किसानों व मजदूरों की आवाज को संसद में बुलंद करने वाले !
अपना पूरा राजनीतिक जीवन अपनी किसान कोम को समर्पित करने वाले!
म्हारे आदर्श!
चौधरी अजीत सिंह जी अमर रहे! ❤️🙏🙏🙏🙏🙏
@anokha_panchi @Shubham_jaat15@aapkadharm@Deshwal0242
प्रभु श्री राम से चुराएँगे, पवनपुत्र हनुमान को नचाएँगे, फिर भी बेशर्म ख़ुद को हिंदू बताएँगे। ये कोई पार्टी नहीं, पाखंड की दुकान है
: पवन खेड़ा, कांग्रेस सांसद
सतलज़ सिनेमा को Zee5 से हटाने पर तर्क देने वाले “सोर्स “ आ गए हैं बाज़ार में। और बिना सवाल किए सोर्स की बात को रखने वाली मीडिया भी।
इनके सोर्स वाले बता रहे हैं कि फ़िल्म से अलगाववाद बढ़ सकता है।
और कुछ सालों से जो प्रोपेगंडा फ़िल्में बन रही है सरकारी सरंक्षण में वे तो “सद्भावना” वाली थी ना ?
डेढ़ करोड़ की गाड़ी में राम मंदिर ट्रस्ट के “फ़क़ीर संत सदस्यगण “ मीटिंग में शामिल हो रहे हैं।
और ये सभी संत-फ़क़ीर ख़ुद को राम का एकमात्र अनुयायी बताकर कहीं चोरी की तुलना “शबरी के जूठे बेर “ से न कर दे!
ये हैं संत साधु समाज जिसने वैराग्य धारण किया हुआ है…
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी परमानंद जी वेलफेयर जैसी लग्ज़री गाड़ियों से घूम रहे हैं…बैठक में उसी गाड़ी से पहुँचे हैं !!
सब कुछ कॉरपोरेट हो चुका है…धर्म का धंधा है बड़ा चंगा
नितिन नवीन से अरविंद केजरीवाल ने सिर्फ़ पूछा “आप कौन” तो पूरी बीजेपी सामने आ गई । मीडिया भी अरविंद केजरीवाल से सवाल करने लगी। इसे “अहंकार” से जोड़ दिया।
आदर्श स्थिति में कह सकते हैं कि केजरीवाल का ऐसा कहना ठीक नहीं है!
लेकिन जब बीजेपी के नेता मीडिया के साथ मिलकर पूरे दिन विपक्षी नेताओं से उनकी धार्मिक मान्यता उनके देशभक्ति पर सवाल करती रही है,सबूत माँगती रहती है तब यह पैमाना कहाँ ग़ायब हो जाता है? और यह “आप कौन “ सवाल से अधिक डीमीनिंग होता है जब किसी के आस्था और उसकी देश देशभक्ति का प्रमाण पत्र बाँटने लगते हैं उसे अपने हिसाब से देते हैं!
आश्चर्यजनक है कि विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी कहा कि इनके अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय से पूछताछ की जाए कि उनके नाक के नीचे राम मंदिर में चंदों की लूट कैसे होती रही? खुद आलोक कुमार से पूछताछ क्यों नहीं की जानी चाहिए?
हिंदुओं के कथित ठेकेदार आलोक कुमार ने विपक्ष के नेताओं से पूछताछ के लिए पत्र लिखा है। अरे भाई अयोध्या का बच्चा बच्चा जानता है कि कैसे कैसे और कहां कहां चंदा चोरी की गई। सच यह है कि बीजेपी, विहिप और RSS की साख फंस गई है। पवन खेड़ा @Pawankhera जी को सुनिए
श्रीराम, श्रीकृष्ण, श्री हनुमान...
ये किसी पार्टी के स्टार प्रचारक नहीं हैं।
ये करोड़ों लोगों की आस्था हैं।
आस्था का सम्मान राजनीति से ऊपर हैं।
सवाल राजनीति की मर्यादा का है- सत्ता किसी की भी हो, आस्था का सम्मान वोट से ऊपर हैं।
जब विकास, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य पर तालियाँ कम पड़ने लगें...
तब आस्था को भी चुनावी मंच पर बुला लो। भगवान चुनाव नहीं लड़ते...
धर्म का सम्मान और किसी राजनीतिक दल का समर्थन - दोनों अलग बातें हैं।
BJP को यह अधिकार नहीं कि वह स्वयं को धर्म का एकमात्र प्रतिनिधि घोषित कर दे।
श्रीराम, श्रीकृष्ण, श्री हनुमान किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं।
- करोड़ों भारतीयों की आस्था हैं। भगवान पर किसी पार्टी का कॉपीराइट नहीं हो सकता।
आस्था किसी पार्टी की सदस्यता नहीं होती - भगवान सबके हैं |