेश बनाना बसपा का सबसे बड़ा चुनावी एजेंडा हो सकता है
देश में संसद व राज्य विधानमण्डलों के सत्र के घटते समय के साथ-साथ हर बार इनके भारी हंगामेदार एवं स्थगन आदि से इनकी जन उपयोगिता का घटता प्रभाव अक्सर गंभीर चिन्ता का विषय रहा है और इसीलिये उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय सम्मेलन के दौरान विधानमण्डलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिन्ता व्यक्त किया जाना उचित, सामयिक व सराहनीय, जिसपर सरकार और विपक्ष दोनों को अति-गंभीर होकर इस पर अमल भी ज़रूर करना चाहिये।
भारतीय संसद व राज्यों के विधानमण्डल यहाँ देश की संवैधानिक व लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं तथा सरकार/कार्यपालिका को देश व जनहित के प्रति उत्तरदायित्व बनाये रखने का एक सशक्त माध्यम है। संसद व विधानमण्डलों की कार्यवाही साल में कम-से-कम 100 दिन के कैलेण्डर तथा सही नियमों के हिसाब से शान्ति-व्यवस्था के साथ चले, यह बहुत ज़रूरी है।
इसके अलावा, ’सरकारी मान्यता नहीं होना मदरसा को बंद करने का आधार नहीं’ सम्बंधी माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच द्वारा दिया गया फैसला अति-महत्वपूर्ण व सामयिक है तथा इस आधार पर श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घण्टे में हटाने के निर्देश का भी स्वागत।
वैसे भी संभवतः यहाँ कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं, बल्कि ज़िला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी का ही शायद यह परिणाम है कि इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं की ख़बरें आती रहती हैं, जिसपर सरकार को उचित संज्ञान लेकर ऐसी प्रवृति को सख़्ती से ज़रूर रोकना चाहिये।
जैसा कि विदित है कि आज से संसद में चूंकि चुनाव सुधार को लेकर चर्चा हो रही है। अतः बी.एस.पी. की ओर से इस सम्बन्ध में यह कहना है कि चुनाव की प्रक्रिया में अन्य सुधार लाने के साथ-साथ निम्न तीन ख़ास सुधार लाना बहुत ज़रूरी हैं।
SIR को लेकर जो पूरे देश में व्यवस्था चल रही है BSP उसके विरोध में नहीं है। परन्तु BSP का यह कहना है कि इस सम्बन्ध में मतदाता सूची में नाम भरने की जो भी प्रक्रिया होनी है, उसके लिए जो समय सीमा निर्धारित की गई है वो बहुत ही कम है, जिसकी वजह से BLO के ऊपर भी काफी दबाव है और कई BLO काम के दबाव के वजह से अपनी जान भी गवां चुके हैं। जहाँ करोड़ों मतदाता हैं वहाँ BLO को उचित समय मिलना ही चाहिये और ख़ासतौर पर उस प्रदेश में जहाँ जल्दी ही कोई भी चुनाव नहीं है।
उत्तर प्रदेश में लगभग 15.40 करोड़ से भी ज़्यादा मतदाता हैं और अगर वहाँ SIR का कार्य जल्दबाज़ी में पूरा करने की कोशिश की जायेगी तो इसका नतीजा यह होगा कि अनेकों वैध-मतदाता ख़ासतौर पर जो ग़रीब हैं और काम करने के सिलसिले में बाहर गये हैं, तो फिर उनका नाम मतदाता सूची से रह जायेगा और वो बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी द्वारा ऐसे व्यक्तियों को दिया गया वोट डालने का संवैधानिक अधिकार से वंचित कर देगा, जो कि पूर्ण रूप से अनुचित होगा। अतः ऐसे में SIR की प्रक्रिया को पूरी करने में जल्दबाज़ी ना करते हुये उचित समय दिया जाना चाहिये अर्थात् वर्तमान मे दी गई समय सीमा को बढ़ाना चाहिये।
इसके साथ ही, मा. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार चुनाव आयोग द्वारा निर्देश जारी किये गये हैं। ऐसे लोग जिनका कोई भी आपराधिक इतिहास है उन्हें अपने हलफनामें में इसका अपने आपराधिक इतिहास का पूरा ब्योरा देना होगा और इसके साथ-साथ स्थानीय अख़बारों में भी इसका पूरा विवरण भी प्रकाशित करना होगा तथा जिस राजनैतिक पार्टी से वे चुनाव लड़ रहे हैं, उस राजनैतिक पार्टी की भी ज़िम्मेदारी होगी कि वह इस सूचना को अपने स्तर से भी राष्ट्रीय अख़बारों में भी प्रकाशित करेगी।
इस सम्बन्ध में BSP का कहना है कि अक्सर यह पाया गया है कि जिस व्यक्ति को चुनाव लड़ने के लिए टिकट/सिम्बल दिया जाता है उनमें से कुछ लोग अपना आपराधिक इतिहास पार्टी को नहीं बतातें हैं तथा कुछ लोगों के सम्बन्ध में स्क्रूटनी (scrutiny) के समय ही पार्टी को इसका पता लग पाता है, जिसकी वजह से इसकी ज़िम्मेवारी पार्टी के ऊपर आ जाती है और वैसे भी ऐसे प्रत्याशियों के आपराधिक इतिहास को राष्ट्रीय अख़बारों में छपवाने की ज़िम्मेवारी पार्टी के ऊपर डाली गयी है।
जबकि इस सम्बन्ध में हमारी पार्टी का यह सुझाव है कि आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों के सम्बन्ध में सभी औपचारिकताएं पूरी करने की ज़िम्मेवारी उन्हीं पर डालनी चाहिये ना कि पार्टी के ऊपर होनी चाहिये। और अगर आगे चलकर यह मालूम होता है कि किसी प्रत्याशी नेे अपना आपराधिक इतिहास छुपाया है तो इससे सम्बंधित हर प्रकार की कानूनी liability और ज़िम्मेदारी भी उसी पर आनी चाहिये ना कि पार्टी के ऊपर।
इसके इलावा हमारी पार्टी का यह भी सुझाव है कि EVM के द्वारा उसमें लगातार उठती गड़बड़ियों की शिकायत जो चुनाव के दौरान और उसके बाद व्यक्त की जाती है उसे दूर करने के लिए और चुनाव प्रक्रिया में सभी का पूर्ण रूप से विश्वास पैदा करने के लिए अब EVM के द्वारा vote डलवाने की जगह पुनः बैलेट पेपर से ही vote डलवाने की प्रक्रिया लागू की जाये और अगर किसी वजह से ऐसा अभी नहीं किया जा सकता है तो कम से कम VVPAT के डब्बे में जो vote डालते समय पर्ची (slip) गिरती है उन सभी पर्चियों की गिनती सभी बूथों में करके EVM के वोटों से मिलान किया जाये।
ऐसा ना करने का जो कारण Election Commission द्वारा बताया जाता है, कि इसमें काफी समय लग जायेगा जबकि इनका यह तर्क बिलकुल भी उचित नहीं है। क्यांेकि अगर सिर्फ कुछ और घन्टे गिनती में लग जाते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिये, जबकि वोट डालने की चुनाव प्रक्रिया महीनों चलती है। और यह इसलिए भी जरूरी है कि इससे देश की आमजनता का चुनाव प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा तथा इस प्रकार के जो अनेकों प्रकार के सन्देह उत्पन्न होते हैं उनपर भी पूर्ण विराम लगेगा, जो देश हित में होगा।
जैसाकि सर्वविदित है कि उत्तर प्रदेश में मेरे (मा. बहनजी के) नेतृत्व में चार बार बनी बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की सरकार के दौरान् ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे उन महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, श्री नारायणा गुरु, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी आदि को विभिन्न रूपों में भरपूर आदर-सम्मान दिया गया है, जिनकी जातिवादी पार्टियों की रही सरकारों में यहाँ हमेशा उपेक्षा की गयी व उनका तिरस्कार भी किया जाता रहा है।
देश में करोड़ों लोगों की भलाई के लिये ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ का संदेश देने वाले तथा उसके लिये आजीवन त्याग व संघर्ष करने वाले इन महापुरुषों के नाम पर बी.एस.पी. सरकार द्वारा जनहित व जनकल्याण की अनेकों बड़ी-बड़ी योजनायें शुरू की गयीं तथा इनके नाम पर यूपी की राजधानी लखनऊ में व राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नज़दीक यूपी के ज़िला गौतम बुद्ध नगर में बनाये गये भव्य स्थल, स्मारक व पार्क आदि, जो अब इनके अनुयाइयों के लिये तीर्थस्थल का रूप धारण कर चुके हैं और जिनकी भारी भीड़ ख़ासकर इन महापुरूषों की जयंती व पुण्यतिथि के मौकों पर यहाँ देखने को मिलती है।
लेकिन इस दौरान् अनुभव यही रहा है कि मेरे जाने पर मेरी सुरक्षा प्रबंध के नाम पर जो सरकारी व्यवस्था की जाती है, जो अत्यन्त ज़रूरी भी है, उससे लोगों को काफी परेशानी/दिक्कतों का सामना करना पड़ता है तथा वहाँ मेरे ठहरने तक उन्हें मुख्य स्थल से काफी दूर ही रोक दिया जाता है, जिसकी वजह से अब मैंने उन स्थलों पर स्वंय ना जाकर अपने निवास स्थान पर या पार्टी कार्यालय में ही इन सभी महापुरुषों की जयंती व पुण्यतिथि आदि पर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करने का यह फैसला लिया है।
इस क्रम में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की पुण्यतिथि पर, पश्चिमी यूपी को छोेड़कर, उत्तर प्रदेश में पार्टी के लोग व उनके अनुयायी मेरे निर्देशानुसार आगामी 6 दिसम्बर को लखनऊ के विशाल एवं भव्य ’डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल’ में तथा पश्चिमी यूपी, दिल्ली व उत्तराखण्ड स्टेट के लोग नोएडा में स्थित ’राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल’ में अपने परिवार सहित भारी संख्या में पहुँचकर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे तथा उनके जीवन संघर्ष से प्रेरणा लेकर उनके कारवाँ को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लेंगे ताकि बी.एस.पी. के नेतृत्व में उनके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का मूवमेन्ट सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करके मंज़िल की ओर आगे बढ़ सके। धन्यवाद।
मायावती जी क़ो समझना और कुदरत क़ो समझना बराबर है , 2027 की शपथ मायावती जी लेंगी और कैसे लेंगी यह आप 2026 के बाद देखेंगे — सैय्यद क़ासिम जी ,संपादक ( राजपथ भारत )
#BSP_मिशन_2027
उल्टे हाथ की दीवार से लेकर सीधे हाथ की दीवार तक और सामने के द्वारा तक, द्वार के बाहर की पूरी सड़क तक और पता नहीं कितनी बसें जो पहुंच नहीं पाई और लौट गई।
बहुजनों की इस अपार भीड़ को देखकर ही विरोधी जातिवादी बौखलाए हुए हैं।
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी के कल 19वें परिनिर्वाण दिवस पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वी.आई.पी. रोड पर बी.एस.पी. की सरकार द्वारा निर्मित किये गये विशाल व भव्य ’मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ में हुये महा आयोजन में अपने ख़ून-पसीने की कमाई से हर उम्र के आये लोगों में भी ख़ासकर युवाओं व महिलाओं की रिकार्ड तोड़ भीड़ व उनके जोश और उमंग के साथ-साथ यूपी के अगले चुनाव में अपनी बहनजी की पाँचवीं बार सरकार बनाने के लिये ज़िद के साथ काम करने के गगन चुम्बी नारों आदि के साथ व्यक्त किये गये दृढ़ संकल्प को देखकर विरोधी पार्टियों/संगठनों आदि की नींद व उनके नेताओं के होश उड़ जाना स्वाभाविक हैं और इस क्रम में इनकी बेतुकी बातें एवं बयानबाज़ी को महत्व ना देकर इनके बारे में कुछ ना कहा जाये तो यही बेहतर होगा।
वैसे भी ’बहुजन समाज’ के लोग अपने वोटों के बलबूते पर शोषित से शासक वर्ग बनकर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का सपना पूरा करने के लिए कितने तत्पर व संघर्षशील हैं इसकी स्पष्ट झलक कल उन लोगों ने यूपी सहित पूरे देश को दिखा दी है। अब उन्हें विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों से सजग व सावधान रहते हुये आगे अपने मिशन 2027 में पूरे तन, मन, धन से लग जाना है, यही संदेश।
साथ ही, कल मान्यवर श्री कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर लखनऊ में हुये महा-आयोजन में, इनको अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के साथ-साथ बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष को सुनने के लिए यू.पी. के सभी 75 ज़िलों के गाँव-गाँव व शहर-शहर से बी.एस.पी. के लाखों-लाखों की संख्या में पार्टी के लोग पहुँचे थे जिनको सुरक्षित लाने व वापिस ले जाने में यू.पी. बी.एस.पी. यूनिट के हर स्तर के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों, नेताओं व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं आदि ने अपनी अहम् भूमिका निभाई है इन सभी की पार्टी बहुत-बहुत आभारी है।
इसके साथ ही, इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में उनके योगदान एवं भागीदारी के लिए पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकरियों, कार्यकर्ताओं, अनुयाइयों, शुभचिन्तकों आदि का पूरे तहेदिल से बहुत-बहुत आभार, शुक्रिया व धन्यवाद।
इसके अलावा, देश भर में उन सभी लोगों का भी हार्दिक धन्यवाद जिन्होंने अपने-अपने प्रदेश व ज़िलों में मान्यवर श्री कांशीराम जी को अपने-अपने हिसाब से कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किया और उनके बी.एस.पी. मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प किया।
समाज के सबसे ज्यादा सताए हुए लोग जुटकर सामाजिक परिवर्तन के महानायक को याद कर रहे हैं।
उनकी नेता उनसे संवाद कर रही हैं।
पार्कों स्मारकों की दुर्दशा कब हुई बता रही हैं।
समझ नहीं आ रहा है लोग इसपर इतना क्यों बौखलाए हुए हैं!
सच में, वाजिब आलोचना भी सुनने की सहनशीलता नहीं रह गई है?
अंत में मैं पार्टी के लोगों को भरोसा दिलाना चाहती हूं कि इस बार यूपी में पांचवीं बार बीएसपी की सरकार बनाने के लिए आप सभी लोगों के साथ साथ मैं भी हर स्तर पर पूरी ताकत लगा दूंगी कोई कमी छोडूंगी नहीं ये वादा है मेरा @Mayawati