गुजरात नगरपालिका में बसपा का खाता खुला।
राज्य में नगरपालिका के चुनाव घोषित हो गए है। 16 फरवरी को मतदान और 18 को परिणाम घोषित होने है।जिसमे मोरबी जिले के वांकानेर नगरपालिका में बसपा उम्मीदवार बिन हरिफ विजय घोषित हुए है।
@Mayawati@AnandAkash_BSP@BSP4Gujarat@Bsp4Morbi
बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी तेज कर दी है. पार्टी सुप्रीमो मायावती ने राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को चुनावी अभियान की कमान सौंपी है. आकाश 10 अगस्त को हाथरस की सादाबाद विधानसभा से अभियान की शुरुआत करेंगे, जहां विधानसभा प्रभारी की घोषणा के साथ कार्यकर्ताओं को भी संबोधित करेंगे.
1. देश में पेपर लीक के जघन्य अपराध व उसके कारण नौजवान छात्र-छात्राओं का उनका भविष्य अंधकार होता देख अनेकों द्वारा आत्महत्या जैसी अति-दुखद घटनाओं की रोकथाम की उपाय के रूप में संसद ने एक बार फिर से एक और सख़्त सज़ा के प्रावधान वाला क़ानून बनाने वाला बिल लोकसभा ने आज अन्ततः पास कर दिया है, लेकिन क्या केवल इससे समस्या का समाधान हो जायेगा, इसकी चिन्ता लोगों में बरक़रार है, क्योंकि लोगों को यह आपाधापी/जल्दबाज़ी में लिया गया एक और क़दम ज़्यादा लगता है, जबकि अन्य और भी उपायों को तत्काल सख़्ती से लागू करना ज़रूरी है।
2. वास्तव में यह कदम भी पेपर लीक होने के बाद सख़्त सज़ा का प्रावधान करता है, जबकि पेपर लीक का पूरा मामला इस महा अपराध को होने देने से पहले ही इसे रोकने का है, अर्थात् अपराध नियंत्रण ज़्यादा महत्वपूर्ण है, जो कि अधिकतर मामलों में यहाँ कहीं भी प्रभावी होता हुआ नज़र नहीं आता है, और यह पेपर लीक के पिछले क़ानून के निष्प्रभावी होने से भी स्पष्ट है।
3. हकीकत में अन्य अपराधों की तरह पेपर लीक जैसे जघन्य अपराध के नियंत्रण के लिये सख़्त से सख़्त कानून से अधिक इसकी रोकथाम हेतु बेहतर से बेहतर उपाय करने की ज़रूरत है, जिसके तहत् शिक्षा के लिये शोषणकारी ऋण को सस्ता करके उसे कल्याणकारी बनाना, सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा आदि सहित पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की ज़रूरत है, ताकि ग़रीबों, उपेक्षितों, शोषितों व अन्य मेहनतकश लोगों के बच्चे भी समता व समानता के साथ आगे बढ़ सकें, जो परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कल्याणकारी संविधान का उद्देश्य तो है किन्तु इसका हर स्तर पर वर्तमान में घोर अभाव है।
4. दरअसल अमीर परिवारों के लोग तो धनबल के आधार पर अपनी मनमानी व मनचाही पढ़ाई आदि प्राप्त कर लेते हैं, किन्तु करोड़ों ग़रीब परिवारों के बच्चे-बच्चियों का क्या जो होनहार होने के बावजूद अपना जीवन संवार नहीं पाते हैं।
5. वैसे भी पेपर लीक शिक्षा व्यवस्था में बिगाड़ का केवल एक उदाहरण है, जबकि शिक्षा व्यवस्था में बिगाड़ की जड़ काफी गहरी व अति-गंभीर है। इसके निदान के लिये दृढ़ इच्छाशक्ति व नेक नीयत के साथ अनवरत ईमानदार प्रयास की ज़रूरत है, तभी कुछ मुट्ठी भर लोगों के बजाय करीब 140 करोड़ लोगों का यह देश आगे बढ़ पायेगा।
6. लेकिन यह अति-दुखद है कि पेपर लीक रोकथाम सम्बंधी बिल पर भी बहस के दौरान अधिकतर पार्टियाँ दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ पायीं अर्थात् संसद में चर्चा के दौरान पूरी गंभीरता कम व एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप ही ज़्यादा रहा। ऐसे में क्या नया बनने वाला यह पेपर लीक निरोधक क़ानून कितना सार्थक होगा इससे लोगों का शंकित होना उचित है।
7. ऐसे में मूल प्रश्न यही है कि क़ानून पर क़ानून क्या इस जटिल समस्या का सही समाधान कर पायेगा? सरकार इसके अलावा भी अन्य बेहतर उपायों पर भी ज़रूर विचार करे तो यह देश के उज्जवल भविष्य के लिये बेहतर होगा।
लखनऊ
➡BSP में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज
➡आकाश आनंद प्रचार रणनीति को देंगे नई धार
➡दिल्ली में सोशल मीडिया की कोर टीम के साथ मंथन
➡सोशल मीडिया की कोर टीम के साथ मंथन जल्द
➡युवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए AI का इस्तेमाल
➡मायावती सरकार की उपलब्धियों को बताया जाएगा
@bspindia@AnandAkash_BSP
1. जैसाकि मीडिया की ख़बरों से सर्वविदित है कि यूपी की वर्तमान सरकार ने, बी.एस.पी. सरकार द्वारा भदोही को राज्य मुख्यालय का दर्जा देते हुये संत रविदास नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था और जिसे समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार ने अपनी संकीर्ण जातिवादी मानसिकता के तहत् बदल दिया था, इसे अब फिर से संत रविदास नगर ज़िला स्थापित कर दिया है, जिसके लिये पार्टी राज्य सरकार की आभारी है।
2. वास्तव में बी.एस.पी. की यूपी में रही चारों सरकारों में प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने व आम जनहित को बेहतर बनाने के मद्देनज़र अनेकों नये ज़िले, तहसील, विकास खण्ड तथा पुलिस ज़ोन व रेंज आदि बनाये गये और उनमें से कई ज़िलों के नाम दलित व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) में समय-समय में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के नाम पर रखे गये और इसी क्रम में संत रविदास नगर व छत्रपति शाहूजी महाराज नगर व भीम नगर आदि अनेकों नये ज़िले बने, जिनके नाम सपा सरकार ने केवल अपनी जातिवादी सोच, द्वेष व संकीर्ण राजनीति के कारण बदल दिये, जिसको लोग कभी भी भुला नहीं पायेंगे।
3. इतना ही नहीं बल्कि ब्रज क्षेत्र में कासगंज इलाके़ के समुचित विकास हेतु कासंगज को ज़िला मुख्यालय का दर्जा देते हुये मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर नया ज़िला बनाया गया, जिसका भी नाम सपा सरकार ने अपने पीडीए-पिछड़ा दलित व अक्लि़यत विरोधी रवैयों के कारण बदल दिया।
4. ऐसे में यूपी सरकार संत रविदास नगर की तरह ही, मान्यवर श्री कांशीराम जी व अन्य महापुरुषों के नाम पर बनाये गये नये ज़िलों के भी असली नाम बहाल कर दे तो यह उचित होगा और यह कार्य अगर मान्यवर श्री कांशीराम जी की दिनांक 9 अक्तूबर के परिनिर्वाण दिवस से पहले कर दिया जाये या उसी दिन ही कर दिया जाये तो बी.एस.पी. इसके लिये आभारी रहेगी।
छत्तीसगढ़ प्रदेश के कर्मठ व संघर्ष शील वरिष्ठ कार्यकर्ता जीवराज रात्रे के आकस्मिक निधन की खबर अत्यंत पीड़ा दायक.एक अच्छे कार्यकर्त्ता की कमी हमेशा महसूस होगी.कुदरत इस असीम दुख को उनके परिवार को सहन करने की ताकत दे.
और अठन्नी की झालरों क्या हाल है तुम्हारा ? किन्नरों की तरह फ्री में ही ताली पीट दी उसके समर्थन में ? 😝
आपके समाज का सबसे बड़ा संगठन #BSP जिसको ये ढक्कन आठ अन्ने का समझता है और राहुल गांधी को तूफ़ान का देवता मानता है !!
खुदी तय करो बुद्धि तुम्हारी खराब ज्यादा या उसकी खराब ज्यादा है !
स्क्रीन शॉट आभार :– @arunnigam52
#Baba_Manish
1. काफी लम्बे इंतज़ार के बाद जेवर में नोएडा इण्टरनेशनल हवाई अड्डा के प्रथम चरण का कल उद्घाटन हुआ, जबकि इसकी रूपरेखा ही नहीं बल्कि इसके सभी ज़रूरी बुनियादी कार्य बी.एस.पी. की मेरी सरकार में ही शुरू हो गये थे।
2. इतना ही नहीं बल्कि उस समय केन्द्र में रही कांग्रेस पार्टी की सरकार अगर रोड़ा नहीं अटकाती तो विकास का यह कार्य, यमुना एक्सप्रेसवे आदि की तरह, काफी पहले मेरी सरकार में ही पूरा हो गया होता।
3. जहाँ तक सपा सरकार का सवाल है तो इनका ज़्यादातर समय उत्तर प्रदेश की ग़रीबी व पिछड़ेपन आदि को दूर करने हेतु विकास के ठोस कार्य करने के बजाय, ख़ासकर बी.एस.पी. सरकार द्वारा समाज के कमज़ोर तबक़ों के हित, कल्याण व उनके उत्थान हेतु लिये गये ऐतिहासिक फैसलों व किये गये महत्वपूर्ण कार्यों को निष्क्रिय बनाने के साथ-साथ बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान में निर्मित शिक्षण व मेडिकल संस्थानों व ज़िला आदि का नाम बदलने व उनके नाम पर बने स्थलों, स्मारकों, एवं पार्कों आदि की अनदेखी व उपेक्षा करने के नकारात्मक, जातिवादी व राजनीतिक द्वेष में ही ज़्यादातर समय लगी रही, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है।
4. अतः इन सबके मद्देनज़र यूपी की जनता से अपील है कि वे विरोधी पार्टियों की छलावापूर्ण राजनीति व बहकावे में ना आकर बी.एस.पी. के ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त में विश्वास रखते हुये अपने व प्रदेश के विकास हेतु बी.एस.पी. के आयरन नेतृत्व पर ही भरोसा करें।
5. इसके साथ ही, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की अलग से बेंच व उनके लिये अलग से प्रदेश बनाने का सपना ना जाने कब पूरा होगा?
#बसपा_का_बढ़ता_जनाधार
आज दिनांक 23-01-202 को जनपद प्रयागराज में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई साथ ही सपा व बीजेपी को छोड़कर दर्जनों साथियों ने थामा बसपा का दामन जिसमें प्रमुख नाम निम्न है—
अब्दुल रहमान जी रिटायर्ड SI, नया लाल जी रिटायर्ड कानूनगो,ललित यादव जी,सरफराज अहमद जी,इम्तियाज सिद्दकी जी, आकिफ फारुख जी,अयान जी,मो.कैफ जी,नूर अलम जी,मो.अरमान जी व मो.शफी जी ने बहुजन समाज पार्टी एवं आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के नीतियों में अपनी आस्था व्यक्त करते हुए बहुजन समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की।
सभी सम्मानित साथियों का बहुजन समाज पार्टी परिवार में हार्दिक स्वागत!
#अबकी_बार_बसपा_सरकार
#मिशन_2027
#प्रयागराज
उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी किसी भी धर्म के पर्व, त्योहार, पूजापाठ, स्नान आदि में राजनीतिक लोगों का हस्तक्षेप एवं प्रभाव पिछले कुछ वर्षों से काफी बढ़ गया है, जो नये-नये विवाद, तनाव व संघर्ष आदि का कारण बन रहा है, यह सही नहीं है तथा इन सबको लेकर लोगों में दुख एवं चिन्ता की लहर स्वाभाविक है।
वास्तव में संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिये धर्म को राजनीति तथा राजनीति को धर्म से जोड़ने के कई ख़तरे हमेशा बने रहते हैं तथा प्रयागराज में स्नान आदि को लेकर चल रहा विवाद, एक-दूसरे का अनादर व आरोप-प्रत्यारोप इसका ताजा़ उदाहरण है। इससे हर हाल में ज़रूर बचा जाना ही बेहतर।
वैसे भी देश का संविधान व क़ानून ईमानदारी से जनहित व जनकल्याणकारी कर्म को ही वास्तविक राष्ट्रीय धर्म मानकर राजनीति को धर्म से तथा धर्म को राजनीति से दूर रखता है, जिस पर सही नीयत व नीति से अमल हो, ताकि राजनेतागण अपना सही संवैधानिक दायित्व, बिना किसी द्वेष व पक्षपात के, सर्वसमाज के सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हित में ईमानदारी व निष्ठापूर्वक निभा सकें, वर्तमान हालात में भी लोगों की यही अपेक्षा। अतः प्रयागराज में स्नान को लेकर चल रहा कड़वा विवाद आपसी सहमति से जितना जल्द सुलझ जाये उतना बेहतर।
इसके साथ ही, आज ’उत्तर प्रदेश दिवस’ की सभी लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।
#BSP की राष्ट्रीय अध्यक्ष व #यूपी की चार बार रही मुख्यमंत्री सुश्री बहन @Mayawati जी की कार्यशैली से पूरा प्रदेश और देश सीखता है,उत्तर प्रदेश सरकार को ऐतिहासिक महत्व के स्थानों पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्कता है। @AnandAkash_BSP
वाराणसी में अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को हटाये जाने की ख़बर ना केवल भारी चर्चाओं में है बल्कि इससे समाज के एक बड़े वर्ग में काफी रोष व आक्रोश भी व्याप्त है। इस अति-दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये ताकि लोगों की आस्था व भावनायें आहत ना हों।
देश में संसद व राज्य विधानमण्डलों के सत्र के घटते समय के साथ-साथ हर बार इनके भारी हंगामेदार एवं स्थगन आदि से इनकी जन उपयोगिता का घटता प्रभाव अक्सर गंभीर चिन्ता का विषय रहा है और इसीलिये उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय सम्मेलन के दौरान विधानमण्डलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिन्ता व्यक्त किया जाना उचित, सामयिक व सराहनीय, जिसपर सरकार और विपक्ष दोनों को अति-गंभीर होकर इस पर अमल भी ज़रूर करना चाहिये।
भारतीय संसद व राज्यों के विधानमण्डल यहाँ देश की संवैधानिक व लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं तथा सरकार/कार्यपालिका को देश व जनहित के प्रति उत्तरदायित्व बनाये रखने का एक सशक्त माध्यम है। संसद व विधानमण्डलों की कार्यवाही साल में कम-से-कम 100 दिन के कैलेण्डर तथा सही नियमों के हिसाब से शान्ति-व्यवस्था के साथ चले, यह बहुत ज़रूरी है।
इसके अलावा, ’सरकारी मान्यता नहीं होना मदरसा को बंद करने का आधार नहीं’ सम्बंधी माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच द्वारा दिया गया फैसला अति-महत्वपूर्ण व सामयिक है तथा इस आधार पर श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घण्टे में हटाने के निर्देश का भी स्वागत।
वैसे भी संभवतः यहाँ कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं, बल्कि ज़िला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी का ही शायद यह परिणाम है कि इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं की ख़बरें आती रहती हैं, जिसपर सरकार को उचित संज्ञान लेकर ऐसी प्रवृति को सख़्ती से ज़रूर रोकना चाहिये।
भारतीय फिल्म इण्डस्ट्री की जानी-मानी हस्तियों में से एक दिग्गज अभिनेता श्री धर्मेन्द्र का आज निधन हो जाने की ख़बर अति-दुखद। अपने मिलनसार, हमदर्द व ख़ुश मिज़ाज स्वभाव के लिये मशहूर रहे श्री धर्मेन्द्र ने काफी लम्बे समय तक फिल्म दुनिया व फिल्मों के शौक़ीन लोगों के दिलों पर राज किया। उनके परिवार वालों के साथ-साथ उनके तमाम चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कु़दरत उन सभी को इस दुख को सहने की शक्ति दे, यही कामना।
बी.एस.पी. की बिहार प्रदेश यूनिट सहित देश के कई राज्यों की कल नई दिल्ली स्थित पार्टी केन्द्रीय कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में बिहार स्टेट बी.एस.पी. के वरिष्ठ पदाधिकारियांे तथा वहाँ से पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक श्री सतीश यादव भी मौजूद रहे।
समीक्षा में, अन्य बातों के अलावा, यह बात भी सामने आई कि मतगणना वाले दिन दिनांक 14 नवम्बर को विरोधी दलों के असामाजिक तत्वों द्वारा कराये गये उपद्रव में बी.एस.पी. के विधायक की गाड़ी तथा प्रशासन की भी गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त की गई, जिसे काबू में करने हेतु पुलिस द्वारा रात में लाठीचार्ज किया गया जिसमें बी.एस.पी. के कई कार्यकर्ता भी गम्भीर रूप से घायल हुये।
इसको लेकर ज़िले की पुलिस द्वारा शासन के दबाव में बी.एस.पी. के लगभग 250 कार्यकर्ताओं पर एवं अन्य 1000 अज्ञात लोगों पर कई एफ.आई.आर. दर्ज करके उसकी आड़ में पुलिस सिर्फ बी.एस.पी. कार्यकर्ताओं को ही परेशान कर रही है, जबकि पहले इस घटना की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिये और उसके बाद ही कोई कार्रवाई होनी चाहिये।
अतः बी.एस.पी. की माँग है कि इस मामले की सही व निष्पक्ष जाँच हो तथा जब तक यह जाँच पूरी ना हो जाये, तब तक इस पर कोई पुलिस कार्रवाई व गिरफ्तारी आदि ना की जाए तो यही उचित होगा।