हृदय का उत्तर- कुछ लोगों का कहना है कि सबसे ज़्यादा सवाल भाजपा से ही क्यों ?
अगर आज केंद्र में सरकार भाजपा की है, अगर 21 राज्यों में उनकी सरकारें हैं, अगर शिक्षा, स्वास्थ्य, भर्ती, महँगाई, अर्थव्यवस्था, कानून-व्यवस्था और प्रशासन से जुड़े फैसले आज की सरकार ले रही है, तो सवाल आखिर किससे पूछे जाएँ?
क्या किसी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था के लिए विपक्ष से जवाब माँगा जाए?
क्या किसी पेपर लीक, भर्ती में देरी, सड़क टूटने, पुल गिरने, महँगाई बढ़ने या किसी मंत्रालय की विफलता पर जवाब उस congress से माँगा जाएगा जो सत्ता में नहीं है?
जब कांग्रेस केंद्र में थी, तब उससे सवाल पूछे जाते थे। आज भाजपा केंद्र में है, इसलिए उससे सवाल पूछे जा रहे हैं। कल कोई और सरकार होगी, तो सवाल उससे भी होंगे ही।
हम जैसे लोगों का उद्देश्य सत्ता को उसकी ज़िम्मेदारी याद दिलाना है।
आज अगर मैं कांग्रेस के 10–20 साल पुराने कारनामे गिनाकर रोज़ चीखता रहूँ, तो उससे आज देश की कौन-सी समस्या हल हो जाएगी?
क्या उससे कोई पेपर लीक रुक जाएगा?
क्या महँगाई कम हो जाएगी?
क्या शिक्षा व्यवस्था सुधर जाएगी?
क्या अस्पताल बेहतर हो जाएँगे?
देश अतीत की बहसों से नहीं, वर्तमान की नीतियों और भविष्य की दिशा से आगे बढ़ता है।
मैं तो मानकर बैठा हूँ कि 2014 से पहले बहुत कुछ ठीक नहीं था।
लेकिन आप तो उसे ठीक करने आए थे न?
अगर हर सवाल का जवाब आज भी - "पहले भी ऐसा था"
जनता ने आपको अतीत की गलतियाँ गिनाने के लिए नहीं चुना था,
वर्तमान सुधारने और भविष्य संवारने के लिए बहुमत दिया था।
आज शिक्षा आपके पास है, स्वास्थ्य आपके पास है, अर्थव्यवस्था आपके पास है, कानून-व्यवस्था आपके पास है, मंत्रालय आपके पास हैं, बजट आपके पास है, प्रशासन आपके पास है।
फिर हर समस्या का जवाब अतीत कैसे हो सकता है?
सम्मान अपनी जगह है, लेकिन लोकतंत्र में किसी भी नेता को इस स्तर तक पहुँचा देना कि 15 महीने के बच्चे की हर हरकत में भी चमत्कार दिख रहा है, सुनील शेट्टी को... यह ठीक सोच नहीं है।
नेता कितने भी बड़े क्यों न हों, भगवान तो नहीं हैं।
अगर हम बच्चों को बचपन से ही नेताओं की तस्वीरों के आगे लड्डू चढ़ाने की कहानियाँ सुनाकर गर्व महसूस करने लगेंगे, तो कल वे सवाल पूछना तो दूर , सिर्फ़ जयकार करना सीखेंगे।
देश को ऐसे नागरिक चाहिए जो संविधान, विज्ञान और कर्तव्य का सम्मान करें; किसी भी नेता की पूजा करने वाली पीढ़ी नहीं।
बच्चों को भगवान और माता-पिता का सम्मान सिखाइए, नेताओं की पूजा नहीं। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जागरूक नागरिक हैं, भक्त नहीं।
जब तर्क कम पड़ जाएँ, तब जादू और चमत्कार की कहानियाँ शुरू हो जाती हैं।फ़िल्मों में अभिनय अच्छा लगता है, लेकिन लोकतंत्र में नहीं shetty ji...
आप विपक्ष के नेता हैं. @RahulGandhi@MamataOfficial@ArvindKejriwal@yadavakhilesh@VijayTh , आप सबसे सवाल है।
यदि इतने गंभीर मुद्दे पर जहाँ आपको लगता है कि देश का नुकसान हो रहा है, तो केवल ट्वीट कर देना कि देश लुट रहा है, क्या काफ़ी है?
RTI लगाइए, अदालत जाइए, PIL दाखिल कीजिए, जांच की मांग कीजिए|
हाथ धोकर पीछे पड़िए, जब तक कि पद से हटा न दिया जाए।
देश सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी के साथ विपक्ष की भी ज़िम्मेदारी है।
नुकसान किसी पार्टी का नहीं, भारत का हो रहा है।जवाब मिलने तक लड़ते रहना सच्ची देशभक्ति है।
गरीबों के मसीहा फैसल खान की सच्चाई फैसल खान के मित्र विपिन सर मैथ्स मस्ती वाले खुलासा कर रहे हैं।
असली कोचिंग माफिया खान सर है।
मोटी रकम वसूल करने के बाद बच्चे जो अपनी मां के इलाज के लिए पैसा रिफंड करवाना चाह रहा था उसका fee नहीं लौटाया गया।
@AlokChikku
यदि यह पूरा मामला उस विवाद से जुड़ा हुआ निकला, तो पूरे शिक्षक समाज के लिए शर्म और पीड़ा का विषय होगा।
विचारों का मतभेद, वैचारिक संघर्ष और पेशेगत प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है, लेकिन यदि किसी परिवार को अपूरणीय क्षति उठानी पड़े , तो इससे अधिक दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण क्या होगा?
बिहार पुलिस से निवेदन है कि जांच निष्पक्ष हो, किसी दबाव में नहीं।
गलत को सजा मिले, सही को न्याय मिले, और सत्य सामने आए।
SSC, DoPT (Department of Personnel & Training) के अधीन आता है और वर्तमान में केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में Jitendra Singh इस विभाग को देखते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह जी @DrJitendraSingh SSC के लाखों अभ्यर्थी न्याय चाहते हैं।
कैंडिडेट"- किसी का बेटा है, किसी की बेटी है, किसी परिवार की उम्मीद है।
व्यवस्था से लड़ते-लड़ते थक चुके हैं। 💔
एक बार इनकी भी सुन लीजिए।
जनता को प्रधानमंत्री के कार्यकाल की लंबाई से नहीं, उसके कार्यकाल के परिणामों से लाभ या हानि से है।
अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उस दौरान देश कितना आगे गया।
उन वर्षों में देश कितना आगे बढ़ा, कितने युवाओं को रोजगार मिला, शिक्षा और स्वास्थ्य कितना सुधरा, न्याय कितना सुलभ हुआ, और आम आदमी का जीवन कितना बेहतर बना।
किसी शासन की वास्तविक सफलता तय इन सबसे होंगी |
हमने वीडियो यूँ ही नहीं बनाया था। सवाल किसी एक चैनल, एक पत्रकार या एक खबर का नहीं था। सवाल उस nature का था जिसमें पूरी तस्वीर दिखाने के बजाय उसका एक हिस्सा दिखाया जाता है।
2016 में subsidised cylinder - 12/yr
2025 में subsidised cylinder - 9/yr
2026 में subsidised cylinder- 4/yr
जब 12 सिलेंडर से 9 और फिर 4 सिलेंडर तक की यात्रा को बड़ी राहत बनाकर पेश किया जाता है, तब समझ आता है कि आईना दिखाने की ज़रूरत क्यों पड़ती है।हमारा उद्देश्य किसी की मानहानि नहीं, बल्कि उन सवालों को उठाना था जिन्हें आम नागरिक महसूस करता है लेकिन अक्सर TV पर नहीं देख पाता।
आईना दिखाना अगर अपराध है, तो फिर सवाल पूछना भी अपराध मान लीजिए।
आज लोग मानहानि के मुकदमे को सही ठहरा रहे हैं, लेकिन कोई यह नहीं पूछ रहा कि आखिर वह वीडियो बना क्यों था। आईना चुभता इसलिए कि वह सच दिखा रहा होता है।
@TweetAbhishekA "भारत में गोदी मीडिया और YouTube Teachers के बीच वैचारिक जंग का आगाज़ हो चुका है। अब लड़ाई सिर्फ खबरों की नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे और सोच की भी है।"
बड़ी खबर📍
NTA ने नीट एग्जाम 2026 को रद्द कर दिया है जल्द नई तारीखों का ऐलान होगा।
बता दें 2014 के बाद ये 101वां एग्जाम है जो मोदी सरकार में रद्द हुआ है डंका बज रहा है।🔥NEET @DrLaxman_Yadav@yadavakhilesh@AajTkNews
प्राइवेट स्कूल अब पढ़ाई की जगह दुकान जैसे लगने लगे हैं। कलम, किताब, कॉपी से लेकर ड्रेस तक - सब कुछ स्कूल से ही खरीदने का दबाव बनाया जाता है। शिक्षा का मकसद बच्चों को ज्ञान देना है, न कि सामान बेचकर मुनाफ़ा कमाना।
आख़िर ऐसा क्यों हो रहा है? क्योंकि सरकार इसे होने दे रही है। जब सख़्त नियम और निगरानी नहीं होती, तब स्कूल पढ़ाई से ज़्यादा कमाई पर ध्यान देने लगते हैं। यही वजह है कि शिक्षा धीरे-धीरे सेवा नहीं, कारोबार बनती जा रही है।
“हम पनी माँ को आखिरी बार भी नहीं देख पाए। मेले के दौरान कोई उचित व्यवस्था नहीं थी, मेरा तो ज़िंदगी उजड़ गया। हम किसके सहारे जिएँ?”
~ अपनी माँ को भगदड़ में खो देने के बाद एक व्यक्ति
सवाल का जवाब है नीतीश जी?
सम्राट जी आप ही कुछ कह दीजिए!
Telecom Companies ऐसे Recharge Plans offer करती हैं जिनमें ‘Daily Data Limits’ जैसे 1.5GB, 2GB या 3GB per day होती हैं, जो हर 24 hours में reset हो जाती हैं। बचा हुआ data midnight पर expire हो जाता है, जबकि उसके पूरे पैसे पहले ही दिए जा चुके होते हैं।
आपको 2GB के लिए charge किया जाता है। आप 1.5GB use करते हैं। बचा हुआ 0.5GB दिन खत्म होते ही गायब हो जाता है। कोई refund नहीं। कोई rollover नहीं।
मैंने आज यह मुद्दा Parliament में उठाया की जिस data के लिए हमने पूरी payment की है, वो दिन समाप्त होने पर Expire नहीं होना चाहिए।
बचा हुआ data अगले दिन की data limit में carry forward होना चाहिए, ताकि users Data इस्तेमाल कर सकें जिसके लिए उन्होंने पहले ही pay किया है।
संसद में आज मेरी demands हैं -
1.सभी users के लिए Data carry-forward / Data rollover की सुविधा दी जाए। जो data दिन के अंत तक use नहीं होता, उसे अगले दिन की limit में add किया जाए, न कि validity खत्म होते ही ख़त्म कर दिया जाए।
2.अगले महीने के recharge amount में unused data का adjustment का option दिया जाए। अगर कोई user लगातार अपना data under-utilise करता है, तो अगले monthly recharge में उस value का adjustment या discount मिलना चाहिए। users को बार-बार उस लिमिट के लिए pay नहीं करना चाहिए जो वे use ही नहीं करते।
3.Unused data को relatives और friends को transfer करने का option दिया जाए। Unused data को user की digital property माना जाना चाहिए। उपभोक्ता को अपने daily data limit से unused data दूसरों को transfer करने की permission होनी चाहिए, बिल्कुल उसी तरह जैसे पैसे transfer किए जा सकते हैं।
आज मोबाइल डेटा कोई luxury नहीं, Digital oxygen बन चुका है। टेलीकॉम कंपनियों की ये लूट बंद होनी चाहिए।
तैयार हो जाइए, हमारे महामानव के नेतृत्व में भारत एक बार फिर बुरे दौर में घुसने जा रहा है!
कोरोना और नोटबंदी के वक्त इनके लीडरशीप का भुगतान पूरे देश को करना पड़ा था!
नीतीश कुमार ने हिजाब खींचा तो संजय निषाद हँसे।
बलात्कारी कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा निलंबित हुई तो ओमप्रकाश राजभर हँसे।
दोनों हँसी में कोई अंतर नहीं है, दोनों बेटियों पर हँसे हैं।