ऐसी क्या मजबूरी थी जो Gpay को फोन से अवैध घोषित कर दिया गया और ट्रांजैक्शन नहीं किया जा रहा है क्या ट्रांजैक्शन की लिमिट है क्या
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ही तो है थोड़ा सा बस इस सा कि मेरे पड़ोस वाले को पता लग जाये ये रो रहा है ।
खैर फ़िल्म देखकर रोना हो तो “मैरी कॉम”देख लीजिएगा । एक महिला के वास्तविक संघर्ष को जिस तरह से पर्दे पर लाया गया और उसने जिन हालातों से निकल कर देश के लिए खेला,जीता और देश का सम्मान बढ़ाया ।बिना किसी
तो रोना ही है । सच कह रहा हूँ कि मैं रोने के लिए तरस गया ।कई बार तो भीतर भीतर इस बात का रोना आ रहा था कि मुझे रोना नहीं आ रहा । अपने लिए घृणित भाव पैदा होने लगे कि मैं कैसा हूँ ,मेरे भीतर कोई दया धर्म है कि नहीं ।मैं एक छोटी सो सामाजिक जिम्मेदारी भी पूरी नहीं कर पा रहा ।बस रोना
कल सैयारा फ़िल्म देखने का मौका मिला । हॉल में कुल 20 लोग भी नहीं थे ।मैं पूरी फ़िल्म के दौरान यही ढूँढ रहा था कि मुझे इसमें रोना कब है । जब इंटरवल तक रोना नहीं आया तो सोचा शायद भूख के कारण भीतर से रोने का माहौल नहीं बन रहा ।कोक,पिज़्ज़ा और पॉपकॉन गटकने के बाद कमर कस चुका था कि अब
कर्म करेगा , नाना प्रकार की असंख्य योनियों में इन कर्मों के आधार से ही उसे दुःख सुख मिलते रहेंगे।
यह तय है !!!*
चलती चक्की देखकर दिया कबीरा रोय
दोय पाटन के बीच में, साबुत बचा ना
ही ये सभी उसकी पीठ से नीचे उतरते हैं !
लख चौरासी के कुचक्र में ऐसी असंख्य योनियां हैं , जिनकी स्थितियां अज्ञात हैं , कदाचित् इसीलिए भवसागर को अगम और अपार कहा गया है।*
ऋषिमत के मुताबिक यह भी मनुष्य योनि में किए गये कर्मों का ही भुगतान है। अर्थात् इन्सान इस मनुष्य जीवन में जो
प्रारम्भ कर देते हैं, और तब तक खाते हैं जब तक कि उसकी केवल अस्थियां ही शेष ना रह जाए। वो तड़पती है , कराहती है , लेकिन ये पीछा नहीं छोड़ते , और ये उसे पलभर में नहीं मार देते बल्कि कई दिनों तक यह मौत से बदतर असहनीय पीड़ा को झेलती हुई दम तोड़ती है।Vमादा बिच्छु की मौत होने पश्चात्

मादा बिच्छू की मृत्यु बहुत बहुत बहुत ही दु:खदायी रूप में होती है!! नीचे दिया गया चित्र एक मादा बिच्छु का है , इसकी अस्थिमज्जा पर मौजूद ये इसके बच्चे हैं, ये सभी बच्चे जन्म लेते ही अपनी मां की पीठ पर बैठ जाते हैं और अपनी भूख मिटाने हेतु तुरंत ही अपनी माँ के शरीर को ही खाना