@CSF_JH @Ankit_23052019@myogiadityanath हर मोर्चे पर फेल उत्तर प्रदेश की सरकार अब सीधे-सीधे गुंडागर्दी पर उतर आई है। इस मदमस्त सरकार को जो अपने जिम्मेदारी को भूलकर देश की जनता की आवाज दमनकारी नीति से खत्म कर रही है। आओ देश प्रेमियों, बेरोजगार युवाओं, छोटे उद्यमियों, माताओं,बहनों देश को बचाने की मुहिम में शामिल हों।
इन काले कानूनों के चलते, बड़े पूंजीपति/कंपनियां किसानों से उनकी फसल कम दाम पर खरीद उनका शोषण करेंगे.
APMC Act में सुधार के बजाय सरकार उसे खारिज करने की कोशिश में है.
2006 में @NitishKumar ऐसा कर चुके हैं, जिसके चलते बिहार के कई किसान, मजदूर बन दूसरे प्रदेशों में पलायन कर गए थे.
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The Farmers Agreement on Price Assurance and Farm Services Ordinance
इसके तहत सरकार कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देगी.
किसान अपनी ही जमीन पर कंपनियों के मजदूर बन जाएंगे ओर उनका अपना वजूद ख़त्म हो जाएगा.
भारत में कृषि जीवनयापन का साधन है पर सरकार इसे व्यापार बनाना चाहती है.
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Essential Commodity Act 1955 में बदलाव के लिए अध्यादेश लाया गया है.
इसके तहत सरकार ने आलू/प्याज/दलहन/तिलहन आदि की जमाखोरी पर लगी रोक को हटा लिया (इनकी स्टॉक-सीमा समाप्त की).
चँद बड़ी कंपनियां और पूंजीपती, इनका अत्यधिक भंडारण कर इन चीजों की कालाबाजारी करेंगे और देश को लूटेंगे.
1) Farmer's Produce Trade and Commerce Ordinance
सरकार ने APMC Act में बदलाव कर कंपनियों/पूंजीपतियों को हरियाणा में मंडियों के बाहर किसानों की फसल खरीदने की छूट है.
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल-खरीद की कोई गारंटी नहीं.
मंडियों में काम करने वाले लाखों लोग बेरोजगार होंगे.
सरकार द्वारा लाए गए 3 अध्यादेशों को काला कानून बताते उनके विरोध में आज हरियाणा के कुरुक्षेत्र की पिपली-मंडी में किसान रैली बुलाई गई, जिसमें प्रदेशभर के किसान जुटे.
एक दिन पहले ही प्रदेशभर के किसान रैली में शामिल होने के लिए घरों से निकल पड़े थे.
आइए जानें,
क्या हैं वह कानून.!
सच्ची साधना के लिए केवल मन में भक्ति होने चाहियें, इसके लिए मन और आंखों के कान बंद करने होते हैं। इसलिए प्रार्थना के दौरान आंखें बंद करना इस तरह की एकाग्रता के लिए एक सहायता है।
#महात्मा_गांधी#Mahatma_Gandhi#CSF
जय जगत
जय कांग्रेस
#कांग्रेस_सेवा_फाउंडेशन
गलवान झड़प में 20 🇮🇳 जवानों की शहादत पर मोदी-सरकार घिर गई थी.
ऐसे में "गोदी-मीडिया" ने 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद चीनी सैनिकों की कब्रें दिखा, देश से झूठ बोला कि वो गलवान में मारे गए चीनी सैनिकों की क्रबें हैं.
मीडिया ने 🇮🇳 को गुमराह क्यों किया.?
🤔https://t.co/b3hfoo1Adw
मीडिया, "मोदी-भक्ति" में चीन-सरकार का अनुमोदन कर रहा है कि चीनी-सैनिकों ने भारत में नहीं...बल्कि 🇮🇳-सैनिकों ने चीन में घुसपैठ की और उस "घुसपैठ" को मोदीजी की "लाल आँख" का परिणाम बता रहा है.!
मोदीजी को उठाने में खुद कितना नीचे गिर गया मीडिया.!
इनके लिए 🇮🇳 से पहले मोदीजी हैं.?
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जब वो कोरोना पर चेता रहा था,
तब सरकार और उसके पिट्ठू उसका मजाक उड़ा रहे थे,
आज 🇮🇳 में 1 दिन में सबसे ज्यादा कोरोना केस आ रहे हैं.
जब वो आर्थिक सुनामी पर चेता रहा था,
तब भी वो उसे गलत साबित करने के लिए झूठे आंकड़े पका रहा थे,
और देख लो -24%
हमारा राहुल
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1962 और आज के भारत के बीच अंतर है.
तब नेहरूजी ने सेना को हर कीमत पर अंत तक लड़ने के आदेश दिए थे.
आज मोदीजी भारत के महाशक्ति होने के बावजूद चीन के हाथों भारत का एक टुकड़ा गँवा चुके.
हम 1962 में बेहतर तैयार दुश्मन से हारे
पर तब भी 🇮🇳 ने मोदी सरकार की तरह आत्मसमर्पण नहीं किया था.
नेहरूजी के लिये गांधी जी के उदगार ;
उनसे अधिक साहस किसी और में नहीं।
देश के प्रति प्रेम में कौन उनसे श्रेष्ठ हो सकता है?
वे स्फटिक की भांति खरे हैं
उनकी सच्चाई संदेह से परे है।
उनके हाथों में राष्ट्र सुरक्षित है।
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जय जगत
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